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कैप्टन अमरिंदर सिंह ढाई साल पुराने 'मीटू' मामले को अपने ही मंत्री के खिलाफ यूज़ कर रहे हैं?

पंजाब के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है. वजह है ढाई साल पुराना एक MeToo मामला. कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस मामले का इस्तेमाल अपनी ही सरकार के एक मंत्री के खिलाफ कर रहे हैं. बताया ये भी जा रहा है कि ये मंत्री पंजाब सरकार से असंतुष्ट हैं और सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं. आरोप लग रहे हैं कि मुख्यमंत्री राज्य के महिला आयोग का इस्तेमाल अपना राजनीतिक हित साधने में कर रहे हैं. इस बीच पीड़िता का कोई पता नहीं है और ऐसा लग भी नहीं रहा कि सरकार को उसकी चिंता है.

क्या है मामला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला सितंबर 2018 का है. पंजाब में तैनात एक महिला IAS ऑफिसर ने ‘मी टू’ मुहिम के तहत राज्य के तकनीकि शिक्षा मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया था. हालांकि, पीड़िता ने न तो इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी और न ही दूसरी कोई डिटेल दी थी.

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़.
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़.

24 अक्टूबर, 2018 को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि मंत्री ने माफी मांग ली है. मामले को सुलझा लिया गया है और पीड़िता पूरी तरह से संतुष्ट है. इसी बीच यह पूरा मामला कांग्रेस पार्टी के हाई कमान के सामने भी लाया गया. पार्टी की महासचिव और उस समय पंजाब कांग्रेस की प्रभारी रहीं आशा कुमारी और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी मंत्री चन्नी को क्लीन चिट दे दी. यह कहते हुए कि मंत्री के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है.

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला पब्लिक डोमेन से गायब हो गया. लेकिन फिर 17, मई 2021 की तारीख आई. पंजाब महिला आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को एक नोटिस भेजा. इसमें चन्नी के खिलाफ लगभग ढाई साल पहले लगे आरोपों पर हुई कार्रवाई की अपडेट मांगी गई.

कैप्टन और चन्नी के समीकरण

पंजाब के मुख्य सचिव को महिला आयोग का नोटिस मिलने से पहले चन्नी अपनी ही सरकार की सार्वजनिक मंचों पर बढ़-चढ़कर आलोचना कर रहे थे. इसे देखते हुए कहा जा रहा है कि कैप्टन ने जानबूझकर यह नोटिस भिजवाया है, ताकि चन्नी कंट्रोल में रहें. दरअसल, शुरुआत से ही कैप्टन और चन्नी के समीकरण ठीक नहीं रहे हैं. चन्नी दलित समुदाय से आते हैं. 2017 में राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद से ही वे लगातार राज्य कैबिनेट में दलित विधायकों की भागीदारी बढ़ाने को कह रहे हैं. यही मांग वो सरकारी नौकरियों में ऊंचे पदों के लिए भी कर रहे हैं. वो प्रमोशन में आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं.

कहा जा रहा है कि अमरिंदर सिंह राज्य के महिला आयोग का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)
कहा जा रहा है कि अमरिंदर सिंह राज्य के महिला आयोग का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)

दरअसल, पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में दलित और ओबीसी समुदाय के लिए बड़े वादे किए थे. बताया जा रहा है कि पार्टी इन वादों पर खरी नहीं उतर पाई है. चन्नी सार्वजनिक रूप से इसे लेकर सरकार की आलोचना करते रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस तरह की आलोचना की वजह से कैप्टन और उनके बीच के समीकरण कभी सही नहीं बैठे.

महिला आयोग का राजनीतिक इस्तेमाल

महिला आयोग के नोटिस के बाद सवाल उठ रहा है कि अगर उस मामले की जांच अभी तक जारी है तो 2018 में अमरिंदर सरकार ने किस आधार पर चन्नी को क्लीन चिट दी थी? क्या कैप्टन और चन्नी के बीच कोई डील हो गई थी? और क्या इस डील के चलते पीड़िता को चुप करा दिया गया था?

दूसरी तरफ राजनीतिक टूल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के आरोपों पर पंजाब महिला आयोग की प्रमुख मनीषा गुलाटी का बयान भी सामने आया है.  उन्होंने कहा,

“यह पहली बार नहीं है, जब मैंने इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. मैं किसी भी तरह के दबाव में काम नहीं कर रही हूं. ऐसे मामलों में तीन या तीस साल का सवाल ही नहीं उठता. मामला तो कभी भी सामने आ सकता है.”

दूसरी तरफ कैप्टन से अंसतुष्ट कैंप भी सवाल उठा रहा है. जालंधर के विधायक परगत सिंह ने भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा,

“मैं यह फिर से कह रहा हूं कि आखिर ढाई साल बाद यह मामला फिर से क्यों खोला गया है, वो भी बिना किसी शिकायत के. मैं कह रहा हूं कि एक महिला आयोग है, लेकिन एक पीड़िता का ट्रायल क्यों चलाया जा रहा है. यह बहुत शर्मनाक है. यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री का ऑफिस और राज्य का महिला आयोग इस तरह का व्यवहार कर रहा है.”

परगत सिंह उन विधायकों में शामिल हैं, जो चन्नी के साथ मिलकर अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े करते आए हैं. करीब एक दर्जन विधायक और मंत्री खुलेआम कैप्टन अमरिंदर सिंह से अपनी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं. इनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, वर्तमान कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, अरुणा चौधरी और दूसरे विधायक शामिल हैं. दूसरी तरफ कैप्टन का कैंप इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है. वहीं पार्टी हाई कमान ने भी अब डैमेज कंट्रोल करना शुरू कर दिया है. ऐसी खबरें हैं कि हाई कमान असंतुष्ट विधायकों और मंत्रियों से बात कर रहा है.

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