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दो नाबालिग बेटियों को मौत के बाद इंसाफ मिले, इसलिए मां ने सिर मुंडवा दिया

केरल का पालक्कड़ ज़िला. यहां एक महिला 26 जनवरी 2021 से धरने पर बैठी थी. फिर 26 फरवरी को उसने अपना सिर मुंडवा दिया. उसके साथ दो अन्य औरतों ने भी ऐसा ही किया. क्यों? क्योंकि ये औरतें कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रही हैं. औरतों को कहना है कि पुलिस ने 2017 में हुई दो बच्चियों की मौत के मामले की जांच ठीक से नहीं की थी. लापरवाही बरती थी. इन औरतों को कुछ नेताओं का भी साथ मिल रहा है. केरल की सरकार से सभी मिलकर कई सारे सवाल पूछ रहे हैं. जिस मामले को लेकर ये विरोध हो रहा है उसे हम और आप वालयार केस के नाम से जानते हैं. ये मामला दो बच्चियों के कथित सेक्शुअल असॉल्ट और मौत से जुड़ा हुआ है. क्या है ये केस? चार साल पुराने इस मामले की जांच कहां तक पहुंची? कोर्ट और सरकार का क्या कहना है? इन सारे सवालों के जवाब आपको एक-एक करके दिए जाएंगे.

क्या है मामला?

मामले की शुरुआत होती है 13 जनवरी 2017 की तारीख से. पालक्कड़ ज़िले में ही वालयार नाम का एक टाउन है. यहां के एक गांव में इस दिन 13 साल की एक दलित लड़की का शव उसके एक कमरे वाले घर में लटकता हुआ पाया गया. इस शव को सबसे पहले मृतक लड़की की 9 साल की बहन ने देखा था. मामले की छानबीन शुरू हुई, तो 9 साल की बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसने 13 जनवरी के दिन अपने घर से दो आदमियों को चुपके से बाहर जाते भी देखा था, दोनों ने अपने चेहरे कपड़ों से कवर कर रखे थे. लड़की के घरवालों का कहना था कि उनकी बेटी की हत्या की गई है, लेकन पुलिस ने इसमें अननैचुरल डेथ का केस दर्ज किया. दो महीने बाद, 4 मार्च के दिन 9 साल की बच्ची, जो इस केस में एक गवाह थी, उसका भी शव उसी जगह पर फांसी से झूलता हुआ मिला, जहां उसकी बहन का मिला था. घरवाले और गांववाले दोनों इस घटना से हैरान हो गए. घटना के खिलाफ जल्द ही प्रोटेस्ट शुरू हो गए. पुलिस के ऊपर दबाव बढ़ने लगा. इसके बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक नाबालिग था.

‘द न्यूज़ मिनट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग आरोपी को बेल मिल गई थी, वहीं चार आरोपियों को जूडिशियल कस्टडी में भेजा गया. सभी के खिलाफ POCSO एक्ट की कुछ धाराओं समेत, SC/ST एट्रोसिटी एक्ट और IPC की कुछ धाराओं के तहत केस दर्ज किया. इन धाराओं में रेप की धारा भी शामिल थी. दोनों लड़कियों की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में ये सामने आया कि लड़कियां सेक्शुअल अब्यूज़ का शिकार हो रही थीं. इस रिपोर्ट के रिमार्क ने ये सजेस्ट किया था कि मर्डर की भी संभावनाएं हैं. इसलिए पुलिस इस एंगल से भी जांच करे. हालांकि मामले की जांच के बाद जून 2017 में पुलिस ने मर्डर की संभावना को खारिज कर दिया. कहा कि उन्हें जांच में मर्डर से जुड़े कोई सबूत नहीं मिले.

Walayar Case (3)
पालक्कड़ में चल रहा है विरोध प्रदर्शन. (फोटो- गोपी कृष्णन)

पांचों आरोपी पहचान वाले थे

जिन पांच लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया था, वो सभी लड़कियों के माता-पिता के पहचान वाले थे. लड़कियों के पैरेंट्स कंस्ट्रक्शन मज़दूर हैं, आरोपियों में से एक आरोपी उनके साथ काम भी करता था. वहीं दो आरोपी पड़ोस में रहते थे. खैर, पुलिस ने मामले में चार्जशीट सौंपी और पॉक्सो कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई. जस्टिस ए हरिप्रसाद और जस्टिस एम आर अनिथा की बेंच ने सुनवाई की. अक्टूबर 2019 के दिन कोर्ट ने पांचों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. इसके बाद से शुरू हुआ विरोध. कई सारे संगठनों और विपक्ष के नेताओं ने इस फैसले की आलोचना की. पुलिस की छानबीन पर भी सवाल किए और मामले में राजनीतिक दखलअंदाज़ी के भी आरोप लगाए. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट के फैसले के बाद लड़कियों की मां ने पुलिस के ऊपर बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप लगाए. 2019 में ये रिपोर्ट्स आई थीं कि लड़कियों की मां ने पुलिस को एक सीक्रेट स्टेटमेंट दिया था, जिसमें कहा था कि लगातार हो रहे सेक्शुअल असॉल्ट से बचने के लिए उनकी बेटियों ने सुसाइड किया था. इस रिपोर्ट पर लड़कियों की मां ने कहा-

