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रोमैंस के नाम पर लड़कियों के साथ ये अपराध होता है, आप जानते थे?

क्या हो अगर कोई आदमी हर वक्त आपका पीछा करता रहे. आप जहां भी जाएं, उसकी नज़रें हमेशा आप पर टिकी रहें. आप भले ही उससे बात न करना चाहें, लेकिन फिर भी वो आपसे बात करने के कई सारे बहाने खोजे. बहुत फिल्मी लग रहा होगा न ये सब सुनना. क्योंकि फिल्मों में तो हमने अक्सर देखा है कि हीरो, हीरोइन के पीछे इसी तरह से पड़ा रहता है. इसे रोमेंटिक तरीके से दिखाया जाता है. लेकिन असल ज़िंदगी में इस तरह से किसी का पीछा करना कतई रोमेंस नहीं है. ये एक अपराध है. ऐसा अपराध जो कई बार लड़की को अंदर तक तोड़ देता है, तो कई बार उसकी जान तक ले लेता है. इसे हम स्टॉकिंग कहते हैं. हाल ही में इसी स्टॉकिंग का शिकार हुई एक नाबालिग बच्ची की मौत हो गई. जो लड़का उसका पीछा करता था, उसी ने कुल्हाड़ी से उसके सिर पर ज़ोरदार हमला किया था. लड़की ने मौत को मात देने की पूरी कोशिश की, अस्पताल में उसका शरीर ज़िंदगी पाने के लिए लड़ता रहा, लेकिन आखिर में उसने हार मान ली. अब वो लड़की हमारे बीच नहीं है. क्या है ये पूरा मामला? क्या होती है स्टॉकिंग? क्या ये केवल एक अपराध है या फिर किसी तरह की मानसिक बीमारी है? स्टॉकिंग का शिकार हुई लड़की किस तरह के मेंटल ट्रॉमा का सामना करती है. सब बताएंगे एक-एक करके.

क्या है पूरा मामला?

स्टॉकिंग की जिस घटना के बारे में अभी मैंने आपको बताया, वो दिल्ली के मोती बाग इलाके की है. लड़की 16 साल की थी. 11वीं में पढ़ती थी. अपनी फैमिली के साथ मोती बाग में रहती थी. सोमवार यानी 12 जुलाई को 21 साल के एक लड़के ने कथित तौर पर लड़की के सिर पर कुल्हाड़ी मार दी. रिपोर्ट्स हैं कि वो पिछले कई महीनों से लड़की को स्टॉक कर रहा था, माने उसका पीछा कर रहा था, नज़र रखे हुए था. ‘आज तक’ के वरिष्ठ संवाददाता तन्सीम हैदर की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 जुलाई को पुलिस को जानकारी मिली की मोती बाग इलाके में एक लड़की के ऊपर कुल्हाड़ी से हमला किया गया है. पुलिस मौके पर पहुंची, देखा कि लड़की की सांसें चल रही हैं, तुरंत सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. 13 जुलाई को लड़की ने दम तोड़ दिया

पुलिस ने छानबीन की, तो पता चला कि पास ही में रहने वाले एक लड़के ने कथित तौर पर हमला किया था. लड़के की खोज शुरू हुई और 13 जुलाई को उसे पलवल से गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपी वहां अपनी बहन के घर छिपा हुआ था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़के की स्टॉकिंग से तंग आकर लड़की ने अपने पिता से शिकायत की थी, जिस पर उसके पिता ने लड़के को डांटा था और थप्पड़ भी मारा था. तभी से लड़का बदला लेने की फिराक में था. पिछले महीने आरके पुरम में एक दुकान से उसने कुल्हाड़ी खरीदी और दो दिन पहले घटना को अंजाम दिया. लड़के का नाम कहीं पर प्रवीण बताया जा रहा है, कहीं पर प्रदीप. वो बेरोज़गार है और शास्त्री पार्क साउथ कैंपस की झुग्गी वाले इलाके में रहता था. पहले लड़के पर हत्या की कोशिश के आरोप के चलते IPC के सेक्शन 307 के तहत केस दर्ज हुआ था, लेकिन लड़की की मौत के बाद हत्या का आरोप लगा और सेक्शन 302 के तहत केस दर्ज किया गया.

