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महंगे और 'सेक्सी' ब्रा बनाने वाली इस कंपनी ने क्यों किया प्रियंका चोपड़ा को पसंद?

करीब एक-दो साल पहले मेरी एक दोस्त की शादी थी. मैं उसके साथ शॉपिंग करने गई. साड़ी-सूट वगैरह खरीदने के बाद हम गए एक लॉन्जरी स्टोर में. माने उस स्टोरी में जहां लड़कियों के ब्रा, पेंटी, नाइटी वगैरह बिकती हैं. अब शादी वाली बात थी, कुछ स्पेशल लेना था, इसलिए मेरी दोस्त ने स्टोर की एक महिला से कहा कि कुछ सेक्सी और हॉट सा दिखाएं. उसके बाद जो भी हमें दिखाया गया, उनकी कीमत तो शुरू ही दो-ढाई हज़ार रुपए से हुई थी. आखिर में मेरी दोस्त ने छह हज़ार रुपए का एक लॉन्जरी सेट खरीदा, जिसमें एक ब्रा और एक पेंटी थी, साथ ही पतली सी नाइटी भी थी. स्टाइलिश काफी दिख रहा था, लेकिन कम्फर्टेबल ज़रा भी नहीं लग रहा था. मेरी दोस्त को उससे कोई फर्क भी नहीं पड़ा, उसे तो शादी के बाद फर्स्ट नाइट में अपने पति के लिए हॉट दिखना था. एक बार फिर दोहराऊंगी पति के लिए हॉट दिखना था. माने ये वाली शॉपिंग उसने अपने होने वाले पति को ध्यान में रखते हुए की थी, खुद को नहीं. बस इसी का फायदा उठाते हैं कई सारे नामी ब्रांड्स, जो स्टाइलिश लॉन्जरी बेचते हैं और उनकी कीमत आसमान छूती हैं.

ऐसा ही एक ब्रांड है विक्टोरियाज़ सीक्रेट. हिंदी में जिसका शाब्दिक अर्थ होगा, विक्टोरिया के रहस्य. ये ब्रांड बड़ा ही फेमस है. लेकिन पिछले कुछ बरसों से इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसलिए अब नए तरीके से ये खुद को पेश करने की तैयारी में है. इसी वजह से इस ब्रांड ने एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा समेत छह अन्य नामी औरतों को अपने नए कैंपेन में शामिल किया है. क्या है इस ब्रांड का इतिहास? क्यों प्रियंका को ही इसने चुना? और ये विक्टोरिया आखिर हैं कौन? सबके बारे में जानेंगे एक-एक करके.

क्या है Victoria’s Secret का इतिहास?

साल 1977 के पहले की बात है. एक आदमी अमेरिका की सड़कों पर घूम रहा था. उसे अपनी पत्नी के लिए ब्रा खरीदनी थी. एक स्टोर में गया, वहां उसे ऐसी फीलिंग आई कि स्टोर में मौजूद सेल्सवुमन को उसका आना रास नहीं आया. माने उस आदमी को वहां असहज महसूस हुआ. इस घटना के बाद आदमी ने सोचा कि क्यों न औरतों की लॉन्जरी का ऐसा स्टोर खोला जाए, जहां आदमी शॉपिंग करते हुए कम्फर्टेबल महसूस करे. बस इसी के साथ इस आदमी ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर 1977 में केलिफर्निया में पहला स्टोर खोला. नाम रखा विक्टोरियाज़ सीक्रेट. ये स्टोर आदमियों को फोकस करते हुए खोला गया था. खोलने वाले का नाम था रॉय रेयमंड (Roy Raymond), पत्नी का नाम था गाये रेयमंड (Gaye Raymond). 1982 तक रेयमंड ने कुल पांच स्टोर खोल लिए थे. लेकिन ज़रा भी फायदा नहीं हो रहा था.