“पुलिस ने हमें इस बात पर विश्वास दिलाने की पूरी कोशिश की कि ये मामला सुसाइड का है. मैंने ऐसा कभी नहीं कहा. ये पुलिस के शब्द थे. मुझे तब भी नहीं लगता था कि मेरी बेटियों ने सुसाइड किया और न अब ऐसा लगता है. उन्हें ये कदम उठाने की समझ ही नहीं थी. उनकी हाइट भी इतनी नहीं थी कि वो फांसी पर झूल सकें. उन्हें मारा गया था. छोटी बेटी गवाह थी, इसलिए छोटी बेटी को मारा गया. हमें लगता था कि पुलिस हमारे साथ है. लेकिन जब मामला कोर्ट में गया तब हमें पता चला कि हमने जो कुछ भी पुलिस से कहा था, उसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. उन्होंने वो लिखा जो उन्हें सही लगा.”

2019 में ही लड़कियों के पैरेंट्स ने इस मामले में CBI जांच की मांग की थी. ‘द न्यूज़ मिनट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित माता-पिता ने सीएम पिनरई विजयन से भी मुलाकात की. CBI जांच की मांग रखी. पैरेंट्स ने ये भी आरोप लगाए कि अगर बड़ी बेटी की मौत के मामले की जांच ठीक से हो जाती, तो दूसरी बेटी की मौत नहीं होती. कई सारे सवाल उठने के बाद पिनरई विजयन की सरकार ने नवंबर 2019 में केरल हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. पॉक्सो कोर्ट के फैसले को चैलेंज करते हुए एक अपील दाखिल की. सरकार ने पॉक्सो अदालत के फैसले को ‘विकृत और पूरी तरह से अस्थिर’ करार दिया. ये अपील दायर करने के एक दिन बाद केरल सरकार ने मामले की जूडिशियल इन्वेस्टिगेशन की घोषणा कर दी. फरवरी 2020 में पुलिस ने माना की शुरुआती जांच में ढील बरती गई थी. पालक्कड़ ज़िला पुलिस चीफ जी. शिवा विक्रम ने वायनाड़ जूडिशियल कमिशन से कहा कि प्राथमिक जांच में काफी गंभीर ढील हुई थी. ये भी कहा कि सब इन्सपेक्टर (SI), जिन्होंने शुरुआती जांच की थी, उन्होंने अहम सबूत इकट्ठे नहीं किए थे. वहीं पिनरई विजयन की तरफ से कहा गया कि अगर लड़कियों के पैरेंट्स हाई कोर्ट में CBI जांच की मांग करते हैं, तो सरकार कोई ऑब्जेक्शन नहीं उठाएगी.

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पालक्कड़ में कई सारे लोग पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक्शन की मांग कर रहे हैं. (फोटो- गोपी कृष्णन)

आगे क्या हुआ?

मार्च 2020 में हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोबारा गिरफ्तार करने के आदेश दिए. पुलिस ने एक आरोपी जो नाबालिग था, उसे छोड़ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, एक अन्य आरोपी पुलिस की पकड़ में नहीं आया. लेकिन गिरफ्तारी के बाद ही तीनों को ज़मानत मिल गई. अप्रैल 2020 में उस जूडिशियल पैनल ने अपनी रिपोर्ट सीएम को सौंपी, जिसे नवंबर 2019 में बनाया गया था. पूर्व डिस्ट्रिक्ट जज पी.के. हनीफा की अगुवाई वाले इस पैनल ने ये पता लगाने की कोशिश की थी कि वालयार केस की जांच में कोई चूक तो नहीं हुई थी. पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा की चूक हुई थी. जून 2020 में केरल पुलिस अधिकारी एम.जे. सोजन का प्रमोशन हुआ, वो सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस बन गए. ये वही अधिकारी थे, जो दोनों बहनों की मौत के मामले की छानबीन में शामिल थे. उनके प्रमोशन के बाद पालक्कड़ में विरोध तेज़ हो गया. लड़कियों की मां ने सीएम को लेटर लिखा और एम.जे सोजन के प्रमोशन का विरोध किया. समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, मां ने तब कहा था-