स्टॉकिंग के कुछ और मामले भी जानिए

स्टॉकिंग का ये पहला केस नहीं है, कई केस रोज़ाना हमारे सामने आते हैं, जिन्हें हम अखबारों-वेबसाइट्स पर पढ़ते हैं या टीवी में देखते हैं. इसी साल जनवरी में एक केस भोपाल से सामने आया था. यहां 19 साल की एक लड़की को एक आदमी ने लगातार छह दिनों तक स्टॉक किया, और फिर एक दिन जब लड़की किसी काम से कहीं जा रही थी, तो आदमी बाइक पर उसके पास पहुंचा. उसे रोका और उसका यौन शोषण किया. फिर भाग गया. इसी तरह का मामला जनवरी में ही पुणे से सामने आया था. यहां एक आदमी ने दो दिनों तक एक कॉल सेंटर एम्पलाई को स्टॉक किया. फिर मौका पाकर उसका किडनैप किया और रेप किया.

ये तो हमने आपको फिज़िकल स्टॉकिंग की कुछ घटनाएं बताईं. स्टॉकिंग का ही एक और नया रूप सामने आ चुका है. वो है ऑनलाइन. जिसे साइबर स्टॉकिंग भी कहते हैं. माने सोशल मीडिया के ज़रिए किसी पर नज़र रखना. इसी साल जून में दिल्ली पुलिस ने 22 साल के एक जिम ट्रेनर को ऑनलाइन स्टॉकिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था. इस आदमी पर आरोप था कि उसने सोशल मीडिया के ज़रिए करीब 100 औरतों को स्टॉक किया था और उन्हें फेक अकाउंट्स से अश्लील मैसेज, वीडियो क्लिप्स भेजकर परेशान कर रहा था.

Ranjhana
‘रांझणा’ फिल्म का सीन, जहां कुंदन ज़बरन ज़ोया का हाथ पकड़ता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आंकड़े क्या कहते हैं?

अब थोड़ा आंकड़ों पर नज़र डालते हैं. NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में साल 2018 में स्टॉकिंग के 9,438 मामले, माने करीब साढ़े नौ हज़ार मामले दर्ज हुए थे. एवरेज निकाले तो हर 55 मिनट में एक मामला दर्ज हुआ था. यही आंकड़ा साल 2017 में 8145 था, 2016 में 7190, साल 2015 में 6266 और 2014 में 4699 था. ये तो हमने वो मामले बताए, जो रिपोर्ट हुए. कितने मामले तो ऐसे होते हैं, जो सामने नहीं आ पाते, माने असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है. आपने एक बार गौर की, साल दर साल स्टॉकिंग के मामले भी बढ़ रहे हैं.

ऐसे तो स्टॉकिंग की घटनाएं पिछले कई बरसों से सामने आ रही हैं. लेकिन सबसे पहली बड़ी घटना सामने आई थी 1996 में. एक दर्दनाक हादसा हुआ. एक लड़की को पहले स्टॉक किया गया, फिर रेप करके हत्या कर दी गई. वो लड़की दिल्ली यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ़ लॉ से एलएलबी कर रही थी. यानी लॉ की स्टूडेंट थी. उसका एक सीनियर संतोष, जो सर्विंग IGP का बेटा था, लगातार उसका पीछा करता था. करीब एक साल तक स्टॉक किया. एक रोज संतोष उस लड़की के घर घुसा और रेप के बाद हीटर के तार से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी. छूट भी गया था. लेकिन लड़की के माता-पिता ने लड़ाई जारी रखी और आखिरकार उसे फांसी की सज़ा हुई, जिसे कोर्ट ने कम कर उम्रकैद कर दिया.

कानून क्या कहता है?

