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पेट में बच्चा उल्टा हो जाए तो क्या करें?

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

रिदा 28 साल की हैं. आगरा की रहने वाली हैं. वो प्रेगनेंट हैं और उनकी प्रेग्नेंसी का 40वां हफ्ता चल रहा है. कुछ समय पहले जब वो रेग्यूलर चेकअप के लिए गई थीं तो उनका अल्ट्रासाउंड हुआ. अल्ट्रासाउंड में पता चला कि उनका बच्चा उल्टा है. अब उल्टा होने का मतलब उसके पैर नीचे की तरफ़ हैं और सिर ऊपर. ये सुनने में ठीक लग रहा होगा, पर डिलीवरी के समय बच्चे का सिर नीचे होता है. यानी मां के शरीर से सबसे पहले सिर बाहर आता है और आख़िर में पैर. पर रिदा के केस में उनका ब्रीच बेबी है. यानी उसके पैर नीचे की तरफ़ हैं. डॉक्टर्स ने रिदा से कहा है कि वो नॉर्मल डिलीवरी का बिल्कुल रिस्क नहीं ले सकते. उन्हें ऑपरेशन की मदद से ही बच्चा पैदा करना पड़ेगा. रिदा चाहती हैं हम अपने शो पर ब्रीच बेबी और ऐसी डिलीवरी के बारे में और जानकारी दें. डॉक्टर से पूछकर बताएं कि क्या ऑपरेशन ही एक मात्र ऑपरेशन है. नॉर्मल डिलीवरी का कोई चांस नहीं है? तो सबसे पहले डॉक्टर्स से जानते हैं कि ब्रीच डिलीवरी क्या होती है?

ब्रीच डिलीवरी क्या होती है?

ये हमें बताया डॉक्टर नीमा शर्मा ने.

Dr. Neema Sharma | Obstetrics and Gynaecology Specialist in Vasant Kunj - Fortis Healthcare
डॉक्टर नीमा शर्मा, डायरेक्टर, ऑब्स्टेट्रिक एंड गाइनकॉलजिस्ट, फ़ोर्टिस, वसंत कुंज, नई दिल्ली

-डिलीवरी के समय, बच्चा मैटरनल/फीमेल पेल्विस (एब्डोमेन का निचला हिस्सा जो हिप बोंस के बीच में होता है) से होता हुआ मां के शरीर से बाहर आता है.

-आमतौर पर डिलीवरी के समय बच्चे का सिर नीचे की तरफ़ रहता है यानी सिर पहले बाहर आता है.

-ये नॉर्मल डिलीवरी के दौरान होता है.

-पर ब्रीच डिलीवरी में बच्चे के पैर नीचे की तरफ़ होते हैं और सिर ऊपर होता है.

-या बच्चे के हिप्स नीचे की तरफ़ होते हैं यानी बच्चा बैठने वाली पोज़ीशन में होता है.

-यानी बच्चा उल्टा होता है.

-इसे ब्रीच डिलीवरी कहते हैं.

कारण

-कभी-कभार ब्रीच डिलीवरी बिना किसी कारण के भी हो सकती है.

-पर कुछ कारण हैं जिनकी वजह से ज़्यादा ऐसे केसेज होते हैं.

-जैसे अगर बच्चा बहुत डेवलप नहीं हुआ है, छोटा है.

-जुड़वां बच्चे हैं.

-गर्भाशय में कोई परेशानी है.

-जिसकी वजह से बच्चे का सिर नीचे नहीं आ रहा.

-लो लाइंग प्लेसेंटा है, मतलब आवल नाल सर्विक्स या गर्भाशयग्रीवा से 20mm से कम दूरी पर है.

-या बच्चे में कोई दिक्कत है जिससे ब्रीच डिलीवरी हो रही है.

What Happens if My Baby is Breech? - Raleigh-OBGYN
आमतौर पर डिलीवरी के समय बच्चे का सिर नीचे की तरफ़ रहता है यानी सिर पहले बाहर आता है

डायग्नोसिस

-इसका पता सबसे पहले तब चलता है जब डॉक्टर जांच करते हैं.

