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इन गलतियों से बढ़ रहा है आपका कोलेस्ट्रॉल

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)


पवन बावन साल के हैं. पटना के रहने वाले हैं. उन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत है. इसलिए समय-समय पर उनके टेस्ट होते रहते हैं. कुछ समय पहले उनका ब्लड टेस्ट हुआ तो पता चला उनका कोलेस्ट्रॉल लेवल काफ़ी ज़्यादा हाई है. पवन के डॉक्टर ने कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल करने के लिए उन्हें दवाइयां दी हैं. साथ ही डाइट में बदलाव और एक्सरसाइज करने की भी सलाह दी है. वो बताते हैं कि डॉक्टर साहब का कहना है कि अगर कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में नहीं आता है तो उनकी नसों में ब्लॉकेज आ सकता है. हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं.

पवन चाहते हैं कि हम कोलेस्ट्रॉल पर एक एपिसोड बनाएं. ये क्या होता है, इसकी मात्रा शरीर में क्यों बढ़ जाती है और इससे क्या नुकसान होता है, ये लोगों को बताएं.

NCBI यानी नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन के मुताबिक, इंडिया के शहरों में रहने वाले 25 से 30 प्रतिशत लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत है. वहीं गांव में रहने वालों 15 से 20 प्रतिशत लोगों में ये समस्या होती है. डेक्कन क्रोनिकल में छपी एक ख़बर के मुताबिक, हिंदुस्तान में हर साल लगभग 20 लाख लोगों को हार्ट अटैक पड़ता है और इसकी सबसे बड़ी वजह हाई कोलेस्ट्रॉल है.

तो सबसे पहले डॉक्टर्स से ये समझ लेते हैं कि कोलेस्ट्रॉल आख़िर होता क्या है और किन कारणों से ये बढ़ता है.

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर ऋषि ने.

डॉक्टर ऋषि लोहिया, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, एलेक्सिस हॉस्पिटल, नागपुर
डॉक्टर ऋषि लोहिया, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, एलेक्सिस हॉस्पिटल, नागपुर

– कोलेस्ट्रॉल बॉडी में पाया जाने वाला एक नॉर्मल केमिकल है.

– हमारी बॉडी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट- तीन प्रकार के न्यूट्रिएंट्स होते हैं.

– इनमें जो फैट होते हैं उनका एक प्रकार कोलेस्ट्रॉल होता है.

– बॉडी में जो चर्बी रहती है, उसे एक अंग से दूसरे अंग तक ले जाने का काम कोलेस्ट्रॉल द्वारा किया जाता है.

– अब अगर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो, तो यह नसों को चोक कर सकता है.

– सबसे ज्यादा ज़रूरी दिल की नसें होती हैं.

– कोलेस्ट्रॉल उन नसों को चोक कर सकता है और दिल की बीमारी हो सकती है.

हाई कोलेस्ट्रॉल होने का क्या मतलब होता है?

– शरीर में नॉर्मल लेवल से ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल होने पर हाई कोलेस्ट्रॉल होता है.

High Cholesterol and Your Risk for Heart Disease | Get Healthy Stay Healthy
बॉडी में जो चर्बी रहती है उसे एक अंग से दूसरे अंग तक ले जाने का काम कोलेस्ट्रॉल द्वारा किया जाता है

– कोलेस्ट्रॉल के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे एलडीएल, जिसे बुरा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है.

– अगर यह कोलेस्ट्रॉल लेवल 100 से ज्यादा होता है, ख़ासतौर पर उन मरीजों में जिन्हें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या होती है, तो माना जाता है कि उनको हार्ट की प्रॉब्लम होने के चांसेस बढ़ सकते हैं.

कारण

– अब अगर पूछा जाए कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण क्या होते हैं, तो इसके मुख्य रूप से दो कारण होते हैं.

– पहला डाइट, यानी कि अगर हमारे खाने में फैट वाली चीजें ज्यादा हों.

– चर्बी युक्त जो पदार्थ होते हैं, वे ज्यादा हों. जैसे- तेल, घी या नॉन वेज फूड.

– दूसरा कारण है हमारा रेगुलर एक्सरसाइज ना करना.

High Blood Cholesterol - What Do the New Guidelines Say? • MyHeart
कोलेस्ट्रॉल के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे एलडीएल जिसे बुरा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है

– शारीरिक एक्टिविटीज नहीं करते हैं तो हमारे शरीर में जो एनर्जी होती है, वह कोलेस्ट्रॉल में बदल जाती है.

हाई कोलेस्ट्रॉल के हेल्थ रिस्क

– जब कभी भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है तो यह हाथ की नसों में, ब्रेन की नसों में और पैर की नसों में जमा होकर ब्लॉकेज कर देता है.

– डाइट और एक्सरसाइज के द्वारा कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है.

– इनसे नहीं होता है तो मेडिसिन से इसे नॉर्मल करने की कोशिश करते हैं.

बचाव और इलाज

– जो लोग 40 से ऊपर के हैं, उन लोगों को कम से कम 6 महीने में एक बार खाली पेट अपना कोलेस्ट्रॉल लेवल और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए.

– इसके बाद अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए.

– अगर कोलेस्ट्रॉल हाई है तो उसको दवाइयों से काफी अच्छी तरह से कंट्रोल किया जा सकता है.

High cholesterol level: symptoms, treatment and prevention
जब कभी भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है तो यह हाथ की नसों में, ब्रेन की नसों में और पैर की नसों में जमा होकर ब्लॉकेज कर देता है

– दवाइयों के अलावा रेगुलर एक्सरसाइज करें और अपनी डाइट में बदलाव करें.

– तेल, घी वगैरह कम खाएं.

– कच्चे फल-सब्जी की मात्रा को बढ़ाना होगा ताकि कोलेस्ट्रॉल न बढ़े.

कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाए जाने वाला एक तरह का फैट होता है. जो ज़रूरी भी है. पर अगर इसकी मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाती है तो ये आपकी सेहत के लिए ख़तरा है. इसलिए डॉक्टर साहब ने बचाव की जो टिप्स बताई हैं, उन्हें ज़रूर फॉलो करिए.


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