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जब जान बचाना नामुमकिन हो तो मौत के दर्द को कम कर देता है ये तरीका!

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो भी सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

35 साल की प्रतिभा अहमदाबाद से हैं. वो अपने परिवार के साथ अमेरिका के बॉस्टन में रहती हैं. जनवरी 2021 की बात है. प्रतिभा के पिता की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. उनको डायबिटीज और हाइपरटेंशन की दिक्कत पहले से थी. प्रतिभा को शक था कि उनके पिता को कोविड हो गया है. वो काफ़ी डर गई थीं. उनके पिता खांस नहीं रहे थे पर उनको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही थी. रंग भी एकदम उड़ गया था. प्रतिभा ने तुरंत उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया. पहले उनके पिता को नेज़ल ट्यूब के ज़रिए ऑक्सीजन दिया गया. फिर ऑक्सीजन मास्क के ज़रिए. तीन दिन बाद उन्हें ICU से फ़ोन आया. प्रतिभा के पिता के लंग्स बिलकुल डैमेज हो चुके थे. बचने का चांस नहीं था. बीपी एकदम गिर गया था. उनके पिता होश में थे पर वो वेंटीलेटर पर नहीं जाना चाहते थे. उन्हें आभास हो गया था कि वो बच नहीं पाएंगे. ऐसे में प्रतिभा ने पिता को वेंटीलेटर पर डालने की बजाए हॉस्पिस केयर में डालने का फैसला किया. ताकि पिता की तकलीफ कम हो जाए. जब किसी मरीज को बचाना नामुमकिन होता है तो डॉक्टर हॉस्पिस केयर देने की बात करते हैं. पेन मैनेजमेंट इसका एक बड़ा हिस्सा है. हॉस्पिस केयर का चलन अमेरिका में कई सालों से है, लेकिन इंडिया में ज्यादातर लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं. हालांकि, देश में कई हॉस्पिटल, क्लिनिक ये सेवा देते हैं.

हॉस्पिस केयर क्या है?

ये हमें बताया डॉक्टर आरके मेहरा ने.

डॉक्टर आर के मेहरा, जनरल फिजिशियन, आकाश हॉस्पिटल, नई दिल्ली
डॉक्टर आर के मेहरा, जनरल फिजिशियन, आकाश हॉस्पिटल, नई दिल्ली

हॉस्पिस केयर यानी हॉस्पिस सेवा उन लोगों के लिए बनी है जो अपने डेथ बेड पर हैं.  पहले ये पश्चिमी देशों में काफी कॉमन था, अब हमारे देश में भी इसका चलन शुरू हो रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य है कि जो रोगी डेथ बेड पर हैं या फिर वो जो किसी ऐसी बीमारी से जूझ रहे हैं जिसका इलाज मुमकिन नहीं है. जैसे कैंसर पेशेंट्स जो रेडियो थैरेपी या कीमो थैरेपी से ठीक नहीं हो पा रहे हैं, या वो जिनका लिवर खराब हो चुका है. ऐसे में हॉस्पिस केयर के जरिए कोशिश होती है कि उनकी जो भी जिंदगी बची है उसमें उन्हें एक अच्छी लाइफ दी जा सके. ये अच्छी जगह पर एक्सपर्ट्स, डॉक्टर्स, मनोचिकित्सक, आध्यात्मिक लोगों के द्वारा दी जाती है.

7,713 Palliative Care Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

हॉस्पिस केयर यानी हॉस्पिस सेवा उन लोगों के लिए बनी है जो अपने डेथ बेड पर हैं

हॉस्पिस केयर देना क्यों ज़रूरी है?

देखिए हमारी ज़िंदगी में कई तरह की बीमारियां होती हैं. कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जिनसे खासतौर पर बुजुर्ग प्रभावित होते हैं. जिन लोगों का परिवार से ज्यादा अटैचमेंट होता है, उनके परिवारवाले काफी परेशान हो जाते हैं. वो चाहते हैं कि हमारे माता-पिता या घरवालों का इलाज ठीक से हो, लेकिन फाइनल स्टेज में उनको नींद नहीं आना, दिमाग में परेशानी होना, भूख कम लगना, उल्टी होना जैसे कुछ लक्षण महसूस होते हैं. जिनके होने पर परिवार वालों को अनौपचारिक प्रशिक्षण के द्वारा बता दिया जाता है कि कैसे उनकी केयर करें. चाहे वो घर में करें या हॉस्पिटल में भर्ती करके करें. इसके लिए आवश्यक है कि कम खर्चे में और परिवार में जो प्रेम है, उसे कायम रखते हुए, वो किया जाए जो रोगी के लिए अच्छा हो ताकी उनकी शेष जिंदगी अच्छी रहे.

End of Life Care: Hospice Care - JANCARE Private Health Services
मुख्य उद्देश्य है कि जो रोगी डेथ बेड पर हैं या वो जो डॉक्टर से प्रमाणित ऐसे रोगों से ग्रस्त हैं जिनसे निजात नहीं पा सकते

हॉस्पिस केयर कहां दी जा सकती है?

ये सेवा घर पर भी दी जा सकती है और अस्पताल में भी. घर पर परिवार वाले पूरी सेवा प्रदान करते हैं, डॉक्टर्स द्वारा दी गई हिदायतों का पालन करते हुए. अस्पताल में अपने रूटीन के हिसाब से ट्रीटमेंट देना, इंवेस्टीगेट करना, डेली इनपुट आउटपुट मेंटेन करना. अस्पताल में थोड़ी दिक्कत ये होती है कि घर वालों के विजिटिंग ऑवर्स लिमिटेड होते हैं और दूसरा ये काफी खर्चीला भी होता है.

वहीं घर में खर्च कम होता है लेकिन क्या दवाईयां चल रही हैं, उसपर निर्भर करता है कि कितना खर्च होगा. इन दोनों के बीच की कड़ी होते हैं हॉस्पिस केंद्र , जिसमें परिवार के सदस्य भी हमेशा रह सकते हैं और खर्च भी कम होता है अस्पताल की तुलना में. डॉक्टर्स की हिदायतों का भी पालन होता है क्योंकि वहां ट्रेंड पैरामेडिकल स्टॉफ और घरवाले रोगी की देखभाल करते हैं.

How the COVID-19 Pandemic Has Impacted Palliative, Hospice Care
ये सेवा घर पर भी दी जा सकती है और अस्पताल में भी

वैसे तो ये पूरी तरह परिवार वालों पर निर्भर करता है कि वो हॉस्पिस केयर कहां करवाना चाहते हैं. लेकिन अगर मरीज को दर्द बहुत ज्यादा है, इंजेक्शन बहुत ज्यादा लगने हैं तो उन्हें हॉस्पिटल या हॉस्पिस केंद्र में रखने को कहा जाता है.

हममे से कोई भी नहीं चाहता कि जिनसे हम प्यार करते हैं, वो किसी भी दर्द में रहें. बीमारियों पर, ज़िंदगी पर तो हमारा कंट्रोल नहीं है. पर हां, उनकी तकलीफ़ हम ज़रूर कम कर सकते हैं हॉस्पिस केयर के ज़रिए. तो अगर आपके परिवार में कोई ऐसा है जिसे हॉस्पिस केयर की ज़रूरत है तो इसको लेने में हिचके नहीं.


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