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वो कौन सा 'जादू' है जिसने लारा दत्ता को इंदिरा गांधी बनाकर ट्रेंड करा दिया?

19 अगस्त को एक फिल्म थियेटर में रिलीज़ होने जा रही है. नाम है ‘बेल बॉटम’. फिल्म में अक्षय कुमार, वाणी कपूर, हुमा कुरेशी और लारा दत्ता अहम भूमिकाओं में हैं. हाल ही में इसका ट्रेलर रिलीज़ हुआ था. और खास बात ये रही कि ये ट्रेलर अक्षय की बाकी फिल्मों से थोड़ा अलग रहा. वो ऐसे कि ट्रेलर के रिलीज़ के बाद चर्चा अक्षय की नहीं हुई, जो कि अमूमन होता है, बल्कि लारा दत्ता ने जनता का सारा ध्यान खींच लिया. वो क्यों? अपने मेकअप के चलते.

दरअसल, फिल्म में लारा दत्ता पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभा रही हैं. और उनका मेकअप इतना ज़बरदस्त हुआ है कि कोई पहचान ही नहीं पा रहा था. फिर जब पहचाना तो सोशल मीडिया पर आ गया तूफान. नहीं हवाओं का नहीं, बल्कि कमेंट्स का, पोस्ट का. लोगों ने जब लारा को पहचाना, तो मेकअप आर्टिस्ट के तारीफों के पुल बांधने लगे. कुछ लोगों ने तो ये भी मांग कर दी कि लारा का मेकअप करने वाले आर्टिस्ट को नेशनल अवॉर्ड देना चाहिए.

फिर लारा ने भी अपने इंस्टाग्राम पर अपने इंदिरा बनने का एक वीडियो डाला. पता चला कि उनका प्रोस्थेटिक मेकअप हुआ है. वीडियो में साफ दिखा कि उनकी नाक के ऊपर कुछ अलग सा स्किन जैसा पीस लगाया गया है, इससे लारा का लुक काफी ज्यादा बदल गया. फिर बाकी मेकअप हुआ, इंदिरा गांधी की आइकॉनिक हेयर स्टाइल वाला विग लगा और फिर फिल्म ‘बेल बॉटम’ को मिली उसकी ‘इंदिरा गांधी’. इस मेकअप को लेकर तारीफ के साथ-साथ ये भी बहस हो रही है कि प्रोस्थेटिक्स पर जितनी मेहनत की गई है, उससे बेहद कम मेहनत में कोई और एक्ट्रेस विश्वसनीय इंदिरा गांधी बन सकती थीं. ये बात केवल लुक्स को लेकर की जा रही है.

खैर, ये एक अलग बहस का मुद्दा है. हम तो यहां बात करेंगे प्रोस्थेटिक मेकअप की. सबसे पहले जानिए कि ये प्रोस्थेटिक शब्द का मतलब क्या है. ‘Cambridge Dictionary’ के मुताबिक, प्रोस्थेटिक का मतलब होता है किसी तरह का आर्टिफिशियल बॉडी पार्ट. जैसे कई दफा आपने देखा होगा कि जिन व्यक्तियों के हाथ या पैर नहीं होते, या किसी दुर्घटना के चलते वो अपने शरीर के ये अंग खो देते हैं, तो उन्हें प्रोस्थेटिक अंग लगाए जाते हैं. अब इसी तर्ज पर ये समझिए कि जब किसी व्यक्ति का कुछ ऐसा मेकअप किया जाए, जिसमें एक तरह की ‘आर्टिफिशियल स्किन’ का इस्तेमाल हो, तो वो कहलाता है प्रोस्थेटिक मेकअप. ये आर्टिफिशियल स्किन असल में सिलिकॉन से बनी होती है.

मेकअप की प्रोसेस से पहले जानिए इसकी शुरुआत कैसे हुई?