साल 2013 के पहले तक स्टॉकिंग के मामलों को लेकर भारत के कानून में कोई कड़े प्रावधान नहीं थे. लेकिन निर्भया केस के बाद IPC में बदलाव हुए और IPC के सेक्शन 354डी के तहत स्टॉकिंग को पनिशेबल क्राइम माना गया. इस सेक्शन के तहत स्टॉकिंग का मतलब है-

“कोई आदमी जब किसी महिला से व्यक्तिगत बातचीत बढ़ाने के मकसद से उसका पीछा करता हो, या उससे कॉन्टैक्ट करता हो या फिर कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करता है, वो भी तब जब महिला द्वारा साफ तौर पर ये इंडिकेट किया जा चुका हो कि वो इंटरेस्टेड नहीं है. या फिर इंटरनेट, ईमेल या किसी और इलेक्ट्रोनिक कम्युनिकेशन के ज़रिए महिला पर नज़र रखता हो, वो स्टॉकिंग का अपराध करता है.”

इसके तहत सज़ा के कई प्रावधान भी हैं. इसे और ठीक से जानने के लिए हमारे साथी नीरज ने बात की वकील देविका गौर से. वो कहती हैं-

“साफ तौर पर बोला गया है कि स्टॉकिंग वो अपराध है, जिसे केवल आदमी कर सकता है. सिर्फ ये कहा गया है कि आदमी ही स्टॉकिंग कर सकता है. न महिला, न ट्रांसजेंडर को इस कैटेगिरी में रखा गया है. IPC में स्टॉकिंग की परिभाषा में रिपिटेडली शब्द का इस्तेमाल हुआ है. इसे ध्यान दीजिए. इसका ये मतलब हुआ कि कोई भी आपको एक बार फॉलो करे, एक बार मैसेज करे, तो ये स्टॉकिंग के अंदर नहीं आता. स्टॉकिंग एक रिपिटेड ऑफेंस है. इसलिए अगर कोई आपको लगातार स्टॉक कर रहा हो, मैसेज कर रहा हो, उसे स्टॉकिंग कहा गया है. सेक्शन 354डी में तीन साल तक की सज़ा का प्रावधान है. फाइन के साथ. अगर कोई आदमी लगातार ये क्राइम करता है, तो उसे पांच साल की सज़ा होगी, फाइन के साथ. वकील होने के नाते हम ऐसे जो मामले देखते हैं, उनमें से ज्यादातर में स्टॉकर का मोटिव छोटा नहीं होता. किसी औरत की मॉडेस्टी को आउटरेज करना, रेप कमिट करने से लेकर एसिड अटैक तक उनका मकसद हो सकता है. एक महिला को ये जानना ज़रूरी है कि वो शुरुआत में ऐसे स्टॉकर को पहचान ले. अगर आप लगातार उसके मैसेज से परेशान हो रही हैं, और अगर आपको लग रहा है कि आपके मना करने के बाद भी ये आपके साथ किया जा रहा है तो आपको वहीं पर उसे रोककर तुरंत शिकायत करनी चाहिए. पुलिस में शिकायत करिए तुरंत. दूसरा- आप राष्ट्रीय महिला आयोग को भी शिकायत कर सकते हैं. ताकि कानूनी काम में तेज़ी आए. आपके फोन में हमेशा विमन सेफ्टी ऐप होना चाहिए. अगर आपको कहीं पर ऐसा लग रहा है कि कोई आपका पीछा कर रहा है तो तुरंत 100 नंबर पर कॉल करिए.”

