Submit your post

Follow Us

छोटे बच्चे करते हैं ये काम तो शरारत या शैतानी समझकर इग्नोर न करें!

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

सौम्या पुणे की रहने वाली हैं. उनका एक बेटा है जिसकी उम्र 6 साल है. तीन साल का होते-होते सौम्या ने अपने बेटे में कुछ चीज़ें नोटिस करना शुरू कर दी थीं. जैसे उसका किसी खेल में मन नहीं लगता था. वो ज़्यादा देर एक ही चीज़ से खेलता नहीं था. उससे कुछ बोलो तो वो सुनता नहीं था. समय बढ़ता गया, वह प्री-स्कूल में जाने लगा. लेकिन वहां उसे जो पढ़ाया जाता, जो सिखाया जाता, उस पर वो फोकस नहीं कर पाता था. उसकी टीचर अक्सर सौम्या से शिकायत करतीं. सौम्या को लगता था कि अभी वो बहुत छोटा है, समय के साथ ठीक हो जाएगा. पर ऐसा हुआ नहीं. वो अक्सर अपनी पानी की बोतल, टिफ़िन या बैग खो देता था. उसका एक जगह बैठना या शांत रहना बेहद मुश्किल था. सौम्या उसे एक जगह रोककर नहीं रख पातीं. वो या तो भागता रहता या किसी न किसी चीज़ पर चढ़ता रहता. जब उसने बात करना सीखा तो उसे चुप करवाना मुश्किल होता था. सौम्या ने सोचा उसे किसी बाल मनोविज्ञानिक को दिखाना चाहिए. कुछ सेशंस के बाद एक्सपर्ट ने उन्हें बताया कि उनके बेटे को ADHD है. यानी Attention-deficit/hyperactivity disorder. ये सारे लक्षण उसी के थे.

इसके बाद सौम्या के बेटे की कुछ थेरेपीज़ शुरू हुईं. अब उसके लक्षण थोड़े कंट्रोल में है. पर हां, पूरी तरह से तो ठीक नहीं हुए हैं. सौम्या चाहती हैं कि हम ADHD पर एक एपिसोड बनाएं. उनका कहना है कि मां-बाप अक्सर इस डिसऑर्डर के लक्षणों को बच्चों की शरारत या महज़ उनका बचपना समझकर ध्यान नहीं देते. इसलिए न समय से इसका पता चल पता है, न ही उन्हें किसी तरह की मदद मिल पाती है. उल्टा बच्चे टीचर्स और पैरेंट्स से डांट खाते हैं. लेकिन बड़े लोग ये नहीं समझते कि ये उन बच्चों के साथ ज्यादती है क्योंकि ऐसा वो जानबूझकर नहीं कर रहे हैं. इसलिए ज़रूरी है कि ADHD के बारे में लोगों को सही जानकारी हो. तो सबसे पहले एक्सपर्ट्स से ये समझ लेते हैं कि ADHD होता क्या है?

क्या होता है ADHD और इसका क्या कारण है?

ये हमें बताया डॉक्टर राकिब अली ने.

रकिब अली, कंसलटेंट क्लिनिकल साइकॉलजस्ट, बीएलके हॉस्पिटल, नई दिल्ली
राकिब अली, कंसलटेंट क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट, बीएलके हॉस्पिटल, नई दिल्ली

-ADHD यानी अटेंशन डेफ़िसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर

-ये एक न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार है

-न्यूरो यानी ये ब्रेन के सही तरह काम न कर पाने के कारण होता है

-डेवलपमेंटल यानी विकास की जो अवधि है, 1 से लेकर 6 साल तक, उस दौरान इसके लक्षण दिखाई देते हैं

-ADHD में बच्चे को ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है

-दूसरा, बच्चे में हड़बड़ाहट रहती है जैसे बिना सोचे-समझे काम करना

-तीसरा है हाइपरएक्टिविटी यानी ज़रूरत से ज़्यादा चंचलता, एक जगह टिककर न बैठ पाना

-3 से 6 साल की उम्र वाले करीब 10-15 प्रतिशत बच्चे अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं

-अगर एक क्लास में लगभग 40 से 50 बच्चे हैं तो 2 से 3 बच्चों में ADHD होने की संभावना बनी रहती है

लक्षण

-प्रमुख लक्षण तीनों श्रेणियों में देखे जा सकते हैं-

-चीज़ों को रखकर भूल जाना

ADHD में बच्चे को ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है
ADHD में बच्चे को ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है

-एक काम को पूरा न कर पाना

-बातें अनसुना कर देना

-कोई चीज़ पसंद है तो उसमें ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान लगा देना, जैसे वीडियो गेम या टीवी

-अगर छोटे बच्चे हैं तो वो कूदना-उछलना, भागना, दौड़ना ज़्यादा करते हैं दूसरे बच्चों के मुकाबले

-कई ख़तरनाक चीज़ें भी करते हैं जैसे कहीं भी चढ़ जाना या कूदने की कोशिश करना

-जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हाइपरएक्टिविटी बेचैनी में बदलने लगती है

-जैसे पढ़ाई के समय छोटी-छोटी चीज़ों से खेलने लगते हैं

-थोड़ा और बड़े होने पर ये हाइपरएक्टिविटी मानसिक बेचैनी में बदलने लगती है जैसे चिड़चिड़ाना, उलझन

