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महिला आयोग की मेंबर ने पहले लड़कियों को लेकर घटिया बात कही, बवाल हुआ तो ये सफाई दी

“सख्ती तो खूब हो रही है. हम लोगों के साथ-साथ समाज को भी इसमें पैरवी करनी पड़ेगी. अपनी बेटियों को भी देखना पड़ेगा कहां जा रही हैं, किस लड़के के साथ बैठ रही हैं, मोबाइल को भी देखना होगा. सबसे पहले मैं सबको यही बोलती हूं कि लड़कियां मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं और यहां तक मैटर पहुंच जाता है कि उसको लेकर भाग जाती हैं शादी के लिए. कल मेरे पास एक मैटर आया बाल्मिकी की लड़की है और जाटव का लड़का है, बालमपुर में. कल वो लोग मेरे पास आए, उन पर ज्यादा सख्ती हुई तो उन्होंने शादी कर ली और फोटो डाल दी. अब गांव के लोग पंचायत करके कहते हैं कि आमने-सामने घर है, हम उसे घुसने नहीं देंगे. मैं अपील करूंगी कि घरवाले बेटियों को मोबाइल न दें. और दें तो उस पर पूरी निगाह रखें. सबसे पहले मैं मांओं को कहती हूं कि अपनी बेटियों का ध्यान रखें. ये सब मां की लापरवाही से बेटियों का ये हश्र होता है.”

ये पढ़ा आपने? हैरानी हुई? हमें भी हुई थी. इसलिए नहीं कि लड़कियों के लिए ऐसी बातें कही गईं. क्योंकि ऐसा तो हर चौथा व्यक्ति कहता है. कई लोगों को लगता है कि लड़कियों को अगर रेप, यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षित रखना है, तो उन पर कई सारी पाबंदियां लगा दो. इसलिए ऐसी बातें सुनने पर हमें हैरानी कतई नहीं होती. हम तो ये जानकर चौंक गए कि ये बात उत्तर प्रदेश महिला आयोग की एक महिला सदस्य ने कही. वो आयोग जो औरतों के हित में काम करता है. इन महिला का नाम है मीना कुमारी. किस कॉन्टेक्स्ट में इन्होंने ये बात कही, आपको बताएंगे डिटेल में.

मीना कुमारी से अलीगढ़ में रिपोर्टर्स ने सवाल किया था-

“लगातार रेप के मामले आ रहे हैं, अलीगढ़ और बरेली में भी बच्चियों के साथ ऐसा हुआ, तो क्या मानसिकता है कि तमाम कोशिशों के बाद भी ऐसे मामले नहीं रुक रहे हैं?”

क्या जवाब दिया?

इसी सवाल के जवाब में मीना कुमारी ने लड़कियों द्वारा मोबाइल फोन इस्तेमाल करने का मुद्दा उठा दिया. हालांकि अपने बयान में कहीं पर भी उन्होंने ‘रेप’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन ये ज़रूर कहा कि समाज को भी ऐसे मामले रोकने के लिए पैरवी करनी पड़ेगी. बेटियों पर ध्यान रखना होगा कि वो कहां जा रही हैं, किस लड़के के साथ बैठ रही हैं, मोबाइल पर भी नज़र रखना होगा. ये भी कहा कि घरवाले अपनी बच्चियों को मोबाइल न दें, दें तो निगाह रखें. आखिर में कहा कि मां अपनी बेटियों पर नज़र रखें, क्योंकि मां की लापरवाहियों के कारण ही बेटियों का ये हश्र होता है.

जैसे ही मीना कुमारी का ये बयान सामने आया, वायरल हो गया और बवाल मच गया. ज़ाहिर है ऐसा होना ही था. सपा प्रवक्ता जूही सिंह ने कहा कि ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ ‘महिला सशक्तिकरण’ के नारे की धज्जियां उड़ा दी गई हैं. कहा-

“बेटियां मोबाइल फोन पर बात करती हैं, इसलिए लड़कों के साथ भाग जाती हैं, इसलिए उन पर नज़र रखना चाहिए. ये उस आयोग की सदस्य हैं, जिसका मेंडेट है कि महिला अधिकारों को सुनिश्चित करे, बेटियों को सुरक्षित रखे. किस तरह के लोगों कि इन आयोगों में नियुक्ति होती है ये स्पष्ट है. ये बयान केवल वाहियात ही नहीं. इनके पद की गरीमा और इनके दायित्व के भी खिलाफ है. इनके ऊपर जांच होनी चाहिए. हम मांग करते हैं कि ऐसे लोग जो महिलाओं पर टीका-टिप्पणी करते हैं, इन्हें तुरंत पद से हटाना चाहिए. सरकार इस पर ध्यान दे.”

