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जेंडर का सबूत देखने के लिए त्रिपुरा पुलिस ने चार LGBT सदस्यों के कपड़े उतरवाए

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला. एक पार्टी से लौट रहे LGBTQ कम्युनिटी के चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. आरोप है कि पुलिस वालों ने इन चारों से कपड़े उतारकर ये साबित करने को कहा कि वो LGBTQ समुदाय से आते हैं. आरोप है कि पुलिस ने इन चारों से जबरन अंडरटेकिंग भी ली कि वो कभी भी क्रॉस ड्रेसिंग नहीं करेंगे. इन चारों ने पुलिसवालों के खिलाफ 10 जनवरी को अगरतला में FIR दर्ज करवाई है.

क्या है पूरा मामला 

चारों विक्टिम्स में से एक मोहिनी ने ऑडनारी से बात की. उन्होंने बताया,

“हम प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट हैं. 8 जनवरी को हम एक होटल के डीजे पार्टी में गए थे.  वहां हमारे साथ अभद्र व्यवहार होने लगा. लोग हमें छूने की कोशिश कर रहे थे और हमपर अश्लील फब्तियां कस रहे थे. रात के करीब 10: 40 बजे घर वापस आते वक्त, हमें एक रिपोर्टर समेत चार पुलिस वालों ने रोका. उन्होंने हमारे कपड़ों पर भद्दे कॉमेंट्स किये और हमें मेंटली हैरेस भी किया.  फिर वो हमें वेस्ट अगरतला के महिला पुलिस स्टेशन में  ले गए. थाने में उस वक़्त 12 से 14 लोग मौजूद थे जिसमें लगभग 8 पुरुष होंगे. हमें उन सब के सामने कपड़े उतारकर अपनी जेंडर आईडेंटिटी साबित करने के लिए मजबूर किया.”  

इन विक्टिम्स ने अगरतला प्रेस क्लब में 11 जनवरी को मीडिया से बात की और घटना की डिटेल मीडिया को दी.

पुलिस ने किया बुरा बर्ताव 

 

विक्टिम्स का कहना है कि थाने में उनके साथ गाली-गलौज और हाथापाई भी की गई. उन्होंने बताया कि उन्हें ज़मीन पर बैठाया गया और भारी ठंड में आधे कपड़ों में महिला पुलिस स्टेशन से वेस्ट अगरतला पुलिस स्टेशन ले जाया गया.

मोहिनी और उसके दोस्तों का कहना है कि उनपर बिना किसी सबूत के लोगों से जबरन वसूली करने का आरोप लगाया गया. पुलिस ने उनपर लड़कियों की तरह कपड़े पहनकर डान्सर का काम और देह व्यापार करने का आरोप भी लगाया. चारों विक्टिम्स ने वेस्ट अगरतला थाना में FIR दर्ज करवाई है.

FIR में उन्होंने लिखा है कि पुलिस ने उनकी विग और अंडरगारमेंट्स तक स्टेशन में जमा करवा लिए थे. उन्होंने आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

क्रॉस ड्रेसिंग क्या है ?

 

Cross Dressing
Cross Dressing

पुलिस ने चारों विक्टिम्स से अंडरटेकिंग लिया है कि वो क्रॉस ड्रेसिंग नहीं करेंगे. जब कोई व्यक्ति अपने जेंडर के लिए ‘निर्धारित’ माने गए कपड़ों से उलट कपड़े पहनता है तो उसे क्रॉस ड्रेसिंग कहते हैं. मसलन कोई पुरुष साड़ी या लहंगा पहन ले तो वो क्रॉस ड्रेसर कहलाएगा. इस पर एक विक्टिम राज का कहना है,

“एक LGBT अपनी आईडेंटिटी को किस तरह देखता है यह उनपर निर्भर करता है. वह आदमी या औरत की तरह रहना चाहते हैं, ये उनपर निर्भर करता है. हमने बार-बार कहा कि हम खुद को एक औरत की तरह देखते इसलिए हमने औरतों के कपड़े पहने हैं. बावजूद इसके हमें आदमियों के सामने कपड़े उतारने को मजबूर किया गया . ” 

