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सिगरेट का अगला कश लेने से पहले मुंह के कैंसर पर ये खबर ज़रूर पढ़ लें

यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.

अभी तक हम कई तरह के कैन्सर्स के बारे में बात कर चुके हैं. प्रोस्ट्रेट कैंसर. स्किन कैंसर. थायरॉइड कैंसर. आज बात करेंगे उस कैंसर के बारे में जो हिंदुस्तान में आदमियों में सबसे ज़्यादा आम है. ये है ओरल कैंसर. यानी मुंह में होने वाला कैंसर. हिंदुस्तान में जितनी भी तरह के कैन्सर्स होते हैं, उनमें से 30 प्रतिशत केसेज़ ओरल कैंसर के होते हैं.

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया में हर साल 10 लाख लोग ओरल कैंसर से मरते हैं. 10 लाख! और वजह पता है क्या है? तंबाकू.

हर फ़िल्म से पहले जो आप मुकेश वाला ऐड देखकर आंखें बंद कर लेते हैं न. वो टाइम पास के लिए नहीं चलाया जाता. ओरल कैंसर वाकई एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है. तो सबसे तो ये जानते हैं कि ओरल कैंसर क्या होता है और क्यों होता है?

क्या होता है ओरल कैंसर?

Dr Mahendru Pic
डॉक्टर विभोर महेंद्रू

ये हमें बताया डॉक्टर विभोर महेंद्रू ने. वो लखनऊ के सहारा अस्पताल में कैंसर स्पेशलिस्ट हैं. उन्होंने कहा,

ज़ुबान, तालू, गाल के अंदर का हिस्सा, जबड़ा और होंठ को मिलाकर ओरल कैविटी बनती है. जो भी कैंसर इन चीज़ों को अफेक्ट करता है उसे हम ओरल कैंसर कहते हैं.

कारण:

-सबसे बड़ा कारण है पान, तंबाकू, मसाला, शराब

-ओरल कैंसर में 80 प्रतिशत केसेज़ इन्हीं कारणों से हैं

-दूसरा कारण है एक वायरस. जिसे ह्यूमन पैपिलोमावायरस कहा जाता है (HPV). ओरल कैंसर में आजकल उसका प्रभाव देखा जा रहा है

ओरल कैंसर क्या होता है और क्यों होता है, ये तो पता चल गया. अब जानते हैं इसके लक्षण और इलाज.

ज़ुबान, तालू, गाल के अंदर का हिस्सा, जबड़ा और होंठ में होने वाले कैंसर को ओरल कैंसर कहते हैं
ज़ुबान, तालू, गाल के अंदर का हिस्सा, जबड़ा और होंठ में होने वाले कैंसर को ओरल कैंसर कहते हैं

लक्षण:

-मेन लक्षण है कि मुंह में छाला बनता है जो धीरे-धीरे बढ़ता जाता है

-पेशेंट इन्फेक्शन की दवाइयां खाता रहता है पर उससे फ़ायदा नहीं होता. छाला बढ़ता रहता है

-अगर कोई भी छाला दो हफ़्ते से ज़्यादा रहता है और ठीक नहीं हो रहा तो ध्यान देने वाली बात है

-गर्दन में लिम्फ़ नोड बढ़ता है

इलाज:

-इलाज में दो मुख्य चीज़ें होती हैं

-एक सर्जरी. दूसरा रेडियो थरैपी

-ज़्यादातर केसेज़ में दोनों को मिलाकर ही अच्छा रिजल्ट मिलता है

-ओरल कैंसर जब सर्जरी लायक स्थिति में होता है तो पहला स्टेप सर्जरी होती है

-सर्जरी में तीन-चार चीज़ें करनी पड़ती हैं

-पहला. कैंसर वाले एरिया को मार्जिन के साथ निकालना पड़ता है. कम से कम एक-डेढ़ सेंटीमीटर चारों तरफ से एक्स्ट्रा निकालना पड़ता है, ताकि पूरा कैंसर निकले. उसकी जड़ें भी साथ में निकलें.

-कैंसर के गर्दन में मौजूद लिम्फ़ नोड्स तक फैलने के चांसेज़ होते हैं, भले ही लिम्फ़ नोड्स महसूस हो या न हो, पर उन्हें भी निकालना पड़ता है.

-पैथोलॉजी में पता चलता है कि बीमारी लिम्फ़ नोड्स में आई है या नहीं आई है.

– सेम सिटिंग में प्लास्टिक सर्जरी भी हो जाती है

-अगर ज़ुबान का बड़ा हिस्सा निकाला जाता है तो प्लास्टिक सर्जरी से ज़ुबान को ठीक किया जाता है

-अगर जबड़ा निकाला जाता है तो प्लास्टिक सर्जरी करके उसे भी ठीक कर दिया जाता है

-जब चार-पांच हफ़्तों में पूरी तरह से हील हो जाता है पेशेंट, तब रिपोर्ट आती है. रिपोर्ट उन टिश्यू (ऊतक) की, जो जांच के लिए भेजे जाते हैं

-रिपोर्ट बताती है कि आगे किसी ट्रीटमेंट की ज़रूरत है या नहीं

-कई रिस्क फैक्टर स्टडी किए जाते हैं

-अगर वो रिस्क फैक्टर पॉजिटिव आते हैं तो सर्जरी के चार से छह हफ़्ते बाद रेडियो थैरेपी भी होती है उस पूरे हिस्से की. गर्दन की, और जहां पर बीमारी थी, वहां की

-तब जाकर ट्रीटमेंट पूरा होता है

ओरल कैंसर में 80 प्रतिशत केसेज़ तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट के सेवन से होते हैं
ओरल कैंसर में 80 प्रतिशत केसेज़ तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट के सेवन से होते हैं

-इसके अलावा कीमोथरैपी भी इस्तेमाल की जाती है

-लेकिन ओरल कैंसर में कीमोथरैपी का रोल बहुत लिमिटेड है

-कीमोथरैपी वहां इस्तेमाल की जाती है जहां देखा बीमारी को श्रिंक करने की गुंजाइश होती है. श्रिंक करने के बाद सर्जरी की जाती है.

-शुरू में सर्जरी हो पाना मुमकिन नहीं लग रहा होता है तो उस समय प्री-ऑप या प्री सर्जरी कीमोथैरेपी दी जाती है ताकि कैंसर थोड़ा सिमट जाए और सर्जरी आसानी से हो पाए. ट्यूमर निकल सके

अगर आपको तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट से प्यार है तो डॉक्टर साहब की बातें सुनकर थोड़ा डर जाइए. ओरल कैंसर बहुत ख़तरनाक है. इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखिए.


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