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सुल्ली डील्स: मुसलमान औरतों की नीलामी करने वाले दो महीने में गिरफ्तार क्यों नहीं हुए?

कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जहां 21 वीं सदी में भी महिलाओं को बेचा जा रहा हो. उनकी तस्वीर के साथ प्राइस टैग लगा कर ‘डील ऑफ़ द डे’ पेश की जा रही हो. उस डील में आपके पास दर्जनों ऑप्शन हों. एक पसंद ना आए तो दूसरी देख सकते हों. ये कल्पना आपमें से कुछ लोगों को घटिया लगी होगी लेकिन कुछ को तो मज़ा आया होगा.

जिन्हें कल्पना करके मज़ा आया, उन्हीं के जैसे कुछ नीच लोगों ने ऐसी घटिया कल्पना को भारत में सच करने की कोशिश भी की. ‘सुल्ली डील’ नाम का ऐप बना कर. 4 जुलाई को ये मामला पहली बार सामने आया. 80 से ज़्यादा मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर लगा कर उन्हें ऑनलाइन बेचा जा रहा था. महिलाओं के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीरें चुराकर उन्हें नीलाम किया जा रहा था. जिन महिलाओं की तस्वीर इस्तेमाल की गईं उनमें से कोई डॉक्टर है, कोई पायलट है, कोई लॉयर है और कोई पत्रकार. यानी वो महिलाएं जो किसी भी देश के लिए उनका गौरव और सम्मान होती हैं. महिलाओं का मामला था तो सनसनी बहुत रही लेकिन गंभीरता किसी ने नहीं दिखाई.

इस बीच शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कुछ न होता देख 30 जुलाई को एक खत लिखा था IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव को. उसमें कहा कि ये देखकर पीड़ा होती है कि इस केस में अब तक मुश्किल से ही कुछ किया गया जबकि ये बहुत गंभीर है. फिर भी वही हुआ जो ऐसे मामलों में होता रहता है. यानी कुछ नहीं. खामोशी छाई रही. दो महीने बाद 6 सितंबर को प्रियंका ने फिर लेटर लिखा. आज तक उसका नतीजा भी वही है जो पहले वाले का था. यानी कुछ नहीं. ऐसा नहीं है कि मामले में FIR न दर्ज हुई हों. वो भी हुई लेकिन FIR दर्ज होना ही कार्रवाई नहीं होता. ये तो कार्रवाई का पहला स्टेज है.

ऐप का नाम था ‘सुल्ली डील’. सुल्ली अपने आप में एक आपत्तिजनक शब्द है जो मुस्लिम महिलाओं को टारगेट करके उन्हें नीचा दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जिन महिलाओं की तस्वीर इस्तेमाल हुई उनमें से कुछ को देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा था. लिहाज़ा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. लेकिन कुछ महिलाएं अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स बंद करके चुप हो गईं. बताने की ज़रूरत नहीं है कि जिस समाज में रेप के लिए महिलाओं को ही दोषी ठहरा दिया जाता हो वहां उन्होंने खामोश रहने का विकल्प क्यों चुना होगा.

Sulli Deals
सुल्ली डील्स ऐप का स्क्रीनशॉट. फ़ोटो- ट्विटर यूज़र अदब- ए- हिंदुस्तान

खैर, जो महिलाएं इस मामले पर सामने आईं और खुलकर इस घटना के खिलाफ बोलीं उनमे से एक हैं हना मोहसिन खान. हना पेशे से पायलट हैं और नोएडा में रहती हैं. उनकी शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी. हना कहती हैं-

“4 जुलाई को मेरी एक दोस्त ने मुझे वॉट्सऐप पर मैसेज भेजा. एक लिंक था और उसने लिखा था – हना तुम्हारी भी तस्वीर है इसमें. पहले मुझे समझ ही नहीं आया यह क्या है. सब अनरियल लग रहा था. उसमे लिखा था ‘फाइंड मी अ सुल्ली’ और मेरी दोस्त की तस्वीर थी. फिर मैंने लिंक पर दोबरा क्लिक किया तो मेरी तस्वीर आयी. धीरे धीरे मुझे सारा मामला समझ आने लगा. उसमे लिखा था ‘शेयर मी ऑन ट्विटर’. यानी कोई भी मुझे शेयर कर सकता है मानो मैं कोई चीज़ हूं. मुझे बहुत गुस्सा आया. मेरा सिर चकरा रहा था.”

हना आगे कहती हैं,

“मैं अब गुस्से के साथ जीना सीख गई हूं. वक़्त के साथ यह खत्म नहीं हुआ. आज भी कभी कभी मुझे बहुत गुस्सा आता है. सिर्फ मेरे नाम के कारण आपने मुझे स्लेव की तरह पेश किया, ‘फाइंड मी अ सुल्ली’ लिखकर मेरी तस्वीर इस्तेमाल की. यह सरासर बदतमीज़ी है.”

