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क्यों इस धनतेरस पर सोने से ज्यादा फायदेमंद लोहे पर इनवेस्ट करना है?

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एक विज्ञापन हर जगह वायरल हो रहा है. वजह है इसका कॉन्टेंट. त्योहार के सीजन में कई कम्पनियां अपने विज्ञापन लेकर आती हैं, ख़ास तौर पर धनतेरस-दीवाली के समय सोना खरीदने की परम्परा को ध्यान में रखते हुए. इन सभी विज्ञापनों में सजी-धजी औरतें होती हैं, चमचमाते लिबास होते हैं. वगैरह-वगैरह. लेकिन जिस विज्ञापन में इसी तरह के विज़ुअल्स होते हुए भी एक बहुत अलग मैसेज है. और यहीं ये विज्ञापन बाजी मार ले जाता है.

इसमें सजी-धजी महिलाएं हैं. लेकिन वो त्योहार के लिए घर सजाने में नहीं लगीं, अपने गहने सहेजने में नहीं लगीं. वो लगी हैं खाने में. पहले वीडियो देख लीजिए:

एक डच कंपनी है. डच स्टेट माइंस. मल्टीनेशनल फर्म है.  न्यूट्रीशन के क्षेत्र में काम करती है. इसी कंपनी ने FCB उल्का नाम की एजेंसी के ज़रिए ये विज्ञापन बनवाया है. इस वीडियो का बैकग्राउंड म्यूजिक बजते-बजते ये संदेश देता है- लोहा चख ले सोना बन जा, अपना ही तू गहना बन जा.

ये विज्ञापन इसीलिए बनाया गया है ताकि औरतों में आयरन की कमी यानी एनीमिया की तरफ  ध्यान दिलाया जा सके. गांव की ही नहीं, शहर की भी 50 फीसद से ज्यादा औरतें एनीमिक हैं. इस पूरे प्रोजेक्ट का नाम प्रोजेक्ट स्त्रीधन रखा गया है. इसकी टैगलाइन है – इस धनतेरस सोने में नहीं, लोहे में इन्वेस्ट करो. हालांकि ये जो वीडियो शूट किय गया है इसमें भी एक बहुत बड़ी दिक्कत ये है कि इसे काफी ज्यादा सेक्सुअलाइज किया हुआ है. अगर उसपर ध्यान दिया जाता तो ये शायद और बेहतर हो सकता था.

एनीमिया क्या है?

एनीमिया का मतलब होता है खून की कमी. नहीं-नहीं, सचमुच में खून नहीं सूखता . खून तो अगर पांच लीटर है तो पांच लीटर ही रहेगा. खून में एक चीज होती है- हीमोग्लोबिन. बोले तो खून का वो हिस्सा जो ऑक्सीजन ले के जाता है पूरे शरीर में. प्रोटीन होता है, बहुत ही ज़रूरी. हर एक डेसीलीटर खून के यूनिट में 12 से लेकर 18 ग्राम तक हीमोग्लोबिन होना चाहिए. 12 से लेकर 16 तक औरतों में सामान्य है. मर्दों में 13 से लेकर 18 तक. हीमोग्लोबिन की वजह से ही हमारा खून लाल होता है. इसके अन्दर आयरन यानी लोहे को अपने आप से बांधकर रखने ताकत होती है. और ऑक्सीजन उनसे जुड़कर ही शरीर में हर जगह तक पहुंचता है. इसीलिए जब खून बढ़ाने की बात होती है तो कहा जाता है हरी पत्तेदार सब्जियां खाने को क्योंकि उनमें आयरन काफी होता है. लेकिन जब हीमोग्लोबिन कम होने लगता है, तो शुरू होती हैं परेशानियां.

ये विज्ञापन बेहद संजीदा मुद्दे पर बात करता है, लेकिन उसे बोरिंग नहीं होने देता. यह भी इसके वायरल होने के पीछे की एक ख़ास वजह हो सकती है. (तस्वीर साभार: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)
ये विज्ञापन बेहद संजीदा मुद्दे पर बात करता है, लेकिन उसे बोरिंग नहीं होने देता. यह भी इसके वायरल होने के पीछे की एक ख़ास वजह हो सकती है. (तस्वीर साभार: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

औरतों में ये परेशानी ज्यादा क्यों?

क्योंकि हमारे यहां की औरतें अपने खान-पान पर ध्यान नहीं देतीं. याद करने की कोशिश कीजिये आखिर बार कब आपने अपनी मां को घर में सबसे पहले खाना खाते हुए देखा था ? या फिर उन्हें ख़ास अपने लिए फ्रूट खरीदते हुए देखा था? नहीं याद? वही तो परेशानी है. औरतें अपनी सेहत पर तभी ध्यान देती हैं जब कुछ ऐसा हो जाए जो उनकी जान पर खतरा बन जाए. दूसरों का क्या कहूं, मेरी मां खुद तब तक डॉक्टर को नहीं दिखातीं जब तक बिस्तर से उठना मुश्किल न हो जाए. और वहीं घर में किसी और की थोड़ी सी भी तबीयत ख़राब होती है तो उसी वक़्त डॉक्टर को चार बार फ़ोन घुमा देती हैं.

एनीमिया जैसी हालत तब होती है जब ढंग से खाया-पिया ना जाए, सेहत पर ध्यान न दिया जाए, समय-समय पर चेकअप ना कराया जाए. हमारे देश में वैसे भी ज्यादातर लड़कियां और महिलाएं एनीमिक हैं. उनको भरपूर खाना नहीं मिलता. भरपूर से मतलब थाली भर के खाने से नहीं, पौष्टिक खाने से है. खून में आयरन की कमी से होता है एनीमिया. फिर आयरन की टैबलेट लेनी पड़ती है.

