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घंटों कंप्यूटर, मोबाइल इस्तेमाल करने के बाद होता है आंखों में दर्द, इलाज ये है

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

अनीशा 26 साल की हैं. दिल्ली में रहती हैं. एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं. अब उनकी जॉब ही कुछ ऐसी है कि रोज़ 9 से 10 घंटे उन्हें कंप्यूटर पर आंखें गड़ाकर काम करना पड़ता है. पिछले कुछ महीनों से उनकी आंखों में काफ़ी दर्द रहने लगा था. आंखें लाल रहतीं, उनमें खुजली होती. साथ ही सिर और पीठ में दर्द भी रहता. अनीशा ने कुछ दिनों पहले डॉक्टर को दिखाया. डॉक्टर ने अनीशा को बताया कि उनके आंखें कमज़ोर हो गई हैं. और ये सारी दिक्कतें घंटों कंप्यूटर स्क्रीन पर ताकने के कारण हो रही हैं. डॉक्टर ने कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम का ज़िक्र किया. यानी लक्षणों का एक समूह जो ज़्यादा देर कंप्यूटर स्क्रीन पर देखने के कारण होते हैं.

अब हममें से जो लोग नौकरी करते हैं, उन्हें कई घंटे लगातार कंप्यूटर पर बैठकर काम करना पड़ता है. ऐसे में कुछ लक्षण हैं जो बहुत आम है. Journal of Mahatma Gandhi Institute of Medical Sciences के मुताबिक, इंडिया में कम से कम 4 करोड़ लोग कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं. इनमें से 80 प्रतिशत लोगों को कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम के कारण आंखों में समस्या होती है. अनीशा चाहती हैं कि हम अपने शो पर कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम के बारे में बात करें. क्योंकि ये दिक्कत बहुत आम है, इसलिए डॉक्टर्स से पूछकर इसका इलाज बताएं. क्योंकि पर कंप्यूटर काम न करना जैसा विकल्प तो लोगों के पास है नहीं. सही बात है. तो डॉक्टर्स से सबसे पहले समझते हैं कि कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम होता क्या है?

क्या होता है कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम?

ये हमें बताया डॉक्टर नेहा जैन ने.

डॉक्टर नेहा जैन, नेत्र-विशेषज्ञ, भारत विकास परिषद हॉस्पिटल, कोटा
डॉक्टर नेहा जैन, नेत्र-विशेषज्ञ, भारत विकास परिषद हॉस्पिटल, कोटा

-टीवी, मोबाइल, लैपटॉप वगैरह लगातार 3-4 घंटे इस्तेमाल करने से आंखों और शरीर में कुछ समस्याएं देखने को मिल सकती हैं.

-जिन्हें मेडिकल भाषा में कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम कहा जाता है.

कारण

-कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम आमतौर पर 3 कारणों से होता है.

-पहला. आंखों में आने वाली ड्रायनेस यानी सूखेपन के कारण.

-आमतौर पर इंसान 1 मिनट में 12-15 बार पलक झपकता है.

-लेकिन जब हम लैपटॉप, टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते हैं तो पलक झपकने का रेट 6-8 बार ही रह जाता है.

-जिसकी वजह से आंखों में ड्रायनेस हो सकती है.

-दूसरा कारण. अगर लैपटॉप या मोबाइल चलाते समय आपके शरीर, गर्दन का पोस्चर सही नहीं है तो इसकी वजह से भी आपको कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम की समस्या हो सकती है.

-तीसरा कारण है अनकरेक्टेड रिफ्रैक्टिव एरर.

-इसका मतलब है कि अगर आपको चश्मा लगा हुआ है और आप उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं

-या ग़लत चश्मे का नंबर इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसकी वजह से भी कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम हो सकता है.

लक्षण

-कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम में जो लक्षण आंखों और शरीर में दिखाई देते हैं वो इन्हीं 3 कारणों से होते हैं.

