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चिट पर शायरी लिखकर लड़कियों पर फेंकते हो, तो बेट्टा! अब तुम्हारी खैर नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट का एक फैसला आज मैंने देखा. और फैसला पढ़ते ही मेरे दिमाग में बॉलीवुड फिल्मों की रील चलने लगी. वो हीरो का पत्थर से चिट्ठी लपेटकर लड़की के हॉस्टल की खिड़की से फेंकना. लड़की का पहले नाराज़ होना और फिर पिघल जाना. वो हीरो का हिरोइन को गंदे इशारे करना. वो लड़की का उसके साथ डांस करना. वो हीरो का पाइप से चढ़कर लड़की के घर पहुंच जाना. कहीं ये सब आपको रोमैंटिक तो नहीं लगता? क्योंकि ये रोमैंटिक बिल्कुल नहीं है. यौन शोषण है, मानसिक प्रताड़ना है.

पहले जान लीजिए मामला क्या है?

महाराष्ट्र का अकोला. यहां श्रीकृष्ण तावड़ी नाम का एक शख्स किराने की एक दुकान चलाता था. इंडिया टुडे की रिपोर्टर विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक, दुकान के आसपास ही रहने वाली महिला का आरोप है कि 3 अक्टूबर, 2011 को तावड़ी ने उसे Love Chit (प्रेम पत्र) देने की कोशिश की थी. उस वक्त महिला अपने घर में बर्तन धो रही थी. जब महिला ने चिट लेने से इनकार किया तो आरोपी ने चिट महिला के ऊपर ही फेंक दी. और आई लव यू कहकर चला गया. अगले दिन से आरोपी महिला को देखकर गंदे इशारे करने लगा. महिला ने ये भी आरोप लगाया कि आरोपी पहले भी उसके साथ फ्लर्ट करता था और उस पर कंकड़ फेंकता था.

Bombay High Court Nagpur Bench
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच. फाइल फोटो.

चिट फेंकने और गंदे इशारे वाली घटना के बाद महिला ने अकोला के सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई. आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 354 (गरिमा का अपमान करने इरादे से किसी महिला पर आपराधिक बल का प्रयोग), 509 ( शब्दों या इशारे से किसी महिला की गरिमा का अपमान करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत केस दर्ज किया गया. इस पर तावड़ी ने महिला पर आरोप लगाया कि उसने उधार में पैसे लिए थे और पैसे नहीं लौटाना चाहती इसलिए ऐसे आरोप लगा रही है. 21 जून, 2018 को अकोला सेशंस कोर्ट ने आरोपी को दो साल की सज़ा दी थी और उस पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था. कोर्ट ने कहा था कि इसमें से 35 हजार रुपये महिला को दिए जाएं.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा ?

तावड़ी ने सेशंस कोर्ट के फैसले को महाराष्ट्र हाई कोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई नागपुर बेंच ने की. जस्टिस बी देव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस बात पर भरोसा न करने की कोई वजह नहीं है कि आरोपी ने महिला पर आपत्तिजनक बातों वाली कोई चिट नहीं फेंकी. उन्होने सेशंस कोर्ट के फैसले को सही बताते हुए कहा,

“शिकायतकर्ता 45 साल की एक शादीशुदा महिला है. उसके ऊपर ऐसी चिट फेंकना जिसमें प्यार का इज़हार किया गया हो. या कविता के रूप में बाते लिखी गई हो. महिला की गरिमा का अपमान है. एक औरत के लिए उसकी इज़्जत सबसे कीमती गहना होता है. उसकी इज़्जत से खिलवाड़ हुई है या नहीं इसका कोई सीधा फॉर्मूला नहीं है.”

हाई कोर्ट ने जुर्माने की रकम में 50 हज़ार और जोड़ दिए हैं. यानी आरोपी को अब कुल 90 हज़ार रुपये जुर्माने के तौर पर देने होंगे. इसमें से 85 हज़ार रुपये पीड़िता को देने के निर्देश कोर्ट ने दिए हैं.  हालांकि कोर्ट के मुताबिक आरोपी सुधार के एक मौके का हकदार है. और आगे की कैद से कोई फयदा नहीं होगा. क्योंकि वह पहले ही 45 दिन की सज़ा काट चुका है.


 

ये खबर हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं अवनि ने लिखी है.


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