देखिए, जब दुनिया में फिल्में बनना शुरू हुई थीं, तब एक्टर्स अपना मेकअप खुद किया करते थे. उनके लिए खासतौर पर कोई मेकअप आर्टिस्ट नहीं होता था. 1930 तक ऐसा ही होता रहा. तब तक एक्टर्स अपने फेस पर स्पेशल इफेक्ट वाले मेकअप के लिए, माने ऐसा मेकअप जिसमें उन्हें कटा, जला या भूत या किसी जानवर या मॉन्सटर की शक्ल का खुद को दिखाना होता था, तो वो प्रोस्थेटिक मेकअप करते थे. तब उनके पास सिलिकॉन वाली टेक्नीक नहीं थी. ऐसे में कॉटन, जिलाटीन, ग्रीसपेंट, क्ले, कई तरह की पुट्टी, पेस्ट और वैक्स की मदद से ये प्रोस्थेटिक्स डिज़ाइन करते थे. प्रोस्थेटिक मेकअप की फील्ड में पायोनियर के तौर पर हम अमेरिकन एक्टर लॉन चेनी का नाम जानते हैं. जो ज्यादातर साइलेंट हॉरर फिल्मों में काम करते थे. उन्होंने अपनी फिल्म ‘The Hunchback of Notre Dame’ में अपने कैरेक्टर का जो मेकअप किया था, वो भविष्य के प्रोस्थेटिक मेकअप के लिए आधार बना. लॉन के अंदर ये एबिलिटी थी कि वो मेकअप के ज़रिए खुद को एक अलग व्यक्ति बना लेते थे. उन्हें इसी वजह से ‘हज़ारों चेहरों वाला आदमी’ कहा जाता था.

The Hunchback Of Notre Dame
‘The Hunchback of Notre Dame’ फिल्म में लॉन चेनी. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

इसके अलावा पायोनियर्स की लिस्ट में एक और नाम आता है जैक पियर्स का. जब कलाकारों का मेकअप करने के लिए आर्टिस्ट रखे जाने लगे, तब जैक सीन में आए. 1930 में लॉन चेनी की मौत हो गई. उसके बाद फिल्मों की मेकअप इंडस्ट्री में नया नाम जैक पियर्स थे. उन्होंने 1930 से 1940 के बीच कई फिल्मों में स्पेशल मेकअप किए. इसके बाद मेकअप की फील्ड में नए-नए प्रैक्टिकल्स होते रहे.

चूंकि पहले जिन पदार्थों का इस्तेमाल प्रोस्थेटिक मेकअप में होता था, वो शरीर पर रिएक्ट कर जाते थे. ऐसे में समय के साथ-साथ प्रोडक्ट्स में और मेकअप के तरीकों में बदलाव आता गया. और प्रोस्थेटिक मेकअप का जो मॉडर्न तरीका है, उसमें सिलिकॉन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि एक्टर-एक्ट्रेस के शरीर को कोई नुकसान न पहुंचे.

भारत में अगर हम प्रोस्थेटिक मेकअप की बात करें तो सबसे पहला नाम कमल हासन की फिल्म ‘चाची 420’ का आता है. इसमें कमल हासन ने 75 साल की औरत का किरदार निभाया था. इसके अलावा ‘पा’ फिल्म में अमिताभ बच्चन का किरदार, ‘राब्ता’ में राजकुमार राव, ‘फैन’ फिल्म में शाहरुख खान, ‘कपूर एंड संस’ में ऋषि कपूर का किरदार, ये सब प्रोस्थेटिक मेकअप के अच्छे-खासे उदाहरण हैं.

क्या है प्रोस्थेटिक मेकअप?

ये मेकअप की फील्ड का वो हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति के कैरेक्टर को अलग लुक या इफेक्ट देने के लिए किया जाता है. प्रोस्थेटिक मेकअप से एक्टर या एक्ट्रेस के शरीर में चोट से लेकर उन्हें बूढ़ा या जवान दिखाया जा सकता है. या किसी दूसरे व्यक्ति का लुक-अलाइक बनाया जा सकता है. या फिर किसी जानवर की शक्ल तक का बनाया जा सकता है.

कैसे किया जाता है ये मेकअप?

