Submit your post

Follow Us

कोविड अस्पताल में दिन-रात ड्यूटी करती रहीं नर्स, प्रेगनेंट हुईं तो बिना नोटिस नौकरी से निकाल दिया

उत्तर प्रदेश में एक ज़िला है- गोंडा. यहां पिछले साल ज़िला अस्पताल से लगा हुआ एक नया वॉर्ड शुरू किया गया था. जहां पर कोविड के मरीज़ों का इलाज हो रहा है. इसे कोविड अस्पताल नाम दिया गया था. अब इसी अस्पताल से जुड़ी एक खबर हाल ही में हमें मिली. ये कि यहां काम कर रही चार प्रेगनेंट नर्सों को अस्पताल ने तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटा दिया गया है. क्या है ये पूरा मामला? नर्सों का क्या कहना है? अस्पताल प्रशासन और अधिकारी इस पर क्या कहते हैं? सबके जवाब देंगे एक-एक करके.

क्या है मामला?

जिन चार नर्सों को निकाला गया है, उनके नाम हैं- लक्ष्मी सिंह, प्रियंका जॉन, प्रियंका आनंद और सीमा द्विवेदी. नर्स लक्ष्मी की कुछ दिन पहले ही डिलीवरी हुई है. बाकी नर्सों की डिलीवरी की तारीख आने वाली है. पिछले साल जब गोंडा का ये कोविड अस्पताल खोला गया था, तब चारों नर्सों की जॉइनिंग हुई थी. CLC यानी शहरी आजीविका केंद्र नाम की एक आउटसोर्सिंग कंपनी के ज़रिए नौकरी मिली थी. CLC, ज़िला नगरीय विकास अधिकरण (डूडा) द्वारा संचालित एक कंपनी है. इन नर्सों को अस्पताल ने तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर रखा था, जो कि समय-समय पर रिन्यू होता गया. इन नर्सों ने ‘ऑडनारी’ को बताया कि इन्हें कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू होने की लिखित में कोई जानकारी नहीं दी गई थी, लेकिन मौखिक तौर पर बताया गया था कि कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2021 तक रिन्यू हो गया है.

Gonda Covid Hospital (3)
गोंडा का कोविड अस्पताल, जहां पर ये नर्स काम करती थीं. (फोटो- अंचल श्रीवास्तव)

अब सवाल आता है कि फिर अचानक से नौकरी से निकाल क्यों दिया? इसका जवाब जानने के लिए हमने नर्स प्रियंका जॉन, प्रियंका आनंद और सीमा द्विवेदी से बात की. प्रियंका आनंद ने हमें बताया कि उन्हें और उनकी अन्य तीन साथियों को केवल इसलिए निकाला गया, क्योंकि वो प्रेगनेंट थीं. जब मैटरनिटी लीव की मांग की गई, तो देने से मना कर दिया गया. प्रियंका का कहना है कि अप्रैल के पहले से ही अस्पताल प्रशासन को पता है कि चार नर्स प्रेगनेंट हैं, लेकिन तब उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई, उनसे काम लिया गया, और फिर अचानक से बर्खास्तगी के लेटर पर साइन करने कह दिया. प्रियंका ने बताया-

“प्रेगनेंट होने के चक्कर में एक महिला को निकाला जा रहा है क्या ये सही है? अभी तक हम लोगों ने कोविड अस्पताल में काम किया. हम लोगों ने जब मैटरनिटी लीव लेनी चाही, मांग की, तो उन्होंने मना कर दिया. कह दिया कि मैटरनिटी लीव नहीं मिल सकती. कहा कि आप लेटर पर साइन करिए और जाइए. हम लोगों को कोई भी जानकारी नहीं दी गई, बल्कि उन्हें पता था कि हम प्रेगनेंट हैं. फिर भी हमसे काम लिया गया. हमने जब मैटरनिटी लीव की मांग की तो इन्होंने बहुत बदतमीज़ी से बात की. कहा कि चले जाओ यहां से. जिस दिन हमें लेटर पकड़ाया गया, नए चार स्टाफ भी भर्ती कर लिए गए. बिना इंटरव्यू के.”

