Submit your post

Follow Us

VHL सिंड्रोमः वो बीमारी जिसमें आपके पूरे शरीर में खून से भरे ट्यूमर बनने लगते हैं

मैं तीन साल की थी. मेरा छोटा भाई हुआ था. मैं बहुत खुश थी. खुशी में नाच रही थी. तभी अचानक मैं बेहोश हो गई. मेरे पैरों में कुछ ही देर में बहुज ज्यादा सूजन हो गई. ये शुरुआत थी उस मुश्किल सफर की, जिस पर आज 41 की उम्र में भी मैं चल रही हूं.

पायल भट्टाचार्य कुछ इस तरीके से अपनी कहानी बताती हैं. वो VHL सिंड्रोम से जूझ रही हैं. इस बीमारी में इंसान के शरीर में बहुत सारे छोट-छोटे ट्यूमर बनने लगते हैं. खून से भरे ट्यूमर्स. ये बीमारी शरीर के 16 तक अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है. पायल के केस में ये बीमारी उनके 10 अंगों को नुकसान पहुंचा रही है. वो लिवर ट्रांसप्लांट से गुज़र चुकी हैं. और ट्रांसप्लांट के बाद से ही उनके शरीर की इम्युनिटी बहुत लो चुकी है. कोविड 19 की दूसरी वेव में पायल को कोरोना हो गया, शरीर का इम्युनिटी रिस्पॉन्स कम होने की वजह से दो महीने से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी पायल कोरोना से रिकवर नहीं हो पा रही हैं.

VHL सिंड्रोम क्या है?

ये समझने के लिए हमने बात की डॉक्टर इशिता सेन से. डॉक्टर इशिता साल 2007-08 से पायल के साथ जुड़ी हैं. सबसे पहले उनकी टीम ने ही पायल पायल के वीएचएल कंडीशन के बारे में पता लगाया था. डॉक्टर इशिता बताती हैं कि VHL यानी वॉन-हिप्पेल-लिंडाउ. इस नाम का एक जीन होता है. हम सबके शरीर में. इसे कैंसर सप्रेसिंग जीन भी कहा जाता है. जब इस जीन में कोई म्यूटेशन आ जाता है यानी जब इसका रूप बदल जाता है तो इसे VHL सिंड्रोम कहते हैं.

डॉक्टर इशिता बताती हैं कि ये एक जेनेटिक डिफेक्ट है. जिसमें पेशेंट के अलग-अलग ऑर्गन्स में ट्यूमर बनते हैं. ब्रेन, किडनी, पैनक्रियाज़, लिवर किसी भी अंग में ट्यूमर बन सकते हैं. शरीर के अलग-अलग अंगों में होने वाले ट्यूमर्स कैंसरस भी हो सकते हैं, प्री कैंसरस भी और नॉन कैंसरस भी. कैंसरस ट्यूमर होने पर कैंसर की तरह इलाज चलता है.

Dr Ishita Sen
Dr Ishita Sen साल 2007-08 से पायल से जुड़ी हैं.

पायल के केस में इस ट्यूमर ने सबसे पहले उनके लिवर पर अटैक किया. लिवर में बहुत सारे ट्यूमर होने की वजह से उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट से गुज़रना पड़ा. लिवर ट्रांसप्लांट के बाद पेशेंट को काफी दवाएं दी जाती हैं, इम्युनोसप्रेसेंट दिए जाते हैं. जिनकी वजह से बाद में उन्हें टीबी और दूसरी दिक्कतें शुरू हो गईं. इन सबसे से ठीक होने के बाद पायल के दूसरे अंगों में ट्यूमर्स होने लगे. उनकी किडनी में कैंसरस ट्यूमर हुए, तो उनका इलाज किया गया. डॉक्टर इशिता के मुताबिक, पायल ट्यूमर की वजह से पायल का शरीर ठीक से फंक्शन नहीं कर पा रहा है, उनके कई अंग कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं.