इसी बीच एंट्री हुई एक और किरदार की. इस किरदार का अपना पहले से एक फैशन ब्रांड था, लेकिन इस किरदार की नज़र पड़ी विक्टोरियाज़ सीक्रेट के स्टोर्स पर. अब रेयमंड को तो पहले से ही नुकसान हो रहा था, इसलिए इस नए किरदार ने 1982 में विक्टोरियाज़ सीक्रेट को रेयमंड से खरीद लिया. बहुत ही कम दाम में. इस आदमी का नाम है लेज़ली एच वेक्सनर (Leslie H Wexner). ‘एल ब्रांड्स’ के फाउंडर हैं. और यही ब्रांड विक्टोरियाज़ सीक्रेट का पैरेंट ब्रांड भी है.

Victoria Secret (3)
विक्टोरियाज़ सीक्रेट की शुरुआत 1977 में हुई थी.

आगे क्या हुआ?

वेक्सनर ने काफी सारे बदलाव किए. ब्रा के डिज़ाइन बदले. ज्यादा कलरफुल बनाया. स्टोर्स को भी काफी कलरफुल लुक दिया. तथाकथित फेमिनिन कलर्स का इस्तेमाल किया. ऐसा स्टोर बनाया, जहां दुनिया की ‘सेक्सिएस्ट’ माने ‘सबसे सेक्सी’ औरतें शॉपिंग करें. जिससे बाकी औरतें भी इसकी तरफ अट्रैक्ट हों. इस आइडिया ने काम किया. इस दौरान औरतों ने बाहर निकलकर काम करना शुरू कर दिया था, वो पैसे कमाने लगी थीं, उनके लिए कॉन्फिडेंट होना अहम था. विक्टोरियाज़ सीक्रेट ने इसी पर मौके पर चौका मारा. ये दिखाने की कोशिश की कि ‘सेक्सिनेस’ कॉन्फिडेंस को बढ़ाता है और सेक्सी ब्रा इसमें मदद करेगा. औरतों के ऊपर ये आइडिया भी काम कर गया. अब चूंकि औरतों के पास खुद के पैसे थे, तो वो लॉन्जरी में इन्हें अपनी मर्ज़ी से खर्च करने लगीं. बीच में कुछ उतार-चढ़ाव भी आए, लेकिन विक्टोरियाज़ सीक्रेट ने नए-नए प्रोडक्ट लॉन्च करके खुद को संभाला.

विक्टोरियाज़ सीक्रेट की एंजल्स से मिलिए

90 के दशक में विक्टोरियाज़ सीक्रेट फैशन शो की शुरुआत हुई. इसमें एकदम दुबली-पतली मॉडल्स को कास्ट किया गया. जो रैम्पवॉक में अलग-अलग तरह की लॉन्जरी पहनकर चलतीं. साथ में हाई हील्स होते. कइयों के पीछे तो बड़े-बड़े पंख तक लगा दिए जाते थे. पूरी कोशिश होती थी कि तथाकथित ‘सेक्सिनेस’ पर फोकस किया जाए. इन मॉडल्स को एंजल्स नाम दिया गया. 90 के दशक और 21वीं सदी के शुरुआती दस बरसों तक लगभग हर मॉडल चाहती थी कि विक्टोरिया की एंजल बने. क्योंकि ये एंजल्स काफी फेमस हो चुकी थीं. कई फिल्म और सीरीज़ में भी इनका ज़िक्र हुआ था.

Victoria Secret (2)
विक्टोरियाज़ सीक्रेट फैशन शो की मॉडल्स, जिन्हें एंजल कहा जाता है.

2012 तक विक्टोरियाज़ सीक्रेट का डंका बजा. लेकिन धीरे से मार्केट डाउन होना शुरू हो गया. इसके तीन-चार कारण थे. पहला- विक्टोरियाज़ सीक्रेट आदमियों की पसंद को ध्यान में रखकर लॉन्जरी बनाता था. इनके प्रोडक्ट में कम्फर्ट से ज्यादा सेक्सिनेस पर फोकस किया जाता था. दूसरा- इनकी एंजल्स को ही देख लीजिए, ज़ीरो फीगर का चलता-फिरता उदाहरण थीं, लेकिन असल में हर लड़की का ज़ीरो फिगर नहीं होता है. तीसरा- मार्केट में और भी कई ब्रांड्स थे, जिन्होंने लॉन्जरी को सेक्सी आउटफिट की तरह न लेकर कम्फर्टेबल आउटफिट बनाना शुरू कर दिया था. एथलीट वियर्स की तरफ औरतों का फोकस शिफ्ट हुआ था. ‘CNBC’ की एक वीडियो रिपोर्ट में कुछ प्लस साइज़ औरतों ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि विक्टोरियाज़ सीक्रेट के प्रोडक्ट उनके लिए बनाए गए हैं.