हमने नर्स प्रियंका जॉन से भी बात की. उन्होंने बताया कि जब वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू हुआ था, तब उनसे कहा गया कि वो वैक्सीन लगवा लें. लेकिन चूंकि वो प्रेगनेंट थीं, और अभी सरकार ने प्रेगनेंट औरतों को वैक्सीन लगवाने के लिए मना कर रखा है, इसलिए प्रियंका ने भी वैक्सीनेशन के लिए मना कर दिया. ये भी बताया कि प्रेग्नेंसी की वजह से वो ऐसा कर रही हैं. तीन फरवरी को उन्होंने अस्पताल प्रशासन को लेटर भी लिखा और प्रेग्नेंसी की जानकारी दी थी.

Up Gonda Covid Hospital
नर्स प्रियंका जॉन का लेटर, जो उन्होंने 3 फरवरी को लिखा था. (फोटो- प्रियंका जॉन)

प्रियंका जॉन का भी यही कहना है कि जब अस्पताल प्रशासन को फरवरी में ही पता चल गया था कि वो प्रेगनेंट हैं, तो फिर उसी वक्त उन्हें प्रोटोकॉल की जानकारी क्यों नहीं दी गई, क्यों तीन महीने तक उनसे काम करवाते रहे और एक दिन अचानक उन्हें जॉब से निकाल दिया. प्रियंका ने कहा-

“हम नर्सों ने जब CDO और बाकी अधिकारियों से बात की, तब CDO ने हमें ये बताया कि प्रेग्नेंसी कोविड प्रोटोकॉल के खिलाफ है. और मैटरनिटी लीव का कोई भी प्रावधान नहीं है. मिसबिहेव करते हुए हमारी कोई बात नहीं सुनी गई. हमारी बेइज्ज़ती करके अस्पताल से निकाल दिया गया. 26 अप्रैल तक हमने काम किया. हमने फरवरी में ही लिखित रूप से बता दिया था कि हम प्रेगनेंट हैं. तब प्रशासन को प्रोटोकॉल की कोई याद नहीं रही. आज जब मैटरनिटी लीव मांगी गई, तब प्रोटोकॉल समझाया गया. और नौकरी से निकाल दिया गया.”

स्टाफ नर्स सीमा द्विवेदी से भी हमने बात की. उन्होंने भी बताया कि उन्होंने फरवरी में लेटर लिखकर जानकारी दी थी कि वो प्रेगनेंट हैं, लेकिन तब उन्हें कुछ नहीं कहा गया और कोविड वार्ड में ड्यूटी कंटिन्यू रखी गई. सीमा ये भी कहती हैं कि जॉइनिंग के वक्त उन्हें ये नहीं बताया गया था कि प्रेगनेंट होने पर उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है, ये कदम तब उठाया गया जब उन्होंने मैटरनिटी लीव की मांग रखी. सीमा ने कहा-

“जब हम लोगों की जॉइनिंग हुई, तब हमें ये नहीं बताया गया था कि अगर आप लोग बीच में प्रेगनेंट हो जा रही हैं तो आपको जॉब से निकाला जा सकता है. जब हम प्रेगनेंट हुए, तो हम चारों ने फरवरी में एक लेटर के ज़रिए इस बात की जानकारी दी. जानकारी मिलने के बाद भी कोविड अस्पताल में कोविड मरीज़ वार्ड में हमारी ड्यूटी लगी, हमने पूरा योगदान दिया. फिर जब हमने मैटरनिटी लीव की बात की, तो यहां के CMS और SIC सर ने लीव देने से मना कर दिया. हमें बिना पेमेंट के भी मैटरनिटी लीव दे देते, फिर जब छुट्टी खत्म होती तो दोबारा जॉइन करवा लेते, लेकिन इन्होंने तो नौकरी से ही निकाल दिया.”

