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स्टेरॉयड से कोविड मरीजों में फंगल इंफेक्शन हो रहे, फिर भी उन्हें ये क्यों दिए जा रहे?

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो भी सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित हैं. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

कोविड के कई मरीज़ों में फंगल इंफेक्शन की खबरें आ रही हैं. इसकी वजह बताई जा रही है- स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल. पर अगर स्टेरॉयड से जानलेवा फंगल इन्फेक्शन हो रहे हैं तो फिर ये मरीज़ों को दिए ही क्यों जा रहे हैं? स्टेरॉयड को लेकर हमारे पास आपके कई सवाल आए हैं. जैसे कोविड के इलाज के दौरान किन्हें स्टेरॉयड देने की ज़रूरत पड़ती है. इससे क्या होता है? शरीर को नुकसान क्या पहुंचता है. क्या कोई दूसरा विकल्प है? इन सारे सवालों की हमने लिस्ट बनाई और पूछा एक्सपर्ट्स से. सुनिए उन्होंने क्या कहा.

स्टेरॉयड का इस्तेमाल किन पेशेंट्स में किया जाता है?

ये हमें बताया डॉक्टर निशांत ने.

डॉक्टर निशांत श्रीवास्तव, हेड, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, जीएमसी, भोपाल
डॉक्टर निशांत श्रीवास्तव, हेड, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, जीएमसी, भोपाल

-कोविड में चार कैटगरी हैं- एसिंपटोमैटिक, माइल्ड, मॉडरेट, सीवियर

-स्टेरॉयड का इस्तेमाल केवल मॉडरेट और सीवियर केसेस में ही किया जाता है

-जब मरीज़ को ऑक्सीजन की ज़रूरत शुरू होती है तब स्टेरॉयड दिए जाते हैं

-जब पहले से कोई हेल्थ कंडीशन होती है जैसे डायबिटीज, हार्ट की बीमारी, हाइपरटेंशन वगैरह तब स्टेरॉयड और भी ज़्यादा कंट्रोल करके दिए जाते हैं

-स्टेरॉयड में भी कुछ सेफ़ स्टेरॉयड दिए जाते हैं और कम समय के लिए दिए जाते हैं

स्टेरॉयड कोविड के इलाज में क्यों दिए जाते हैं, इससे क्या फ़ायदा होता है?

-जब भी कोरोना वायरस शरीर में घुसता है तो दो तरीके से काम करता है. एसिंपटोमैटिक और माइल्ड पेशेंट्स में इम्यून सिस्टम नॉर्मल काम करता है और वायरस से लड़ता है. वहीं, जब मॉडरेट और सीवियर पेशेंट्स में वायरस के हमले के बाद शरीर में मौजूद सेल्स जिनका काम हमें बचाना है, वो केमिकल रिलीज़ करते हैं. यही केमिकल जब ज़्यादा बनने लगते हैं तब इसे हाइपर इम्यून रिस्पांस कहा जाता है. ये केमिकल शरीर के जिस भी अंग में जाते हैं वहां नुकसान पहुंचाते हैं. ये जब जब लंग्स में जाते हैं तो वहां सूजन आ जाती है. ऑक्सीजन गिरता है और हालत क्रिटिकल हो जाती है.

इसे रोकने का एक ही तरीका है. वायरस के संपर्क में आने से जो हाइपर इम्यून रिस्पांस हुआ था उसे दबाना. ऐसे में इम्यूनो सप्रेसेंट दिए जाते हैं. स्टेरॉयड सबसे बेहतर इम्यूनो सप्रेसेंट माने जाते हैं. स्टेरॉयड का काम है जिस वजह से शरीर को नुकसान पहुंच रहा है उसे रोका जाए.

COVID-19 Story Tip: Steroid Drug Hailed as Effective COVID-19 Treatment but Questions Linger About Its Use for Black Patients
स्टेरॉयड में भी कुछ सेफ़ स्टेरॉयड दिए जाते हैं और कम समय के लिए दिए जाते हैं

स्टेरॉयड के अलावा क्या विकल्प है?

मरीज़ को बचाने के लिए इम्यूनो सप्रेसेंट इस्तेमाल करना बेहद ज़रूरी है. स्टेरॉयड सबसे सेफ़ इम्यूनो सप्रेसेंट माने जाते हैं. बाकी दवाइयां तब इस्तेमाल की जाती हैं जब स्टेरॉयड के साइड इफ़ेक्ट बहुत ज़्यादा बढ़ जाते हैं.

Common Steroid Could Be Cheap and Effective Treatment for Severe COVID-19 - Scientific American
ऐसे फंगल इन्फेक्शन होने के पीछे बड़ी वजह कोविड का नया स्ट्रेन है

कई बार पेशेंट डर के मारे स्टेरॉयड का सेवन पहले से करने लगते हैं. जब आप माइल्ड केस में स्टेरॉयड लेते हैं तब ये वायरस के बढ़ने में मदद करने लगता है. बिना एक्सपर्ट की सलाह के स्टेरॉयड न लें.

उम्मीद है स्टेरॉयड से जुड़े सारे सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे. डॉक्टर साहब के मुताबिक, स्टेरॉयड जान बचाने के लिए ज़रूरी है. इसलिए इसे देना बंद नहीं किया जा सकता. पर हां, इसका ये ज़रूरी है कि इसका इस्तेमाल ज़रूरी होने पर ही किया जाए.


वीडियो: Covid-19 को ठीक करने के लिए Steroid कैसे काम करता है?

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