उन्होंने बताया कि इस वक्त पायल के ब्रेन और पैनक्रियाज़ के ट्यूमर का जल्द से जल्द इलाज होना ज़रूरी है. ब्रेन सेंट्रल नर्वस सिस्टम के जरिए हमारे पूरे शरीर को कंट्रोल करता है. उसमें कई सारे ट्यूमर्स हैं जो पायल के शरीर के फंक्शन को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं. उन्हें सीज़र्स यानी झटके आ सकते हैं. उनकी देखने और सुनने की शक्ति जा सकती है. फिट्स न आएं, इसके लिए पायल रेगुलर दवाएं लेती हैं. वहीं, पैनक्रियाज़ में वो एन्जाइम्स बनते हैं जो हमारा खाना पचाने में हमारी मदद करते हैं. लेकिन ट्यूमर की वजह से उनके पैनक्रियाज़ वो एन्जाइम नहीं बना पा रहे हैं, उसके लिए भी पायल को सप्लिमेंट्स लेने पड़ रहे हैं.

बकौल डॉक्टर इशिता,

‘इतनी दिक्कतों से जूझने वाले कई पेशेंट अक्सर हिम्मत हार जाता हैं. पर पायल अलग हैं. वो लगातार लड़ रही हैं. उनकी इच्छाशक्ति प्रेरणा देने वाली है. उन्होंने VHL को लेकर बहुत पढ़ाई की है, इस वक्त मैं कह सकती हूं कि इस रेयर बीमारी के बारे में उनसे ज्यादा शायद ही कोई जानता हो. पायल बहुत ब्राइट हैं, बहुत अच्छा लिखती भी हैं. ये दुखद है कि उन्हें इन सबसे गुज़रना पड़ रहा है.’

पायल की तरफ से हमें दी गई जानकारी के मुताबिक, पैनक्रियाटिक ट्यूमर के लिए वो जो दवाएं खा रही हैं, उसकी एक दवा की कीमत 3000 रुपये हैं. और एक दवा केवल दो से तीन दिन चलती है.

कितने लोगों को होती है ये बीमारी?

पायल के मुताबिक, ये बीमारी अब तक पूरी दुनिया में ही बहुत कम लोगों में डिटेक्ट हुई है. 1902 से लेकर 2013 के बीच पूरी दुनिया में इसके 132 मामले ही रिपोर्ट हुए हैं. पायल कहती हैं कि ये बीमारी इतनी रेयर है कि इसके बारे में कई डॉक्टरों को भी ठीक-ठीक नहीं पता है. वो बताती हैं कि शुरुआत में इस बीमारी को नहीं जानने वाले डॉक्टरों ने उन्हें ऐसी एंटिबायोटिक्स दे दीं जिनकी वजह से अब कई दवाएं उनके शरीर पर असर नहीं करती हैं.

Payel Bhattacharya 1
Payel अपनी मां को अपनी लाइफ का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम मानती हैं. अब तक उनकी तीन किताबें छप चुकी हैं. दो फिक्शन हैं जिनमें उन्होंने खुद को और अपनी मां को सेंट्रल कैरेक्टर बनाया है. वहीं, एक द वॉरियर प्रिंसेस नाम से उनकी किताब छपी है.

वहीं, डॉक्टर इशिता बताती हैं कि इस बीमारी के नोन केसेस बहुत कम हैं. इसकी कई वजहें हो सकती हैं, एक तो ये कि ऐसे केसेज़ में बिना इलाज के पेशेंट्स का सर्वाइवल रेट बहुत कम होता है. कई लोग प्रॉपर ट्रीटमेंट करने की बजाए इसे दैवीय मानकर नीम-हकीमों के चक्कर में पड़े रहते हैं. इस वजह से इसके केसेस डॉक्टरों तक पहुंच ही नहीं पाते.

अब आगे इलाज का क्या रास्ता है?

किसी भी इलाज से पायल को पूरी तरह ठीक कर पाना मुमकिन नहीं है. पर जब कोई ट्यूमर लाइफ थ्रेटनिंग हो जाता है, यानी जान के लिए खतरनाक बन जाता है. तो उसका इलाज करना ज़रूरी होता है. अब तक पायल कई सर्जरी और कई रेडिएशन थैरेपी से गुज़र चुकी हैं. अब ये दोनों ही उनके शरीर पर परफॉर्म करना उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. लेकिन अब उनके ब्रेन और पैनक्रियाज़ के ट्यूमर उनके लिए खतरनाक बन गए हैं, ऐसे में उनके इलाज के लिए पायल को प्रोटॉन थैरेपी की ज़रूरत है.

