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पत्नी ने मरने से पहले जो बयान दिया, उसने 11 साल बाद पति को जेल पहुंचा दिया

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सुप्रीम कोर्ट ने 11 साल पुराने एक मामले में बड़ा फैसला दिया है. मामला है जगबीर सिंह और उसकी पत्नी का. पत्नी संतोष देवी. जो जलकर मर गई. लेकिन उसकी हत्या के मामले को सुलझने में एक दशक से भी ज्यादा समय लग गया.

1999 में जगबीर सिंह की शादी संतोष देवी से हुई. उस समय उसकी नौकरी नहीं थी. कुछ समय बाद CRPF में उसकी नौकरी लग गई. पर वो अपनी पत्नी के साथ नहीं रहता था. संतोष उस दौरान अपनी सास के साथ रहती थी. कोर्ट में मौजूद बयानों और मामले की सुनवाई के मुताबिक़, जब जगबीर का ट्रान्सफर दिल्ली हुआ, तब वो अपनी पत्नी के साथ रहने लगा. संतोष ने आरोप लगाया था कि जगबीर का अपनी भाभी के साथ अफेयर था.

अदालत के निर्णय में दी गई डीटेल के मुताबिक़ संतोष बार-बार अपने पति पर आरोप लगाती थी कि उसके शादी से बाहर भी संबंध हैं. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)
अदालत के निर्णय में दी गई डीटेल के मुताबिक़ संतोष बार-बार अपने पति पर आरोप लगाती थी कि उसके शादी से बाहर भी संबंध हैं. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

23 जनवरी को जगबीर की मां अपनी बेटी के ससुराल गई, उसके अगले दिन शाम को जगबीर घर आया और संतोष के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी. थोड़ा सा तेल खुद पर भी डाला. दोनों को अस्पताल ले जाया गया. उस समय जब संतोष का बयान लिया गया तो उसने कहा कि मोटरसाइकिल से पेट्रोल लीक हो रहा था, और बीड़ी से आग लग गई. लेकिन जब उससे पूछा गया कि अगर वो पेट्रोल से जली है तो उसके शरीर से मिट्टी के तेल की गंध कैसे आ रही है. तब संतोष उसका जवाब नहीं दे पाई. लेकिन 27 जनवरी 2008 को मरने से पहले संतोष ने बताया कि जगबीर ने ही उस पर तेल डाल कर आग लगाई थी. इसके बाद FIR दर्ज हुई, धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत. संतोष की मौत के बाद इस मामला धारा 302 यानी हत्या का हो गया.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जगबीर को अपराधी घोषित कर दिया है.

नवभारत टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, अदालत ने ये कहा कि संतोष के पिछले बयानों से ये लग रहा था कि अगर वो पति पर दोष नहीं डालेगी तो शायद उसकी शादी-शुदा जिंदगी बच जाएगी. हर तरह की ज़िल्लत झेलकर भी अपनी शादी बचा लेने की कोशिश कर रही थी शायद. जो बचपन से लड़कियों के भीतर पैठा दी जाती है. मरने की कगार पर पहुंचकर भी उसके मन में ये उम्मीद थी कि वो अपनी कथित शादी-शुदा जिंदगी बचा लेगी. एक ऐसी जिंदगी, जिसमें उसका पति उसे जलाकर मार डालने तक का अपराध कर सकता है. लेकिन मरने के ठीक पहले उसने बयान बदला और दोष पति पर लगाया. इसे डाइंग डिक्लेरेशन कहते हैं. और आमतौर पर यही मरने वाले की सबसे विश्वसनीय गवाही मानी जाती है. इसके और बाकी उपलब्ध सुबूत के आधार पर जगबीर को दोषी घोषित किया गया.


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