जैसा कि शुरुआत में ही बताया था कि फिल्मों के शुरुआती दौर में अलग-अलग सामानों से प्रोस्थेटिक मेकअप होता था. लेकिन अब सिलिकॉन का इस्तेमाल होता है. इस सिलिकॉन से प्रोस्थेटिक पीसेस तैयार किए जाते हैं, जो किसी एक्टर या एक्ट्रेस के चेहरे या ज़रूरत के हिसाब के शरीर के अंग पर चिपकाए जाते हैं. इन पीसेस को कहते हैं- ‘अपलायंसेस’. और इन अपलायंसेस को मेडिकल-ग्रेड अधेसिव से चिपकाया जाता है. अधेसिव माने एक तरह का गोंद. मेडिकल-ग्रेड माने जिस गोंद से त्वचा को कोई नुकसान न हो.

कैसे तैयार होते हैं अपलायंसेस?

किसी फिल्म की स्क्रिप्ट के हिसाब से एक्टर का लुक तैयार किया जाता है. और अगर किसी फिल्म में उस एक्टर को बूढ़ा या किसी दूसरे व्यक्ति की तरह दिखना है, तो होता है प्रोस्थेटिक मेकअप का इस्तेमाल. एक बार जब ये डिसाइड कर लिया जाता है कि एक्टर या एक्ट्रेस को कैसा लुक देना है, तो फिर उसके हिसाब से शुरू होती है अपलायंसेस बनाने की प्रोसेस.

ये रही वो प्रोसेस-

– लाइफ कास्टिंग- किसी एक्टर या एक्ट्रेस के चेहरे का या उस पार्ट का, जिसमें प्रोस्थेटिक मेकअप होना है, उसका लाइफ कास्ट लेना. जैसे ‘पा’ फिल्म में अमिताभ बच्चन के अपलायंसेस तैयार करने के लिए उनका सबसे पहले लाइफ कास्ट लिया गया था. इस प्रोसेस में सिलिकॉन रबर को चेहरे से सिर से लेकर कंधे तक लगाया जाता है. फिर उसके ऊपर प्लास्टर वाली पट्टियां लगाई जाती हैं. जब ये सूख जाता है, तब प्लास्टर वाली पट्टियां और सिलिकॉन रबर को चेहरे और सिर से आराम से निकाला जाता है. चेहरे का उभार उस सिलिकॉन रबर पर आ जाता है. इसे ‘इनसाइड आउट’ वर्ज़न कहते हैं. इसके बाद इस उभार वाले हिस्से में प्लास्टर डालकर लाइफ कास्ट निकाला जाता है. इसे ‘positive life cast mould’ कहते हैं.

Fan Shahrukh Khan
लेफ्ट टू राइट: ‘फैन’ फिल्म में शाहरुख खान के लाइफ कास्टिंग की प्रोसेस और आखिर में तैयार हुआ लाइफ कास्ट. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

– स्कल्पटिंग- इस प्रोसेस में पॉज़िटिव लाइफ कास्ट पर क्ले का इस्तेमाल करके फाइनल डिज़ाइन तैयार की जाती है. ये डिज़ाइन आर्टिस्ट अपने हाथ से ही तैयार करता है.

Prosthetic Makeup
प्रोस्थेटिक मेकअप में स्कल्पटिंग की प्रोसेस. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

– मोल्डिंग-जब फाइनल स्कल्पटिंग तैयार हो जाती है, यानी लाइफ कास्ट के चेहरे के ऊपर वो डिज़ाइन क्ले से तैयार कर ली जाती है, जो एक्टर या एक्ट्रेस के चेहरे पर लगाना है, तब इस स्कल्पटिंग से सिलिकॉन अपलायंसेस तैयार किए जाते हैं.

हमने इस मेकअप टेक्नीक और प्रोसेस को और ठीक से समझने के लिए हमने बात की प्रोस्थेटिक मेकअप आर्टिस्ट रिया वशिष्ठ से. ये प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट हैं और अमेरिका में इस मेकअप की पढ़ाई करके भारत लौटी हैं. रिया कहती हैं-

