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महिलाओं को होने वाले इन तीन कैंसर के बारे में जान लीजिए, काम आएगा

आज वर्ल्ड कैंसर डे है. हर साल चार फरवरी के दिन मनाया जाता है. ताकि इसी दिन के बहाने कैंसर की जांच, बचाव, और उसके ट्रीटमेंट की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा सके. उनकी जागरूकता बधाई जा सके. इसे ऑर्गनाइज करने वाली संस्था का नाम है यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रीसर्च. ये संस्था मेडिकल दुनिया में चल रही प्रोग्रेस पर नज़र रखती है. देखती है रीसर्च वगैरह कैसी चल रही है. इसी के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम ने एक स्टडी में पाया कि रोज़ लगभग 1300 लोग कैंसर की वजह से मरते हैं.

इन कैंसरों में से कुछ ऐसे कैंसर हैं जो सिर्फ महिलाओं को प्रभावित करते हैं. कौन से हैं ये कैंसर, कैसे प्रभावित करते हैं, उनका क्या बचाव और इलाज है. हम आपको बताते हैं:

# ब्रेस्ट कैंसर:

क्या है: आदमियों को भी होता है, लेकिन महिलाओं को ज्यादा होता है. क्योंकि उनकी छाती पर टिशू ज्यादा होते हैं. वहां कैंसर के पनपने की संभावना ज्यादा हो जाती है. तो इस वजह से औरतों को इस बारे में जागरूक होना जरूरी हो जाता है. ब्रेस्ट कैंसर में छाती के एरिया यानी ब्रेस्ट में गाँठ बन जाती है और फिर वो बढ़ते-बढ़ते कैंसर का रूप ले लेती है.

लक्षण: स्तनों के आस-पास गांठ हो. तो उसकी जांच करवाएं. काफी तेज दर्द हो रहा हो स्तनों में, या फिर काफी जलन हो रही हो – ये कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. घबराने वाली बात नहीं है, अगर ज्यादा टाइम तक ऐसा लगे तभी टेंशन लें. पर डॉक्टर को ज़रूर दिखा लें. अगर निप्पल से डिस्चार्ज आ रहा हो तो ज़रूर चिंता की बात है.

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ज़रूरी नहीं कि सिर्फ सर्जरी कर के ही कैंसर का इलाज हो. डॉक्टर्स कैंसर की जगह, और उसके प्रकार के आधार पर ट्रीटमेंट का तरीका बताते हैं. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

बचाव: खुद से जांच करके देखें कहीं स्तनों के आस-पास या बगलों में कोई गांठ तो नहीं है. अगर ऐसा महसूस हो तो फ़ौरन जांच करवाएं.

इलाज: कुछ ट्यूमर छोटे होते हैं लेकिन काफी तेजी से बढ़ते हैं. कुछ बड़े होते हैं लेकिन धीरे बढ़ते हैं. ब्रेस्ट कैंसर के लिए ज़िम्मेदार कुछ जींस (genes ) होते हैं जो इन्हेरिट किये जा सकते हैं. यानी मां से बेटी में आ सकते हैं. खून से जुड़े किसी भी रिश्ते में ये चीज़ हो सकती है. अगर कैंसर इसकी वजह से हुआ है तो ट्रीटमेंट में थोड़ा अंतर होगा.

सबसे पहला तरीका है सर्जरी. इसमें ट्यूमर के साथ आस पास का थोड़ा सा हेल्दी टिशू भी हटा दिया जाता है. इसके बाद भी हो सकता है कुछ माइक्रोस्कोपिक कैंसर सेल रह जाएं जिनकी वजह से बाद में कैंसर बढ़ जाता है. तो उनको ट्रीट करने के लिए थेरपी चलती है. हॉर्मोन्स की, कीमो की. अगर ट्यूमर ऐसी जगह है या इस हालत में हैं जहां ऑपरेशन नहीं हो सकता तो उसे इनऑपरेबल कहा जाता है यानी जिसका ऑपरेशन नहीं हो सकता. ऐसे मामलों में डॉक्टर दूसरे तरीकों से इलाज करने की कोशिश करते हैं जैसे रेडियेशन, कीमोथेरपी वगैरह.

