Submit your post

Follow Us

'रेपिस्ट की हत्या करने का भरोसा दिलाते मंत्री जी! गैरक़ानूनी बात करते हुए आपको शर्म आनी चाहिए'

तेलंगाना सरकार में श्रम मंत्री हैं मल्ला रेड्डी. खबरों में बने हुए हैं. प्लान्ड एनकाउंटर का ऐलान कर रहे हैं. दरअसल, हैदराबाद के सईदाबाद इलाके में 9 सितंबर को एक छह साल की बच्ची का कथित तौर पर रेप के बाद मर्डर कर दिया गया. बच्ची की लाश एक बंद घर में मिली. इंडिया टुडे के आशीष पांडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित रेप और मर्डर का आरोप 30 साल के एक व्यक्ति पर है जो बच्ची के पड़ोस में ही रहता था. फिलहाल आरोपी फरार है और हैदराबाद पुलिस ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम भी रखा है. इस मामले को लेकर तेलंगाना में कई जगहों पर प्रोटेस्ट हुए, सोशल मीडिया पर बच्ची को इंसाफ दिलाने की मांग हो रही है. आरोपी को जल्द से जल्द पकड़कर कड़ी सज़ा देने की मांग हो रही है. मामला इतना बड़ा हो गया है कि इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है. तेलंगाना में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

इस मामले पर जब मल्ला रेड्डी सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा,

‘हम बिल्कुल आरोपी को पकड़ेंगे और उसे एनकाउंटर में मार देंगे. उसे छोड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है.’

गौर कीजिएगा. एक राज्य का मंत्री ये बात कह रहा है. आरोपी को पकड़ेंगे और गोली मार देंगे.

मंत्री जी को पता ही नहीं है कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है. आरोपियों को पकड़कर उन्हें कोर्ट के हवाले करना है. ताकि इंसाफ हो सके. देश में एक न्यायपालिका भी है, जिसका कॉन्सेप्ट शायद उन्हें नहीं मालूम है. सज़ा देना उस न्यायपालिका का काम है, न कि पुलिस का.

उनको संभवतः ‘Follow due process’ का मतलब भी नहीं पता है. झटके में कामयाबी और नाम चाहिए. उनको पता है कि फांसी की मांग है तो प्लान्ड encounter कर देंगे. जनता लहालोट हो जाएगी. पर ऐसी जनता और ऐसे नेता, दोनों ही इस देश और लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं. जिनके लिए इंसाफ का मतलब हत्या है. हां, जिस एनकाउंटर की बात मंत्री जी कर रहे हैं वो हत्या है.

लेकिन इन मंत्री जी ने तो शॉर्ट कट का कमाल देखा ही हुआ है. इसके लिए चलते हैं 6 दिसंबर, 2019 की तारीख पर. उस दिन देश की सबसे बड़ी खबर थी हैदराबाद में गैंगरेप-मर्डर के चार आरोपियों का एनकाउंटर. हैदराबाद पुलिस ने बताया था कि क्राइम सीन को रीक्रिएट करने के लिए आरोपियों को घटनास्थल लेकर गए थे. वहां उन लोगों ने बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की. खुद को बचाने के लिए पुलिस को उन चारों को मारना पड़ा. इस एनकाउंटर पर कई सवाल उठे थे. लेकिन सवाल से ज्यादा मनाया गया था जश्न.

क्या सोशल मीडिया, क्या सड़क. उस रोज़ और उसके बाद आने वाले कुछ रोज़ों तक हैदराबाद पुलिस देश की सबसे काबिल पुलिस मानी जा रही थी. तेलंगाना सरकार सबसे एफिशिएंट सरकार मानी जा रही थी. पर क्या वो असल में पुलिस की सफलता थी? नहीं. वो असल में पुलिस का सबसे बड़ा फेलियर था. उस रोज़ सिस्टम का, न्याय व्यवस्था का खुले तौर पर मज़ाक बना था और पूरा देश उस पर खुशी मना रहा था.

Encounter Site
हैदराबाद में दिसंबर, 2019 में हुए एनकाउंटर को लेकर लोगों में इतना यूफोरिया था कि खबर मिलते ही एनकाउंटर साइट पर काफी लोग इकट्ठे हो गए थे. (PTI)

क्यों खतरनाक है 2 मिनट जस्टिस सिस्टम?

