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पूरी दुनिया कह रही है, इन सात महिला नेताओं से सीखो कोरोना वायरस से कैसे लड़ना है

कोरोना संक्रमण हमारे मेडिकल साइंस का सबसे बड़ा इम्तिहान है. उतनी ही कड़ी परीक्षा दुनिया भर में लीडरशिप की भी है. इस परीक्षा में कोई पास हुआ. कोई फेल. तो कोई डिस्टिंक्शन से पास होता दिख रहा है. इनमें कुछ मिसालें महिला नेताओं की भी है. जिनके कोरोना रेस्पॉन्स की ख़ूब तारीफ़ हो रही है.

कौन हैं ये लीडर्स? इन्होंने ऐसा क्या किया कि इतनी वाहवाही मिल रही है इन्हें?

(1) देश- जर्मनी

लीडर- चांसलर एंजेला मर्केल

Merkel Modi New
पीएम नरेंद्र मोदी के साथ एक मीटिंग के दौरान एंजेला. इनके वो वीडियो बहुत वायरल हुए थे जिनमें ये पीएम मोदी का हाथ मिलाने की बजाए आगे बढ़ जाती हैं.

तारीफ क्यों हो रही है-

फ़ोर्ब्स की लिस्ट के अनुसार जर्मनी ने किसी भी बड़े देश की तुलना में सबसे ज़्यादा लोगों की टेस्टिंग की है. मौत की दर भी बेहद कम रही है. इसके पीछे वजह ये बताई जा रही है कि जर्मनी ने कोरोना वायरस के फैलने की शुरुआत में ही कड़े कदम उठाए. ऐसे वक़्त में जब कई बड़े राष्ट्राध्यक्ष निरी अवैज्ञानिक बातें कर रहे थे, तब मर्केल लोगों के आगे आकर बहुत वैज्ञानिक अप्रोच से चीजें बता रही थीं.

मर्केल ने जब लोगों से कहा कि जर्मनी की 60 से 70 पर्सेंट आबादी को कोरोना हो सकता है, तो कइयों ने कहा, वो डर फैला रही हैं. मगर मर्केल ने जो आंकड़े दिए थे, वो वैज्ञानिकों के बताए पूर्वानुमान के मुताबिक थे. अब अगले हफ़्ते जर्मनी लॉकडाउन में ढील देने जा रहा है. वहां स्थितियां सुधरी हैं. इसके पीछे मर्केल की लीडरशिप, प्रांतीय सरकारों की सूझबूझ, बेहतर तैयारी और अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा हाथ बताया जा रहा है.

(2) देश – ताइवान

लीडर- त्साई इंग-वेन

Tsai Financial Times
त्साई ताइवान की राष्ट्रपति हैं. और उनके द्वारा जिस तरह से महामारी के दौरान चीज़ें कंट्रोल की गई हैं, उसकी तारीफ हर जगह हो रही है. (तस्वीर साभार: फाइनेंशियल टाइम्स)

तारीफ़ क्यों हो रही है-

कोरोना के आगे तो ताइवान मिसाल ही है समझिए. कोरोना की ही तरह 2003-2004 में चीन से SARS नाम की बीमारी आई थी. ताइवान ने भी झेला था उसे. झेला और सीख ली. कोरोना के आगे उसने उसी सीख का इस्तेमाल किया. ये दिसंबर 2019 की बात है. तब कोरोना संक्रमण की पहचान भी नहीं हुई थी. बस इतना पता चला था कि कोई रहस्यमय न्यूमोनिया फैल रहा है वुहान में. ताइवान के कान खड़े हो गए. उसने चीन से आने वाले लोगों की मेडिकल जांच शुरू कर दी. चीन से भी पहले ताइवान ने WHO को बता दिया था कि ये नई बीमारी संक्रामक है. मगर WHO ने उसकी बात नहीं सुनी. नतीजा दुनिया के सामने है.

