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उन्नाव में तीन दलित लड़कियों के साथ जो हुआ, वो पूरा मामला क्या है?

तीन लड़कियां. तीनों की उम्र 18 साल से कम. तीनों दलित समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. एक ही परिवार से हैं. यूपी के एक गांव में रहती थीं. एक शाम तीनों खेत की तरफ गईं. कुछ काम से. लेकिन फिर घर नहीं लौटीं. कुछ ऐसा हुआ कि उन तीन में से दो लड़कियों की मौत हो गई. और एक लड़की अभी इस वक्त, अस्पताल में भर्ती है. बहुत गंभीर हालत है उसकी. ज़िंदगी और मौत से लड़ रही है. हज़ारों आंखें उसकी सलामती की दुआ मांग रही हैं.

ये दर्दनाक घटना हुई है यूपी के उन्नाव ज़िले के एक गांव में. क्या है ये पूरा मामला? अभी तक जांच में क्या पता चला है? परिवार वाले क्या कह रहे हैं? किस तरह की राजनीति की जा रही है इस मामले पर? विस्तार से जानते हैं.

क्या है पूरी घटना?

घटना उन्नाव के असोहा थाने के तहत आने वाले एक गांव की है. ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार शिवेंद्र श्रीवास्तव और विशाल चौहान की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 फरवरी की दोपहर करीब तीन बजे एक ही परिवार की तीन लड़कियां पशुओं के लिए चारा लाने का बोलकर घर से निकलीं. खेत की तरफ. इनका खेत घर से करीब आधा किलोमीटर दूर था. शाम छह बजे तक लड़कियां घर नहीं पहुंचीं, तो घरवाले उन्हें खोजने निकले.

सात बजे के करीब तीन लड़कियां खेत में बेहोशी की हालत में पड़ी मिलीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों में से एक लड़की के पिता ने सबसे पहले तीनों को देखा था. उन्होंने मीडिया को बताया कि लड़कियों के गले में दुपट्टा बंधा हुआ था, और उसी दुपट्टे की उसी गांठ में उनके हाथ भी फंसे हुए थे. तीनों में से एक लड़की की मां का कहना है कि लड़कियों के मुंह से झाग भी निकल रहा था.

परिवार वालों को जैसे ही लड़कियां मिलीं, तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. उसके बाद उन्नाव ज़िला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने दो लड़कियों को मृत घोषित कर दिया. एक लड़की की हालत बहुत गंभीर थी, उसे शुरुआती इलाज देकर रात में ही कानपुर के रीजेंसी अस्पताल ले जाया गया. ये लड़की अभी इसी अस्पताल में भर्ती है. उसकी हालत नाज़ुक बनी हुई है.

तीनों लड़कियों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने दो को मृत घोषित कर दिया. तीसरी की हालत क्रिटिकल बनी हुई है.
तीनों लड़कियों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने दो को मृत घोषित कर दिया. तीसरी की हालत क्रिटिकल बनी हुई है.

‘इंडिया टुडे’ से जुड़े पत्रकार रंजय सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, रीजेंसी अस्पताल के डॉक्टरों का पैनल गंभीरता से इलाज कर रहा है. 17 फरवरी की रात में ही लड़की वेंटीलेटर पर चली गई थी, उसकी हालत में अभी कोई सुधार देखने को नहीं मिला है. अस्पताल में किसी को भी लड़की और उसके परिवार वालों से मिलने या देखने नहीं दिया जा रहा है. अस्पताल के पीआरओ परमजीत सिंह ने बताया कि छह डॉक्टरों का पैनल लड़की का का इलाज कर रहा है. उसके शरीर पर अभी तक कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं. डॉक्टरों का कहना है कि उनका मकसद किसी भी तरह से लड़की को बचाना है. और क्या कहा परमजीत सिंह ने, पढ़िए-

“लड़की जिस समय आई थी, उस समय शॉक की कंडीशन में थी. अभी उसकी हालत क्रिटिकल है.रात को 11 बजे वो इमरजेंसी में आई थी. इस समय आईसीयू में है. उसकी पूरी देखरेख हो रही है. अभी स्टेबल है. उसे बेस्ट पॉसिबल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है. हम यही आशा कर रहे हैं कि वो जल्दी से ठीक हो जाए. यह जहर देने का संदिग्ध केस है. जांचे चल रही हैं. शरीर पर किसी चोट का निशान नहीं है. कुछ टाइम के बाद ही हम कुछ और कह पाएंगे.”

