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गांव वालों का आरोप, औरत ने खून पीकर चार साल की बच्ची की हत्या कर दी

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ओडिशा के सुन्दरगढ़ से खबर आई.  कि एक औरत ने चार साल की बच्ची की हत्या कर दी. खून पीने के बाद. ममा झुमका नाम के गांव का है. सूत्र बताते हैं कि शनिवार को बच्ची आंगनवाडी से वापस आकर घर के बाहर खेल रही थी. शाम को वहां से गायब हो गई.

जब लोगों ने ढूंढना शुरू किया, तो कथित रूप से उसी गांव की एक औरत के घर में वो लड़की मिली. टिन के डब्बे में बंद. उसके गले और पेट पर चोट और खून के निशान थे. घरवाले उसे अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया. गांव में खबर फ़ैल गई कि बच्ची काले जादू की भेंट चढ़ गई है. प्रशासन ने दो प्लैटून गांव में भेजीं ताकि वहां का तनाव नियंत्रित किया जा सके. मामले में जांच चल रही है. बच्ची के घरवाले मीडिया से बातचीत नहीं कर रहे. पुलिस तफ्तीश में लगी हुई है कि आरोपों का सच क्या है. आज तक से जुड़े मोहम्मद सूफ़ियन ने वहां  बातचीत की. तो महिला (जिसपर आरोप लगाए गए हैं) उसने कहा कि उसे कुछ नहीं पता. कैसे बच्ची की बॉडी घर में आई ये भी नहीं पता.

 

आसाम, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा जैसे इलाकों से ऐसी खबरें काफी आती हैं . (सांकेतिक तस्वीर)
आसाम, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा जैसे इलाकों से ऐसी खबरें काफी आती हैं . (सांकेतिक तस्वीर)

नई नहीं, बेहद पुरानी कहानी

इस तरह की खबरें अखबारों के कोनों में पढ़ने को अक्सर मिल जाती हैं. कई मामलों में तो शक की बिना पर हत्या तक कर दी जाती है. पश्चिम बंगाल के मिदनापुर की घाताल तहसील में एक छोटा सा गांव है ईश्वरपुर. आदिवासी बहुल इलाका है. यहां पिछले कुछ दिनों से लोग काफी बीमार पड़ रहे थे. किसी को बुखार हो रहा था, तो किसी को दस्त हो रहे थे, किसी के पेट में भी दर्द हो रहा था. इन लोगों को लगा कि कोई बुरी ताकत ऐसा कर रही है. इसलिए मसले को हल करने गांव की ओझा जान गुरू के पास पहुंच गए.उस ने गांव की चार औरतों का नाम बताया. कहा कि ये चार औरतें ही डायन हैं. इन्हें लेकर आओ. उन्हें लाकर भीड़ ने इतना पीटा कि उनमें से एक की मौत हो गई.

राजस्थान में एक जिला है भीलवाड़ा. वहां एक तहसील है- रायपुर. यहां 75 साल की चमेली का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया था. क्यों? क्योंकि गांव वाले उसे ‘डायन’ समझते हैं. चमेली के परिवार के लोगों ने ही ये अफवाह फैलाई थी. उसके जेठ और परिवार के कुछ लोगों ने उसे ‘डायन’ घोषित कर दिया था. और गांव से निकल जाने का फरमान भी सुना दिया था. चमेली पिछले करीब एक महीने से पुलिस के चक्कर काट रही है. वो चाहती है कि उसकी शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज हो. लेकिन अभी तक उसकी शिकायत पर पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया है.

अधिकतर महिलाएं जिन्हें डायन होने के आरोप में फंसाया जाता है, वो बुजुर्ग और विधवा होती हैं. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)
अधिकतर महिलाएं जिन्हें डायन होने के आरोप में फंसाया जाता है, वो बुजुर्ग और विधवा होती हैं. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

डायन कहकर औरतों को मार डालना, उनका बलात्कार करना, घर से निकाल देना, मार-पीट करना कोई नई बात नहीं है. शहरों में भले ही इसके मामले कम दिखाई दें, गांवों में अभी भी इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. सोलहवीं सदी के इंग्लैंड में भी सालेम में कई औरतों को डायन कहकर जिन्दा जला दिया गया था. गांवों में इस तरह की बातें होने के पीछे अन्धविश्वास होता है. यही नहीं, अकेली औरत से जुड़े मिथ भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. आम तौर पर विधवाएं, बूढ़ी औरतें, वो औरतें जिनका कोई बच्चा ना हुआ हो, इस तरह की औरतों को टार्गेट किया जाता है क्योंकि इनमें किसी ना किसी तरह की कमी निकलना आसान हो जाता है. कई औरतों को डायन कहकर इसलिए मार दिया गया क्योंकि उनका खुद का कोई बच्चा नहीं था, और उस गांव से कोई छोटा बच्चा गायब हो गया था.

काले जादू के नाम पर चलने वाला धंधा

डायनों को अधिकतर काले जादू से जोड़कर देखा जाता है. काले जादू में कई तरह की चीज़ें आती हैं.लेकिन ये मान्यता है कि अधिकतर लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है. नज़र लगा देना, नुक्सान करा देना, बच्चे को बीमार कर देना, बिजनेस में या नौकरी में घाटा करवा देना. ये सभी चीज़ें काले जादू के ऊपर मढ़ दी जाती हैं. साधारण बीमारी को भी ऊपरी हवा का साया बता कर पैसे लूटने वाले काले जादू शब्द का बेतरह इस्तेमाल करते हैं. इसके जाल में अंधविश्वासी जनता फंस जाती है, और इस तरह ये सिलसिला चलता रहता है.

दुनिया के सामने देवी कहकर आरती उतारने वाले लोग अन्धविश्वास के नाम पर औरतों को आग में झोंकने से ज़रा भी नहीं कतराते. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)
दुनिया के सामने देवी कहकर आरती उतारने वाले लोग अन्धविश्वास के नाम पर औरतों को आग में झोंकने से ज़रा भी नहीं कतराते. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

डायन बता कर औरतों से जुर्माना वसूलने में पंचायतें भी पीछे नहीं रहतीं. मानो जुर्माना भरकर उनके ‘डायन’ होने से छुटकारा मिल जाएगा. आमतौर पर गरीब, अकेली औरतें जुर्माना नहीं भर पातीं और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. कुछ ही ‘भाग्यशाली’ औरतें होती हैं जिन्हें निष्कासन झेलना पड़ता है. बाकी जिंदा रहकर अगले दिन का सूरज भी नहीं देख पातीं. नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के मुताबिक़ 1991 से लेकर 2010 के बीच 1700 औरतें डायन होने के आरोप में मार दी गईं. जबकि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा होने की पूरी आशंका है. क्योंकि कई मामले तो रिपोर्ट तक नहीं किए जाते. या अगर किए भी जाते हैं तो उन्हें दर्ज नहीं किया जाता.


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