Submit your post

Follow Us

तेजस एक्सप्रेस की अटेंडेंट्स की तस्वीरें देखकर हंस रहे हैं, तो ये पढ़ लीजिए

भारत की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन तेजस की तस्वीरें आपने सोशल मीडिया पर देखी ही होंगी. ये ट्रेन लखनऊ से दिल्ली के बीच चलने लगी है. इस ट्रेन में मिलने वाली कई सुविधाएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं. इन्हीं में शामिल है हवाई जहाज के फ्लाईट अटेंडेंट्स की तरह ट्रेन में अटेंडेंट्स की मौजूदगी.

तेजस के अटेंडेंट्स के लिए ख़ास ड्रेस डिज़ाइन की गई है. काले और पीले रंग की इस ड्रेस में अटेंडेंट्स की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं और इसी के साथ लोगों के दिमाग की गंद भी साफ़-साफ़ बाहर आ रही है. कई ऐसी तस्वीरों में जिनमें अटेंडेंट्स ट्रेन्स के पास खड़ी हैं, उनको शेयर किया जा रहा है इस कैप्शन के साथ:

भारतीय रेलवे आपकी संपत्ति है.

इस तरह के मैसेज हर जगह वायरल किए जा रहे हैं. (तस्वीर: फेसबुक स्क्रीनशॉट)
इस तरह के मैसेज हर जगह वायरल किए जा रहे हैं. (तस्वीर: फेसबुक स्क्रीनशॉट)

शेयर हो रहे जोक्स में अटेंडेंट्स को पब्लिक प्रॉपर्टी बताया जा रहा है. ये सिर्फ एक उदाहरण है. ऐसे कई मैसेज वॉट्सऐप पर भी वायरल किए जा रहे हैं जिनकी कमोबेश भाषा, लहजा और गलीजियत ऐसी ही है. कुछ में उनके कपड़ों पर टिप्पणी की जा रही है कि उन्हें भारतीय संस्कृति वाले कपड़े पहनने चाहिए थे. वगैरह-वगैरह.

इसमें दिक्कत क्या है?

दो बातें हैं. जो समझनी बेहद ज़रूरी हैं. ताकि ये जानने में आसानी हो कि हम कहां गलत जा रहे हैं.

# अटेंडेंट्स अपना काम कर रही हैं. उनके पहनावे और उनके लुक्स पर कमेंट करना लिचड़ई है. वो महिला हैं, इसका मतलब ये नहीं कि आपको उन पर वाहियात कमेन्ट करने का जन्मसिद्ध अधिकार मिल गया है. दिमाग में कीड़े कुलबुला रहे हैं और इस तरह के कमेंट्स में आपको कोई बुराई नहीं दिखती तो आपको कम से कम छह महीने का इंटरनेट व्रत ले लेना चाहिए. जब तमीज सीख जाएं तो वापस आएं. न सीख पाएं तो व्रत की समयावधि छह महीने और बढ़ा दें. दुबारा इंटरनेट पर आने से पहले दस कन्याओं को भोजन कराएं, और उनके सामने टेस्ट दें. कि आप इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए कितने फिट हैं.

# भारतीय रेलवे आपकी संपत्ति है. ये हर जगह लिखा हुआ दिखाई देता है. सही बात. इसका मतलब ये है कि चूंकि वो सरकार द्वारा चलाई जा रही है, उसे चलाने में करदाताओं का मिला-जुला पैसा लगा है. वो पब्लिक प्रॉपर्टी है. उसका ख्याल रखना सबकी साझी ज़िम्मेदारी है. इसका मतलब ये नहीं है कि रेलवे में काम करने वाले लोग आपके नौकर हैं, आपकी संपत्ति हैं. तेजस की अटेंडेंट्स आपकी संपत्ति नहीं हैं. महिलाओं को संपत्ति मानकर उनका शोषण करने, उन पर फब्तियां कसने, अश्लील कमेंट करने में यदि आपको कुछ गलत नहीं लगता तो पॉइंट नंबर 1 देखें.

औरतों को संपत्ति बताने वाले ये मज़ाक अगर आपके पास फॉरवर्ड होकर आ रहे हैं, तो इग्नोर न करें. भेजने वाले को समझाएं कि ये मज़ाक करने वाली बात नहीं है. एक औरत के शरीर का संपत्ति की तरह उपभोग करने की बात कहने वाले मैसेज पर हंसना तो दूर, शर्म करने में भी इंसान को गड़ जाना चाहिए कि वो इस तरह की बात कह रहा है. और अगर आप खुद ऐसे मैसेज भेजकर या पढ़कर हंस रहे हैं, तो फिर से पॉइंट नंबर एक देखें.

आपका व्रत शुरू होता है अब.


वीडियो: मुंबई का धारावी, बस्तियों का इलाका जो मैनुफैक्चरिंग का हब बन गया

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

बंगाल में लड़की की मौत को 'रेप के बाद हत्या' कहा जा रहा था, पर हकीकत क्या है?

शव मिलने के बाद लोगों ने भयंकर विरोध प्रदर्शन किया था.

पुलिसवाले पर आरोप, लड़की को कॉल कर कहा- 50 हज़ार ले लो, साले के लिए घर आ जाओ

बातचीत का ऑडियो वायरल, आरोपी पुलिसकर्मी सस्पेंड.

दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे, महिला ने वीडियो बनाया, जी-मेल में सबूत रखकर फांसी लगा ली

मां से अपने पति और सास-ससुर को सजा दिलवाने की गुहार लगाई.

सेक्स रैकेट क्वीन सोनू पंजाबन, जिसे बच्ची से रेप केस में कोर्ट ने दोषी करार दिया है

2009 में हुआ था बच्ची का अपहरण, फिर वो कई बार कई लोगों को बेची गई.

103 साल की उम्र में कोरोना को हरा आईं, लेकिन पड़ोसियों ने ओछी हरकत कर डाली

हमीदा को दुकानदार तक सामान नहीं बेच रहे.

घिनौनापन! सुशांत के सुसाइड पर दुख जताने वाले, रिया चक्रवर्ती को सुसाइड करने के लिए कह रहे हैं

ये भी कहा गया कि तुम्हारा रेप हो. जान से मारने के लिए आदमी भेजने की बात भी कही गई.

मदरसा टीचर ने चार साल तक नाबालिग लड़की का रेप किया, अब जाकर केस दर्ज हुआ

लड़की को उसके पति ने केस दर्ज करवाने की हिम्मत दी.

बच्चियों को 'हायर' करके रेप करने का आरोपी प्यारे मियां भोपाल से भागा था, श्रीनगर में पकड़ाया

एक बच्ची की दादी भी पुलिस की गिरफ्त में.

पटना के इस नामी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वॉर्ड में नाबालिग से रेप, आरोपी गार्ड अरेस्ट

सात दिन बाद घटना के बारे में पता चला.

गैंगरेप विक्टिम की वाजिब मांग मजिस्ट्रेट को इतनी गलत लगी कि उसे ही जेल भेज दिया

मांग सुनकर आप भी कहेंगे- ये तो पूरी होनी ही चाहिए.