गिरफ्तारी, पेशी, सुनवाई, फैसला और अपील. ये भारत में न्याय की प्रक्रिया है. इसमें पीड़ित, आरोपी और पुलिस कोर्ट में अपना-अपना पक्ष रखते हैं. लेकिन ये प्रक्रिया वक्त मांगती है, ताकि सही मायनों में न्याय हो सके. एनकाउंटर की बात कहना या उसकी मांग करना असल में ये बताता है कि आपका भरोसा इस न्यायिक प्रक्रिया से खत्म हो चुका है. या फिर आप उनमें से हैं जो कोर्ट के बाहर कुछ ले-देकर मामला सुलझा लेने में यकीन रखते हैं. पर जब आप एनकाउंटर की बात करते हैं तो आप किसी की हत्या की बात कर रहे हैं. और एक आदर्श स्टेट में कभी भी हत्या को आप इंसाफ के बराबर खड़ा नहीं कर सकते हैं.

यहां तो दो मिनट में बनने का दावा करने वाला नूडल भी दो मिनट में नहीं बनता, लेकिन जनता को इंसाफ दो मिनट में चाहिए. इसका खतरा क्या है? एक नहीं कई हैं. हो सकता है कि जिस आरोपी को एनकाउंटर के नाम पर मार दिया गया हो, वो किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो. किसी बड़े रैकेट का. उससे पूछताछ में सेक्स ट्रेड, ट्रैफिकिंग, तस्करी के किसी बड़े समूह का खुलासा हो सकता था. लेकिन उसका मुंह बंद कर दिया गया. हो सकता है कि जिस व्यक्ति पर शक हो या आरोप हो उसने कुछ किया ही न हो. उस पर झूठा आरोप लगा हो, ऐसे में मार डालने के बाद उसको इंसाफ कैसे मिलेगा?

झटपट जनता का अप्रूवल पा लेने को आतुर नेता जब प्लान्ड एनकाउंटर की बात करते हैं तो डर लगता है. कि क्या हो अगर कोई कल को आप पर कोई झूठा गंभीर आरोप लगा दे, गुस्साई भीड़ आपको पीटने को दौड़े या पुलिस पकड़कर आपका एनकाउंटर कर दे. तब क्या होगा? क्या आपको इंसाफ मिलेगा? आपके परिवार का क्या होगा? और जब मैं इस क्या होगा के जवाब खोजती हूं तो मुझे इंदौर का वो चूड़ी वाला याद आता है, जिसको मुस्लिम होने के चलते पीटा गया और सरकार के मंत्री उस पर ही दो आई कार्ड रखने के आरोप लगा रहे थे. मुझे वो रिक्शे वाला याद आता है जिसे उसकी मासूम बेटी के सामने पीटा गया. वो सारे लोग जो भीड़ के हमले के शिकार हुए. क्या होता अगर वो मर जाते? क्या उन्हें इंसाफ मिलता? या फिर क्या उन पर धार्मिक भावना आहत करने, राज द्रोह, UAPA जैसी धाराएं लगाकर उन हत्याओं को त्वरित इंसाफ के तौर पर पेश किया जाता.

Indore
इंदौर में अगस्त के महीने में एक मुस्लिम चूड़े वाले को भीड़ ने पीटा था. वायरल वीडियो में लोग उसे पीटते और धमकाते नज़र आ रहे थे.

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हमारी न्याय पालिका में भारी कमियां हैं. ये बहुत समय मांगती है. इतना दौड़ाती है कि इंसान थक जाता है. इस त्वरित इंसाफ वाली मानसिकता के पीछे की वजह भी शायद अदालतों में लगने वाला लंबा वक्त है. मामले सालों साल अटके रह जाते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 25 उच्च न्यायालयों में 20 जुलाई तक जजों के 450 पद खाली पड़े थे. जजों की कमी निचली अदालतों में भी है. जिसकी वजह से केसेस का दबाव बहुत अधिक है. केवल उत्तर प्रदेश में 30 जून तक सत्र न्यायालयों में 92 लाख 35 हज़ार से ज्यादा मामले पेंडिंग थे. ये हमारी न्याय पालिका की कमी है, जिसे सुधारने की ईमानदार कोशिश की ज़रूरत है. ताकि सिस्टम पर भरोसा बना रहे. और लोग शॉर्टकट को इंसाफ न मान लें.