Adoption Process In India (5)
देविका, एडवोकेट

स्टॉकिंग को पनिशेबल क्राइम की कैटेगिरी में लाने के बाद भी इस पर एक लंबी बहस छिड़ी हुई है. दरअसल, पहली बार स्टॉकिंग के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद बेल मिल जाती है. मतलब अगर आप अपने स्टॉकर के खिलाफ शिकायत करवाते हैं और पुलिस उसे गिरफ्तार भी कर लेती है, लेकिन अगर स्टॉकिंग के किसी पहले मामले के तहत वो गिरफ्तार हुआ है तो उसे ज़मानत मिल जाएगी. क्योंकि स्टॉकिंग के पहले मामले में तीन साल तक की सज़ा हो सकती है, हालांकि ये ज़रूरी नहीं कि तीन साल की ही सज़ा हो, इससे कम भी हो सकती है. दूसरी या उसके बाद होने वाली स्टॉकिंग की घटना में गिरफ्तारी को ‘गैर-ज़मानती’ करार दिया गया है. इसमें सज़ा पांच साल तक की हो सकती है. वकील देविका कहती हैं-

“सेक्शन 354डी में जो सज़ा की बात कही गई है, वो पहले ऑफेंस में, मतलब आप पहली बार ऑफेंस करते हैं तो तीन साल तक की सज़ा हो सकती है, ये बेलेबल होगा. दूसरा या इसके बाद अगर होता है तो पांच साल तक की सज़ा हो सकती है, और ये गैर-ज़मानती होगा.”

स्टॉकिंग सर्वाइवर्स ये डिमांड करते हैं कि इस क्राइम को पूरी तरह से ‘गैर-ज़मानती” अपराध के दायरे में लाया जाए. क्योंकि वो आदमी जिसके खिलाफ सर्वाइवर शिकायत करती हैं, वो अगर ज़मानत पर बाहर आ जाए, तो सोचिए सर्वाइवर्स को खतरा कितना ज्यादा बढ़ सकता है.

मानसिक तौर पर क्या असर पड़ता है?

स्टॉकिंग एक ऐसा अपराध है, जो विक्टिम को पूरी तरह से तोड़कर रख देता है. कई दफ उन्हें अकेले बाहर निकलने में डर लगता है, वो अपना रूटीन बदल लेती हैं, बहुत सारी एक्टिविटी जो उन्हें अच्छी लगती हैं, वो उन्हें करना छोड़ देती हैं, वो अपने मन के कपड़े तक पहनकर नहीं जा सकतीं बाहर, या फिर वो ऑनलाइन आने से तक घबराने लगती हैं. पैनिक अटैक होते हैं. एंग्ज़ायटी होती है. कई बार घरवाले भी कई तरह की पाबंदियां लगा देते हैं. लड़कियों के दिमाग में किस तरह का असर होता है, ये जानने के लिए हमने बात की डॉक्टर अखिल अग्रवाल से. ये मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट हैं. वो कहते हैं-

“जो लड़कियां स्टॉकिंग का शिकार होती हैं, उनके ऊपर इसका बहुत गहरा मानसिक दुष्प्रभाव पड़ता है. चूंकि ये लगातार डर का माहौल होता है. एक ऐसे व्यक्ति, जिसको वो नहीं चाहती हैं, वो लगातार उनके सामने आता है. उनके मन में डर पैदा करता है. एंग्ज़ायटी पैदा करता है, जिसकी वजह से उन्हें फोबियाज़ होने लगते हैं. पैनिक अटैक होने लगते हैं. और अगर ये डर लगातार बना रहे तो पेशेंट डिप्रेशन में भी जा सकता है. इससे बचने के लिए महिला को सही कदम उठाना चाहिए, नहीं तो कई बार वो सुसाइड की कोशिश तक कर लेती हैं. जो सेटिंग बिगड़ती है, उसकी वजह से उनकी फैमिली लाइफ, सोशल लाइफ और पर्सनल लाइफ खत्म हो जाती है. प्रोफेशनल लाइफ में उनका परफॉर्मेंस भी डाउन होता चला जाता है.”