हना की शिकायत यूपी पुलिस ने दर्ज कर ली थी. तारीख थी 6 जुलाई. DCW (Delhi Commission for Women) ने भी दिल्ली पुलिस को खत लिखा जिसके बाद 8 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने भी FIR दर्ज की. दिल्ली की नबिया खान भी उन महिलाओं में से एक थीं जिनकी तस्वीर इस ऐप पर अपलोड की गई थी. वो भी दिल्ली पुलिस के पास पहुंची और 12 जुलाई तो उनकी भी FIR लिखी गई. नबिया कहती हैं,

“यह एक हेट क्राइम है जो मुस्लिम महिलाओं की आवाज़ दबाने और उनकी राजनीतिक भागीदारी को बंद करने के लिए किया गया. हमें धर्म और जेंडर के कारण टारगेट किया गया.”

Nabiya Complaint
इंडिया अहेड न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता की रहने वाली नूर महविश ने भी 9 जुलाई को लाल बाजार पुलिस हेडक्वार्टर में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन एक महीने बाद भी उन्हें पुलिस से इस केस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. नूर का कहना है,

“मैंने पुलिस से कहा कि कम से कम कम्प्लेंट नंबर या FIR नंबर ही दे दीजिये. मैंने कंप्लेंट फाइल की और मुझे कुछ नहीं पता इस केस में हो क्या रहा है. मैंने सारे स्क्रीनशॉट्स दिए पर पुलिस का कहना है कि वो मुझे कुछ नहीं बता सकती क्योंकि उन्हें कोई इनफार्मेशन नहीं है. वो मुझसे पूछ रहे थे कि क्या मुझे किसी ने पुलिस स्टेशन बुलाया था. मैंने बताया मैं खुद आयी हूं.”

DCW चीफ स्वाति मालीवाल को भी दिल्ली पुलिस ने कुछ ऐसी ही बात कही. द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस सूत्रों का कहना है क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के तहत सुल्ली डील्स ऐप बनाने वाले GitHub प्लैटफॉर्म को नोटिस भेजा गया है. दिल्ली पुलिस ने उनसे वेबपेज का IP एड्रेस मांगा था. GitHub की तरफ से जवाब आया कि Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) के तहत लीगल रास्ता अपनाया जाए. MLAT दो देशों के बीच का एग्रीमेंट है जिसके तहत वो एक दूसरे की कानूनी मदद के लिए डेटा शेयर करते हैं. चूंकि GitHub भारत का प्लेटफार्म नहीं है तो वो CrPC मानने के लिए बाध्य भी नहीं है.

वैसे जिन महिलाओं की तस्वीर इस्तेमाल की गयी उनमें एक चीज़ कॉमन है. सभी सोशल मीडिया पर खुलकर अपने विचार रखती हैं. हना कहती हैं कि पुरुषों को उन महिलाओं से खतरा है जो हमारे देश में मुखर हैं. ये मुखरता ही है कि हना जैसी कुछ महिलाओं ने थाने का रुख किया और अब जब महीनों बीतने के बाद भी पुलिस उनकी शिकायतों पर तसल्ली से बैठी है तो फिर बोल रही हैं. हना का कहना है,

“मैंने जब शिकायद दी तो पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज की थी. पर अब दो महीने हो गए. हम पूछते हैं तो कोई जवाब नहीं मिलता. अगर हम लड़कियों को ही सुरक्षा नहीं दे सकते तो हम क्या फ्यूचर बनाएंगे. सिर्फ नाम और धर्म के कारण मुझे टारगेट किया गया. पुलिस सही एक्शन ले ही नहीं पाती. यह पितृसत्तात्मक सोच का ही नतीजा है कि अगर किसी कम्युनिटी को टारगेट करना है तो उसकी औरतों के साथ बुरा करो.कितनी ही लड़कियों ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स बंद कर दिए. कुछ लोग हमसे कहने लगे कि आपने क्यों फोटोज पोस्ट की. उल्टा हमें ही ब्लेम करने लगे. मैं खुद को विक्टिम नहीं मानती. मैं अपने आप को फाइटर मानती हूं. मैंने लड़ाई लड़ी और लड़ूंगी. मैं फाइटर हूं.”

अब सवाल ये है कि जिस देश में किसी नेता, किसी जाति, किसी धर्म के खिलाफ बोला गया या लिखा गया एक कमेंट किसी को जेल की हवा खिलाने के लिए काफी है वहां महीनों बीत जाने के बाद भी शिकायतकर्ता सिर्फ पुलिस का मुंह ताकने की मोहताज हैं तो क्यों? क्या इसलिए कि वो आम महिला हैं? क्या इसलिए कि वो अल्पसंख्यक समुदाय से आती हैं? क्या इसलिए कि डिजिटल इंडिया का सपना देखनेवाले इस मुल्क में आईटी कानून कमज़ोर हैं और उन्हें तोड़नेवालों को पकड़ने में पुलिस बुरी तरह लाचार है या इसलिए कि पुलिस सीरियसली कुछ करने के लिए किसी प्रेशर में नहीं है? जवाब सिर्फ हमें नहीं आपको भी खोजना है..


प्रियंका चतुर्वेदी ने IT मंत्री से सुल्ली डील्स मामले में PM मोदी को लेकर क्या कहा?-

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