प्रोटॉन थैरेपी भी एक तरह की रेडिएशन थैरेपी है. लेकिन ये नॉर्मल रेडिएशन से बहुत ज्यादा फोकस्ड थैरेपी है. इसमें आसपास के अंगों और टिशूज़ को नुकसान पहुंचाए बिना केवल उस ट्यूमर को टारगेट करके जलाया जाता है. बाकी अंग पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.

Randeep Guleria
AIIMS के डॉक्टर Randeep Guleria भी लंबे वक्त से पायल के संपर्क में हैं.

कितना खर्च आएगा?

प्रोटॉन थैरेपी जितनी सोफिस्टिकेटेड है, उसका खर्च भी उतना ही ज्यादा है. इलाज के खर्च के एस्टिमेशन के लिए अपोलो अस्पताल की तरफ से पायल को एक लेटर भेजा गया है. इसके मुताबिक, उनके अस्पताल में रुकने, पूरी प्रोसीजर और दवाओं का कुल खर्च 40 लाख रुपये के करीब आएगा. इसके लिए पायल को अपोलो के चेन्नई स्थित प्रोटॉन सेंटर में रुकना होगा, क्योंकि ये फेसिलिटी इस वक्त केवल वहीं उपलब्ध है. अस्पताल की तरफ से कहा गया है कि इलाज के दौरान अगर किसी और तरह के टेस्ट करने पड़ते हैं, अस्पताल में और ज्यादा रुकना पड़ता है तो उसका खर्च अस्पताल खुद उठाएगा. हालांकि, 40 लाख रुपये एक बड़ी रकम है, जो ट्रीटमेंट के लिए पायल को जुटाने होंगे.

क्या सरकार की तरफ से फंड्स नहीं मिल सकते इलाज के लिए?

इसके लिए हमने बात की एडवोकेट आदित्य चैटर्जी से. आदित्य दिल्ली हाईकोर्ट में पायल को रिप्रेज़ेंट कर रहे हैं. पायल के अलावा रेयर बीमारियों से जूझ रहे और भी पेशेंट्स की तरफ से याचिका लगाई गई है. एडवोकेट आदित्य ने हमें बताया,

‘सरकार की तरफ से गंभीर बीमारियों के इलाज के खर्च में मरीजों की मदद करने की व्यवस्था है. राष्ट्रीय आरोग्य निधि स्कीम के तहत मरीजों की मदद की जाती है. लेकिन इसमें अभी तक रेयर बीमारियों को शामिल नहीं किया गया है. 2017 में केंद्र सरकार ने इसे लेकर ड्राफ्ट निकाला था, लेकिन ये कानून नहीं बन पाया. मार्च 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए और एम्स को इसके लिए नोडल ऑफिस नियुक्त किया था. यानी एम्स को ये जिम्मेदारी दी गई कि वो रेयर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के आवेदन देखें और तय करें कि उनका ट्रीटमेंट क्या होगा और उन्हें कितना फंड दिया जाए. लेकिन, ये भी अभी इम्प्लिमेंट नहीं हो पाया है. इम्प्लिमेंटेशन को लेकर हमें कोर्ट के फैसले का इंतज़ार है.’

फिलहाल ये तय नहीं है कि हाईकोर्ट का फैसला कब तक आएगा और सरकार की तरफ से पायल या उनकी तरह रेयर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मदद कब तक की जाएगी.

दूसरी तरफ, पायल का 2007-2008 से लगातार इलाज चल रहा है. ऐसे में उनके परिवार के पास जो भी सेविंग्स थीं, जो भी पैसे थे वो उनके इलाज में खर्च हो गए. पायल कहती हैं कि उनकी पूरी जर्नी में उनकी मां उनका सबसे बड़ा सपोर्ट रहीं. इसके साथ ही पायल, AIIMS के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, डॉक्टर हर्ष महाजन और देश-विदेश के कई डॉक्टरों के लगातार संपर्क में हैं. जो उनका हौसला बढ़ाते हैं. पायल ‘वॉरियर प्रिंसेस’ नाम से एक ब्लॉग चलाती हैं. जिसमें वो अपने अनुभव लिखती हैं. वो कविताएं भी लिखती हैं. हम उम्मीद करते हैं कि पायल जल्द से जल्द अपने इलाज के लिए फंड जुटाने में सफल हों और उनका समय पर ट्रीटमेंट हो पाए.