हमने इस पूरे मुद्दे पर मीना कुमार का भी पक्ष जानने की कोशिश की. अब चूंकि इतने सवाल उठ रहे हैं, तो उनका एक्सप्लेनेशन जानना ज़रूरी था. हमारे साथी नीरज ने उन्हें कॉल किया. मीना ने फोन पर कहा-

“मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, मेरे कहने का ये मतलब नहीं था.”

इसके बाद उन्होंने जाटव और किसी अन्य समाज के लोगों से जुड़े एक मुद्दे के बारे में कुछ-कुछ कहा, जिसका ज़िक्र उन्होंने अपने वायरल स्टेटमेंट में भी किया था. हमारे साथी ने वीडियो इंटरव्यू करने के लिए उनसे समय मांगा, मीना ने हामी भर दी. समय पर उन्हें कई बार कॉल किया गया, लेकिन फोन का जवाब नहीं दिया गया. आज तक से जुड़े स्थानीय पत्रकार ने हमें बताया कि मीना 55 किलोमीटर दूर अपने गांव चली गई हैं और किसी का भी फो नहीं उठा रही हैं.

वहीं ANI UP की रिपोर्ट की मानें तो, मीना कुमारी ने उनसे हुई बातचीत में अपने बयान पर सफाई दी. कहा-

“मेरे बयान को गलत तरीके से समझा गया. मैंने असल में ये कहा था कि पैरेंट्स को ये चेक करते रहना चाहिए कि उनके बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए कर रहे हैं या कुछ और कर रहे हैं. मैंने ये नहीं कहा कि अगर लड़कियां फोन इस्तेमाल करेंगी तो लड़कों के साथ भाग जाएंगी.”

महिला आयोग ने क्या कहा?

मीना के बयान पर बवाल मचने के बाद उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बिमला बाथम का भी बयान आया. उन्होंने सफाई देते हुए कहा-

“मीना कुमारी से अभी मेरी बात हुई है, उनका मोबाइल इस्तेमाल ना करने को दिए बयान में कोई इस तरह का इंटेंशन नहीं था. दरअसल उनके सामने बहुत सारे मामले मोबइल से संबंधित आए थे, इसी को लेकर उन्होंने नाबालिग लड़कियों को मोबाइल इस्तेमाल न करने और माता पिता को मोबाइल चेक करने की बात कही थी. बाकी लड़कियों के मोबाइल इस्तेमाल करना और भाग जाने वाली बात बेहद गलत है, हमेशा सोच-समझकर बात करना चाहिए, हम इसकी जांच करेंगे.”

मीना जी, आप महिला आयोग की सदस्य हैं, कम से कम आपसे तो हमने ये उम्मीद नहीं की थी कि आप लड़कियों के बारे में ऐसी घटिया बात कहेगीं. जो लड़कियां अपराध का शिकार होती हैं, आप उन्हीं पर लगाम लगाने कह रही हैं, आप ये भी तो कह सकती थीं कि मांएं अपने बेटों पर कंट्रोल रखें, ताकि वो किसी लड़की की ज़िंदगी खराब न करे. दूसरा मुद्दा- केवल फोन इस्तेमाल करने वाली औरतें ही अपराध का शिकार नहीं होतीं. वो लड़कियां भी होती हैं, जिनके पास फोन नहीं होता या जो छोटी बच्चियां होती हैं. कई बार तो घर के पुरुष ही उनका यौन शोषण करते हैं. इसमें आप मोबाइल वाला मुद्दा कैसे फिट करेंगी?

हां, ये सच है कि मोबाइल का गलत इस्तेमाल काफी ज्यादा हो रहा है, लेकिन आप इस फैक्ट से भी नहीं मुंह मोड़ सकते कि मोबाइल सुरक्षा भी देता है. आज तक डिजिटल के असिस्टेंट एडिटर और टेक जर्नलिस्ट मुन्ज़िर अहमद कहते हैं कि स्मार्ट फोन आज की तारीख में महिलाओं की सुरक्षा के लिए काफी अहम हो गया है. बहुत सारे सिक्योरिटी फीचर उसमें होते हैं. जैसे लोकेशन को ट्रैक किया जाता है. SOS नाम का एक फीचर होता है, जैसे अगर फोन में नेटवर्क न भी हो तो वैसी स्थिति में पुलिस से संपर्क किया जा सकता है. दूसरी चीज़ लोकेशन शेयरिंग जैसी चीज़ भी काफी अहम है. खतरे के हालात में एक बटन दबाने के बाद आप लोकल पुलिस अथॉरिटी को जानकारी दे सकते हैं.


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