Gonda Covid Hospital (4)
प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो- PTI)

नर्सों ने अस्पताल प्रशासन के ऊपर नाइंसाफी करने के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उन्हें कुछ महीने की लीव दे देते, भले ही इस दौरान सैलेरी न देते, लेकिन कम से कम नौकरी से तो नहीं निकालते. ये बात उन्होंने अस्पताल प्रशासन के सामने रखी भी थी, लेकिन किसी ने उनकी मांग नहीं सुनी. सीधा ये कह दिया गया कि मैटरनिटी लीव नहीं दे सकते. इसके अलावा नर्सों ने चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर यानी CDO शशांक त्रिपाठी पर भी आरोप लगाए हैं. नर्सों का कहना है कि 27 अप्रैल के दिन जब CDO अस्पताल आए थे दौरे पर, तब उन्होंने नर्सों से कहा कि वो अब इस अस्पताल में नहीं आएंगी और यहां से चली जाएं. और ये बात CDO ने काफी गुस्से में चिल्लाते हुए कही थी.

अस्पताल प्रशासन क्या कहता है?

जितनी भी नर्सों से हमने बात की, हमें ये पता चला कि प्रेगनेंट होने की वजह से उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. मैटरनिटी लीव न देकर सीधे छुट्टी ही कर दी गई. इन गंभीर आरोपों पर अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने की भी हमने कोशिश की. ‘इंडिया टुडे’ से जुड़े पत्रकार अंचल श्रीवास्तव ने अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉक्टर घनश्याम सिंह से बात की. उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि प्रेगनेंट नर्सों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाया गया था. कहा कि एडवांस प्रेग्नेंसी की स्थिति में नौकरी नहीं कराई जा सकती. मैटरनिटी लीव के सवाल पर कहा कि चूंकि वो नर्स कॉन्ट्रैक्ट पर हैं, तो उन्हें मैटरनिटी लीव नहीं मिलती. डॉक्टर घनश्याम ने कहा-

“इस वक्त संक्रमण काफी ज्यादा आ रहे हैं. और इन नर्सों की प्रेग्नेंसी एडवांस स्टेज में पहुंच गई है. ऐसी स्थिति में हम उनसे ड्यूटी नहीं करवा सकते. वैसे भी वो आउटसोर्सिंग के ज़रिए यहां आई थीं, तो उसमें कोई मैटरनिटी लीव भी नहीं मिलती. उनसे हमने छुट्टी लेने के लिए कहा था, ये कि छुट्टी लेकर जाइए, लेकिन वो तैयार नहीं थी. फिर हमने आउटसोर्सिंग कंपनी को लेटर लिखकर उन्हें हटा दिया.”

Gonda Covid Hospital (2)
डॉक्टर घनश्याम सिंह (फोटो- अंचल श्रीवास्तव)

गोंडा कोविड अस्पताल में तैनात डॉक्टर दीपक कुमार से भी हमने इस सिलसिले में बात की. उन्हीं की साइन के साथ CLC को वो लेटर भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि चारों नर्सों को कोविड अस्पताल से हटाया जा रहा है. डॉक्टर दीपक का कहना है-

“नर्सों की प्रेग्नेंसी की एडवांस स्टेज चल रही थी. ऐसे में कोविड से उन्हें खतरा होने का डर ज्यादा था. इसलिए ये कदम उठाया गया. जनवरी, फरवरी और मार्च में कोविड के मामले ज्यादा थे भी नहीं, इसलिए उस समय उन्हें जाने के लिए बोलने का कोई मतलब नहीं था. जब मामले बढ़े तो हमने ये कदम उठाया. हमने CDO सर के सामने कहा गया कि अभी आप कुछ दिन घर पर रहो, क्योंकि आपकी डिलीवरी होनी है, जब आपकी ज़रूरत होगी तो हम दोबारा आपको रख लेंगे. CDO सर ने यही कहा भी है. हमने चार नए लोगों को उनकी जगह अभी इसलिए रख लिया है क्योंकि स्टाफ की ज़रूरत है. मामले बढ़ रहे हैं. किसी प्रेगनेंट महिला को कोविड वार्ड में घुसाना गलत है. रही बात मैटरनिटी लीव की, तो अगर उनकी आउटसोर्सिंग कंपनी में प्रावधान है, तो वो ले लें. हमें कोई दिक्कत नहीं है. वो कर लें लीव के लिए CLC से बात.”