लोगों का फोकस शिफ्ट हो गया था, सेक्सिनेस से ज्यादा उन्हें चाहिए था कम्फर्ट. वायर्ड ब्रा की बजाए बैंड वाले आरामदायक ब्रा चाहिए थे. विक्टोरियाज़ सीक्रेट के महंगे लॉन्जरी की जगह उन्हें कम दाम में ये सब मिलने लगा था. ये सब देख विक्टोरियाज़ सीक्रेट ने भी स्पोर्ट्स वियर की तरफ काम शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. कई ब्रांड्स ने हर तरह के साइज़ वालों को अपने कैंपेन में शामिल करना शुरू कर दिया था, यहां भी विक्टोरिया सीक्रेट लेट हो गया. 2018 तक इसका एंजल वाला फैशन शो चला, लेकिन पिछले दो साल से ये शो भी नहीं हुआ है.

विक्टोरियाज़ सीक्रेट ने तथाकथित स्लिम-ट्रिम, सेक्सी, आदमियों को पसंद आने वाली औरतों और प्रोडक्ट्स पर फोकस किया था. बाकी ब्रांड्स ने इसी के अपोज़िट काम किया. मेगास्टार रियाना ने साल 2018 में कहा था-

“मैं विक्टोरिया सीक्रेट गर्ल की तरह नहीं हूं. और मैं फिर भी अपनी लॉन्जरी में सुंदर और कॉन्फिडेंट महसूस करती हूं.”

ट्रांसजेंडर मॉडल वाला विवाद

एक और विवाद हुआ था साल 2018 में. विक्टोरियाज़ सीक्रेट के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर एड राज़ेक ने कहा था कि ट्रांसजेंडर मॉडल्स विक्टोरियाज़ सीक्रेट फैंटेसी को सेल नहीं कर सकते हैं. इस बयान ने काफी हंगामा मचाया था. जिसके बाद राज़ेक ने माफी मांगी और कहा था कि वो ट्रांसजेंडर मॉडल्स को कास्ट करेंगे.

फिर सोचा नए सिरे से काम शुरू किया जाए

और भी बहुत सारी घटनाएं हुई थीं, अगर वो सब बताने लगे तो तीन-चार एपिसोड्स लग जाएंगे. इसलिए आगे बढ़ते हैं. लगातार घटते बिज़नेस के बाद विक्टोरियाज़ सीक्रेट ने खुद की इमेज बदलने का फैसला किया. और सात ऐसी औरतों को अपने कैंपेन में शामिल किया, जो अपने एक्स्ट्राऑर्डिनरी काम के चलते फेमस हैं. इनमें शामिल हैं, प्रियंका चोपड़ा. हम जानते ही हैं कि ये एक्ट्रेस, प्रड्यूसर और इंटरप्रेन्योर हैं. अगला नाम है- मेगन रेपिनो, सॉकर प्लेयर हैं और LGBTQIA+ एक्टिविस्ट हैं. तीसरा नाम है- आइलिन गू, 17 साल की चाइनीज़ अमेरिकन फ्रीस्टाइल स्कियर हैं और जल्द ही ओलंपियन भी बनने वाली हैं. चौथा नाम है- पलोमा अलसेसर का, 29 बरस की मॉडल हैं, इनका नाम उन 14 प्लस साइज़ औरतों में शामिल हैं, जो वॉग मैगज़ीन के कवर में आ चुकी हैं. पांचवां नाम है- अडुट अकेक. सुपरमॉडल हैं, और रिफ्यूजी कैंप में इनका जन्म हुआ था. छठा नाम है- अमांडा डी केडेनेट का. ये जर्नलिस्ट और फोटोग्राफर हैं. सातवां नाम है- वेलेन्टीना सम्पायो. LGBTQIA एक्टिविस्ट हैं और ट्रांस मॉडल हैं. इन सारी औरतों की तस्वीरें शेयर करते हुए विक्टोरियाज़ सीक्रेट ने लिखा-