सेहत: कैसे हो जाता है मलाशय का कैंसर और इससे कैसे निपटें?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

बिहार के स्कूल में लड़कों को बांट दिए गए सैनिटरी पैड्स!

बिहार के स्कूल में लड़कों को बांट दिए गए सैनिटरी पैड्स!

हेडमास्टर बदले, तब सामने आया घोटाला.

शादी की वेबसाइट्स से 40 औरतों को ठग लिया, आप ये गलतियां बिल्कुल न करें

शादी की वेबसाइट्स से 40 औरतों को ठग लिया, आप ये गलतियां बिल्कुल न करें

शादी की हड़बड़ी आपको बहुत-बहुत भारी पड़ सकती है.

तीन महीने की प्रेग्नेंट फॉरेस्ट ऑफिसर के बाल खींचे, चप्पलों से पीटा

तीन महीने की प्रेग्नेंट फॉरेस्ट ऑफिसर के बाल खींचे, चप्पलों से पीटा

घटना का वीडियो वायरल है.

अर्चना गौतम अगर जीतीं तो चौराहे पर गर्दन कटा देंगे, हिंदू महासभा के प्रवक्ता का ऐलान

अर्चना गौतम अगर जीतीं तो चौराहे पर गर्दन कटा देंगे, हिंदू महासभा के प्रवक्ता का ऐलान

हिंदू महासभा के प्रवक्ता ने कांग्रेस प्रत्याशी अर्चना गौतम को हिंदू संस्कृति विरोधी बताया है.

केरल का चर्चित नन रेप केस, जिसमें आरोपी बिशप को बरी कर दिया गया है

केरल का चर्चित नन रेप केस, जिसमें आरोपी बिशप को बरी कर दिया गया है

2018 में सामने आया था मामला, पीड़ित नन ने पोप को भी लिखी थी चिट्ठी.

मॉडलिंग ऑफर के बहाने लड़कियों का सेक्सटॉर्शन करने के आरोप में कॉलेज स्टूडेंट गिरफ्तार

मॉडलिंग ऑफर के बहाने लड़कियों का सेक्सटॉर्शन करने के आरोप में कॉलेज स्टूडेंट गिरफ्तार

इंस्टाग्राम से की थी सेक्सटॉर्शन की शुरुआत.

छत्तीसगढ़ः मां पर बेटे का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा है

छत्तीसगढ़ः मां पर बेटे का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा है

इंटरफेथ शादियों में कैसे तय होता है बच्चे का धर्म?

राजस्थान: नाबालिग से गैंगरेप, प्राइवेट पार्ट में नुकीली चीज से कई वार किए

राजस्थान: नाबालिग से गैंगरेप, प्राइवेट पार्ट में नुकीली चीज से कई वार किए

बोल और सुन नहीं सकती है पीड़िता. दिमागी हालत भी ठीक नहीं है.

अपहरण, यौन शोषण, विक्टिम शेमिंगः पांच साल में एक्ट्रेस भावना मेनन के साथ क्या-क्या हुआ

अपहरण, यौन शोषण, विक्टिम शेमिंगः पांच साल में एक्ट्रेस भावना मेनन के साथ क्या-क्या हुआ

एक्टर दिलीप के खिलाफ 9 जनवरी को केस दर्ज हुआ है. उन पर केस की जांच कर रहे अधिकारियों के खिलाफ साजिश करने का आरोप है.

जेंडर का सबूत देखने के लिए त्रिपुरा पुलिस ने चार LGBT सदस्यों के कपड़े उतरवाए

जेंडर का सबूत देखने के लिए त्रिपुरा पुलिस ने चार LGBT सदस्यों के कपड़े उतरवाए

विक्टिम्स का आरोप- पुलिस ने भारी ठंड में आधे कपड़ों में रखा, ज़मीन पर बैठाया.