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झूठ बोलकर स्वरा से सेक्स वर्धक दवा के लिए ट्वीट करवाया, ये जवाब मिला

हम सब इस बात के गवाह रहे हैं कि जब से कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश में तबाही मचानी शुरू की, सोशल मीडिया एक दूसरे की मदद का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया. अनगिनत लोगों ने ऑक्सीजन, दवाई, प्लाज्मा और हॉस्पिटल बेड्स से जुड़ी जानकारियां साझा कीं. जिनको इनकी जरूरत थी, उनके मेसेज को आगे बढ़ाया गया. जिनको इनकी उपलब्धता की जानकारी थी, उनके संदेश जरूरतमंदों तक पहुंचाए गए. यह सब करते हुए हम सब अपने इंसान होने का फर्ज निभा रहे थे. लोगों के मैसेज मात्र यह सोचकर आगे बढ़ा रहे थे कि शायद कहीं से कोई मदद मिल जाए और किसी का कोई अपना बच जाए. अब जबकि संक्रमण के मामलों में कमी आई है, तब भी यह सिलसिला जारी है. सोशल मीडिया के जरिए लोग अभी भी एक दूसरे तक मदद पहुंचा रहे हैं. लेकिन कुछ लोगों ने इसका इस्तेमाल भी अपना राजनीतिक एजेंडा साधने के लिए शुरू कर दिया है. इसी का शिकार अभिनेत्री स्वरा भास्कर बनीं.

क्या हुआ Swara Bhaskar के साथ?

ट्विटर पर सनी नाम के एक यूजर ने इमरजेंसी मेसेज ट्वीट किया. जिसमें सुरेश चह्वाण नाम के कथित मरीज के लिए दवा मांगी गई. यह भी बताया गया कि कथित मरीज थाणे सिविल अस्पताल में भर्ती है. उसका कथित नंबर भी डाला गया. जो दवाई मांगी गई, उसका नाम बताया- सिलडेनाफिल. इसको कॉमन तौर पर वियाग्रा नाम से जाना जाता है. जी वही वियाग्रा, जिसका नाम सुनकर लोग अक्सर हंस देते हैं. वही वियाग्रा, जिसके लिए कहा जाता है कि यह यौन उत्तेजना बढ़ाती है. तो इस ट्वीट में सनी नाम के यूजर ने सिलडेनाफिल की 100 एमजी की एक डोज मांगी. बकायदा, स्वरा भास्कर से आग्रह किया कि वे इस ट्वीट को रीट्वीट कर दें.

कोरोना काल में हमने बहुत सी कठिन दवाइयों के नाम सुने हैं. मसलन, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन, रेमडेसिविर, फैबीफ्लू, डेक्सामेथासोन इत्यादि. ऐसे में शायद स्वरा को सिलडेनाफिल का नाम सुनकर लगा हो कि शायद ये दवाई भी कोरोना मरीजों के लिए जरूरी हो. स्वरा भास्कर कोई मेडिकल एक्सपर्ट तो हैं नहीं. भलाई की भावना से उन्होंने ट्वीट को रीट्वीट कर दिया. इस रीट्वीट के बाद उसी सनी नाम के यूजर ने उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की. अगल बगल दो स्क्रीनशॉट लगाए. एक एक्ट्रेस के रीट्वीट का और दूसरा जिसमें सिलडेनाफिल को वियाग्रा बताया गया.

सनी ने लिखा कि स्वरा इस IQ लेवल के साथ सरकार के फैसलों की आलोचना करती हैं. लब्बोलुआब यही कि स्वरा वियाग्रा को नहीं पहचान पाईं और चली हैं सरकार को चुनौती देने. हालांकि, ट्रोल करने की मंशा रखने वाला खुद कितना अतार्किक है, उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं.

ट्रोल यह आशा रखता है कि एक एक्ट्रेस, जिसका मेडिकल फील्ड में कोई स्पेशलाइजेशन नहीं है, वो किसी दवाई के फॉर्मूले वाले से नाम से उसकी पहचान कर ले. यह बिल्कुल वैसा ही है कि जैसे अमेरिका के किसी न्यूक्लियर साइंटिस्ट से आशा रखी जाए कि वो हिंदी साहित्य के किसी भक्तिकालीन कवि या कवियत्री का नाम सामने आते ही, उसकी जीवनी से लेकर समालोचना तक प्रस्तुत कर दे. और अगर ना कर पाए तो ये ट्रोल उसका आईक्यू लेवल जीरो घोषित कर दें. खैर, इस ट्वीट के बाद कुछ ऐसे भी ट्वीट आए, जिनमें सिलडेनाफिल के यूज के बारे में बताया गया. बताया गया कि इस दवाई का यूज यौन समस्याओं के अलावा फेफड़ों की एक बीमारी के इलाज के लिए भी होता है.

वैसे स्वरा को ट्रोल करने की कोशिश करने वाले शख्स को इतने लोगों ने लताड़ा कि अपना अकाउंट डिलीट करके वो उड़नछू हो गया. माने उसका अकाउंट डिलीट हो गया है.

स्वरा भास्कर केवल इस तरह के गुमनाम टाइप ट्रोल्स के निशाने पर ही नहीं रहतीं. ब्लूट टिक धारी लोग भी उनके ऊपर छिछली टिप्पणियां करते हैं. बीते दिनों कोविड सहायता से जुड़ा ही एक ऐड करने पर दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने उनके लिए बेहद भद्दी टिप्पणी की थी. श्रीवास्तव ने स्वरा को एक ऐसा ‘कुंदबुद्धि महिला’ घोषित कर दिया था, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में ‘वाइब्रेटर’ का पदार्पण कर उसे स्त्री सशक्तिकरण का प्रतीक बना दिया. बाद में श्रीवास्तव ने अपने मुंह की खाई और माफी मांगते हुए टिप्पणी वापस ले ली.

