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भारत को पैरालंपिक मेडल दिलाने वाली तीन औरतें और उनके संघर्ष की कहानी

30 अगस्त की सुबह नींद खुली एक अच्छी खबर के साथ. खबर ये थी कि अवनि लेखारा ने टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीत लिया है. पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाली वाली वो पहली भारतीय महिला हैं. वैसे गोल्ड न सही, मेडल तो भाविना बेन पटेल ने भी जीता. 29 अगस्त को उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. वैसे अवनि और भाविना को मिलाकर अब तक केवल तीन महिलाओं ने पैरालंपिक में मेडल जीता है. इससे पहले साल 2016 के रियो पैरालंपिक में दीपा मलिक ने सिल्वर मेडल जीता था.

आखिर ये तीनों प्लेयर्स कौन हैं? कौन से खेल खेलती हैं? इनका संघर्ष क्या रहा है? आज इसी पर बात करेंगे. सबसे पहले बात आज की गोल्डन गर्ल अवनि के बारे में.

अवनि लेखरा
खेल- शूटिंग
मेडल- गोल्ड, टोक्यो पैरालंपिक 2020

Avani Copy
पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं अवनि.

पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला. साल 2012 में अवनि एक कार हादसे में बुरी तरह घायल हो गईं. इस एक्सीडेंट में अवनि की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई. कमर का नीचे वाला हिस्सा सुन्न हो गया. दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया. डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया कि अब अवनि कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएंगी. अवनि के पिता प्रवीण लखेरा राजस्थान प्रशासनिक सेवा में हैं. उन्होंने मीडिया को बताया कि एक्सिडेंट के बाद अवनि बुरी तरह से टूट चुकी थीं. डिप्रेशन में चली गई थीं और बेहद कमज़ोर हो गई थीं.

ऐसे में उनके पिता को लगा कि स्पोर्ट्स के जरिए शायद अवनि को डिप्रेशन से निकाला जा सकता है. वो अवनि को तीरंदाजी के लिए लेकर गए, पर वहां बात नहीं बनी. इसके बाद वो उन्हें शूटिंग रेंज लेकर गए. यहां उनका मन लगा. साल 2015 से अवनि ने निशानेबाजी शुरू की. और इसी साल वो स्टेट चैम्पियन भी रहीं. इसके अगले साल वो नैशनल चैम्पियन बनीं. और वो पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट बनी हैं.

पैरालंपिक से पहले अवनि ने एक वीडियो जारी किया था. इसमें उन्होंने बताया था कि 2020 में जब लॉकडाउन हुआ तो उनके लिए काफी मुश्किल हो गई. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने घर को ही शूटिंग रेंज में तब्दील कर दिया. वो अपने किचन से दूसरी तरफ की दीवार पर निशाना लगाती थीं. उन्होंने ये भी बताया कि अपनी शूटिंग और मेंटल पीस और फोकस के लिए वो ऑनलाइन कोच की मदद लेती थीं.

जीत के बाद 19 साल की अवनि ने कहा,

“मेरी लाइफ बहुत अप्स एंड डाउन वाली रही. लेकिन अब मैं हर फेज़ की शुक्रगुज़ार हूं, क्योंकि उनकी बदौलत ही मैं यहां तक पहुंच पाई हूं… मैं पांच साल से प्रैक्टिस कर रही थी, आज मुझे मौका मिला अपने देश को पैरालंपिक में रिप्रेजेंट करने का…”

अवनि ने 10 मीटर एयर राइफल की SH1 कैटेगरी में गोल्ड हासिल किया है. पैरालिम्पिक्स में SH1 या SH2 कैटेगरी डिसएबिलिटी के आधार पर बनी होती हैं. SH1 कैटेगरी उनके लिए होती है जिनके शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं करता है. तो इसी कैटेगरी में अवनि ने फाइनल में 249.6 अंक स्कोर कर चीन की निशानेबाज़ को हराया. चीन की झांग कुइपिंग ने 248.9 अंकों के साथ सिल्वर जीता.

भाविना बेन पटेल
खेल- टेबल टेनिस
मेडल- सिल्वर, टोक्यो पैरालंपिक, 2020

Bhavinaben Patel
पैरालंपिक में टेबल टेनिस में मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी हैं भाविना पटेल.

बचपन में टीचर्स सिखाते हैं- तब तक कोशिश करते रहो जब तक सफलता न मिले. भाविना बेन ने इस सीख को अपनी ज़िंदगी में उतारा और 34 की उम्र में उन्होंने पैरालंपिक मेडल जीता. भाविना टेबल टेनिस में पैरालंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय हैं.

नवंबर, 1986 में वडनगर के सुंधिया गांव में जन्मीं भाविना जब एक साल की हुईं, तब उनको पोलियो का इंफेक्शन हुआ. मिडिल क्लास परिवार उस वक्त भाविना का इलाज नहीं करवा पाया. हालांकि, बाद में विशाखापट्नम में उनका ऑपरेशन करवाया गया. पर उसका वैसा फायदा नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था. तब से ही भाविना बैसाखी के सहारे चलती हैं. भाविना की स्कूलिंग सुंधिया गांव में ही हुई. साल 2004 में भाविना अहमदाबाद पहुंचीं, यहां उन्होंने एक कम्प्यूटर कोर्स में दाखिला लिया. इसी दौरान ब्लाइंड पीपल्स असोसिएशन में उनके पिता ने उनको एनरोल करवाया. यहां उन्होंने टेबल टेनिस खेलना शुरू किया. यहीं उनको उनके पहले कोच लाला दोषी मिले.

