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अपराधियों को धूल चटाने वाली लेडी अफसर ने सुसाइड क्यों किया?

आज शुरुआत करते हैं कुछ परेशान करने वाले शब्दों से. यातना, उत्पीड़न, यौन शोषण और स्वाभिमान को ठेस. इन सबसे जुड़ा एक और शब्द आत्महत्या यानी सुसाइड. ये सारे शब्द उस लेडी अफसर से जुड़े हैं जिनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर लगातार सवाल जवाब चल रहे हैं.  इस अफसर की बहादुरी की कहानियां मशहूर थीं. युवा लड़कियां उस ऑफिसर को अपना आइकॉन मानती थीं.

कौन थी वो बहादुर लेडी ऑफिसर? क्या करती थी? जाते-जाते सुसाइड लेटर में क्या कह गई? पूरी कहानी क्या है? इस मामले में SC/ST एक्ट का एंगल क्या है? क्या लेडी ऑफिसर ने SC/ST के गलत मामले में फंसाए जाने की धमकी से प्रताड़ित होकर जान दी? सबकुछ विस्तार से जानते हैं.

क्या है पूरा मामला?

लेडी ऑफिसर की मौत के बाद इलाके में रोष है.
लेडी ऑफिसर की मौत के बाद इलाके में रोष है. 

ऊपर एक फोटो है. इस फोटो में दिख रहा है कि एक पेड़ पर दो लोगों के पोस्टर लगाए गए हैं. कुछ औरतें उन पोस्टरों पर जूतों से वार कर रही हैं. साथ में कुछ नारे भी लग रहे हैं. पास में ही महाराष्ट्र की अमरावती लोकसभा सीट से सांसद नवनीत राणा खड़ी हैं. वे महिलाओं से कह रही हैं कि पोस्टरों को जूते मारने में बिल्कुल भी हिचक ना दिखाई जाए.

जिन दो लोगों के ये पोस्टर हैं, उनका नाम है- एम एस रेड्डी और विनोद शिवकुमार. एम एस रेड्डी जहां मेलघाट टाइगर रिजर्व में एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कन्जरवेटर के पद पर तैनात थे, वहीं विनोद शिवकुमार इसी रेंज में गुगामल डेपुटी कन्जरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स के पद पर थे. विनोद शिवकुमार को जहां गिरफ्तार किया जा चुका है, वहीं रेड्डी को सस्पेंड कर दिया गया. क्यों? क्योंकि विनोद शिवकुमार पर एक 33 साल की महिला रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप लगे हैं और रेड्डी को इसलिए संस्पेंड किया गया है क्योंकि महिला ऑफिसर के बार-बार शिकायत करने पर भी उन्होंने विनोद शिवकुमार पर कोई कार्रवाई नहीं की.

जिस लेडी ऑफिसर ने आत्महत्या की, उसका नाम दीपाली चह्वाण था. दीपाली मेलघाट टाइगर रिजर्व के हरिसाल डिवीजन में तैनात थीं. पिछले सप्ताह 25 मार्च को उन्होंने जान दे दी. ये कदम उठाने से पहले उन्होंने अपने पति राजेश मोहिते को फोन मिलाया था… और एक आखिरी बार मिलने की बात कही थी. राजेश को इस बात का अंदेशा हो गया था कि दीपाली कोई एक्सट्रीम कदम उठाने जा रही हैं. ऐसे में उन्होंने दीपाली के स्टाफ को फोन मिलाया था. लेकिन जब तक स्टाफ के लोग दीपाली को रोक पाते, तब तक देर हो चुकी थी.

मामले के बारे में आगे जानकारी देने से पहले  पहले विनोद शिवकुमार की गिरफ्तारी के बारे में जान लीजिए, जो बेहद ही नाटकीय तरीके से हुई. दरअसल, दीपाली की मौत के तुरंत बाद उनके पति और घरवालों की शिकायत पर विनोद शिवकुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था. शिवकुमार को भी इसकी भनक लग गई थी. ऐसे में उसने भागने का प्लान बना लिया. वो अपनी गाड़ी से रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में पहुंचा. वहां काफी देर रुका और फिर एक टैक्सी में बैठकर स्टेशन आ गया.

