Submit your post

Follow Us

वो जानलेवा बीमारी, जिससे 16 करोड़ का एक इंजेक्शन ही बचा सकता है

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

बिहार के रहने वाले अलोक कुमार सिंह और नेहा सिंह ने पिछले साल एक बेटे को जन्म दिया. अयांश. पैदा होने के दो महीने बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. अलोक और नेहा ने पटना में उसे कई डॉक्टर्स को दिखाया पर कुछ पता नहीं चला. आख़िरकार वो अयांश को इलाज के लिए National Institute of Mental Health and Neuro-Sciences यानी (NIMHANS) बेंगलुरु लेकर गए. वहां उसके कई टेस्ट हुए. पता चला उसे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नाम की बीमारी है. डॉक्टर्स का कहना है कि इस बीमारी से जूझ रहे बच्चे केवल 18 से 24 महीने जी पाते हैं. इस बीमारी का इलाज है एक इंजेक्शन, जिसकी कीमत है 16 करोड़ रुपए. अब इतनी रकम जमा करना अलोक और नेहा के लिए मुमकिन नहीं है.

इसलिए उन्होंने एक क्राउड फंडिंग कैंपेन शुरू किया. यानी लोगों से अपील की कि वो उनकी मदद करें. मीडिया और सोशल मीडिया पर इसका बहुत ज़िक्र हुआ. अलोक और नेहा सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी से भी मदद की गुहार लगाई है. वहीं अगस्त के महीने में तमिलनाडु के रहने वाले प्रियदर्शिनी और जगन्नाथ ने भी अपनी सात महीने की बेटी के लिए तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर एमके स्टालिन से मदद मांगी है. उनकी बेटी को भी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी SMA है. प्रियदर्शिनी ने बताया कि उनकी बेटी के पास सिर्फ़ दो साल बचे हैं.

हमें सेहत पर बहुत सारे लोगों के मेल्स आए हैं जो इस बीमारी के बारे में जानना चाहते हैं. वो इन पेरेंट्स की मदद करना चाहते हैं पर उनके मन में कई सवाल हैं. इसलिए वो चाहते हैं हम स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी पर बात करें. ये क्या बीमारी है, क्यों होती है इसके बारे में एक्सपर्ट्स से बात करके लोगों को बताएं. तो सबसे पहले समझते हैं स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी क्या है और किन बच्चों को होती है?

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी क्या है?

ये हमें बताया डॉक्टर गोविंद माधव ने.

डॉक्टर गोविंद माधव, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, ऑर्किड मेडिकल सेंटर, रांची
डॉक्टर गोविंद माधव, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, ऑर्किड मेडिकल सेंटर, रांची

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी स्पाइनल कॉर्ड (रीढ़ की हड्डी) में परेशानी के चलते मांसपेशियों का ढीला हो जाना, सूख जाना या काम न करना. मांसपेशियों में किसी भी प्रकार का मूवमेंट या हरकत होने के लिए दिमाग से करंट निकलता है. जो स्पाइनल कॉर्ड के रास्ते पहले एंटीरियर हॉर्न सेल पर पहुंचता है और उसके बाद स्पाइनल नर्व्स ( रीढ़ की हड्डी में मौजूद नसें) के माध्यम से हाथ-पैरों की मांसपेशियों में जाता है. इस पूरे रास्ते के किसी भी पॉइंट पर अगर कोई दिक्कत होती है यानी न्यूरॉन्स ( तंत्रिका कोशिका) अगर खराब होने लग जाते हैं तो मांसपेशियों के मूवमेंट में प्रॉब्लम होती है.

यह बीमारी वैसे तो कई प्रकार की होती है, लेकिन इसका सबसे कॉमन टाइप बच्चों में होता है. इसमें एंटीरियर हॉर्न सेल सूखने लग जाते हैं जिसकी वजह से मांसपेशियां सूखने लगती हैं, ढीली पड़ जाती हैं, मूवमेंट नहीं होता है. इसी बीमारी को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी कहा जाता है.

