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अफगान महिलाओं की चिंता करने वाले अमेरिका ने अपने राज्य में ये कानून बनाकर भद्द पिटवा ली!

कुछ दिन पहले अमेरिका के एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी रॉबर्ट एल ग्राहम ने मीडिया संस्थान लॉस एंजेल्स टाइम्स के संपादक को एक पत्र लिखा. ग्राहम ने बताया कि उन्होंने वियतनाम युद्ध में भाग लिया और बीते बीस साल से अफगानिस्तान में भी अमेरिका के मिशन पर नज़र बनाए हुए हैं. रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने अपने पत्र में लिखा कि वो अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के समर्थक नहीं रहे और उन्हें अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों की बहुत चिंता है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें डर है कि तालिबान के पिछले शासन की तरह ही इस बार भी वहां की महिलाओं के मूल अधिकार छीन लिए जाएंगे. उन्हें गुलाम बना लिया जाएगा और वो अपने फैसले लेने के लिए आजाद नहीं होंगी.

उस रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने आगे लिखा कि अमेरिका में महिलाओं को लेकर जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए अमेरिका में रहने वाले लोगों के पास तालिबान की आलोचना करने का नैतिक अधिकार नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका की सरकारों ने महिलाओं से उनका एक अहम अधिकार छीन लिया है. वह है, अपने शरीर से जुड़े फैसले लेने का अधिकार.

रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ग्राहम ने आगे अपने पत्र में अमेरिका के एक बहुत महत्वपूर्ण राज्य टेक्सस में हाल ही में पारित हुए अबॉर्शन विरोधी कानून (Texas Abortion Law) का ज़िक्र किया. यह भी लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस महिला विरोधी कानून पर रोक लगाने से मना कर दिया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का ही बरसों पुराना फैसला अमेरिकी महिलाओं को अबॉर्शन कराने का अधिकार देता है. अपने पत्र के आखिर में उन्होंने लिखा कि अमेरिका के लोगों को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि जब बात महिलाओं और लड़कियों के साथ बर्ताव की आती है, तो हम तालिबान से कितने अलग हैं!

क्या कहता है कानून?

टेक्सस के अबॉर्शन विरोधी कानून को लेकर जिस तरह की चिंता रॉबर्ट एल ग्राहम ने जताई, ठीक उसी तरह की चिंता और भी लोगों ने जताई है. यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस कानून को संविधान और महिलाओं के मूल अधिकार का विरोधी बताया है. इस कानून को अमेरिका में अबॉर्शन पर बना सबसे कड़ा कानून बताया जा रहा है. आखिर, इस कानून में ऐसा क्या है?

‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्सस के इस अबॉर्शन विरोधी कानून में कई कड़े प्रावधान हैं. इस कानून के हिसाब से छह हफ्ते की प्रेग्नेंसी के बाद गर्भपात नहीं कराया जा सकता है. यह शर्त बलात्कार और इंसेस्ट के मामलों में भी लागू होगी. इंसेस्ट का मतलब, करीबी रिश्ते में आने वाले लोगों से बने शारीरिक संबंध है.

इस कानून के तहत टेक्सस में रहने वाले लोगों को यह ताकत दी गई है कि वे शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ यह शिकायत कर सकते हैं कि वो गैरकानूनी गर्भपात में लिप्त है. अगर उनकी शिकायत सही पाई जाती है, तो टेक्सस प्रशासन उन्हें प्रोत्साहन के तौर पर 10 हजार डॉलर देगा.

Texas Abortion Law छह सप्ताह की प्रेगनेंसी के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं देता. अमेरिकी राष्ट्रपति Joe Biden ने इस कानून को संविधान के खिलाफ बताया है. (फोटो: एपी)
Texas Abortion Law छह सप्ताह की प्रेगनेंसी के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं देता. अमेरिकी राष्ट्रपति Joe Biden ने इस कानून को संविधान के खिलाफ बताया है. (फोटो: एपी)

इस कानून को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, उसमें सबसे बड़ी चिंता औरतों के उनके शरीर पर अधिकार को लेकर है. कानून का विरोध करने वालों का कहना है कि किसी औरत के गर्भ में पल रहे बच्चे पर सबसे पहला हक उस महिला का है और ऐसे में उसके पास ही यह अधिकार होना चाहिए कि उसे अबॉर्शन कराना है नहीं.