शुरुआती में ही सचेत होने की वजह से ताइवान में लॉकडाउन की ज़रूरत ही नहीं पड़ी. आपको पता है, चीन की पॉलिटिक्स के चक्कर में WHO ने ताइवान को सदस्यता नहीं दी हुई है. इसकी वजह से ताइवान को कोई मदद भी नहीं मिली WHO से. फिर भी ताइवान इतनी बेहतर स्थिति में है कि दूसरे देशों को मदद भेज रहा है. दुनिया में मास्क की कमी है और ताइवान अमेरिका और यूरोप को मास्क भेज रहा है. अब तक कुल छह मौतें हुई हैं वहां कोरोना से. ज़्यादातर जानकार मानते हैं कि ताइवान का कोरोना रेस्पॉन्स सबसे बेहतरीन की कैटगरी में आता है.

(3) देश – न्यूजीलैंड

लीडर- जसिंडा ऐडर्न

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कुछ समय पहले न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में आतंकवादी हमला हुआ था. उस हमले के बाद जसिंडा के उठाये गए क़दमों की बहुत तारीफ हुई थी. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

तारीफ़ क्यों हो रही है-

23 मार्च को जब न्यू ज़ीलैंड में कोरोना के 102 केस हुए, तो जेसिंडा के नेतृत्व वाली सरकार ने तय किया. कि जब सख़्त कदम उठाने ही हैं, तो हालात बेकाबू होने का इंतज़ार क्यों करें. 28 दिन के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया. दो दिन का समय दिया लोगों को. ताकि वो लॉकडाउन की तैयारी कर सकें.

छोटा सा देश, जिसकी इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर करता है. उसने अपनी सीमाएं सील करने में कोई हिचक नहीं दिखाई. देश को मैक्सिमम लेवल अलर्ट पर रखा. बाहर से आ रहे अपने नागरिकों को 14 दिन क्वारंटीन में रहने को कहा. विदेशियों के आने पर तरह रोक लगा दी. अब तो ये हाल है कि न्यू ज़ीलैंड कोरोना का फ्लैट कर्व नहीं कर रहा. बल्कि वो अपने यहां से कोरोना का पूरी तरह सफाया करने की तरफ बढ़ रहा है. जेसिंडा ऐडर्न न केवल कारगर नीतियां बना रही हैं. बल्कि लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया के सहारे लगातार लोगों से जुड़ी हुई हैं. उनके सवाल ले रही हैं. जवाब दे रही हैं. जिससे लोगों में संयम बना रहे.

(4) देश – नॉर्वे

लीडर- एर्ना सोलबर्ग

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एर्ना ने अपने देश के नागरिकों के साथ-साथ छोटे बच्चों को भी भरोसा दिलाने की कोशिश की, कि इस बुरे समय से वो लोग जरूर बाहर निकलेंगे और जीतेंगे. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

तारीफ़ क्यों हो रही है-

इन्होंने टीवी के जरिए अपने देश के सभी बच्चों से सीधे बात की. उन्हें समझाया कि आखिर ऐसे माहौल में डरना क्यों स्वाभाविक है. उन्होंने बच्चों द्वारा पूछे गए मासूम से सवालों के भी जवाब दिए. जैसे, क्या मैं अपनी बर्थडे पार्टी मना सकता हूं. या मैं अपनी सहेली के घर क्यों नहीं जा सकती. नॉर्वे ने इमरजेंसी पावर्स के तहत पब्लिक और प्राइवेट संस्थानों को बंद करा दिया है. वैसे अगले हफ़्ते वो भी लॉकडाउन में ढील देने जा रहे है.

(5)देश – फिनलैंड

लीडर- सना मरीन

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सना अपने देश की सबसे युवा मुखिया हैं. उनके चुनाव के बाद ये दुनिया की सबसे बड़ी ख़बरों में से एक बनी थी. (तस्वीर: Getty Images)

तारीफ़ क्यों हो रही है-

दुनिया की सबसे कम उम्र की लीडर हैं ये जो देश चला रही हैं. इन्होंने लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर पॉपुलर लोगों की मदद ली. वैसे लोग, जिन्हें सोशल मीडिया इन्फ़्लूएन्सर्स कहा जाता है. इसके पीछे सोच ये थी कि हर कोई तो नहीं पढ़ता अख़बार. कई लोग न्यूज़ नहीं देखते. मगर सोशल मीडिया पर कमोबेश हर कोई ही मौजूद है. सना का कहना था, इस रास्ते ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों तक पहुंचा जा सकता है. ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, अपने आस-पास के कई देशों के मुकाबले फिनलैंड की तैयारियां बेहतर हैं.

