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अकेला, गैर-शादीशुदा आदमी बच्चा गोद लेने के लिए क्या करे?

रोहित 28 साल का है. उसकी शादी नहीं हुई है. और न ही वो शादी करना चाहता है. लेकिन वो एक बच्चा गोद लेना चाहता है. पर उसकी दिक्कत ये है कि उसे समझ ही नहीं आ रहा, कि वो बच्चा कैसे एडॉप्ट करे. उसके दिमाग में सबसे बड़ा सवाल ये है, कि क्या वो अकेले बच्चा एडॉप्ट कर सकता है, क्या सिंगल गैर शादीशुदा आदमी को बच्चा एडॉप्ट करने की परमिशन है. अब यही सवाल, रोहित की तरह ही बहुत सारे आदमियों के दिमाग में आते हैं, जब वो सिंगल और गैरशादीशुदा रहते हुए, बच्चे को एडॉप्ट करने के बारे में सोचते हैं.

इस आर्टिकल में हम इन्हीं सारे सवालों के जवाब दे रहे हैं. बता रहे हैं कि गैर शादीशुदा आदमी को बच्चा एडॉप्ट करने के लिए क्या-क्या करना होता है, क्या शर्तें होती हैं, पूरी प्रोसेस क्या है. इसके लिए हमने कारा को कॉल किया. वहां की एक काउंसलर, जिनका नाम निधी है उनसे बात की. और कारा की वेबसाइट खंगाल मारी. इन दो तरीकों से ही हमें पूरी जानकारी मिली.

अब ये कारा क्या है?

कारा, मतलब CARA. सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी. ये महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एक विभाग है. कारा की वेबसाइट पर लिखा है कि ये WCD का सांविधिक निकाय है. ये निकाय या बॉडी, भारत में एडॉप्शन की पूरी प्रोसेस पर नजर रखता है. एडॉप्शन की मंशा रखने वाले लोगों, को पहले कारा में ही रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इसकी मंजूरी के बिना तो एडॉप्शन होता ही नहीं है.

cara_073119072449.jpgकारा की वेबसाइट की तस्वीर.

कौन कर सकता है एडॉप्ट?

पति-पत्नी, सिंगल औरत और सिंगल आदमी. ये एडॉप्ट कर सकते हैं.

इस आर्टिकल में हम सिंगल आदमी पर फोकस करेंगे. अब बच्चा गोद लेने के लिए उसे क्या जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी?

– लड़के की मिनिमम एज यानी उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए.

– उसका शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर स्टेबल होना जरूरी है.

– वो गर्ल चाइल्ड को एडॉप्ट नहीं कर सकता. इसके लिए बिग नो-नो है.

– बच्चे और एडॉप्ट करने वाले आदमी के बीच कम से कम 25 साल का एज गेप रहना जरूरी है. 0 से 4 साल तक के बच्चे को गोद लेने के लिए आदमी की उम्र 25 से 45 के बीच होनी चाहिए.

– 4 से 8 साल के बच्चे को गोद लेने के लिए आदमी की उम्र 50 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

– 8 से 18 साल के बच्चे को गोद लेने के लिए आदमी की उम्र 55 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

– सिंगल पैरेंट के लिए बच्चा गोद लेने की सर्वाधिक उम्र 55 साल है. उसके बाद नो एडॉप्शन. यानी अगर रोहित 55 साल का हो जाता है, तो फिर वो बच्चा एडॉप्ट नहीं कर सकता.

धर्म का काई बंधन नहीं है. किसी भी धर्म का आदमी, किसी भी धर्म के बच्चे को गोद ले सकता है. कारा की एक काउंसलर ने हमसे कहा था कि कारा धर्मनिरपेक्ष होकर काम करता है.

photo1-750_073119072545.jpg‘मैं रहूं या न रहूं’ गाने का एक स्क्रीनशॉट. इसमें इमरान हाशमी अपनी दोस्त के बेटे के साथ है. प्रतीकात्मक तस्वीर. 

अब ये सारी जरूरी शर्तें जानने के बाद बारी आती है रजिस्ट्रेशन की. इसके लिए कारा की वेबसाइट पर जाकर आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज-

– अपने परिवार की तस्वीर. अगर आदमी अपने माता-पिता के साथ रहता है, तो उनके साथ की तस्वीर. खुद की एक तस्वीर.

– पैन कार्ड

– बर्थ सर्टिफिकेट, या फिर जन्म के लिए किसी भी तरह का प्रूफ

– अपने घर के पते का प्रूफ. इसमें आधार कार्ड/वोटर कार्ड/पासपोर्ट/इलेक्ट्रिसिटी बिल/टेलीफोन बिल जमा करवा सकते हैं.

– इनकम का प्रूफ. इसमें सैलेरी स्लिप/इनकम सर्टिफिकेट या जो इनकम टैक्स रिटर्न आदमी भरता है, उसका प्रूफ देना होगा.

– मेडिकल सर्टिफिकेट. जिसमें आपके डॉक्टर ने ये बताया हो कि आपको कोई लंबी या बड़ी बीमारी नहीं है. और आप एडॉप्ट करने के लिए फिट हैं.

– आपकी एडॉप्शन की इच्छा को सपोर्ट करते हुए आपके किसी दो रिश्तेदारों या दोस्तों के लेटर्स.