वहीं बाकी दोनों लड़कियों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था. इस पर शुरुआती रिपोर्ट्स आ चुकी हैं. इसके मुताबिक, दोनों लड़कियों के शरीर में किसी तरह का ज़हरीला पदार्थ मिला है. हालांकि अभी ये नहीं पता चला है कि ये पदार्थ किस प्रकार का है और लड़कियों तक ये पहुंचा कैसे. पुलिस अब ज़हर का पता लगाने की कोशिश कर रही है. जो ज़हरीला पदार्थ लड़कियों के शव में से मिला, उसके सैंपल्स को जांच के लिए आगे लैब में भेजा जा चुका है. जिन दो लड़कियों की मौत हुई उनके बीच बुआ-भतीजी का रिश्ता था, तीसरी जो लड़की अस्पताल में भर्ती है, वो एक मृत लड़की की चचेरी बहन है.

पुलिस क्या कह रही है?

अब बताते हैं कि इस मामले में परिवार और पुलिस का क्या कहना है? 17 फरवरी की शाम जब लड़कियां बेहोशी की हालत में मिलीं, तो तुरंत पुलिस को जानकारी दी गई. उन्नाव SP आनंद कुलकर्णी, ASP वीके पांडे समेत बाकी अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. और जांच शुरू की. हालांकि इस मामले में अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है और न ही किसी को हिरासत में लिया गया है. SP आनंद कुलकर्णी का कहना है कि परिवार वालों ने खुद अभी FIR दर्ज नहीं कराई है. साथ ही ये भी बताया कि मामले की जांच करने के लिए घटनास्थल का रिक्रिएशन किया जाएगा. ज़हरीले पदार्थ की बात सामने आने के बाद, गांव के कुछ लोग इसे आत्महत्या का मामला भी कहने लगे हैं. इन सभी मुद्दों पर ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार ने बात की SP से. उन्होंने क्या कहा, पढ़िए

“घटनास्थल पर सीन के रिक्रिएशन के लिए फॉरेंसिक टीम को बुलाया है. जिन दो लड़कियों की मौत हुई है, उनका पोस्टमार्टम हो चल रहा है. परिवार के लोगों के जो बयान हैं, हमने रिकॉर्ड किए हैं. सस्पेक्टेट पॉइजन देने के केस हैं. बॉडी पर कोई चोट नहीं मिली है. कुछ लोगों से पूछताछ की गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चीजें और साफ होंगी. सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है.”

इस मामले में यूपी पुलिस ADG लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने भी कुछ इसी तरह का बयान दिया है. उन्होंने क्या कहा, पढ़िए-

“उन्नाव में तीन बच्चियों के बेहोश होने की खबर आई थी. उनके परिवार वाले उन्हें अस्पताल भी ले गए. जहां दो बच्चियों की मौत हो गई. तीसरी का इलाज कानपुर के अस्पताल में चल रहा है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो आएग, उसके अकॉर्डिंग कार्रवाई की जाएगी. अभी फिलहाल परिवार वालों की लाइन पर हम कदम उठा रहे हैं.”

वहीं परिवार वालों ने मीडिया को बताया कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, गांव के किसी भी व्यक्ति ने लड़कियों को धमकाया नहीं था, किसी से कोई लड़ाई भी नहीं थी, इसलिए उन्हें किसी भी व्यक्ति पर शक नहीं है. परिवार के एक सदस्य ने ये कहा था कि लड़कियां जब मिली थीं, तब उनके हाथ बंधे हुए थे. लेकिन इसी परिवार की एक महिला, जो एक लड़की की मां है, उन्होंने हाथ बंधे होने वाली बात को गलत बताया था.

UP ADG लॉ एंड ऑर्डर Prashant Kumar ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी.
UP ADG लॉ एंड ऑर्डर Prashant Kumar ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस का कहना है कि सारे तथ्यों को जांचने के लिए एक-एक करके सभी परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है और गांव वालों से भी सवाल-जवाब किए जाएंगे. इस मामले में रेप की आशंका भी जताई जा रही है, लेकिन उसकी पुष्टि भी अभी नहीं हुई है. वहीं गांव के कुछ लोग धरने पर बैठे हैं, CBI जांच की मांग की जा रही है. इधर ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आई थीं कि पुलिस ने पीड़ित परिवार को ही थाने में बैठा लिया है, गांव में इसका भी विरोध हुआ था, हालांकि इन आरोपों पर पुलिस ने सफाई देते हुए कहा था कि किसी को भी नजरबन्द नहीं किया गया है और न ही किसी को थाने में बैठाया गया है. अब इस मामले में हत्या और आत्महत्या, दोनों की बातें हो रही हैं. लेकिन अभी तक हुई जांच में कुछ भी क्लीयर नहीं हो पा रहा है.