अधिकतर परिवारों में महिलाएं अपने खान पान का ध्यान नहीं रखतीं. कुछ भी खा लेती हैं. ये एक बहुत बड़ी वजह है एनीमिया के पीछे. (तस्वीर साभार: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)
अधिकतर परिवारों में महिलाएं अपने खान पान का ध्यान नहीं रखतीं. कुछ भी खा लेती हैं. ये एक बहुत बड़ी वजह है एनीमिया के पीछे. (तस्वीर साभार: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

क्या होता है एनीमिया में?

हीमोग्लोबिन कम होगा तो ऑक्सीजन शरीर के सभी हिस्सों में ढंग से पहुंचेगा नहीं. मतलब सांस पूरी लेंगे, सांस का फायदा नहीं होगा. थकान हो जायेगी. खाया पीया शरीर को लगेगा नहीं. माहवारी में परेशानी होगी. कम खून आएगा, समय पे नहीं आएगा. कई बार बहुत ज्यादा आएगा . चेहरे की रौनक चली जायेगी, आंखों के नीचे काले घेरे हो जायेंगे. अगर आप प्रेग्नेंट होने की कोशिश कर रही हैं तो गर्भ ठहरने के बाद बच्चे के पोषण में दिक्कत हो जायेगी. और आपकी तो वाट लगनी तय है. उम्र बढ़ने पर परेशानियां और ज्यादा दिखाई देंगी, और उनसे छुटकारा पाना मुश्किल होता जाएगा.

क्या है इलाज?

एनीमिया का इलाज कोई मुश्किल नहीं है. डॉक्टर आपको धीरे-धीरे खाना-पीना ठीक करने को कहेंगे. उनकी दी हुई दवाइयां सही समय पर खानी होंगी. खुद से आप एनीमिया का टेस्ट नहीं कर सकते. डॉक्टर के पास जाकर ब्लड टेस्ट करवाना ही पड़ेगा. एक बार पता चल जाए कि आपका हीमोग्लोबिन कितना है, उसके बाद आप डॉक्टर की सलाह से दवाइयां लेना और खाना शुरू कर सकते हैं. आप हरी पत्तेदार सब्जियां खा सकती हैं. उनमें काफी ज्यादा क्वांटिटी में आयरन होता है. हमने जितने भी डॉक्टर्स से बात की, सबने कहा कि शुरुआत तो अच्छे खाने-पीने से करनी ही पड़ेगी. दवाइयां भी एक लिमिट तक आपकी मदद कर सकती हैं. लेकिन शरीर को हेल्दी रखना है तो आपको बेसिक चीज़ों से शुरुआत करनी होगी जिनमें आपकी खाने की आदतें सबसे पहले आती हैं.

ये एक ऐसी बीमारी है जिसे छुपाते नहीं हैं लोग. किसी को एनीमिया हो तो झट से बता देता है. शायद इसी वजह से इतना सामान्य है इसके बारे में सुनना. और इसी वजह से ये काफी खतरनाक है. क्योंकि लोग इसके बारे में सुनने के इतने आदी हो गए हैं कि इसे गंभीरता से नहीं लेते. किसी की शक्ल उतरी हो या फिर कमजोरी दिख रही हो तो लोग फटाक से कह देते हैं; ‘एनीमिक लग रही हो’.

अनार, बादाम, तरबूज, मच्छली वगैरह खाने से आयरन लेवल बढ़ता है शरीर में. इन्हें रेगुलर खाना चाहिए. ((तस्वीर साभार: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)
अनार, बादाम, तरबूज, मछली वगैरह खाने से आयरन लेवल बढ़ता है शरीर में. इन्हें रेगुलर खाना चाहिए. ((तस्वीर साभार: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

क्या हैं खतरे?

इस बीमारी का इतना सामान्य हो जाना भी डराने वाला है. अधिकतर औरतों का हीमोग्लोबिन सात से नौ के बीच पाया जाता है. ये साधारण स्तर से काफी नीचे है. लेकिन अगर इसे एक सामान्य बात समझा जाता रहेगा तो दिक्कत ही होगी. यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसकी वजह से लाखों महिलाएं बीमारी में जीवन काटने को मजबूर होती हैं. एक सर्वे के अनुसार ग्लोबल न्यूट्रीशन इंडेक्स में भारत को सबसे निचले पायदान पर रखा गया है, क्योंकि यहां पर आधे से ज्यादा औरतें एनीमिक हैं. इनमें से अधिकतर औरतें वो हैं जो बच्चे पैदा करने की उम्र में हैं.

एनीमिया को साइलेंट किलर यानी ‘चुप्पा हत्यारा’ भी कहा जाता है. यानी ऐसी बीमारी जो बिना कोई ख़ास लक्षण दिखाए जान ले ले. और ऐसा नहीं है कि सिर्फ ग्रामीण इलाकों या छोटे शहरों की औरतें ही खाने में में ध्यान नहीं रखतीं और एनीमिक हो जाती हैं. बड़े बड़े शहरों में भी ये दिक्कत है. डॉक्टरों से बातचीत करने पर यह भी पता चला कि अधिकतर औरतों को अपनी प्रेगनेंसी ढंग से चलाने के लिए आयरन की गोलियां लेनी पड़ती हैं. इसलिए इसे लाइटली मत लीजिये. जांच कराइए. अपने घर की औरतों से कहिए. जान है, तो जहान है.


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