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क्या जलने पर ठंडा पानी डालना या टूथपेस्ट लगाना चाहिए?

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

दिवाली पर राधिका अपने परिवार के साथ घर के सामने कुछ पटाखे फोड़ रही थीं. उनके हाथ में एक फुलझड़ी थी. खेल-खेल में उनका हाथ जल गया. ऐसे में किसी ने उन्हें सलाह दी कि टूथपेस्ट लगा लो, दर्द नहीं होगा. उन्होंने बात मानकर वहां टूथपेस्ट लगा लिया. चोट ठीक होना दूर और ज़्यादा गहरी हो गई. अब उनकी स्किन पर इन्फेक्शन हो गया है. अब ऐसा कई लोग करते हैं. ये बहुत आम धारणा है कि जलने पर टूथपेस्ट लगा लेना चाहिए. इससे स्किन ज़्यादा नहीं जलती है. ठंड पहुंचती है. पर ये सरासर ग़लत है. टूथपेस्ट में केमिकल्स होते हैं. कैल्शियम और पेपरमिंट होता है. ये जली हुई स्किन को ठीक नहीं करते, उल्टा और नुकसान हो जाता है. वहां इन्फेक्शन हो सकता है. फ़फोले बन सकते हैं.

राधिका चाहती हैं कि हम सेहत पर बर्न इंजरीज़ के बारे में बात करें. यानी वो चोटें जो जलने पर लगती हैं. साथ ही लोगों को ये बताएं कि किस तरह के जलने पर, क्या गलतियां नहीं करनी चाहिएं और क्या फर्स्ट ऐड देना चाहिए. तो सबसे पहले बात करते हैं अलग-अलग तरह की बर्न इंजरीज़ के बारे में. आपने फर्स्ट डिग्री, सेकंड डिग्री, थर्ड डिग्री बर्न के बारे में सुना होगा. पर ये होते क्या हैं? सुनिए.

फर्स्ट, सेकंड, थर्ड डिग्री जलना क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर रिची गुप्ता ने.

Dr. Richie Gupta - Plastic Surgeon - Book Appointment Online, View Fees, Feedbacks | Practo
डॉक्टर रिची गुप्ता, डायरेक्टर एंड एचओडी, प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, फ़ोर्टिस हॉस्पिटल, नई दिल्ली

-बहुत तेज़ धूप में रहने से स्किन एकदम लाल पड़ जाती है, इसे फर्स्ट डिग्री बर्न कहते हैं. इसमें फ़फ़ोले नहीं निकलते.

-अगर इससे ज़्यादा जलता है तो स्किन के अंदर की परत जिसे डर्मिस कहते हैं, वहां तक गर्मी पहुंचती है. ऐसे में ऊपर की स्किन फ़फ़ोला बनकर उठ जाती है. डेड हो जाती है. ये सेकंड डिग्री बर्न होता है.

-जब स्किन की पूरी गहराई जल जाती है तो उसे थर्ड डिग्री बर्न बोलते हैं.

-फ़ोर्थ डिग्री बर्न भी होता है, जिसमें स्किन के साथ-साथ शरीर के अंदरूनी अंग तक जल जाते हैं. वहां तक गर्मी पहुंच जाती है. हड्डियों को भी नुकसान पहुंचता है.

किस तरह के हेल्थ कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं?

-स्किन शरीर का सबसे बड़ा अंग है. इसका सर्फेस एरिया 1.7 स्क्वायर मीटर है और वज़न 3.5 किलोग्राम है

-जब स्किन जलती है तो शरीर का सुरक्षा कवच खत्म हो जाता है. बैक्टीरिया आराम से शरीर के अंदर घुस सकते हैं

-इन्फेक्शन हो सकता है.

-ज़ख्मों में से फ्लूइड रिसता रहता है. ऐसे में शरीर के अंदर फ्लूइड की कमी हो जाती है. इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है.

-इलेक्ट्रोलाइट वो तत्व हैं जो शरीर के अंदरूनी कामकाज के लिए ज़रूरी है. सोडियम, कैल्शियम, पोटाशियम ये सब इलेक्ट्रोलाइट हैं.

-जब ज़ख्म भर जाते हैं तब कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं.

-जैसे निशान सतह से ऊपर उठ जाता है. इसे हाइपरट्रोपिक स्कार बोलते हैं.

-स्किन में खिंचाव आ जाता है. गले की स्किन जलने से गर्दन नीचे की तरफ़ खिंच सकती है.

-हाथ, पैर के जोड़ों में खिंचाव आ सकता है.

जलने पर तुरंत क्या फर्स्ट ऐड देनी चाहिए?

-लोग अक्सर जले हुए एरिया पर कोलगेट, नील जैसी चीज़ें लगा देते हैं. ये नहीं करना चाहिए.

-अगर कम जगह पर जला है तो फौरन वहां पानी लगाना चाहिए.

-इससे जलन में भी आराम मिलता है और झुलसने की गहराई भी कम हो जाती है.

-अगर एसिड से स्किन जली है तो उसपर पानी डालकर उसे साफ़ करना है ताकि स्किन जलती न रहे.

-अगर स्किन का ज़्यादा एरिया जला है, जैसे पेशेंट ऊपर से नीचे तक जल गया है तो ठंडा पानी नहीं डालना चाहिए.

-क्योंकि ऐसा करने से पेशेंट हाइपोथर्मिया में चला जाएगा. ये ऐसी कंडीशन है जिसमें शरीर से बहुत जल्दी हीट लॉस होता है और शरीर उतनी तेज़ी से गर्मी बना नहीं पाता.

Burn Injuries Expert Witnesses | ForensisGroup Consulting
लोग अक्सर जले हुए एरिया पर कोलगेट, नील जैसी चीज़ें लगा देते हैं. ये नहीं करना चाहिए

-ऐसे में कॉटन की चादर से पेशेंट को ढकना है और फौरन हॉस्पिटल लेकर जाना है.

-अगर कोई ऐसी सिचुएशन है जिसमें बिल्डिंग जल रही है, ऐसे में वहां गैसेस लीक हो सकती है. जिससे पेशेंट में रेस्पिरेटरी बर्न हो सकता है यानी सांस लेने की नली और फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है.

-ऐसी सिचुएशन में पेशेंट को वहां से तुरंत निकालना है.

-अगर इलेक्ट्रिकल बर्न है यानी बिजली के संपर्क में आने से स्किन झुलसी है तो सबसे पहले बिजली का कनेक्शन रोकना है.

-उसके बाद ही पेशेंट को हाथ लगाएं नहीं तो हाथ लगाने वाले को भी इलेक्ट्रिकल बर्न हो सकता है.

-अगर पेशेंट सांस नहीं ले रहा है तो उसे मुंह से सांस देनी है और सीने पर प्रेशर देना है. दिल को दोबारा से काम करवाना है. ऐसे में देरी न करें. मेडिकल हेल्प लें.

जलने पर क्या गलतियां अवॉयड करनी चाहिए, ये तो आपने जान लिया. पर एक बात और जान लीजिए. जलने से लगने वाली चोटों को घरेलू नुस्खों से ठीक करने की हरगिज़ कोशिश न करें. ये सीरियस हो सकती हैं. द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान में हर साल 70 लाख से ज़्यादा लोगों को जलने से चोट पहुंचती है, वहीं लगभग एक लाख 40 हज़ार लोगों की मौत हो जाती है. तो भैया आग और करंट के आसपास बहुत संभल कर रहिए. वैसे स्किन केवल आग से नहीं जलती है. बहुत ठंड और रगड़ से भी जलती है. इसलिए ध्यान रखिए.


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