राजनीति भी हो रही है

इधर इस मामले में अब राजनीति भी शुरू हो चुकी है. विपक्षी पार्टियों के कुछ नेता लड़कियों के गांव में भी पहुंच रहे हैं. वहीं CPM नेता और कानपुर की पूर्व सांसद सुभाषिनी अली तो रीजेंसी अस्पताल भी पहुंच गईं, जहां पर तीसरी लड़की एडमिट है. और उन्होंने तो इस केस का अलग ही एंगल बता दिया. वो तो इस केस को तंत्र-मंत्र का मामला कह रही हैं. उन्होंने क्या कहा, पढ़िए-

“जो मैंने देखा और समझा है, उससे लगता नहीं है कि ये सीधा-सीधा जहर देने या आत्महत्या का मामला है. अभी तो वो लड़की कुछ कहने की स्थिति में नहीं है. लेकिन जो भाई का बयान है कि लड़कियों के हाथ-पैर बंधे हुए थे और मुंह से झाग भी निकल रहा था. ये सीधा सा केस नहीं है. या तो इसमें तंत्र-मंत्र का कोई मामला है या फिर उनके ऊपर हमले का कोई मामला है. हालांकि, परिवार के लोग बता रहे हैं कि उनके शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं. लेकिन कहीं ना कहीं ये हमले का मामला है.”

अब एक नज़र सोशल मीडिया पर डालते हैं. मामला सामने आने के बाद से ही तरह-तरह के नेता अपनी-अपनी बात लिख रहे हैं. ज़ाहिर तौर ये घटना यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. विपक्षी पार्टियों के नेता लगातार योगी सरकार से तीखे सवाल पूछ रहे हैं, जो पूछे जाने निश्चित तौर पर ज़रूरी हैं.

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने फेसबुक पर लिखा-

“उन्नाव की घटना दिल दहला देने वाली है. लड़कियों के परिवार की बात सुनना एवं तीसरी बच्ची को तुरंत अच्छा इलाज मिलना जांच – पड़ताल एवं न्याय की प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी है. खबरों के अनुसार पीड़ित परिवार को नजरबंद कर दिया गया है. यह न्याय के कार्य में बाधा डालने वाला काम है. आखिर परिवार को नजरबंद करके सरकार को क्या हासिल होगा. यूपी सरकार से निवेदन है कि परिवार की पूरी बात सुने एवं त्वरित प्रभाव से तीसरी बच्ची को इलाज के लिए दिल्ली शिफ्ट किया जाए.”

उन्नाव की घटना दिल दहला देने वाली है। लड़कियों के परिवार की बात सुनना एवं तीसरी बच्ची को तुरंत अच्छा इलाज मिलना जांच -…

Posted by Priyanka Gandhi Vadra on Wednesday, February 17, 2021

भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आज़ाद ने ट्वीट किया-

“हाथरस की घटना में सरकार ने बेटी को दिल्ली रेफ़र करने में बहुत देर लगाई. हमारी मांग उन्नाव की बेटी के जीवन की सुरक्षा के लिये है. सरकार हमारी मांग मानने में देरी क्यों कर रही है जबकि ये सबसे जरूरी कदम है. Cm चुप्पी तोड़े वरना अब मजबूरी में एक ही रास्ता बचेगा कि हम #उन्नाव_कूच करें.”

ट्विटर पर कई सारे लोग ये मांग कर रहे हैं कि पीड़ित बच्ची को AIIMS शिफ्ट किया जाए. कांग्रेस ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये सवाल पूछा है कि लड़की को अभी तक एयरलिफ्ट करके एम्स क्यों नहीं लाया गया है. यूपी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा-

“वो लड़की सच्चाई सामने ला सकती है. योगी सरकार औरतों और लड़कियों के लिए श्राप बन गई है. अपराधी खुले घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार थाने में बैठा है. यूपी औरतों और लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराधों का और रेप का केंद्र बन गया है. स्मृति ईरानी चुप क्यों हैं? वो यूपी से सांसद हैं. महिला और बाल विकास मंत्री हैं. ये दो इंजिन की सरकार है. फिर लड़कियों को सुरक्षा और इंसाफ क्यों नहीं. पहले हाथरस फिर अब उन्नाव. योगी सरकार फेल हो गई. लगता है बेटी बचाओ एक चेतावनी वाला स्लोगन था.”