-जांच के बाद पता चलता है कि बच्चे का सिर नीचे की तरफ़ है.

-या बच्चे के पैर या हिप्स नीचे की तरफ़ हैं.

-दूसरा तरीका है अल्ट्रासाउंड.

-जिससे पक्के तौर पर पता चल जाता है कि ब्रीच बेबी है.

-आमतौर पर 37 हफ़्तों तक बच्चा मूव करता रहता है.

-कभी बच्चे का सिर नीचे होता है, कभी पैर नीचे होते हैं.

-पर अगर 37 हफ़्तों के बाद भी बच्चे के पैर नीचे हों तो उसके बाद मूवमेंट होने का चांस कम हो जाता है.

-फिर ब्रीच डिलीवरी के तौर पर उसे देखा जाता है.

ब्रीच बेबी होने से प्रेग्नेंसी पर कोई असर तो नहीं पड़ता?

-नहीं, ब्रीच बेबी होने पर प्रेग्नेंसी पर कोई असर नहीं पड़ता.

-मां और बच्चे नॉर्मल रहते हैं.

-पर हां बच्चे के मूवमेंट मां को अलग जगह महसूस होते हैं.

-ज़्यादातर मूवमेंट नीचे महसूस होंगे.

-क्योंकि बेबी का सिर ऊपर होता है.

How to Turn Your Breech Baby - Rock the Cradle
अगर 37 हफ़्तों के बाद भी बच्चे के पैर नीचे हों तो उसके बाद मूवमेंट होने का चांस कम हो जाता है

-इसलिए मां को अपने रिब केज के पास हार्ड सी चीज़ महसूस होती है.

ब्रीच बेबी से डिलीवरी पर क्या असर पड़ता है?

-ब्रीच बेबी से डिलीवरी पर बहुत असर पड़ता है.

-जब 37 हफ़्तों के बाद पता चलता है कि ब्रीच बेबी है.

-तब नॉर्मल डिलीवरी नहीं कर सकते.

-नॉर्मल डिलीवरी करने से बहुत ज़्यादा रिस्क होता है.

-बच्चे को रिस्क होता है.

-बच्चे की नाल दब सकती है.

-जिससे ऑक्सीजन सप्लाई कम हो सकती है.

-कभी-कभी बच्चे का सिर अटकने का चांस होता है.

-ऐसे बच्चों को आमतौर पर ऑपरेशन से ही डिलीवर किया जाता है.

क्या ब्रीच बेबी होने से रोका जा सकता है?

-ऐसा कुछ कर नहीं सकते जिससे ब्रीच बेबी होने से रोका जा सके.

-कुछ एक्सरसाइज हैं जो फिजियोथेरेपिस्ट आपको बता सकते हैं.

-पर आपके कुछ करने से या आपकी वजह से ब्रीच बेबी नहीं होता है.

Is Baby in a Breech Position? How to Tell & What to Do
ब्रीच बेबी होने पर प्रेग्नेंसी पर कोई असर नहीं पड़ता

-वो बस हो जाता है.

-इसलिए जब भी ब्रीच बेबी होता है तो उसे मैनेज करना पड़ता है.

-3-5 प्रतिशत केसेस में ब्रीच बेबी होने का चांस होता है.

-100 में से 3 या 5 औरतों में ब्रीच बेबी की कंडीशन हो सकती है.

-इसके लिए ज़रूरी है कि उसे ठीक तरह से डायग्नोज़ किया जा सके.

-फिर ऑपरेशन की मदद से ब्रीच बेबी पैदा किया जाता है.

जैसे डॉक्टर नीलम ने बताया, ब्रीच बेबी होने से मां और बच्चे को कोई ख़तरा तो नहीं होता है पर हां डिलीवरी सर्जरी की मदद से की जाती है. इसलिए ज़रूरी है कि 37वें हफ़्ते के बाद अल्ट्रासाउंड की मदद से बच्चे की पोजीशन के बारे में पक्के तौर पर पता चल सके. ताकि अगर ब्रीच बेबी है तो उसी हिसाब से डिलीवरी प्लान हो सके.


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