DIGITAL EYE STRAIN – A HIDDEN EPIDEMIC WORSENED BY THE LOCK DOWN
जब हम लैपटॉप, टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते हैं तो पलक झपकने का रेट 6-8 बार ही रह जाता है

-आंखों में ड्रायनेस की वजह से आंसुओं का pH लेवल (यानी एसिडिटी का लेवल) न्यूट्रल से एसिडिक हो जाता है.

-सोचिए, अगर आंखों में एसिड चला जाए तो कैसा महसूस होगा?

-इसी कारण आंखें लाल हो जाती हैं.

-आंखों में जलन होती है.

-आंखों से आंसू आ सकते हैं.

-अगर आप सही चश्मे का नंबर नहीं इस्तेमाल कर रहे हैं तो आंखों और सिर में दर्द हो सकता है.

-इसके अलावा ग़लत पोस्चर होने के कारण कमर या गर्दन की मांसपेशियां अकड़ सकती हैं, उनमें दर्द हो सकता है.

-थायरॉइड, आर्थराइटिस वाले मरीजों में ये समस्याएं ज़्यादा देखने को मिल सकती हैं.

-मोबाइल और लैपटॉप से ब्लू लाइट रेज़ ज़्यादा निकलती है.

-कुछ स्टडीज़ के मुताबिक, इनकी वजह से स्लीप साइकिल भी डिस्टर्ब होती है.

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आंखों में ड्रायनेस की वजह से आंसूओं का pH लेवल (यानी एसिडिटी का लेवल) न्यूट्रल से एसिडिक हो जाता है

-कोशिश करें कि सोने से 2 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप जैसी चीज़ों का इस्तेमाल न करें.

बचाव

-मोबाइल, लैपटॉप जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करते समय रूल ऑफ़ 20 को याद रखिए.

-यानी अगर आप 3-4 घंटे रोज़ मोबाइल चलाते हैं तो हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड के लिए ब्रेक लेकर 20 फ़ीट की दूरी पर देखिए.

-पलकों को बार-बार झपकिये.

-इससे आंखों की मांसपेशियां रिलैक्स होंगी और ड्रायनेस की समस्या भी कम होगी.

-AC या कूलर की हवा के सामने डायरेक्टली न बैठें.

-शरीर में पानी की मात्रा कम न होने दें.

-ज़रूरत पड़े तो कमरे में ह्यूमिडिफायर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

-अगर इसके बावजूद भी ड्रायनेस बनी रहती है तो लुब्रीकेटिंग ऑयड्राप का इस्तेमाल कर सकते हैं.

-पोस्चर संबंधित समस्याओं से बचने के लिए लैपटॉप और आंखों के बीच 1 हाथ की दूरी रखिए.

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कोशिश करें कि सोने से 2 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप जैसी चीज़ों का इस्तेमाल न करें

-लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के लेवल से 4-5 इंच नीचे रखिए.

-इससे गर्दन की मांसपेशियां रिलैक्स रहेंगी.

-अगर कुर्सी पर बैठे हैं तो पीठ को सीधा रखिए.

-पैरों को ज़मीन पर टिकाकर रखिए इससे पीठ की मांसपेशियों पर कम से कम स्ट्रेस पड़ेगा.

-मोबाइल और लैपटॉप की लाइट से चमक निकलती है.

-उससे बचने के लिए एंटी ग्लेयर चश्मों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

-अगर इन सबके बावजूद भी समस्या बनी रहती है तो आंखों के डॉक्टर से मिलकर चेकअप करवाएं.

-सही चश्मे का इस्तेमाल करें.

अगर आप कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं तो डॉक्टर की बताई गई टिप्स को ज़रूर फॉलो करिए. आपकी आंखों को आराम मिलेगा. साथ ही अगर आपको कंप्यूटर या लैपटॉप पर ज़्यादा देर काम करने के कारण आंखों में दर्द, जलन, आंखों से पानी आना, सिर, गर्दन या पीठ में दर्द हो रहा है तो डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करें. इन लक्षणों को इग्नोर न करें.


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