ये पूछने के लिए कि पीड़ित बच्ची को AIIMS क्यों नहीं शिफ्ट किया जा रहा और सरकार किस तरह की मदद पीड़ित परिवार को दे रही है, हमने उन्नाव सांसद साक्षी महाराज से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन बात हो नहीं सकी. खैर, ये मांग उठने के पहले साक्षी महाराज ने ‘इंडिया टुडे’ से बात की थी. तब उन्होंने क्या कहा था, पढ़िए-

“इस घटना को जब से सुना है, तब से मैं भी दुखी हैं. मैंने प्रशासन के लोगों और अपने संपर्कों से पता करने की कोशिश की है कि आखिरकार मामला क्या है. लेकिन पुलिस भी अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है. परिवार के लोग भी अभी तक किसी पर आरोप नहीं लगा पाए हैं. पोस्टमार्टम चल रहा है. हम परिवार को उनकी बेटियां तो वापस नहीं दे सकते. लेकिन योगी जी की सरकार और प्रशासन अपराधियों को सजा देने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली है.”

वहीं ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार कुमार अभिषेक की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की को एम्स में शिफ्ट करने का सरकार का अभी कोई प्लान नहीं है, सरकारी सूत्रों का कहना है कि लड़की को रीजेंसी अस्पताल में बेस्ट ट्रीटमेंट दिया जा रहा है. ट्विटर पर कई सारे लोग उन्नाव की इस घटना पर योगी सरकार से सवाल पूछ रहे हैं. इस घटना पर सरकार का विरोध कर रहे हैं, कैसे ट्वीट किए जा रहे है, आप अभी अपनी स्क्रीन पर देख रहे हैं- इस मामले में एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने भी ट्वीट किया. कहा-

“और क्या होना बाक़ी है???? उत्तर प्रदेश में और क्या होना है कि अजय बिष्ट की सरकार का इस्तीफ़ा मांगा जा सके.. और राष्ट्रपति शासन लागू हो?”

 


एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने लिखा-

“धरती पर ही स्वर्ग और नर्क होता है, और उन्नाव औरतों के लिए नर्क है. खासतौर पर ज्यादा कमज़ोर औरतों के लिए. उस लड़की के लिए प्रार्थना कर रही हूं, जो ज़िंदगी के लिए लड़ रही है. उन्नाव हाथरस नहीं बनेगा. अब न्याय होगा.”

इसके अलावा ट्विटर पर आम जनता भी लगातार इस मुद्दे पर लिख रही है. उनके ट्वीट्स भी आप अपनी स्क्रीन पर देख रहे होंगे. (कुछ सेंकेंड्स रोककर ट्वीट्स फ्लैश करने हैं). ट्विटर पर #DalitLivesMatter भी ट्रेंड कर रहा है. इतना बवाल होने के बाद अभी कुछ घंटे पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ की तरफ से ट्वीट किया गया. जहां उन्होंने कहा-

“जनपद उन्नाव की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. UP DGP को प्रकरण की पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिए हैं. अस्पताल में भर्ती पीड़िता का सरकारी व्यय पर बेहतर से बेहतर एवं नि:शुल्क इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है.”

 


लड़कियों के पास ज़हर कैसे पहुंचा? खेत में जाने के बाद दोपहर तीन बजे से छह बजे के बीच क्या-क्या हुआ था, इस पर अभी हम कुछ भी नहीं कह सकते. क्योंकि इससे जुड़ी कोई भी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. लेकिन हमारी इस मुद्दे पर कड़ी नज़र है. हम दुआ करते हैं कि अस्पताल में एडमिट लड़की जल्द से जल्द ठीक हो जाए और सच सामने आ सके.

अपडेट– इस मामले में पिता की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है. शिकायत में पिता ने यह भी कहा कि लड़कियां दुपट्टे से बंधी थीं और उनके मुंह से झाग निकल रहा था. पुलिस ने मामले की जांच के लिए छह टीमें बनाई हैं. वहीं दोनों मृत लड़कियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर की पुष्टि हुई है.

वीडियो- UP के उन्नाव में खेत में बंधी मिली तीन दलित लड़कियां, मचा हड़कंप

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