Submit your post

Follow Us

अमेरिका के जाते ही अफगानी महिलाओं पर तालिबानी हिंसा शुरू, कई अधिकार छीन लिए गए

इस साल अप्रैल महीने में एक वीडियो वायरल हुआ. वीडियो में कुछ पुरुष एक महिला को कोड़े से मार रहे थे. बुर्के से ढकी हुई महिला दर्द से चीख रही थी. वीडियो अफगानिस्तान के ओबे जिले का बताया गया. साथ में यह भी बताया गया कि कोड़े मारने वाले असल में तालिबान (Taliban) के सदस्य हैं और महिला पर कोड़े इसलिए बरसाए जा रहे हैं, क्योंकि उसने शादीशुदा होते हुए भी किसी दूसरे पुरुष से संबंध बनाए.

शुरुआत में इस वीडियो की प्रामाणिकता स्थापित नहीं हो पाई. लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान द गार्डियन ने हाल ही में इस वीडियो की पुष्टि की है. द गार्डियन ने तालिबान के एक जज से भी बात की. जज ने मीडिया संस्थान को बताया कि वीडियो वायरल होने से तालिबान के कमांडर नाराज हुए हैं. खासकर तब, जब तालिबान इमेज मेकओवर की कोशिश कर रहा है. हालांकि, अप्रैल के बाद से अभी तक ऐसी तमाम रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिनमें तालिबान ने एक के बाद एक जिलों में महिलाओं के ऊपर वही प्रतिबंध लगा दिए हैं, जो उसने 1996 से 2001 के अपने शासन के दौरान लगाए थे.

तालिबान का बढ़ता नियंत्रण

दरअसल, विदेशी सैनिक बहुत तेजी से अफगानिस्तान की धरती से वापस बुलाए जा रहे हैं. कभी अफगानिस्तान की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की संख्या एक लाख के ऊपर थी. 2 जुलाई को अमेरिकी सैनिकों ने बगराम एयरबेस को खाली कर दिया. यह एयरबेस देश में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का केंद्र था. फिलहाल, अफगानिस्तान में अब एक हजार अमेरिकी सैनिक ही बचे हैं. दूसरे पश्चिमी देश भी अपने सैनिकों को वापस बुला रहे हैं. विदेशी सैनिकों के वापस जाने से अफगानिस्तान के सैनिक भी दूसरे देशों में शरण लेने लगे हैं. उन्हें मालूम है कि बिना विदेशी सहायता के वे तालिबान का मुकाबला नहीं कर सकते. अब हालात ये हैं कि अफगानिस्तान में चुनी हुई सरकार होने के बाद भी तालिबान का लगभग तीन चौथाई देश पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण हो गया है. और अपने नियंत्रण वाले इलाकों में तालिबान ने अपनी परिभाषा वाला इस्लाम थोपना शुरू कर दिया है.

एक समय था, जब अफगानिस्तान में महिलाएं किसी पश्चिमी देश की ही तरह आजाद थीं. अपनी मर्जी के कपड़े पहनती थीं, कॉलेज जाती थीं, काम करती थीं और सार्वजनिक स्थानों पर नजर आती थीं. यह कोई बहुत पुरानी बात नहीं है. पिछली सदी के सातवें दशक तक यह सब होता था. लेकिन इसी दौरान शीत युद्ध की छाया अफगानिस्तान पर पड़ी. 1978 में सोवियत संघ की देखरेख में अफगानिस्तान में क्रांति हुई. अमेरिका ने कम्युनिस्ट सोवियत संघ के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए एक गुप्त ऑपरेशन को मंजूरी दी. इसके तहत अफगानिस्तान में कट्टर इस्लामिक विचारधारा वाले लड़ाकों (मुजाहिद्दीनों) को तैयार किया गया. जिन्होंने लगातार कमजोर हो रहे सोवियत संघ को हरा दिया.