(6) देश- आइसलैंड

लीडर – कात्रिन जेकब्सदोत्तिर

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आइसलैंड की बेहतरीन परफॉरमेंस के पीछे उनकी लगातार टेस्टिंग है, जिसकी वजह से बिना लक्षण वाले लोगों को भी ट्रेस किया जा रहा है. इसमें कात्रिन का बड़ा रोल रहा है. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

तारीफ़ क्यों हो रही है –

आइसलैंड अपने सभी नागरिकों को मुफ्त में कोरोनावायरस टेस्टिंग उपलब्ध करवा रहा है. सिर्फ उनको नहीं जिनमें लक्षण दिखाई दे रहे हैं. क्योंकि बस लक्षण वाले लोगों की जांच करना सही अप्रोच नहीं. शोध बताते हैं कि बड़ी संख्या में कोरोना मरीज़ों के अंदर संक्रमण का कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता. साउथ कोरिया और सिंगापोर की तरह आइसलैंड भी दनादन कोरोना जांच कर रहा है. इसके अलावा तकनीक का भी अच्छा इस्तेमाल कर रहा है आइसलैंड. ट्रैकिंग सिस्टम के सहारे मरीज़ों की, उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करके उन्हें आइसोलेट कर रहा है.

(7) देश – डेनमार्क

लीडर – मेटे फ्रेडरिक्सन

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मेटे फ्रेडरिक्सन की लीडरशिप में उनका देश अपना कर्व फ़्लैट कर रहा है. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)

तारीफ़ क्यों हो रही है –

सरकार ने मार्च के बीच में ही लॉकडाउन की शुरुआत कर दी थी. इन्होंने लगातार प्रेस कांफ्रेंस करके देश के लोगों को कोरोना पर अपडेट्स दीं. फ्रेडरिक्सन और उनकी टीम लगातार ज़रूरी निर्देशों को लोगों तक पहुंचा रही है. कारगर स्ट्रैटजी की वजह से वहां कोराना के मामलों में कमी आ रही है. बेहतर हो रही स्थितियों को देखते हुए धीरे-धीरे लॉकडाउन को खोलने की भी तैयारी हो रही है. लेकिन अगर इन्फेक्शन बढ़े, तो इसे वापस लागू कर दिया जाएगा. सरकार ने देश के लोगों और कंपनियों के लिए आर्थिक सहायता भी देनी शुरू कर दी है.

और अंत में

हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के मुताबिक़, एक रिसर्च बताती है कि अधिकतर देशों में पुरुष मुखियाओं के होने के पीछे उनका लीडरशिप टैलेंट नहीं है. बल्कि पावर है. रिसर्च कितनी सही, कितनी गलत, कह नहीं सकते. मगर इतना तो हम सभी जानते हैं कि पॉलिटिक्स में होना पुरुषों के लिए आसान है. महिलाओं के लिए मुश्किल. क्योंकि लोगों महिलाओं के काम से ज्यादा उनके लुक्स और चरित्र पर बात करना पसंद करते हैं. ऐसे में जब देश पर आपदा का संकट हो तो किसी भी लीडर के लिए खुद को साबित करना मुश्किल हो जाता है. मगर ये लीडर्स खुद को साबित कर रही हैं. और दुनिया के कोने-कोने में नन्ही बच्चियों के  लिए सबक लिख रही हैं. कि वो देश तो क्या, दुनिया भी चला सकती हैं.


वीडियो: कौन है ये महिला जिसने अंबानी को भी पीछे छोड़ दिया है?

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