“प्रोस्थेटिक मतलब आर्टिफिशियल बॉडी पार्ट्स बनाना. जैसे नाक, आंख, उंगली. जो भी हम आर्टिफिशियल पार्ट्स बनाते हैं. उन्हें हम प्रोस्थेटिक्स बोलते हैं. प्रोस्थेटिक मीन्स किसी और के फेस को क्रिएट करके आपने एक पर्टिकुलर पर्सन के फेस के ऊपर पेस्ट किया. प्रोस्थेटिक मेकअप बाकी मेकअप से अलग है, क्योंकि बाकी मेकअप में आप किसी को खूबसूरत दिखाते हो, बदसूरत दिखाते हो. लेकिन प्रोस्थेटिक में आप किसी इंसान की अपीयरेंस को प्रॉपर तरीके से बदल सकते हैं. किसी इंसान को किसी और में कन्वर्ट करना प्रोस्थेटिक होता है. और उस प्रोसेस को प्रोस्थेटिक मेकअप कहते हैं. इसकी प्रोसेस बहुत लंबी होती है. क्योंकि जिस दिन आपको ये मेकअप करना होता है, उससे करीब एक महीने पहले से तैयारी शुरू हो जाती है. लाइफ कास्ट लो, फिर उसके ऊपर आप जो भी फेस क्रिएट करना चाहते हैं, उसे क्रिएट करते हैं, फिर मोल्ड करते हैं, कास्टिंग करते हैं. और सिलिकॉन के पीसेस को फिर चेहरे पर चिपकाया जाता है. इस चिपकाने वाली प्रोसेस में भी एक से दो घंटे लग जाते हैं. ये निर्भर करता है कि आपको कितना प्रोस्थेटिक करना है. केवल नाक का करना है या गाल का.”

Rheaa Vashist
मेकअप आर्टिस्ट रिया वशिष्ठ लाइफ कास्ट के साथ. (फोटो- रिया वशिष्ठ)

भारत में इस वक्त प्रोस्थेटिक मेकअप आर्टिस्ट बेहत कम हैं. ज्यादातर फिल्मों में, जहां प्रोस्थेटिक्स का इस्तेमाल हुआ, उसे विदेशी आर्टिस्ट्स ने तैयार किया था. हालांकि अब धीरे-धीरे भारत के आर्टिस्ट भी इस मेकअप टेक्नीक में आगे आ रहे हैं. रिया कहती हैं, भारत में प्रोस्थेटिक मेकअप आर्टिस्ट कम इसलिए हैं क्योंकि जो सामान इसमें इस्तेमाल होता है, उसे भारत में खोजना काफी मुश्किल है. काफी चीज़ें ऐसी हैं जो उपलब्ध ही नहीं हैं, या फिर बैन हैं. लेकिन फिर भी ये कहीं न कहीं से अरैंज हो जाता है.

लारा दत्ता को ‘इंदिरा गांधी’ क्या किसी विदेशी आर्टिस्ट ने बनाया?

इस सवाल का जवाब है- नहीं. ‘बेल बॉटम’ के लिए लारा का मेकअप चार बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके मेकअप आर्टिस्ट विक्रम गायकवाड़ ने किया है. ‘द क्विंट’ से हुई बातचीत में विक्रम ने बताया कि उनकी टीम खुद प्रोस्थेटिक्स बनाती है. ये भी बताया कि इंदिरा गांधी वाला लुक देने के लिए लारा की नाक पर प्रोस्थेटिक्स किया गया और विग लगाया गया. साथ ही कई सारी शेडिंग्स के साथ रिंकल्स क्रिएट किए गए. विक्रम कहते हैं-

“प्रोस्थेटिक मेकअप का सबसे कठिन हिस्सा प्रोस्थेटिक्स को चिपकाना है. क्योंकि आपको उस पीस को इस तरह से चिपकाना पड़ता है जिससे ये न दिखाई दे कि ये अलग से लगा है. एक्टर के बाकी चेहरे से इसे मैच करना पड़ता है. जब आप एक बार पीस चिपका देते हैं, तो इसके किनारों को चेहरे के बाकी हिस्से से ब्लेंड करना पड़ता है, ताकि ये अलग से दिखाई न दे.”

लारा का मेकअप वाकई लोगों का ध्यान खींच रहा है. खैर, इस ट्रेलर ने जितना ध्यान खींचा है, उतना क्या फिल्म खींच पाएगी, ये तो 19 अगस्त के बाद ही पता चलेगा.


वीडियो देखें: मैटिनी शो: ‘बेल बॉटम’ की लारा दत्ता से पहले अपने मेकअप से सबको चौंकाने वाले इन 9 एक्टर्स से मिलिए

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