कारण

यह बीमारी जेनेटिक कारणों से होती है. एंटीरियर हॉर्न सेल को जिंदा रहने के लिए एक खास तरह के प्रोटीन की जरूरत होती है, जिसे SMN1 कहा जाता है. जीन में जब यह प्रोटीन नहीं होता है, तब एंटीरियर हॉर्न सेल सूखने लग जाते हैं. मांसपेशियां हरकत करना बंद कर देती हैं, ढीली पड़ जाती हैं यानी कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी हो जाती है.

Spinal Muscular Atrophy: Treatment
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी स्पाइनल कॉर्ड (रीढ़ की हड्डी) में परेशानी के चलते मांसपेशियों का ढीला हो जाना

लक्षण

इसमें मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रहता, मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं. गर्दन आगे की तरफ झुक जाती है, हाथ-पैर ढीले पड़ जाते हैं. आदमी बैठ नहीं पाता है, चल नहीं पाता है, यहां तक कि हाथ ऊपर नहीं उठा पाता है. आगे चलकर फेफड़ों में दिक्कत आती है. जितने भी वॉलंटरी स्केलेटल मसल्स (मांसपेशियां) हैं वह ढीली/ कमजोर पड़ने लग जाती हैं, उनकी गतिविधियां प्रभावित होने लग जाती हैं.

इलाज

2017 से पहले इस बीमारी का कोई भी इलाज नहीं था, लेकिन उसके बाद वैज्ञानिकों ने जेनेटिक थेरेपी या जीन थेरेपी की खोज की.

Spinal Muscular Atrophy: Testing and Diagnosis
इसमें ओरल दवाई दी जाती है और इसकी एक बोतल की कीमत लगभग 6 लाख रूपए तक पड़ती है

इस थेरेपी में जो जीन खराब होता है, उसको अच्छे स्वस्थ जीन से बदल दिया जाता है, जिसे डॉक्टर्स इंजेक्शन के द्वारा करते हैं. इसमें स्पाइनल कॉर्ड (रीढ़ की हड्डी) में एक इंजेक्शन दिया जाता है. न्यूज़ीनरसेन (nusinersen), यह इंजेक्शन काफी महंगा आता है. इंजेक्शन का एक डोज़ भारत में लगभग 87 लाख रुपए का पड़ता है और मरीज को ठीक होने के लिए 7 से 8 इंजेक्शन दिए जाते हैं.

दूसरा इंजेक्शन है ऑनासेम्नोजीन अबेपार्वोवेक (Onasemnogene Abeparvovec). इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपए है, ये इंजेक्शन इतना महंगा क्यों होता है? क्योंकि ये इंजेक्शन भारत में नहीं बनता. इनको बाहर से इम्पोर्ट करना पड़ता है.

अब हाल ही में FDA ने एक तीसरा इलाज, रिज्डीप्लैम (Risdiplam) नाम के इंजेक्शन को मंजूरी दी है, इसमें ओरल दवाई दी जाती है और इसकी एक बोतल की कीमत लगभग 6 लाख रुपए की पड़ती है, एक साल में बच्चे को कम से कम 6 बोतलों की जरूरत होती है.

Newborn screening and early treatment for spinal muscular atrophy can save both lives and money
2017 से पहले इस बीमारी का कोई भी इलाज नहीं था

अब सवाल उठता है कि क्या इस तरह के इलाज से मरीज एकदम ठीक हो जाता है? यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बीमारी का इलाज 2017 से ही शुरू हुआ है. यह अभी भी रिसर्च और ट्रायल के लेवल पर है, देखा गया है कि शुरुआत में जिन बच्चों को ट्रायल के लिए चुना गया था, उनमें बीमारी के लक्षण दिखने शुरू ही हुए थे. उनकी उम्र कम थी और वो बहुत कमजोर नहीं हुए थे. उनको यह दवाई दी गई और 2 से 3 साल तक उनके ऊपर ट्रायल किया गया. पाया गया कि इनमें इस बीमारी के बढ़ने की गति कम हो गई है यानी वह थोड़े लंबे समय तक जी सकते हैं.

