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हमारे लड़ाके औरतों का सम्मान करना नहीं जानते, इसलिए अभी वो घर पर ही रहेंः तालिबान

महिलाओं की आजादी और उनके मूल अधिकारों का सम्मान करने का वादा करने के बाद अब तालिबान (Taliban) की तरफ से नई घोषणा की गई है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के प्रवक्ता जबीबुल्ला मुजाहिद ने महिलाओं से अस्थाई तौर पर घरों के अंदर रहने की अपील की है. प्रवक्ता ने कहा है कि अभी तालिबान के कई लड़ाकों को महिलाओं का सम्मान करने की ट्रेनिंग नहीं मिली है. ऐसे में वे महिलाओं को बाहर देखकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं.

प्रवक्ता की तरफ से कहा गया है कि महिलाओं के घरों के अंदर रहने की व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक तालिबानी लड़ाकों को महिलाओं को नुकसान ना पहुंचाने की ट्रेनिंग ना दे दी जाए. इससे पहले तालिबान ने कहा था कि वो शरिया कानून के दायरे में महिलाओं को आजादी और अधिकार देने का पक्षधर है. इन अधिकारों में महिलाओं के रोजगार और शिक्षा का अधिकार भी शामिल है.

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

बीते 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान की तरफ से कहा गया कि वो पहले के मुकाबले बदल गया है. इससे पहले साल 1996 से 2001 के दौरान तालिबान ने अफगानिस्तान पर शासन किया था. इस दौरान उसने औरतों को घरों में कैद कर दिया था. उनसे रोजगार और शिक्षा का अधिकार छीन लिया था. औरतों के लिए पूरे शरीर को ढंकने वाला बुर्का पहनना अनिवार्य हो गया था. वे बिना किसी पुरुष के बाहर नहीं जा सकती थीं. तालिबान के आदेशों का उल्लंघन करने पर उन्हें सार्वजनिक तौर पर कोड़े मारे जाते थे. शरीर के अंग काट दिए जाते थे. कई औरतों को पत्थर मार-मारकर मार दिया जाता था.

औरतों को घरों में बंद रखने की अपील जारी करने के बाद तालिबान के प्रवक्ता जबीबुल्ला मुजाहिद ने न्यू यॉर्क टाइम्स को बतााया,

“यह प्रावधान अस्थाई है. हमें चिंता है कि हमारे नए सिपाही औरतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं क्योंकि उन्हें अभी ढंग से ट्रेनिंग नहीं मिली है. हम नहीं चाहते कि महिलाओं के साथ ऐसा हो.”

मुजाहिद ने आगे कहा कि वर्तमान व्यवस्था में औरतों की सैलरी उनके घर तक पहुंचा दी जाएंगी. परिस्थितियां सामान्य होने पर वो अपने काम पर जा सकेंगी. दूसरी तरफ मानवाधिकार संगठन तालिबान के इस दावे से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. उनका कहना है कि तालिबान ने पिछली बार भी ऐसी ही दावे किए थे. लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट थी. ह्यूमन राइट्स वॉच संस्थान में विमेन्स राइट्स की एसोसिएट डायरेक्टर हीथर बार ने ट्वीट किया,

“उनका कहना है कि वो सुरक्षा व्यवस्था के बेहतर होने का इंतजार कर रहे हैं. उसके बाद महिलाओं को आजादी होगी. लेकिन पिछली बार जब वो शासन में थे, तब ऐसा मौका कभी नहीं आया. और मैं यह वादा करती हूं कि जो अफगान महिलाएं उनकी बातें सुन रही हैं, उन्हें पता है कि इस बार भी ऐसा मौका नहीं आएगा.”

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के साथ जुड़े ब्रायन कास्टनर ने न्यू यॉर्क टाइम्स को बताया कि अगर तालिबान पहले के मुकाबले इस बार महिलाओं से बेहतर व्यवहार करना चाहता है तो उसे अपने लड़ाकों पर अंकुश लगाना चाहिए. ऐसा नहीं हो सकता कि 25 साल तक एक ही सोच के साथ काम करने वाला तालिबान एकदम से बदल जाएगा. आपने एक चुनी हुई सरकार को हटा दिया, इसका मतलब यह नहीं कि आपके लड़ाके एकदम अलग तरीके से व्यवहार करने लगेंगे.

तालिबान नहीं बदला है!

दूसरी तरफ एमनेस्टी इंटरेनशनल को ऐसी रिपोर्ट्स मिली हैं, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि बार-बार दावा करने का बाद भी तालिबान मूल तौर पर नहीं बदला है. एमनेस्टी इंटरनेशनल को पता चला है कि तालिबान के लड़ाके लोगों के घर-घर जाकर पता कर रहे हैं कि किसने-किसने पिछली सरकार के साथ काम किया है. जबकि तालिबान ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि सरकार के साथ काम कर चुके लोगों को माफ कर दिया जाएगा. एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक तालिबान के लड़ाकों को लोगों के घर जाने के आदेश केंद्रीय नेतृत्व से मिले हैं. यह पूरी प्रक्रिया संस्थागत तरीके से चल रही है.

हीथर बार ने न्यू यॉर्क टाइम्स को बताया कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने कई महिलाओं से बात की है. उन महिलाओं ने बार को बताया कि वे तालिबान के नियम-कानूनों की तरह व्यवहार कर रही हैं. यही नहीं, जो थोड़ी बहुत आजादी बची हुई है, वो तब तक ही है, जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मीडिया का ध्यान अफगानिस्तान पर है. यह ध्यान हटते ही असलियत सामने आ जाएगी. बार का कहना है कि तालिबान ने जो ताजा घोषणा की है, उससे लगता है कि वो औरतों को कैद करने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करेंगे.

वीडियो- तालिबान से मोर्चा ले रही क्रिस्टल बयात की बातें हर इंसाफ पसंद इंसान को सुकून देंगी

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