बरगम एयर बेस (फोटो: एपी)
बगराम एयर बेस (फोटो: एपी)

90 के दशक में अफगानिस्तान में एक अंतरिम सरकार बनी. इस बीच मुजाहिद्दीनों के अलग-अलग ग्रुप सत्ता पाने के लिए लड़ने लगे. फिर अफगानिस्तान के मदरसों में पढ़े छात्रों ने एक ग्रुप बनाया. नाम दिया-तालिबान. यह ग्रुप 1994 में बना. तालिबान ने कहा कि वो सत्ता के लिए लड़ रहे अलग-अलग समूहों को हराकर देश में इस्लाम का राज कायम करेगा. 1996 में तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया, जो प्रभावी रूप से 2001 तक रहा. इस दौरान इस समूह ने इस्लाम के नाम पर बर्बर नियम-कानून बना दिए. महिलाओं की शिक्षा और रोजगार पर रोक लगाई. उनके लिए यह तय कर दिया गया कि वे बिना किसी पुरुष के बाहर नहीं जाएंगी. यहां तक कि किसी पुरुष डॉक्टर से इलाज तक नहीं कराएंगी. उन्हें शरीर को पूरी तरह से ढक लेने वाले बुर्का पहनना होगा.

अमेरिका ने तालिबान को खदेड़ दिया

तारीख 11 सितंबर, 2001. अमेरिकी धरती पर अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ. इस हमले में नाम आया ओसामा बिन लादेन का. पता चला कि लादेन को तालिबान ने संरक्षण दिया. अमेरिका ने पहले तालिबान से लादेन को सौंपने के लिए कहा और तब तालिबान ने ऐसा करने से मना कर दिया, इसके बाद अमेरिका ने अपनी सेनाएं अफगानिस्तान में भेज दीं. देखते ही देखते तालिबान का नियंत्रण खत्म हो गया.

साल 2004 में अफगानिस्तान का संविधान बना. इसमें महिलाओं को कई अधिकार दिए गए. चुनाव के जरिए सरकार का चयन किया गया. अधिकार मिलने और तालिबान का राज खत्म होने के बाद एक बार फिर से महिलाओं को वर्कफोर्स, स्कूलों और कॉलेजों में जगह मिली. 2011 में एक ऑपरेशन में ओसामा बिन लादेन को मार दिया गया. दो साल बाद तालिबान के फाउंडर मुल्ला मुहम्मद उमर की भी मौत हो गई. इसके बाद अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों को वापस बुलाने की राय को और बल मिलता गया. इस बीच साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार में ट्रंप ने चुनावी वादा किया कि वे राष्ट्रपति बनने के बाद विदेशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुला लेंगे और अमेरिका दूसरों की लड़ाई नहीं लड़ेगा.

Osama Bin Laden
9/11 हमलों के पीछे आतंकी संगठन अल-क़ायदा का मुखिया ओसामा बिन लादेन. (तस्वीर: एपी)

अपने वादे को पूरा करने के लिए ट्रंप ने साल 2020 में तालिबान के साथ एक शांति समझौता किया. 29 फरवरी, 2020 को हुआ यह समझौता दोहा संधि के नाम से जाना गया. संधि के तहत यह तय हुआ कि अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों को वापस बुलाया जाएगा, लेकिन इसके एवज में तालिबान को सुनिश्चित करना होगा कि उसके नियंत्रण वाले इलाकों में ऐसी गतिविधियों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा पर कोई खतरा आए. संधि में यह भी तय हुआ है कि तालिबान और अफगानिस्तान मिलकर शांति कायम करने का मसौदा तैयार करेंगे. इस संधि में कहीं भी महिलाओं के अधिकारों की बात नहीं थी. हालांकि, तालिबान की तरफ से बार-बार कहा गया कि वो बदल गया है. उदाहरण के तौर पर तालिबान के डिप्टी लीडर सिराजुद्दीन हक्कानी ने 20 फरवरी, 2020 को न्यूयॉर्क टाइम्स में एक ओपिनियन पीस लिखा. जिसमें कहा गया कि तालिबान इस बात को लेकर आश्वस्त है कि विदेशी सैनिकों के जाने के बाद महिलाओं को उनके इस्लामिक अधिकार दिए जाएंगे. जिनमें शिक्षा और रोजगार के अधिकार शामिल हैं.