लेकिन ऐसा नहीं कह सकते कि इन इंजेक्शन या इस इलाज के बाद वह बिल्कुल ठीक हो गए, जैसे-जैसे इलाज को और समय दिया जाएगा, वैसे-वैसे पता चलेगा कि हम इसके इलाज मे कितने सफ़ल रहे हैं.

बचाव

अब सवाल उठता है कि क्या इस बीमारी से बचा जा सकता है? अगर एक बार यह बीमारी किसी को हो जाए तो दवाइयों से आप आंशिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं,  लेकिन सबसे अच्छा तरीका है कि इस बीमारी को होने से पहले ही रोक दिया जाए.

अगर इस बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है तो एक्सपेक्टेड पेरेंट्स की जेनेटिक काउंसलिंग के द्वारा पता किया जाता है कि आने वाले बच्चे को इस बीमारी के होने के चांसेज क्या हैं? जेनेटिक काउंसलिंग के द्वारा हम आने वाले बच्चे में इस बीमारी को होने से रोक सकते हैं. इससे बेहतर कोई और उपाय नहीं है.

आपने डॉक्टर की बातें सुनीं. एक बात तो साफ़ है. इस बीमारी को होने से रोकना ही सबसे बेस्ट उपाय है.बच्चे के जन्म से पहले ही पता किया जा सकता है कि उसे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी होगी या नहीं. पर जो बच्चे इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं, उनके बचाने के लिए इंजेक्शन के अलावा कोई इलाज नहीं है. ये इंजेक्शन बहुत महंगे होते हैं. इसलिए ज़रूरी है कि सरकार और स्वास्थ अधिकारी उन लोगों की मदद करें जिन्हें ये बीमारी है. एक आम आदमी के लिए इतनी रकम जोड़ पाना नमुमकिन है. जो लोग इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की मदद करना चाहते हैं, वो ज़रूर करें.


वीडियो

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

खो-खो प्लेयर की हत्या करने वाले का कुबूलनामा- "उसे देख मेरी नीयत बिगड़ जाती थी"

बिजनौर पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला प्लेयर का रेप करना चाहता था.

LJP सांसद प्रिंस राज के खिलाफ दर्ज रेप की FIR में चिराग पासवान का नाम क्यों आया?

तीन महीने पहले हुई शिकायत पर अब दर्ज हुई FIR.

साकीनाका रेप केस: महिला को इंसाफ दिलाने के नाम पर राजनेताओं ने गंदगी की हद पार कर दी

अपनी सरकार पर उंगली उठी तो यूपी के हाथरस रेप केस को ढाल बनाने लगी शिवसेना.

सलमान खान को धमकी देने वाले गैंग की 'लेडी डॉन' गिरफ्तार, पूरी कहानी जानिए

एक सीधे-सादे परिवार की लड़की कैसे बन गई डॉन?

मिलने के लिए 300 किलोमीटर दूर से फ्रेंड को बुलाया, दोस्तों के साथ मिलकर किया गैंगरेप!

आरोपी और पीड़िता सोशल मीडिया के जरिए फ्रेंड बने थे.

मुंबई रेप पीड़िता की इलाज के दौरान मौत, आरोपी ने रॉड से प्राइवेट पार्ट पर हमला किया था

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा-फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस.

NCP कार्यकर्ता ने महिला सरपंच को पीटा, वीडियो वायरल

मामला महाराष्ट्र के पुणे का है. पीड़िता ने कहा – नहीं मिला न्याय.

सिविल डिफेंस वालंटियर मर्डर केस: परिवार ने की SIT जांच की मांग, हैशटैग चला लोग मांग रहे इंसाफ

पीड़ित परिवार का आरोप- गैंगरेप के बाद हुआ कत्ल.

उत्तर प्रदेश: रेप नहीं कर पाया तो महिला का कान चबा डाला, पत्थर से कुचला!

एक साल से महिला को परेशान कर रहा था आरोपी.

मुझे जेल में रखकर, उदास देखने में पुलिस को खुशी मिलती है: इशरत जहां

दिल्ली दंगा मामले में इशरत जहां की जमानत में अब पुलिस ने कौन सा पेच फंसा दिया है?