विनोद शिवकुमार बेंगलुरू भाग जाने की तैयारी में था. दीपाली की मौत के बाद जिले की सभी सीमाओं पर नाकाबंदी कर दी गई थी. ऐसे में उसे ट्रेन से भागना सबसे ठीक लगा. वो राजधानी एक्सप्रेस में बैठने ही वाला था कि अमरावती ग्रामीण और धारणी पुलिस ने उसे पकड़ लिया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान पुलिस शिवकुमार के फोन को सर्विलांस पर रखे हुए थी. शिवकुमार को 26 मार्च की सुबह ही गिरफ्तार कर लिया गया था.

सुसाइड लेटर में क्या है?

अपने सुसाइड लेटर में दीपाली ने कई बातों का जिक्र किया है. और यह लेटर एम एस रेड्डी को संबोधित है. हरिसाल डिवीजन में आने से पहले दीपाली धुलघाट में तैनात थीं. जब उन्हें पता चला कि उनका ट्रांसफर हरिसाल में होने जा रहा है, तो वो काफी खुश हुईं. दीपाली ने अपने लेटर में लिखा कि वे इसलिए खुश थीं क्योंकि उन्हें शिवकुमार के मार्गदर्शन में काम करने का मौका मिलने जा रहा था. अपने प्रोबेशन पीरियड में वे शिवकुमार से काफी प्रभावित हुई थीं. लेकिन जल्द ही उन्हें शिवकुमार का असली चेहरा देखने को मिल गया.

अपने सुसाइड लेटर में दीपाली ने लिखा कि शिवकुमार सबके सामने उन्हें गालियां देता था. हर काम में जबरदस्ती की गलतियां निकालकर शो कॉज नोटिस देता था. उन्हें बार-बार सस्पेंड करने की धमकी दी जा रही थी. यह सब इसलिए क्योंकि दीपाली ने उसके साथ सोने से मना कर दिया. शिवकुमार अक्सर रात में फोन करके अपने कमरे पर बुलाता था, अश्लील बातें करता था, गालियां देता था.

दीपाली ने  लिखा कि बार-बार मना करने के कारण शिवकुमार उनसे चिढ़ने लगा था. ऐसे में एक बार शिवकुमार ने दीपाली को तीन दिन तक मालूर गांव के कच्चे रास्तों पर चलने के लिए मजबूर किया. दीपाली उस वक्त प्रेगनेंट थीं. लगातार तीन दिनों तक चलने के कारण उनका बच्चा गिर गया. इस इमोशन ट्रॉमा से जूझ रही दीपाली को शिवकुमार ने छुट्टी तक नहीं दी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दीपाली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि वे फिर से पांच महीने की गर्भवती थीं.

अपनी आत्महत्या के लिए शिवकुमार को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराते हुए दीपाली ने लिखा कि शिवकुमार के उत्पीड़न के कारण उनकी मानसिक हालत खराब हो गई थी. और शिवकुमार ने केवल उन्हें मानसिक तौर पर ही नहीं बल्कि आर्थिक तौर पर भी नुकसान पहुंचाया. कुछ प्रोजेक्ट्स को  पूरा करने के लिए दीपाली ने अपनी जेब से पैसे खर्च किए. लेकिन रिइम्बर्समेंट की उनकी रिक्वेस्ट बार-बार रिजेक्ट कर दी गई.

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी विनोद शिवकुमार.
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी विनोद शिवकुमार.

दीपाली ने अपने लेटर में रेड्डी को यह भी बताया कि उन्होंने बार-बार शिवकुमार को व्यवहार को लेकर रेड्डी से शिकायत की थी, ताकि एक सीनियर ऑफिसर की हैसियत से वे कुछ कार्रवाई करें. लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की. दीपाली ने रेड्डी से पूछा कि आप तो अपने जूनियर ऑफिसर का ही पक्ष ले रहे थे ना?

अपने लेटर में दीपाली ने रेड्डी से शिवकुमार पर कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और को ऐसा कदम न उठान अपदे. साथ ही अपनी बकाया सैलरी और दूसरे भत्ते अपनी मां को ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट भी की.

SC/ST एक्ट का एंगल क्या है?