क्या स्टॉकिंग कोई मानसिक विकार है या कोई मानसिक बीमारी है? इस सवाल का जवाब भी हमें दिया डॉक्टर अखिल ने. वो कहते हैं-

“बहुत सारी स्टडीज़ ये कहती हैं कि जो लोग स्टॉकिंग करने वाले होते हैं, वो ज्यादातर क्लोज़ रिलेटिव होते हैं, आपका एक्स बॉयफ्रेंड हो सकता है. एक्स हसबेंड हो सकता है. वो ये कारण देते हैं कि हम उस लड़की से प्यार करते हैं. हम इसकी केयर करते हैं. इसलिए पीछा करते हैं कि कोई इन्हें नुकसान न पहुंचाए. लेकिन एग्जेक्टली हम बात करें, तो उन लोगों की मनोवृत्ति होती है कि वो उस महिला को डराना चाहते हैं, ये दिखाना चाहते हैं कि तुम मेरी प्रॉपर्टी हो. ये दिखाते हैं कि तुम मुझसे बचकर कहीं नहीं जा सकती. तुम्हें अल्टिमेटली मेरे पास आना पड़ेगा. ऐसे लोग बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी होते हैं. इरोटोमेनिया भी एक कंडिशन होती है, जिसमें किसी व्यक्ति को किसी सेलिब्रिटी के लिए लगता है कि वो मुझसे प्यार करता है, इसलिए फिर वो उसका पीछा करता है. बीच में आपने कुछ ऐसे मामले देखे होंगे. ज्यादातर ये पुरुषों में होता, पर कभी-कभी महिलाओं में भी होता है. विक्टिम के मन में डर पैदा करना चाहते हैं कि तुम कहीं भी जाओ मुझसे पीछा नहीं छुड़ा पाओगे. ये एक मानसिक विकार है. इसका ट्रीटमेंट होना चाहिए, लेकिन दिक्कत इसको एक्सेप्ट करने में है. परिवार वाले ध्यान दें तो इसका इलाज संभव है.”

Sexual Harassment In Covid Time (3)
डॉ. अखिल अग्रवाल, मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल

इस स्टोरी की तैयारी के समय जितने भी आर्टिकल हमने पढ़े, जितनी भी रिसर्च की, एक ही बात समझ आई कि स्टॉकिंग एक बेहत गंभीर यौन शोषण है. ये सीधे लड़कियों के कॉन्फिडेंस पर हमला करता है. इससे निपटने का एक ही तरीका है, इसके खिलाफ आवाज़ उठाना. इसकी शिकायत करना. हिम्मत से काम लेना. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि सोशल प्रेशर की वजह से लड़कियां स्टॉकिंग को रिपोर्ट नहीं कर पातीं, लोग कहते हैं कि छोटी सी बात है, होता रहता है, रिपोर्ट करोगी तो लड़के की ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी. ऐसा नहीं करना चाहिए. इस मुद्दे पर डॉक्टर अखिल कहते हैं-

“हमारी इंडियन सोसायटी हमेशा से महिलाओं को दबाते आई है. यही कारण है कि कोई फीमेल, जो स्टॉकिंग का शिकार हो रही है, वो इस डर से घरवालों को नहीं बताती कि अगर मैं बताती भी हूं तो उल्टा घरवाले मुझे डाटेंगे. या अगर घरवाले पुलिस में शिकायत करते हैं, तो लोग कहते हैं कि ज़रा से के पीछे लड़के की ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी. लेकिन उस महिला का क्या? उस विक्टिम का क्या? इस स्टॉकिंग के मामलों में डरना नहीं चाहिए. आप सबसे पहले परिवार और दोस्तों को बताएं, ताकि वो लोग ध्यान दे पाएं कि कौन आपका पीछा कर रहा है. फिर उन्हें समझाने की कोशिश करें. अगर नहीं मानते हैं तो आप पुलिस को जानकारी दें. आप जानकारी न देकर बड़े खतरे को बुलावा दे रहे हैं.”

तो अब तक आप समझ गए होंगे कि स्टॉकिंग ज़रा भी रोमेंटिक नहीं है. ये विक्टिम को मानसिक तौर पर तो तोड़ती है ही, साथ ही साथ ये अपराध उनकी जान तक ले लेता है. किसी को स्टॉक करना प्यार नहीं है. शोषण है.


वीडियो देखें: प्रेगनेंसी के लिए बायोलॉजिकल क्लॉक महिलाओं को टेंशन क्यों दे रही है?

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