एडवोकेट का क्या कहना है 

 

प्राइड
प्राइड प्रोटेस्ट की एक तस्वीर

इस मुद्दे पर विक्टिम ट्रांसपर्संस से कन्सल्ट कर रही एडवोकेट नीलांजना रॉय से हमने बात की . उनका कहना है कि यह घटना केवल ट्रांसजेंडर अधिकारों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का घोर खंडन है। उन्होंने कहा –

“लड़का या लड़की होने से पहले वो इंसान हैं. किसी भी मुकदमे में क्रॉस-ड्रेसिंग को अपराध नहीं माना जा सकता है.  यह अस्तित्व और पहचान के लिए संघर्ष की बात है.  हम न्याय पाने के लिए सभी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. हम जल्द ही उनके खिलाफ़ रिट पिटीशन फ़ाइल करेंगे .”

आपको बता दें कि रिट  पिटीशन उस व्यक्ति के विरुद्ध दायर किया जाता है, जो किसी दूसरे व्यक्ति को बंदी बनाकर अपने पास रखता है .

खबर देने वाले पत्रकार ने मांगी माफ़ी  

 

जिस पत्रकार पर पुलिस के साथ विक्टिम्स को परेशान करने का आरोप लग रहा है , उसने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें LGBTQ अधिकारों की जानकारी नहीं थी और उन्होंने दावा किया कि किसी ने उन्हें सूचित किया था कि कुछ लोग नकली जेंडर पहचान के साथ दूसरों को धोखा दे रहे हैं, इसलिए वह इस स्टोरी को कवर करने गए. लेकिन उन्होंने अपने मीडिया आउटलेट में इस समाचार को नहीं चलाया. उन्होंने कहा,

“इस मुद्दे का एहसास होने के बाद मैंने समाचार नहीं चलाया. लेकिन कुछ अन्य मीडिया संगठनों ने इस कहानी को कवर किया और चूंकि मैं अकेला ही सवाल पूछ रहा था, इसलिए वीडियो में मेरी आवाज सुनी गई और मुझे दोषी ठहराया जा रहा है. जो कुछ भी हुआ उसके लिए मुझे खेद है.”

LGBTQIA राइट ऐक्टिविस्ट ने लिया स्टैन्ड 

 

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प्रेस के साथ बात करती ट्रांसपर्सन और LGBTQIA राइट ऐक्टिविस्ट स्नेहा गुप्ता

त्रिपुरा की पहली ट्रांसपर्सन और LGBTQIA राइट ऐक्टिविस्ट स्नेहा गुप्ता विक्टिम्स के समर्थन में आईं.  प्रेस के साथ लाइव कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया,

“कुछ जर्नलिस्टों द्वारा बनाए गए घटना के वीडियोज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. उसमें सवाल उठाया जा रहा है कि लड़का होकर लड़की की तरह तैयार होना क्राइम है . मेरा सवाल है कि ये संविधान के किस हिस्से में लिखा है ? “

आगे उन्होंने कहा

 “पीड़ितों के साथ जो कुछ भी हुआ उसने पूरे समुदाय को मानसिक और भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाया है. लोगों को मनुष्य के समलैंगिक पहचानों के प्रति समावेशी होना सीखना होगा.”

इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए हमने वेस्ट अगरतला पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की कोशिश की . लेकिन उनकी तरफ़ से हमें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली .

आपको बता दें कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 377 हटाकर , समलैंगिकता को मान्यता प्रदान की . लेकिन आज भी LGBT कम्युनिटी के लोगों को अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है.


वीडियो- समलैंगिक विवाह पर दिल्ली हाईकोर्ट में सेंटर के तर्क को LGBT एक्टिविस्ट ने कहा संवेदनहीन

 

 

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