साल 2020 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए. ट्रंप हार गए और ओबामा प्रशासन में उपराष्ट्रपति रहे जो बाइडेन को जीत मिली. बाइडेन प्रशासन ने दोहा संधि का रिव्यू किया और फिर इसे एक तरह के किनारे कर दिया. अप्रैल 2021 में बाइडेन ने कहा कि वे 11 सितंबर तक ज्यादातर अमेरिकी सैनिकों को वापस बुला लेंगे. बाइडेन ने कहा कि वे अमेरिका का सबसे लंबा और हमेशा से चल रहा युद्ध खत्म करना चाहते हैं. उनकी तरफ से संदेश दिया गया कि अमेरिकी सैनिकों के वापस आने के बाद अफगानिस्तान का क्या होगा, यह अफगानी ही तय करेंगे. हालांकि, घोषणा से पहले उन्होंने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति से बात की और उन्हें अमेरिकी मदद का आश्वासन दिया.

मुल्ला मुहम्मद उमर. तालिबान का जन्मदाता.
मुल्ला मुहम्मद उमर. तालिबान (Taliban) का जन्मदाता.

इस बीच अफगानिस्तान में कामकाजी औरतों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले बढ़ते गए. कइयों का जान चली गई. इसी साल मार्च की शुरुआत में जलालाबाद में तीन महिला पत्रकारों को मौत के घाट उतार दिया गया. उससे पहले जनवरी में अफगानिस्तान सुप्रीम कोर्ट की दो महिला जजों को गोली मार दी गई. वे बच नहीं सकीं. अफगानिस्तान सरकार की तरफ से शांति समझौते डेलिगेशन में शामिल फौजिया कूफी को गोली मारी गई. उनकी जान बच गई. घायल हालत में ही उन्होंने शांति समझौते की बातचीत में हिस्सा लिया. न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में इस तरह की कुल 136 हत्याएं हुईं. इन हत्याओं की जिम्मेदारी बार-बार तालिबान पर डाली गई. लेकिन तालिबान ने अपना हाथ होने से इनकार कर दिया.

फिर से शुरू हुई तालिबान की मनमानी!

वापस से ओबे के वीडियो पर आते हैं. तालिबान से जुड़े जज ने द गार्डियन को बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद तालिबान के कमांडर गुस्सा हुए. जज ने यह भी बताया कि कमांडर चाहते थे कि इस तरह की सजा सार्वजनिक स्थानों पर नहीं देनी चाहिए थी. जज ने आगे बताया कि उसने हाल ही में एक महिला को कोड़े मारने की सजा सुनाई. उसके घर के भीतर.

ओबे का नियंत्रण हासिल करने के लिए तालिबान शुरुआत से ही हिंसा करता आया है. कुछ महीने पहले, जब विदेशी सैनिक यहां से चले गए, तो यह जिला भी तालिबान के नियंत्रण में आ गया. द गार्डियन के मुताबिक, ओबे का नियंत्रण आने के तुरंद बाद ही तालिबान ने यहां अपने बर्बर नियम-कानून लागू कर दिए. हलीमा सलीमी नाम की महिला अधिकार कार्यकर्ता ने द गार्डियन को बताया-

“मेरे जैसी एक्टिविस्टों के साथ-साथ आम महिलाओं को पूरी तरह से नजरबंद कर दिया गया है. तालिबान ने आदेश दिया है कि महिलाएं पूरा शरीर ढकने वाला बुर्का पहनें. वे काम पर नहीं जा सकतीं. किसी भी कारण से बिना किसी पुरुष को साथ लिए वे घर से नहीं निकल सकतीं. दुकानदारों को आदेश दिया गया है कि वे अकेली महिलाओं को कोई भी सामान ना दें. तालिबान उन महिलाओं को बुरी तरह से पीट रहा है, जिन्हें वो अकेले पा लेता है. हम जानते हैं कि तालिबान बिल्कुल भी नहीं बदला है.”