“हमें एक नया एक्साइटिंग पार्टनरशिप प्लेटफॉर्म अनाउंस करते हुए गर्व हो रहा है. #TheVSCollective, ये विक्टोरियाज़ सीक्रेट के भविष्य को बनाएगा और शेप देगा. ये एक्स्ट्राऑर्डिनरी पार्टनर्स अपने अलग बैकग्राउंड, इंटरेस्ट के ज़रिए हमारे साथ नए रिवॉल्यूशनरी प्रोडक्ट्स बनाने में सहयोग देंगे.”

‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, विक्टोरियाज़ सीक्रेट के फरवरी में चीफ एग्ज़िक्यूटिव बनने वाले मार्टिन वॉटर्स का कहना है-

“जब दुनिया बदल रही थी, हमने रिस्पॉन्ड करने में देर कर दी. हमें इस बारे में सोचना बंद करना होगा कि पुरुष क्या चाहते हैं? हमें सोचना होगा कि महिलाएं क्या चाहती हैं. मैं जानता हूं कि हमें बहुत पहले ही इस ब्रांड को बदल देना चाहिए था. ऐसा करने में सक्षम होने के लिए हमारे पास कंपनी का नियंत्रण नहीं था. रही बात एंजल्स की, तो मुझे नहीं लगता कि इस वक्त कल्चरली तौर पर उनकी कोई प्रासंगिकता है. पुराने समय में विक्टोरिया ब्रांड के पास एक ही लेंस था, वो था ‘सेक्सी’. जो कई बरसों तक बिका भी. लेकिन इसने बहुत सारे प्रोडक्ट्स जैसे मैटर्निटी प्रोडक्ट्स को बेचने पर रोक लगा रखी थी. इस ब्रांड ने कभी मदर्स डे तक सेलिब्रेट नहीं किया था.”

विक्टोरिया सीक्रेट ने आखिरकार पिछले महीने मदर्स डे कैंपेन इंट्रोड्यू किया था. और एक प्रेगनेंट मॉडल को भी फीचर किया था, जल्द ही नर्सिंग ब्रा भी बेचना शुरू करेगा. ये सब पहले कभी भी इस ब्रांड ने नहीं किया था. क्योंकि ये सब सो-कॉल्ड ‘सेक्सिनेस’ से मेल नहीं खाता था. अब इस ब्रांड में इन-चार्ज की पॉज़िशन में औरतों की संख्या भी बढ़ा दी गई है. ब्रांड के मेनिकन का साइज़ जो 32-B हुआ करता था, उसे भी बदला जाएगा. एंजल्स जो कभी इस ब्रांड की पहचान हुआ करती थीं, उन्हें अब उतनी तवज्जो नहीं मिलेगी. कंपनी अभी भी थॉन्ग और लेस वाली लॉन्जरी बेचेगी, लेकिन नए तरीके और नए अप्रोच के साथ. और इसमें मदद करेंगी वो सात औरतें जिन्हें नए कैंपेन में शामिल किया गया है.

कैसी ब्रा पहनी जाए?