इस शॉर्टकट वाली मानसिकता को समझने के लिए हमारे साथी नीरज ने सामाजिक कार्यकर्ता फिरोज़ा खान से बात की. फिरोज़ा खान कहती हैं,

“जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो दुख होता है, गुस्सा आता है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप एनकाउंटर की बात करें. देश संविधान के हिसाब से चलता है. कोई भी व्यक्ति कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता है. पॉक्सो एक्ट में जो बदलाव हुए हैं उसमें नाबालिग बच्चियों के साथ यौन अपराध के मामलों में फांसी तक की सज़ा का प्रावधान है. ऐसे में आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाकर उसे तय प्रक्रिया से सज़ा दिलवाए, न कि कानून अपने हाथ में लेकर.”

पर क्या पुलिस कानून नहीं है?

पुरानी हिंदी पिक्चरों में पुलिसवाले को ‘कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं’ वाली लाइन बोलते आपने सुना होगा. वो सुनकर लोग समझ बैठते हैं कि असल में पुलिस ही कानून है. पर ऐसा है नहीं. पुलिस का काम है कानून की रक्षा करना, ये सुनिश्चित करना कि लोग सुरक्षित रहें, कि कोई अपराध न हों. अपराध होने पर आरोपी को पकड़ने की और जांच की जिम्मेदारी भी पुलिस की है. लेकिन आरोपी को सज़ा देने का काम पुलिस का नहीं है. अगर कोई पुलिस वाला ऐसा करता है तो वो कानून को अपने हाथ में ले रहा होता है. माने अपराध कर रहा होता है.

खबर हैदराबाद की है, वहीं लौटते हैं. ये कितनी शर्मिंदा करने वाली स्थिति है.  दो साल पहले पुलिस और सरकार जहां खड़ी थी, आज भी वहीं खड़ी नज़र आ रही है. दो साल पहले भी विवादित एनकाउंटर से जनता के चहेते बने थे, और आज भी उनकी वही मंशा नज़र आती है. लेकिन मुझे इंतज़ार है, कि कोई जिम्मेदार आएगा और मल्ला रेड्डी को लताड़ेगा कि ये क्या गैरकानूनी बात कर रहे हो, कि ये सब यहां नहीं चलता. कि पुलिस मल्ला रेड्डी की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए, कानून अपने हाथ में लिए बिना कानून और न्याय प्रणाली की रक्षा करेगी. क्योंकि उम्मीद के सहारे ही दुनिया अब तक बची हुई है.


रेप आरोपी के पुलिस फायरिंग में मर जाने से ज़्यादा खतरनाक है मौत का जश्न

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

खो-खो प्लेयर की हत्या करने वाले का कुबूलनामा- "उसे देख मेरी नीयत बिगड़ जाती थी"

बिजनौर पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला प्लेयर का रेप करना चाहता था.

LJP सांसद प्रिंस राज के खिलाफ दर्ज रेप की FIR में चिराग पासवान का नाम क्यों आया?

तीन महीने पहले हुई शिकायत पर अब दर्ज हुई FIR.

साकीनाका रेप केस: महिला को इंसाफ दिलाने के नाम पर राजनेताओं ने गंदगी की हद पार कर दी

अपनी सरकार पर उंगली उठी तो यूपी के हाथरस रेप केस को ढाल बनाने लगी शिवसेना.

सलमान खान को धमकी देने वाले गैंग की 'लेडी डॉन' गिरफ्तार, पूरी कहानी जानिए

एक सीधे-सादे परिवार की लड़की कैसे बन गई डॉन?

मिलने के लिए 300 किलोमीटर दूर से फ्रेंड को बुलाया, दोस्तों के साथ मिलकर किया गैंगरेप!

आरोपी और पीड़िता सोशल मीडिया के जरिए फ्रेंड बने थे.

मुंबई रेप पीड़िता की इलाज के दौरान मौत, आरोपी ने रॉड से प्राइवेट पार्ट पर हमला किया था

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा-फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस.

NCP कार्यकर्ता ने महिला सरपंच को पीटा, वीडियो वायरल

मामला महाराष्ट्र के पुणे का है. पीड़िता ने कहा – नहीं मिला न्याय.

सिविल डिफेंस वालंटियर मर्डर केस: परिवार ने की SIT जांच की मांग, हैशटैग चला लोग मांग रहे इंसाफ

पीड़ित परिवार का आरोप- गैंगरेप के बाद हुआ कत्ल.

उत्तर प्रदेश: रेप नहीं कर पाया तो महिला का कान चबा डाला, पत्थर से कुचला!

एक साल से महिला को परेशान कर रहा था आरोपी.

मुझे जेल में रखकर, उदास देखने में पुलिस को खुशी मिलती है: इशरत जहां

दिल्ली दंगा मामले में इशरत जहां की जमानत में अब पुलिस ने कौन सा पेच फंसा दिया है?