उन महिलाओं, जिनका कोई करीबी पुरुष रिश्तेदार नहीं है, उनके लिए तालिबान ने एक जटिल व्यवस्था बनाई है. ओबे से भागकर आई एक महिला ने द गार्डियन को बताया-

“ऐसी महिलाओं को तालिबान को बताना होगा कि उनके घर में कोई पुरुष नहीं है. फिर तालिबान उसके लिए एक मैप बनाएगा. महिला से कहेगा कि वो मैप के इन-इन स्थानों पर ही जा सकती है. उसके ऊपर निगरानी रखी जाएगी.”

महिला ने यह भी बताया कि छोटी-छोटी बातों के लिए लोगों को पीटा जाता है. मसलन, अगर किसी ने रमज़ान के दौरान किसी दिन रोज़ा नहीं रखा तो उसे पीटा गया. किसी महिला ने मेकअप लगा लिया, तो उसे मारा गया. यही नहीं लोगों के मोबाइल नियमित तौर पर चेक किए जाते हैं. अगर उनमें संगीत से जुड़ी कोई फाइल मिल गई, तो इसे अपराध माना जाता है. किसी के फोन में सरकार से जुड़ी जानकारी या उसकी कोई ऐसी फोटो मिल गई, जो यह बताती हो कि आदमी या औरत सरकार के लिए काम करता/करती है, तो उसे मार दिया जाता है.

महिला ने बताया कि तालिबान ने आते ही हर तरह की कमाई पर 10 फीसदी टैक्स की घोषणा कर दी है. छोटे-मोटे अपराधों के लिए भी शरीर के अंग काटने जैसी सजा दी जा रही है. बच्चियों की पढ़ाई पर रोक लगा दी है. वे ज्यादा से ज्यादा छठवीं क्लास तक पढ़ सकती हैं. यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसा उसने 1996 से 2001 के बीच देखा था.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

इस पूरे मामले को समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार शेरवानी से बात की. उन्होंने हमें कई जरूरी बातें बताईं. उन्होंने बताया-

“पश्चिमी देशों ने अपने हितों की रक्षा के लिए तालिबान को खड़ा किया. बाद में तालिबान ने इस्लाम की अपनी एक कट्टर परिभाषा समाज पर थोप दी. एक समय में अफगानिस्तान की महिलाएं किसी पश्चिमी देश की महिलाओं सरीखी ही आजाद थीं. तालिबान ने वो सब छीन लिया. अपने इस्लाम और अपने कुरान के नाम पर”

शेरवानी ने यह भी बताया कि औरतों पर इस तरह की पाबंदी लगाकर तालिबान एक तरफ मर्दों के बीच पॉपुलर हुआ, तो दूसरी तरफ अपनी परिभाषा के समाज को बनाने की नींव डाली क्योंकि औरतें ही सबसे पहले आने वाली नस्ल को शिक्षित करती हैं.

शेरवानी यह चिंता जाहिर करती हैं कि अफगानिस्तान में आने वाले समय में औरतों के अधिकार बुरी तरह से कुचले जाने हैं और तमाम तरह के एक्टिविस्ट तालिबान के सामने कहीं नहीं टिक पाएंगे क्योंकि तालिबान हिंसा करने में में जरा भी नहीं हिचकता. उन्होंने दुख जताया कि एक बार तालिबान का दंश झेल चुकीं औरतों ने बीते सालों में जो भी अधिकार हासिल किए, वो एक झटके में खत्म हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि पश्चिमी देश अब अफगानिस्तान में किसी भी तरह का दखल नहीं देंगे क्योंकि उनका काम पूरा हो चुका है. अव्वल तो आने वाले समय में जो हिंसा अफगानिस्तान में होने जा रही है, उसमें हथियार बेचकर और रक्षा सौदों के तहत ये देश मोटा मुनाफा जरूर कमाने की तैयारी कर रहे हैं.