भाविना के पति हैं निकुंज पटेल. वो खुद भी क्रिकेटर रहे हैं. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात की. उन्होंने बताया कि कैसे भाविना को प्रैक्टिस पर जाने के लिए अलग-अलग गाड़ियां बदलनी पड़ती थीं. वो पहले बस पकड़तीं, उससे उतरकर ऑटो लेतीं और इसके बाद एक लंबा रास्ता पैदल पार करतीं. तब जाकर प्रैक्टिस कर पातीं. वो बताते हैं कि रियो 2016 पैरालंपिक में भाविना कुछ पॉइंट्स की वजह से क्वालिफाई नहीं कर पाई थीं. इस बार वो किसी भी हाल में पैरालंपिक में शामिल होना चाहती थीं. इसके लिए निकुंज और भाविना ने कोविड के बढ़ते केसेस के बीच स्पेन तक जाने का रिस्क लिया. ताकि मैच खेल सकें और भाविना टोक्यो के लिए क्वालिफाई कर सकें.

निकुंज बताते हैं कि उनके घर के चार में से एक कमरा टेबल टेनिस के लिए है. लॉकडाउन के दिनों में भाविना घर पर ही प्रैक्टिस करती थीं. वो बताते हैं कि भाविना के कोच और व्हीलचेयर पर खेलने वाले दूसरे प्लेयर्स भाविना के साथ खेलने उनके घर आते थे.

करियर की बात करें तो भाविना ने साल 2009 में अपना इंटरनैशनल डेब्यू किया था. और साल 2011 में उन्होंने पैरा टेबल टेनिस थाईलैंड ओपन में अपना पहला मेडल जीता था. तब उन्होंने सिल्वर अपने नाम किया था. 2013 में भाविना ने एशियन रीजनल चैम्पियनशिप में सिल्वर जीता. ये इस चैम्पियनशिप में भारत का पहला मेडल था. इसके बाद भाविना ने कई इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेले, पर गोल्ड नहीं जीत सकीं. साल 2019 में इंटरनैशनल पैरा टेबल टेनिस चैम्पियनशिप हुआ, थाईलैंड में. यहां भाविना ने अपना पहला गोल्ड मेडल जीता था.

दीपा मलिक
खेल- शॉटपुट
मेडल- सिल्वर, रियो पैरालंपिक, 2016

पद्मश्री दीपा मलिक अर्जुन और खेल रत्न अवॉर्डी भी हैं. ये पहली भारतीय महिला हैं जिन्होंने पैरालंपिक में भारत के लिए मेडल जीता था.
पद्मश्री दीपा मलिक अर्जुन और खेल रत्न अवॉर्डी भी हैं. ये पहली भारतीय महिला हैं जिन्होंने पैरालंपिक में भारत के लिए मेडल जीता था.

पैरालंपिक में भारत के लिए मेडल जीतने वाली पहली महिला हैं दीपा मलिक. पैरालंपिक शॉटपुट में जीता पर दूसरे खेलों में भी भारत को रिप्रेजेंट कर चुकी हैं. जैवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो, स्विमिंग और मोटरसाइकलिंग में. दीपा ने उस उम्र में अपना करियर शुरू किया जिसमें तमाम खिलाड़ी रिटायर होने के करीब होते हैं. 36 की उम्र में. और पैरालंपिक मेडल उन्होंने जीता था 45 की उम्र में.

हरियाणा के सोनिपत में जन्मीं दीपा के पिता आर्मी में थे. छह की थीं तब ट्यूमर की चपेट में आईं. ट्यूमर ने रीढ़ की हड्डी पर अटैक किया था. इलाज चला, तीन साल लगे दीपा को ठीक होने में. 20 की उम्र में एक आर्मी अफसर से दीपा की शादी हो गई. 29 की उम्र में यानी 1999 में ट्यूमर ने फिर से रीढ़ की हड्डी को निशाना बनाया. सर्जरी हुई. ट्यूमर तो चला गया पर दीपा अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाईं. उनकी छाती से नीचे का हिस्सा पूरी तरह सुन्न हो गया.

1999 में जब दीपा की सर्जरी चल रही थी तब उनके पति युद्ध में थे. पति की मौत के बाद दीपा ने केटरिंग का काम शुरू किया था. दीपा का स्पोर्ट्स में करियर बनाने का कोई सीन नहीं था. पर एक दिन वो आम दिनों की तरह की स्विमिंग कर रही थीं. वहां स्पोर्ट्स अथॉरिटी के ऑफिसर्स ने उन्हें देखा. इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने दीपा को क्वालालंपुर में चल रहे एक इवेंट में भारत को रिप्रेजेंट करने का न्योता भेजा. दीपा ने न्योता स्वीकार किया और स्विमिंग में भारत के लिए सिल्वर भी ले आईं.

दीपा को शुरुआत से ही बाइक का बहुत शौक था. साल 2009 में उन्होंने Raid de Himalaya और साल 2010 में Desert Storm में हिस्सा लिया था. ये खतरनाक कार रैलियां मानी जाती हैं.

साल 2012 में दीपा मलिक को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. साल 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. साल 2019 में उन्हें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से नवाज़ा गया.

अवनि के गोल्ड जीतने के बाद दीपा ने एक वीडियो जारी किया. इसमें उन्होंने कहा,

“ये ऐतिहासिक है. आपने सबको चौंका दिया अवनि. मैं वहां होना चाहती थी. बधाई हो. आपका मेडल जनमाष्टमी के जश्न को बढ़ाएगा. आपने हर भारतीय को जश्न मनाने की एक बड़ी वजह दी है.”

इससे पहले भाविना के सिल्वर मेडल पर दीपा ने उन्हें बधाई दी थी.

टोक्यो पैरालंपिक में मेडल लाने वाले खिलाड़ी चैंपियन कैसे बने?

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