“हमने उम्मीद की थी कि हमारी बेटियों को न्याय मिलेगा. हमने राज्य सरकार पर भरोसा किया था, लेकिन उन्होंने भी हमें धोखा दिया. शुरुआत से पुलिस ने हमें टॉन्ट किया था. निर्भया की मां न्याय पाने के लिए सड़कों पर निकली थीं. इसी तरह से अगर मैं भी सड़कों पर निकलूंगी, तो मेरी बेटियों को न्याय मिलेगा. मैं अपनी मौत आते तक न्याय के लिए लड़ूंगी. अपराधियों को फांसी होनी चाहिए. हमने केरल हाई कोर्ट में सोजन के प्रमोशन के खिलाफ केस फाइल किया है. हम चाहते हैं कि उन्हें सर्विस से निकाल दिया जाए.”

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लड़कियों की मां समेत दो अन्य महिलाओं ने सिर मुंडवाया. (फोटो- गोपी कृष्णन)

घरवालों ने प्रदर्शन किए

सितंबर 2020 में लड़कियों के पैरेंट्स ने भूख हड़ताल की. अपनी बड़ी बेटी के बर्थडे के मौके पर. कोच्चि कमिश्नर ऑफिस के सामने धरना दिया. न्याय मांगा. कहा कि घटना को तीन साल हो गए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है. नवंबर 2020 में इस केस का एक आरोपी अपने घर पर मृत पाया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने सुसाइड कर लिया था. आरोपी का नाम प्रदीप था, 36 बरस का था. दिसंबर 2020 में लड़कियों की मां ने सीएम को एक लेटर लिखा और मामले की CBI जांच की मांग की. जनवरी 2021 में केरल हाई कोर्ट की एक बेंच ने मामले की दोबारा सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए. पॉक्सो कोर्ट के पुराने फैसले को खारिज करते हुए स्पेशल कोर्ट को आदेश दिया कि फिर से सुनवाई हो. इसके बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार करके जूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया. ‘इंडिया टुडे’ के गोपी कृष्णन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक आरोपी अभी ज़मानत पर बाहर है, तो चौथे आरोपी की सुसाइड की वजह से मौत हो गई है. लड़कियों के पैरेंट्स ने CBI जांच की मांग की थी, इस पर हाई कोर्ट और सरकार दोनों ने सहमति जताई और CBI जांच की परमिशन दे दी. इस आदेश के आने के बाद लड़कियों की मां धरने पर बैठीं. इस मांग के साथ कि इस केस में लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया जाए. और इसी क्रम में लड़कियों की मां समेत तीन औरतों ने 26 फरवरी को सिर मुंडवा लिए.

धरने पर बैठने के पहले लड़कियों की मां ने कहा था कि अगर इलेक्शन नोटिफिकेशन आने के पहले राज्य सरकार पुलिस अधिकारी के खिलाफ एक्शन लेने के आदेश नहीं देती है, तो वो सिर मुंडवा लेंगी. दलित ह्यूमन राइट्स मूवमेंट स्टेट चेयरपर्सन सलीना प्रक्कानम और सोशल एक्टिविस्ट बिंदू कमलन ने भी सिर मुंडवाया है. महिला कांग्रेस स्टेट की प्रेसिडेंट और सांसद लतिका सुभाष भी पीड़ित मां के प्रदर्शन को सपोर्ट कर रही हैं. ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वालयार एक्शन काउंसिल के नेताओं ने भी ये कहा है कि पीड़ित मां का समर्थन करने के लिए 4 मार्च को वो भी सिर मुंडवा लेंगे. BJP SC मोर्चा के स्टेट प्रेसिडेंट शाजुमोन वात्तेक्कड़ का कहना है कि इस सिर मुंडन के पीछे केवल और केवल सीएम पिनरई विजयन ज़िम्मेदार हैं.

इस मामले में तमाम विपक्षी पार्टियां एकसाथ एक ही सुर का राग अलापते नज़र आ रही हैं. हम कोई कमेंट नहीं करेंगे, बस इतना कहना चाहेंगे कि केरल में चुनाव होने वाले हैं और अभी वहां LDF यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है. खैर, इस पूरे मामले में हम तो यही उम्मीद करेंगे कि पीड़ित पक्ष के साथ न्याय हो. ऐसा न हो कि राजनीतिक दल अपनी रोटियां सेककर खा पीकर निकल जाएं और पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाता रहे.


वीडियो देखें: तमिलनाडु की महिला आईपीएस ने स्पेशल डीजीपी राजेश दास पर लगाया सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप

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