 

वीडियो- तालिबान अफगानिस्तान पर पूरा कब्जा करने से पहले किस बात का इंतज़ार कर रहा है?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

पहले मैटरनिटी लीव नहीं दी फिर नौकरी से निकाला, अब हाई कोर्ट ने अफसरों की क्लास लगा दी

पहले मैटरनिटी लीव नहीं दी फिर नौकरी से निकाला, अब हाई कोर्ट ने अफसरों की क्लास लगा दी

आयरनी ये कि मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा है.

16 साल की लड़की का पति उससे संबंध बनाए तो ये IPC में रेप क्यों नहीं कहलाता?

16 साल की लड़की का पति उससे संबंध बनाए तो ये IPC में रेप क्यों नहीं कहलाता?

डियर कानून, यू आर ड्रंक, गो होम.

बिहार: आठ साल की बच्ची से बर्बरता, 'रेप' के बाद आंख निकाली, उंगलियां कुचलीं

बिहार: आठ साल की बच्ची से बर्बरता, 'रेप' के बाद आंख निकाली, उंगलियां कुचलीं

पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए SIT गठित की है.

महिला का आरोप, 'पति टॉर्च से मेरा प्राइवेट पार्ट चेक करता था कि उसमें कुछ है तो नहीं'

महिला का आरोप, 'पति टॉर्च से मेरा प्राइवेट पार्ट चेक करता था कि उसमें कुछ है तो नहीं'

शादी के बाद US पहुंची, वहां जाते ही पति ने मार-पीट शुरू कर दी.

यूपी: कोरोना से हुई पति की मौत, महिला ने देवर पर लगाया रेप का आरोप

यूपी: कोरोना से हुई पति की मौत, महिला ने देवर पर लगाया रेप का आरोप

महिला ने पुलिस पर केस दर्ज करने में आनाकानी के आरोप लगाए हैं.

दिल्ली कैंट: दलित बच्ची के कथित रेप और हत्या मामले में डॉक्टर्स की टीम को क्या पता चला?

दिल्ली कैंट: दलित बच्ची के कथित रेप और हत्या मामले में डॉक्टर्स की टीम को क्या पता चला?

श्मशान घाट के पुजारी समेत चार लोग गिरफ्तार.

BSP सांसद अतुल राय पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला को क्यों खोज रही है पुलिस?

BSP सांसद अतुल राय पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला को क्यों खोज रही है पुलिस?

2019 से जेल में बंद हैं अतुल.

दिल्ली कैंट: शव के नाम पर बचीं सिर्फ बच्ची की टांगें, रेप का पता कैसे चलेगा?

दिल्ली कैंट: शव के नाम पर बचीं सिर्फ बच्ची की टांगें, रेप का पता कैसे चलेगा?

9 साल की दलित बच्ची की कथित हत्या का मामला.

लड़की का रेप करने वाला अगर उससे शादी कर ले तो क्या उसका गुनाह माफ़ हो जाता है?

लड़की का रेप करने वाला अगर उससे शादी कर ले तो क्या उसका गुनाह माफ़ हो जाता है?

पांच साल पहले जिस नाबालिग लड़की का रेप किया था, उसी से शादी करने को तैयार हुआ पूर्व पादरी.

यूपी: पूर्व मंत्री चौधरी बशीर पर पत्नी ने छठी शादी का आरोप लगाते हुए क्या-क्या कहा?

यूपी: पूर्व मंत्री चौधरी बशीर पर पत्नी ने छठी शादी का आरोप लगाते हुए क्या-क्या कहा?

आगरा में तीन तलाक का केस भी दर्ज कराया है.