# सर्वाइकल कैंसर:

क्या है: सर्वाइकल कैंसर यानी बच्चेदानी के मुंह का कैंसर काफी खतरनाक बीमारी है. मेडिकल की दुनिया में देखें तो इसे गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर कहा जाता है . सर्विक्स यानी बच्चेदानी का मुंह वो जगह है जहां से बच्चा बाहर आता है. यहां पर कैंसर हो जाए तो बचना मुश्किल होता है.

लक्षण: पेडू यानी पेल्विस में दर्द रहना,सेक्स के समय दर्द होना,वजाइना से सफ़ेद डिस्चार्ज होना, उसमें दुर्गन्ध होना, पीरियड ना होते हुए भी खून आना, पीरियड का अनियमित होना, काफी ज्यादा खून जाना,वजन गिरना, उलटी जैसा महसूस होना, बाथरूम जाने की आदतों/ टाइम में बदलाव.

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इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि सर्वाइकल कैंसर किस तरह गर्भाशय के मुंह पर असर डालता है. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

बचाव: एक वैक्सीन है. एच पी वी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की वैक्सीन. नौ साल की उम्र के बाद कभी भी लगवा सकते हैं. नजदीकी अस्पताल में जाकर पूछें. सबसे सही उम्र है 16 से 18 के बीच. लेकिन उसके बाद भी लगवा सकते हैं. इससे बचने के लिए 21 साल की उम्र के बाद हर साल पैप स्मीयर (Pap Smear) टेस्ट कराना चाहिए. इस टेस्ट से पता चल जाता है कि सर्विक्स में कैंसरस सेल तो नहीं बन रहे. अगर ऐसा हो रहा होता है तो बच्चेदानी निकाल दी जाती है. ये सबसे ज्यादा सफल होने वाला तरीका होता है.

इलाज: ट्रीटमेंट में अधिकतर वही तरीके अपनाए जाते हैं जो किसी भी कैंसर के लिए इस्तेमाल होते हैं. अगर कैंसर बढ़ गया है तो बच्चेदानी निकाल दी जाती है, उससे भी फायदा नहीं हो तो कीमोथेरपी और रेडियेशन से इलाज किया जाता है. इसके लिए आपके केस को ध्यान से देखकर आपकी डॉक्टर आपको पर्सनल तरीके से इलाज का सबसे बेहतर तरीका बता पाएंगी.

# ओवेरियन कैंसर:

क्या है: एक होता है गर्भाशय. जहां बच्चा पलता है. इससे जुड़े होते हैं अंडाशय. जिसमें औरत का शरीर अंडाणु रखता है. इनमें से हर महीने अंडाणु निकलते हैं, और स्पर्म से मिलकर फिर बच्चा बनता है. इन्हीं अंडाशयों में होने वाले कैंसर को ओवेरियन कैंसर या अंडाशय का कैंसर कहा जाता है.

लक्षण: पेट के निचले हिस्से में सूजन या दर्द, वजन घटना, बार बार पेशाब जाने की इच्छा होना, पेडू वाले क्षेत्र में परेशानी महसूस होना.

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गर्भाशय के दोनों तरफ ओवरी होती हैं जिन्हें अंडाशय कहा जाता है. कई बार इनमें गांठें पड़ जाती हैं जिनको सिस्ट कहा जाता है. (सांकेतिक तस्वीर: ट्विटर)

बचाव: अगर उम्र पचास से ज्यादा है, तो जांच करवाते रहना चाहिए. अगर परिवार में किसी को पहले ओवेरियन कैंसर हो चुका है, तो सावधानी बरतनी चाहिए और रेगुलर चेकअप करवाने चाहिए. डॉक्टर से बात करिए, अगर वो ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल लेने की सलाह दें, तो वो भी ले सकती हैं आप.

इलाज: सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियेशन. जो डॉक्टर अच्छी तरह से जांच-परख कर ज़रुरत के हिसाब से बताएंगे कि कौन सा तरीका बेहतर होगा. किस तरीके से सबसे ज्यादा असरदार ट्रीटमेंट होगा.

इन सभी के अलावा कुछ कैंसर ऐसे होते हैं जो महिलाओं और पुरुषों, दोनों को प्रभावित करते हैं. जैसे फेफड़े का कैंसर, मुंह का कैंसर, स्किन कैंसर, हड्डियों का कैंसर. इनसे बचाव और इलाज के भी अलग अलग तरीके हैं, जोकि डॉक्टर से सलाह लेकर अपनाए जा सकते हैं.


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