इस मुद्दे पर हमने CDO शशांक त्रिपाठी से भी बात की. उन्होंने कहा-

“ऐसा नहीं है कि मैंने उन्हें पहली बार कहा और पहली बार में ही चिल्ला दिया. हमने उन्हें बार-बार कहा था कि आप मत आइए, क्योंकि आप प्रेगनेंट हैं, वैक्सीन भी नहीं लगी है, ऐसे में कोविड अस्पताल में आपको खतरा ज्यादा है. गाइडलाइन्स आई हैं कि कोविड ड्यूटी में प्रेगनेंट औरतों को नहीं रखना है, मैं उसी का पालन कर रहा था. कई बार कहने के बाद भी जब वो नहीं मानीं तो मुझे गुस्सा आ गया था. हालांकि बाद में मैंने एक नर्स के पति से कहा भी कि मैं माफी चाहता हूं कि मैंने ऊंची आवाज़ में बात की. लेकिन मैं उनके और उनके आने वाले बच्चे की भलाई के लिए ऐसा कह रहा था. रही बात मैटरनिटी लीव की, तो कॉन्ट्रैक्ट में ऐसा प्रावधान नहीं है. मैंने अपनी तरफ से उन नर्सों को कहा है कि वो कुछ दिन आराम करें, जब डिलीवरी हो जाएगी, कुछ महीने बीत जाएंगे तो हम उन्हें दोबारा अपॉइंट कर लेंगे.”

हर जगह ही ये बात आ रही है कि नर्सों के कॉन्ट्रैक्ट में मैटरनिटी लीव का कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए हमने CLC में काम कर रहे मिस्टर विवेक से बात की. उन्होंने बताया कि हां ये सच है कि नर्स जिस कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए अस्पताल में नियुक्त हुई थीं, उनमें मैटरनिटी लीव का प्रावधान नहीं है. हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि हमारी बहनों के साथ न्याय हो और उन्हें कहीं पोस्टिंग मिल जाए.

यहां तक ये क्लीयर हो गया है कि कॉन्ट्रैक्ट में मैटरनिटी लीव का कोई प्रावधान न होने के चलते चार नर्स इस वक्त बेहद परेशान हैं. हैरानी होती है कि आज भी कई लोग मैटरनिटी लीव को आराम का एक ज़रिए समझते हैं. इस केस में महिलाओं का प्रेगनेंट होना तो ऐसा हो गया मानो उन्होंने कोई बड़ा अपराध किया हो. क्या हम इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि कोई पुरुष बोले कि मैं बाप बनने वाला हूं, और उसका बॉस उसे नौकरी से निकाल दे. नहीं. ऐसा कहीं नहीं हुआ न होगा. फिर होने वाली मां के साथ इतनी नाइंसाफी क्यों है? मैटरनिटी लीव लेना हर औरत का अधिकार है. इसलिए क्योंकि पुरुष के पास पैटरनिटी लीव नहीं होती. कहीं कहीं पर मिलती भी है तो सिर्फ सात दिन की. अब आप सोचिए कि सात दिन में क्या ही होगा. इसलिए पूरी ज़िम्मेदारी मां के पास ही आ जाती है. ऐसे में मैटरनिटी लीव का प्रावधान न रखकर, क्यों एक महिला से उसकी नौकरी छीनी जाती है. उसे ये क्यों अहसास कराया जाता है कि उसने पाप किया है.