Swara Bhaskar
Swara Bhaskar

इस पूरे मामले पर हमने स्वरा से भी बात की. पढ़ें, वो क्या कहती हैंः

सवाल- आपने तो भलाई की भावना से ही उस ट्वीट को रीट्वीट किया होगा. इस तरीके से जो ट्रोल करने की कोशिश हुई, क्या अगली बार किसी की मदद करने में झिझक होगी?

जवाब- अव्वल तो यह समझना चाहिए कि ये दौर कोई समान्य दौर नहीं है. महमारी का दौर है. पूरा देश इससे गुजर रहा है. ऐसा नहीं है कि मुसीबत सिर्फ किसी एक के घर में आई है. ट्रोल करने वालों के यहां भी मुसीबत है. एक ऐसे समय में, जब सरकार के पास कुछ नहीं है देने को, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, सोशल मीडिया ने लोगों की बहुत मदद की है. सोशल मीडिया के जरिए सही में लोगों को मदद मिली है. मेरे अंदर इतनी समझ है, इतनी सामाजिक जिम्मेदारी है कि एक घटिया मजाक के चलते मैं लोगों की मदद करना बंद नहीं करूंगी.

सवाल- सेक्सिस्ट और कैरेक्टर असैसिनेशन करने वाले ट्रोल्स से किस तरह से निपटती हैं? खासकर जो ब्लू टिक धारी लोग करते हैं? मानसिक तनाव से किस तरह से डील करती हैं?

जवाब- ट्रोलिंग जो है, वो पीड़ित के चरित्र के बारे में कुछ नहीं बताती है. जो कर रहे हैं, उनके चरित्र के बारे में बहुत कुछ बता देती है. जो ट्रोलिंग हो रही है, जिस तरह की हो रही है, उससे मेरे बारे में लोगों को पता नहीं चलेगा. उससे तो अशोक श्रीवास्तव और उनके जैसे छिछोरी हरकतें करने वाले लोगों के बारे में पता चलेगा. सबसे ज्यादा तौहीन तो वे लोग अपने प्रोफेशन की कर रहे हैं. खुद अपनी कर रहे हैं. मुझे लगता है कि ये लोग इतने उम्रदराज हैं और गली चलते लफंगों जैसी हरकतें कर रहे हैं. इनको शर्म नहीं आती. अपनी उम्र नहीं देखते. चापलूसी करके जो ओहदा मिला है, उसका तक ख्याल नहीं रखते. जिस दुर्भाग्यपूर्ण महिला के पति हैं, उसका ही ख्याल कर लो. अपने बच्चों का ही ख्याल कर लो. मतलब, हर शर्म से आजाद हैं ये लोग.

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स्वरा भास्कर ने कहा कि उनमें इतनी समझ है कि वो एक बुरे अनुभव के चलते लोगों की मदद के लिए पोस्ट करना नहीं छोड़ेंगी. (फाइल फोटो)

सवाल- क्या पुलिस में शिकायत की है किसी ट्रोल की? इसके क्या इम्प्लिकेशन हो सकते हैं? खासकर उन युवाओं के लिए, जिन्होंने अभी-अभी दुनिया का जानना समझना शुरू किया है और किसी के बहकावे में आकर सोशल मीडिया पर उल्टी सीधी बातें लिखते रहते हैं.

जवाब- मैंने एक FIR दर्ज कराई थी दो लड़कों के खिलाफ. ऐसे लड़कों से मैं ये कहूंगी कि जो बकवास आप कर देते हैं, वो सही में भारी पड़ सकती हैं. किसी दिन मेरी जैसी किसी इंसान का दिमाग सनक जाएगा और हमने ये तय कर लिया कि सबक सिखाना ही है तो फिर दिक्कत हो जाएगी. तीन कॉन्सटेबल आएंगे. सबसे पहले तो पिटाई लगाएंगे. जो चीज आप कर रहे हैं, वो जुर्म है. पुलिस आपको किसी सड़क के क्रिमिनल की तरह ट्रीट करेगी. किसी हाई प्रोफाइल क्रिमिनल की तरह भी नहीं. पुलिस वाले तो वैसे भी ऐसे मामलों से चिढ़े हुए होते हैं. उन्हें हजारों किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. एक राज्य से दूसरे राज्य जाना पड़ता है. आपको ऊपर एक FIR दर्ज हो जाएगी. जो भविष्य में हर जगह रिफ्लेक्ट होगी.

Social Media
महामारी के दौर में सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के जरिए लोगों को बड़ी मदद मिली है.

ये तो स्वरा की बात हो गई. लेकिन इस तरह की ट्रोलिंग केवल स्वरा तक ही सीमित नहीं है. और ना केवल एक पॉलिटिकल स्पेक्ट्रम तक. महिलाएं सोशल मीडिया पर आए दिन गालियों, भद्दी बातों से दो चार होती हैं. गाली देने वाले कभी खुद को सत्ताधारी पार्टी का समर्थक बताते हैं तो कभी विपक्ष का. विपरीत विचारधाराओं का होने के बाद भी इस तरह के गलीज ट्रोल्स में एक बात जो कॉमन होती है, वो है स्त्री द्वेष. हालांकि, पुरुषों को भी इसी तरह से ट्रोल किया जाता है या कहें कि ऑनलाइन हरास किया जाता है, लेकिन उनका चरित्रहनन बमुश्किल ही होता है. होता भी है तो महिलाओं के मुकाबले इसका वॉल्यूम बहुत कम होता है. और अगर गलती से मदद मांगती महिलाएं अपना पर्नसल नंबर सोशल मीडिया पर साझा कर दें तो उनके लिए यह किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं होता.


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