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तालिबान का नया फरमान, 'बाप को सज़ा से बचाना है तो बुर्का पहनकर रहो'

तालिबान और तालिबान के नए-नए फ़रमान. फिर एक फ़रमान आया है – ‘महिलाओं को पब्लिक स्पेस में हेड-टू-टो बुर्का पहनना होगा, वर्ना पति या पिता को होगी सज़ा.’ फ़रमान आया तो ख़बर भी बनी. दुनिया के कई स्कॉलर्स और लेखकों ने कहा कि तालिबान सिस्टमैटिकली औरतों के भागीदारी कम कर रहा है. इन्हीं में एक नाम है नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफ़ज़ई का. मलाला ने कहा कि ये अफ़ग़ानिस्तान में सार्वजनिक जीवन से लड़कियों और महिलाओं को मिटाने की कोशिश है. इस फरमान को लेकर अमेरिका ने भी आपत्ति दर्ज कराई है. और कई औरतें इसके खिलाफ लिख रही हैं.

‘बुर्का पहनो नहीं तो पापा को सज़ा देंगे’

अफ़ग़ानिस्तान क़ब्ज़े के बाद से ही तालिबान ने एक के बाद एक महिलाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं. सबसे पहला काम ये किया कि महिला मंत्रालय बंद कर दिया. लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा पर रोक लगा दी.‌ टीवी सीरियल्स में महिलाओं के दिखने पर रोक लगा दी. पिछले साल दिसंबर में आदेश निकाला कि महिलाएं 45 मील यानी 72 किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र अकेले नहीं कर सकतीं. कई प्रांतों में महिलाओं को हमाम (सार्वजनिक स्नानघर) इस्तेमाल करने से बैन कर दिया. वेतन को लेकर भी कई महिलाएं महीनों से संघर्ष कर रही हैं.

अब तालिबान के नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा का फरमान आया है, जिसमें कहा गया है,

“वे महिलाएं जो बहुत बूढ़ी या छोटी नहीं हैं, उन्हें शरिया के मुताबिक़, आंखों को छोड़कर अपना पूरा चेहरा ढंकना चाहिए. ताकि जब वो ऐसे पुरुषों से मिलें जो महरम (वयस्क करीबी पुरुष रिश्तेदार) न हों, तो पुरुष ‘उत्तेजित’ न हो जाएं. ऐसा न करने पर महिला के पिता या पुरुष रिश्तेदार को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा या नौकरी से निकाल दिया जाएगा.”

Women In Afghanistan
इसी ब्लू वाले बुर्के को ‘चदोरी’ कहते हैं, जो ज़्यादातर अफ़ग़ानिस्तान के इलाक़े में पहना जाता है (फोटो – रायटर्स)

एक आधिकारिक बयान में Promotion of virtue and Prevention of Vice Ministry ने कहा,

“किसी महिला के शरीर को ढकने वाले किसी भी कपड़े को हिजाब माना जाता है. बशर्ते वो इतना टाइट न हो कि शरीर के कर्व्स दिखें और न इतनी पतली हो कि उसके आर-पार दिखे.”

Malala ने क्या कहा?

मलाला युसुफ़ज़ई. नोबेल पुरस्कार विजेता. उन्होंने कहा,

“तालिबान लड़कियों और महिलाओं को अफ़ग़ानिस्तान में सार्वजनिक जीवन से मिटाना चाहता है. उन्हें पूरी तरह से अपने चेहरे और शरीर को ढकने के लिए मजबूर किया जा रहा है. ताकि लड़कियों को स्कूल से और महिलाओं को काम से बाहर रखा जा सके. उन्हें परिवार के पुरुष सदस्य के बिना ट्रैवल करने से भी वंचित कर दिया गया है.

हमें अफ़ग़ान महिलाओं के लिए अपनी चिंता नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि तालिबान अपने वादों को तोड़ता रहेगा. अब भी, महिलाएं अपने मानवाधिकारों और सम्मान के लिए लड़ने के लिए सड़कों पर उतर रही हैं. विशेष रूप से मुस्लिम देशों को उनके साथ खड़ा होना चाहिए.”

इस फरमान के सामने आने के बाद एक वीडियो भी वायरल हो रहा है. वीडियो है ईरानी जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद का. मसीह ने भी इस्लामिक कट्टरपंथी क़ानूनों के ख़िलाफ़ लगातार मोर्चा बुलंद किया है. उन्होंने अपना एक पुराना वीडियो दोबारा ट्वीट किया जिसमें वो इस्लामिक रूढ़िवाद और वेस्ट की हिपॉक्रिसी के बारे में बता रही हैं.

वीडियो में मसीह पहले एक बुर्का पहने हुए दिख रही हैं. कहती हैं,

“इस्लामिक रिपब्लिक मुझे ऐसे देखना चाहती है. तालिबान और ISIS हमें ऐसे देखना चाहते हैं.”

इसके बाद वह बुर्का उतारती हैं और कहती हैं,

“ये मैं हूं. असल में.

ईरान में मुझे कहा जाता था कि अगर मैं अपना हिजाब उतार दूंगी, तो मुझे मेरे बालों से लटका दिया जाएगा. मुझे स्कूल से निकाल दिया जाएगा. मुझे कोड़े मारे जाएंगे. मोरल पुलिसिंग के ठेकेदार मुझे पीटेंगे. अगर मेरा बलात्कार होता है तो यह मेरी ग़लती है. अगर मैं अपना हिजाब उतार दूं, तो मुझे औरत कहलाने के लायक़ भी नहीं माना जाएगा.

वही वेस्ट में अगर मैं अपनी कहानियां बताती हूं, तो मुझे इस्लामोफोबिक कहा जाएगा.

मैं मिडिल ईस्ट में रहने वाली एक औरत हूं और मैं इस्लामी कानूनों से डरती हूं. मैं उनकी बर्बरता से डरती हूं. फोबिया एक इल्लॉजिकल डर है, लेकिन ये मेरे अनुभव हैं. और, सिर्फ़ मेरे नहीं, मेरी जैसे हज़ारों महिलाओं के जो इस्लामिक क़ानून के शासन में रह रही हैं.”

तालिबान को लेकर US ने क्या कहा

न्यूज़ एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका ने कहा है कि वो तालिबान पर अपने हालिया फैसलों को उलटने के लिए दबाव बनाएगा. विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा,

“हम सीधे तालिबान से बात कर रहे हैं. अगर हमें लगता है कि इन फ़ैसलों को पलटा नहीं जाएगा, तो हमारे पास कई तरीक़े हैं. हम क़दम बढ़ाने के लिए तैयार हैं.”

हालांकि, उन्होंने संभावित स्टेप्स के बारे में बताया नहीं, कि वो एक ऐसे ग्रुप का हृदय परिवर्तन कैसे करेंगे जिसने सालों से लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों को कुचला है.


तालिबानी कानूनों के खिलाफ अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं का आंदोलन

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