वीडियो देखें: कोविड पेशेंट्स के लिए ऑक्सीजन मांग रही लड़कियों को अश्लील फोटो भेजने वाले कौन हैं?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

पत्नी का आरोप- जबरन सेक्स के चलते पैरालाइज़ हुई, कोर्ट बोला- सहानुभूति, पर पति की गलती नहीं

पत्नी का आरोप- जबरन सेक्स के चलते पैरालाइज़ हुई, कोर्ट बोला- सहानुभूति, पर पति की गलती नहीं

महिला ने दहेज प्रताड़ना का केस किया, कोर्ट ने ससुराल वालों को एंटीसिपेटरी बेल दे दी.

पसंद के लड़के के साथ जाकर शादी की तो पूरे परिवार ने मिलकर मार डाला

पसंद के लड़के के साथ जाकर शादी की तो पूरे परिवार ने मिलकर मार डाला

एक महीने पहले लड़की ने पुलिस को बताया था कि उसे डर है कि परिवार वाले उसे मार डालेंगे.

बाप ने बेटी की बलि चढ़ा दी, वजह घृणा से मन भर देगी

बाप ने बेटी की बलि चढ़ा दी, वजह घृणा से मन भर देगी

आरोपी असम के चाय बागान में काम करता था, हत्या के बाद शव नदी में बहाया.

चिट पर शायरी लिखकर लड़कियों पर फेंकते हो, तो बेट्टा! अब तुम्हारी खैर नहीं

चिट पर शायरी लिखकर लड़कियों पर फेंकते हो, तो बेट्टा! अब तुम्हारी खैर नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ-साफ बोल दिया है.

दो बड़े नेताओं के सेक्स टेप, एक निर्मम हत्या: भंवरी देवी केस में आरोपियों को कैसे मिली बेल

दो बड़े नेताओं के सेक्स टेप, एक निर्मम हत्या: भंवरी देवी केस में आरोपियों को कैसे मिली बेल

10 साल पहले इस केस ने राजस्थान में भूचाल ला दिया था.

'मुस्लिम लड़के हिंदू औरतों को मेहंदी लगाएंगे तो लव जिहाद हो जाएगा!'

'मुस्लिम लड़के हिंदू औरतों को मेहंदी लगाएंगे तो लव जिहाद हो जाएगा!'

क्रांति सेना के लोग मुस्लिम कारीगर के मेहंदी लगाते दिखने पर 'अपने स्टाइल' में सबक सिखाने की बात कर रहे हैं.

"रेप केवल 11 मिनट तक चला", ये कहकर महिला जज ने रेपिस्ट की सज़ा ही कम कर दी

जज के इस फैसले के खिलाफ इस देश के लोगों का अनोखा प्रदर्शन.

मुंगेर में जिस बच्ची के शरीर के साथ बर्बरता हुई, उसे लेकर पुलिस के हाथ क्या लगा?

मुंगेर में जिस बच्ची के शरीर के साथ बर्बरता हुई, उसे लेकर पुलिस के हाथ क्या लगा?

बच्ची के शव से एक आंख निकाल ली गई थी. उसकी उंगलियों को कुचला गया था.

पहले मैटरनिटी लीव नहीं दी फिर नौकरी से निकाला, अब हाई कोर्ट ने अफसरों की क्लास लगा दी

पहले मैटरनिटी लीव नहीं दी फिर नौकरी से निकाला, अब हाई कोर्ट ने अफसरों की क्लास लगा दी

आयरनी ये कि मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा है.

16 साल की लड़की का पति उससे संबंध बनाए तो ये IPC में रेप क्यों नहीं कहलाता?

16 साल की लड़की का पति उससे संबंध बनाए तो ये IPC में रेप क्यों नहीं कहलाता?

डियर कानून, यू आर ड्रंक, गो होम.