दीपाली साल 2011 से वन विभाग में काम कर रही थीं. 14 मई 2019 को उनकी शादी हुई थी. उनके पति राजेश मोहिते सतारा के रहने वाले हैं. दीपाली खुशमिजाज थीं और सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती थीं. अपनी काम की गंभीरता को समझती थीं. जहां-जहां भी उन्हें तैनाती मिली, वहां उन्होंने माफियाओं और लुटेरों का जीना हराम कर दिया. चाहे बाद तस्करी की हो, अवैध शिकार या फिर गैरकानूनी अतिक्रमण की, दीपाली जब तक इन गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक नहीं लगा देती थीं, तब तक चैन की सांस नहीं लेती थीं.

पांच साल पहले उन्होंने कुछ ऐसा किया था कि पूरे इलाके में उनका बहुत नाम हुआ था. दरअसल, कुछ गोंद तस्कर महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश भाग रहे थे. वे ट्रेन में सवार थे. तब दीपाली ने अपनी बाइक से उनका पीछा किया था. ना केवल पीछा किया बल्कि उन्हें पकड़ भी लिया और पांच टन गोंद जब्त कर ली.

इतनी बहादुर दीपाली की आत्महत्या के कारण पूरे इलाके में रोष है. वन विभाग में काम करने वाली महिला कर्मचारी भी आक्रोशित हैं. ये सब लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और दीपाली के लिए जल्द से जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं. इस संबंध में अमरावती की सांसद नवनीत राणा, उनके विधायक पति रवि राणा और अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा है.

राजनीति तो इस मामले में दूसरी तरह की भी हो रही है. खासकर, SC/ST एंगल के संबंध में. सोशल मीडिया पर यह बात फैलाई जा रही है कि  कि दीपाली ने आत्महत्या केवल इसलिए क्योंकि शिवकुमार ने उन्हें झूठे SC/ST केस में फंसाने की धमकी दी थी. इसी आधार पर सोशल मीडिया पर SC/ST एक्ट को खत्म करने की मांग की जा रही है. इससे जुड़े एक रिएक्शन पर नजर डालिए.

ट्विटर रिएक्शन.
ट्विटर रिएक्शन.

दीपाली ने अपने लेटर में उन्हें झूठे SC/ST एक्ट में फंसाने की धमकी का जिक्र किया है. अपने लेटर में उन्होंने लिखा-

“मार्च 2020 में मैं और मेरी टीम मांगिया गांव में अतिक्रमण हटा रहे थे. कुछ गांववालों ने हमें वहां बंद कर दिया और हमारे ऊपर SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की धमकी दी. जब मैंने शिवकुमार को फोन किया तो उसने मुझे गालियां दीं और मुझे झूठा भी बताया. साथ ही यह धमकी भी दी कि वो SP से मेरे खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की बात कहेगा.”

अपने लेटर में दीपाली ने यह भी बताया कि उन्होंने फोन पर हुई इस बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली थी. और बाद में इसे सांसद नवनीत राणा को भी सुनाया था.

हालांकि, SC/ST कानून के तहत फंसाने की धमकी देना उस पूरी यातना का एक हिस्सा भर है जो कथित तौर पर शिवकुमार ने दीपाली को दी. शिवकुमार ने सेक्स का दबाव बनाया, नहीं मानने पर सार्वजनिक रूप से गालियां दी. काम में बेवजह गलतियां निकालने लगा. मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया. शारीरिक प्रताड़ना दी जिसकी वजह से दीपाली का गर्भपात हो गया. ऐसे में SCST एक्ट में फंसाने की धमकी को आत्महत्या की एकमात्र वजह बताना, पूरे मामले को बहुत ही सरलीकृत नजरिए से देखना होगा. जिसमें यह बात निश्चित तौर पर पीछे छूट जाएगी कि वर्किंग स्पेस में महिलाओं को अपने से ऊंचे पदों पर बैठे पुरुष बॉसेज के उत्पीड़न और यौन कुंठा का सामना करना पड़ता है. हर एक सेक्टर में यह बात लगभग समान रूप से लागू होती है.

वीडियो- शोवा मजूमदार की मौत के बाद पीएम मोदी और अमित शाह ने ममता बनर्जी को क्या चेतावनी दी?

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