-चलते चलते चीज़ों से टकरा जाना

-एकदम से कुछ भी बोल देना, सवालों को पूरा न होने देना

-बहुत ज़्यादा बोलना

-ये सारे प्राइमरी लक्षण हैं

-इनके ऊपर सेकेंडरी लक्षण होते हैं यानी दूसरे स्तर के लक्षण

-जैसे व्यवहार में दिक्कत, दोस्ती न कर पाना

-झगड़े होना

-इमोशनल दिक्कतें होना

अगर एक क्लास में लगभग 40 से 50 बच्चे हैं तो 2 से 3 बच्चों में ADHD होने की संभावना बनी रहती है
अगर एक क्लास में 40 से 50 बच्चे हैं तो 2 से 3 बच्चों में ADHD होने की संभावना बनी रहती है

-एकदम से गुस्सा, रो देना या बहुत ख़ुश हो जाना

-पढ़ाई पर भी इन लक्षणों का असर दिखता है

-ये बच्चे इंटेलिजेंट होने के बावजूद पढ़ाई में पीछे रह सकते हैं क्योंकि पढ़ने और लिखने जैसी चीज़ों में ध्यान केंद्रित करना होता है

एक जगह टिककर किसी चीज़ को सीखना होता है, इसमें इन्हें दिक्कत आती है

-सोशल दिक्कतें भी आती हैं. लोग ऐसे बच्चों को समझ नहीं पाते

इलाज

-ADHD के लिए 2 तरह के इलाज मौजूद हैं

-पहला, कुछ ऐसी दवाइयां जो बच्चे को ध्यान केंद्रित करने में मदद करती हैं

-हाइपरएक्टिविटी को कम करने में मदद करती हैं

-ये दवाइयां मॉडरेट से सीवियर ADHD को कंट्रोल करने में मददगार साबित होती हैं

-लेकिन अगर माइल्ड से मॉडरेट ADHD है तो व्यवहारिक थेरेपी बहुत कामयाब होती है

-व्यवहारिक थेरेपी यानी इसमें बच्चों को अटेंशन ट्रेनिंग के द्वारा ध्यान केंद्रित करना सिखाया जाता है

-इस थेरेपी से उनकी हाइपरएक्टिविटी को भी कंट्रोल किया जा सकता है

-सोशल और इमोशनल प्रॉब्लम्स से निपटना सिखाया जाता है

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हाइपरएक्टिविटी बैचनी में बदलने लगती है
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हाइपर एक्टिविटी बैचनी में बदलने लगती है

-अगर पढ़ाई-लिखाई में दिक्कत है तो स्पेशल एजुकेशन भी बहुत मदद करती है

-कभी-कभी थेरेपी और दवाइयां मिलकर चलती हैं तो काफ़ी अच्छा नतीजा देखने को मिलता है

-इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि अगर ADHD का इलाज नहीं होता है तो वो आगे चलकर कंडक्ट डिसऑर्डर और एंटीसोशल पर्सनैलिटी में तब्दील हो सकता है

-कई बच्चों में ADHD उम्र के साथ थोड़ा ठीक हो जाता है ख़ासकर लड़कियों में

-लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनको थेरेपी नहीं देनी चाहिए

-थेरेपी इन बच्चों को देना ज़रूरी है ताकि उनकी सोशल, इमोशनल और पढ़ाई से संबंधित परेशानियां दूर हों

एक्सपर्ट ने जो लक्षण बताएं, शायद उनको सुनकर आपके दिमाग में अपने आसपास के कई बच्चों के नाम आ गए होंगे. ADHD बच्चों में आम है. इसलिए ज़रूरी है कि इसके लक्षण पहचाने जाएं. इन्हें बच्चों की शरारत या शैतानी समझकर इग्नोर न किया जाए. इसलिए अगर डॉक्टर के बताए गए लक्षण आपको बच्चों में दिख रहे हैं तो उन पर ध्यान दें. किसी एक्सपर्ट से ज़रूर मिलें.


वीडियो

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद बेटी ने आतंकियों को 'कुरान का संदेश' दे दिया!

श्रद्धा बिंद्रू ने आतंकियों को किस बात के लिए ललकारा है?

बिहार: महिला चिल्लाती रही, लोग बदन पर हाथ डालते रहे; वीडियो भी वायरल किया

बिहार की पुलिस ने क्या एक्शन लिया?

महिला अफसर के यौन उत्पीड़न का ये मामला है क्या जिसके छींटे वायु सेना पर भी पड़े हैं?

आरोपी अफसर पर बलात्कार से जुड़ी धारा 376 लगी है.

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी, 18 साल बाद फैसला आया है

कोर्ट ने एक को फांसी और 12 लोगों को उम्रकैद की सज़ा दी है.

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

नाबालिग 15 साल की है और एक बच्चे की मां बन चुकी है.

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

नौ महीने के अंतराल में एक वीडियो के सहारे बच्ची का रेप करते रहे आरोपी.

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखने वाली फातिमा पेशे से वकील हैं.

रेप की कोशिश का आरोपी ज़मानत लेने पहुंचा, कोर्ट ने कहा- 2000 औरतों के कपड़े धोने पड़ेंगे

कपड़े धोने के बाद प्रेस भी करनी होगी. डिटर्जेंट का इंतजाम आरोपी को खुद करना होगा.

स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन शोषण के गंभीर आरोप, उनका जवाब भी आया

इस मामले पर विक्टिम और संजय राजौरा की पूरी बात यहां पढ़ें.

मध्य प्रदेश: लड़की को किडनैप किया, रेप नहीं कर पाए तो आंखों में डाल दिया एसिड

पीड़िता की आंखों की रोशनी चली गई. मामले में दो आरोपी गिरफ्तार.