शुरुआत हमने स्टाइलिश लॉन्जरी से की थी. जो अधिकतर वायर्ड होती हैं, या फिर साटिन की होती हैं या सिंथेटिक होती हैं. ऐसी लॉन्जरी का औरतों की हेल्थ में किस तरह का प्रभाव पड़ता है, और उनकी हेल्थ के नज़रिए से कैसी लॉन्जरी सही है, ये जानने के लिए हमने बात की जो एक्सपर्ट्स से. डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर पंकज चतुर्वेदी ने कहा-

“दो तरह के साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं. पहला वायर की वजह से, दूसरा साटन कपड़े की वजह से. सिंथेटिक कपड़े आमतौर पर पानी को ठीक से एब्ज़ॉर्ब नहीं करते. इसलिए जब इनर-वियर के तौर पर उन्हें पहना जाता है, तो पसीने के प्रॉपर एब्ज़ॉर्ब्शन नहीं होता. वो एरिया काफी देर तक नम रहता है. इस तरह के इनर-वियर्स पहनने से फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा बना रहता है. क्योंकि वहां पर हमेशा पसीना और नमी जमी रहती है. दूसरा इसी पसीने की वजह से रैशेज़ भी हो जाते हैं. तीसरा- जैसे लोगों को घमौरियां हो जाती हैं, टेक्निकली हम लोग इसे मिलेरिया कहते हैं, इन लोगों को मिलेरिया होने की संभावना भी ज्यादा रहती है. क्योंकि एरिया में नमी रहती है, प्रॉपर हवा भी नहीं मिल पाती. चौथा- जिनकी स्किन सेंसिटिव है, उनमें अधिकतर लोगों में देखा जाता है कि जब भी वो सिंथेटिक कपड़े, वुलन कपड़े, पॉलिस्टर के कॉन्टैक्ट में आते हैं तो उन्हें इरिटेशन और ईचिंग शुरू हो जाती है. तो जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, उन्हें इस तरह के कपड़े नहीं पहनना चाहिए. और वायर की वजह से ऐसी कोई दिक्कत तो नहीं होती, लेकिन वायर की कवरिंग अगर हट जाए, और वो सीधे तौर पर स्किन के कॉन्टैक्ट में आता है, तो लोगों को दिक्कत हो सकती है.”

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिनव सिंह ने कहा-

“सिंथेटिक लॉन्जरी महिलाओं की हेल्थ पर बुरा असर डालती है. सिंथेटिक फाइबर को अलग-अलग कंपनी कई सारे नामों से बनाती हैं. ये जो फाइबर होते हैं, इनकी नमी को सोखने की क्षमता कॉटन के मुकाबले बहुत कम होती है. उस वजह से प्राइवेट पार्ट्स में नमी और गर्मी बढ़ती है, इससे वजाइना में इन्फेक्शन होने की संभावना भी बढ़ जाती है.”

विक्टोरिया आखिर कौन थीं?

अब बताते हैं कि विक्टोरियाज़ सीक्रेट नाम क्यों रखा गया. ‘स्लेट डॉट कॉम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉय रेयमंड ने विक्टोरियन एरा से जुड़ी शुद्धता और सम्मान को महत्व देने के लिए ये नाम चुना था. विक्टोरिया यूनाइटेड किंगडम की रानी थीं, जिन्होंने 1837 से लेकर 1901 तक यहां शासन किया था. इसी समय को विक्टोरियन एरा कहा जाता है. इस दौरान औरतों के पास ज्यादा अधिकार नहीं थे. तब ये समझा जाता था कि औरत का मकसद ये है कि वो इसी लक्ष्य के साथ पली-बढ़े कि आगे जाकर उसे शादी करके अच्छी पत्नी और मां बनना है. इसलिए उनके लिए पढ़ना भी ज़रूरी नहीं समझा जाता था. सुंदर दिखना, संगीत की जानकारी होना ज़रूरी था. पढ़ने के कुछ अधिकार मिल भी जाते थे, तो यूनिवर्सिटी वगैरह में एडमिशन मिलने में भेदभाव होता था. अपर क्लास की औरतों को बाहर काम करने की परमिशन नहीं थी. मिडल क्लास की औरतें कुछ काम करती थीं, लेकिन वो भी ज्यादातर फैक्ट्री में, नर्सिंग और डोमेस्टिक हेल्प के काम तक सीमित था. औरतों को ‘एंजल इन दी हाउस’ माना जाता था. उनसे उम्मदी की जाती थी कि वो पूरी तरह से अपने पति पर समर्पित रहें. एक आदर्श पत्नी बनकर रहें. तथाकथित सभ्य रहें.


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