दूसरी बड़ी चिंता प्रेग्नेंसी के समय को लेकर है. एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है कि कोई महिला गर्भवती है या नहीं, यह पता लगाने के लिए 6 सप्ताह का वक्त बहुत कम है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ही साल 1973 के अपने फैसले में अमेरिकी महिलाओं को 24 हफ्ते की प्रेग्नेंसी तक अबॉर्शन कराने का अधिकार दिया था.

चिंता इस कानून के एक अपवाद पर भी जताई जा रही है. कानून में कहा गया है कि अगर बच्चे के जन्म से महिला के स्वास्थ्य को खतरा है, तो उस स्तिथि में 6 हफ्ते के बाद भी गर्भपात कराया जा सकता है. इस कानून का विरोध करने वालों का कहना है कि अपवाद में उन स्वास्थ्य संबंधी खतरों का साफ-साफ ज़िक्र नहीं किया गया है.

तालिबान से तुलना

इन्हीं सब चिंताओं के साथ अमेरिका के लोग इस कानून की तुलना तालिबान से कर रहे हैं. लेखक स्टीफन किंग ने ट्वीट करते हुए कहा- “टेक्सस का अबॉर्शन कानून तालिबान को जरूर पसंद आएगा.”

एक्टर माइकल रैपापोर्ट ने भी कुछ इसी तरह का ट्वीट किया. उन्होंने लिखा- “टेक्सस में वैक्सीनेशन को लेकर तो ‘मेरा शरीर और मेरा अधिकार’ की बात होती है लेकिन यही बात अबॉर्शन को लेकर महिलाओं के अधिकार के बारे में लागू नहीं होती. चाहे औरत के साथ रेप ही क्यों ना हुआ है. टेक्सस अब तालिबान है.”

राजनीति विशेषज्ञ चेरी जैकोबस ने ट्वीट करते हुए कहा-

“हमें तालिबानी टेक्सस में एयरलिफ्ट की जरूरत है. सबसे पहले वहां की महिलाओं और लड़कियों को निकाला जाए.”

कॉलमनिस्ट आयशा सुल्तान ने गंभीर सवाल उठाते हुए लिखा-  “एक युवा लड़की जिसका रेप होता है, वो रेप के बाद बच्चा पैदा करने के लिए मजबूर है. क्या वह अफगानिस्तान में तालिबान के शासन में जी रही है? या फिर टेक्सस में रिपब्लिकन पार्टी के शासन में?”

एक्टर हैरी शियरर ने लिखा-

“तालिबान ने एक तरफ अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और दूसरी तरफ टेक्सस की विधायिका को भी अपने नियंत्रण में ले लिया. अद्भुत!”

कुछ लोगों ने इस तुलना पर सवाल उठाया और लिखा कि टेक्सस में जो महिला विरोधी कानून बना है, वो यहां के ईसाई कट्टरपंथियों की वजह से बना है. इन कट्टरपंथियों की तुलना तालिबान से नहीं की जा सकती.

टेक्सस में कानून बनाने वाली बॉडी यानी विधायिका पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है. रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने इस कानून को पारित किया है. रिपब्लिकन पार्टी से ही आने वाले टेक्सस के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने इस साल मई में इस कानून पर हस्ताक्षर किए थे. एक सितंबर से यह कानून टेक्सस में लागू हो गया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस कानून पर रोक लगाने से मना कर देने के बाद रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाले और दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के कानून बनाने की बात चल रही है.

दूसरी तरफ, ज़िम्मेदार पदों पर बैठे रिपब्लिकन पार्टी के इन सदस्यों ने इस कानून को ऐसे वक्त में पारित कराया है, जब इसी पार्टी के सदस्य अमेरिकी सैनिकों के वापस आ जाने के बाद अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों की आज़ादी के लिए चिंता जता रहे हैं. अफगानिस्तान की महिलाओं के अधिकारों पर चिंता जताते हुए रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की आलोचना भी की थी. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी से वास्ता रखने वाले जॉर्ज बुश ने भी अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों के बारे में चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि उन्हें और उनकी पत्नी लॉरा बुश को डर है कि अमेरिकी सैनिकों के वापस आ जाने के बाद अफगानिस्तान की औरतों के वो अधिकार एक झटके में खत्म हो जाएंगे, जो उन्हें पिछले 20 साल में मिले हैं.


वीडियो- अफ़गानिस्तान की इन औरतों ने जैसे अपनी जान बचाई, उसे जानकर तालिबान के वादे झूठे लगेंगे!

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