रजिस्ट्रेशन के वक्त, आपको कुछ राज्यों को चुनना होगा. मतलब, उन राज्यों के नाम डालने होंगे, जहां से आप बच्चा एडॉप्ट करना चाहते हैं. आप जो राज्यों को सेलेक्ट करेंगे, आप उनकी स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी में अपने आप रजिस्टर्ड हो जाएंगे.

क्या होती है स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी?

हर राज्य में ये एजेंसी होती हैं. ये बच्चे के एडॉप्शन की प्रोसेस पर नज़र रखती हैं. ये सारी एजेंसी कारा में रजिस्टर्ड होती हैं.

रजिस्ट्रेशन पूरा करने के बाद आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा. इसी नंबर के जरिए आप ये देख सकेंगे, कि आपके एप्लीकेशन में कहां तक प्रोग्रेस हुई है.

आपको अपने घर के सबसे नजदीक की एक स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी, को प्राथमिक तौर पर चुनना होगा. आपके रजिस्ट्रेशन के बाद एक होम स्टडी रिपोर्ट बनाई जाएगी. इसे बनाने के लिए आपके जरिए चुनी हुई आपकी प्राथमिक स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी के सोशल वर्कर आपके घर आएंगे. पूरा जायजा लिया जाएगा. आपसे बात की जाएगी.

col_750-x500_073119072618.jpgइस प्रोसेस में दो से तीन साल का वक्त लग जाता है. प्रतीकात्मक तस्वीर- Pixabay 

होम स्टडी रिपोर्ट की तैयारी

कारा में आपके रजिस्ट्रेशन के 30 दिन के अंदर ही होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. और उसे कारा के डाटाबेस में अपलोड कर दिया जाएगा.

ये रिपोर्ट तीन साल तक के लिए मान्य रहेगी. और यही रिपोर्ट आपके एडॉप्शन का आधार रहेगी. आपकी रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर ही ये डिसाइड होगा कि आप बच्चा गोद लेने लायक हैं या नहीं.

अगर आपकी रिपोर्ट में या फिर दस्तावेजों में आपको रिजेक्ट कर दिया जाता है, तो आप कारा की अथॉरिटी के पास दोबारा अपील भी कर सकते हैं.

सिंगल आदमियों के लिए होम स्टडी में एक जरूरी बात देखी जाती है. वो ये कि वो किसके साथ रहते हैं. अकेले या फिर अपने मां-बाप के साथ. ये देखना इसलिए जरूरी होता है, क्योंकि जब वो जॉब के लिए ऑफिस चले जाएंगे, तब बच्चे की देखरेख कौन करेगा. अगर वो आदमी आया रखता है, तो इसे मान्यता मिलना थोड़ा मुश्किल है. घर का कोई मेंबर बच्चे का ख्याल रखने के लिए मौजूद होना चाहिए. या फिर उस आदमी के ऑफिस में क्रैश सुविधा होनी चाहिए. इसके अलावा आपको बच्चे की अंडरटेकिंग के लिए दो नाम भी सजेस्ट करने होंगे. मतलब, आपको ये बताना होगा, कि खुदा न खास्ता, आपको कुछ हो जाए, तो बच्चे की देखरेख कौन करेगा. इसके लिए आप अपने किसी नजदीकी का नाम दे सकते हैं.

अब ये सारी चीजें होम स्टडी रिपोर्ट बनाते वक्त देखी जाती है. पूरी रिपोर्ट बनने के बाद, उसे कारा के डाटाबेस पर अपलोड होने के बाद, आपको इंतजार करना होगा. कारा या स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी की तरफ से आपको तब कॉन्टैक्ट किया जाएगा, जब आपका नंबर आएगा और जब आपकी इच्छा के मुताबिक, बच्चा उपलब्ध होगा. यहां इच्छा के मुताबिक से मतलब है फॉर्म में आपके जरिए भरे हुए राज्य और बच्चे की एज ग्रुप.

आप अपने रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए कारा की वेबसाइट में जाकर अपना वेटिंग नंबर देख सकते हैं. आपकी तरह और भी कई लोग एडॉप्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं. ऐसे में एक लंबी लिस्ट होती है बच्चा एडॉप्ट करने की इच्छा रखने वाले पैरेंट्स की. नंबर आने पर, और आपने कौनसे राज्य चुने हैं, इसी के आधार पर आपको कॉन्टैक्ट किया जाता है. इस वक्त 23 हजार पैरेंट्स ने एडॉप्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा है. यानी इतने लोग अभी वेटिंग में है.

father-750x500_073119072659.jpgपिता और बच्चे के बीच 25 साल का अंतर होना चाहिए. प्रतीकात्मक तस्वीर- Pixabay.

 अब अगर जैसे आपने 2 से 3 साल के बच्चे को चुना है, तो आपको वेटिंग के हिसाब से बच्चा मिलता है. इसमें एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है. आपका नंबर आने पर, और बच्चे की उपलब्धता के आधार पर, आपको तीन बच्चों की तस्वीरें और प्रोफाइल भेजी जाती हैं. उनमें से एक बच्चा चुनना होता है. उसके बाद एडॉप्शन एजेंसी, आपके और बच्चे के बीच मीटिंग रखते हैं. ये बच्चा एडॉप्शन के लिए ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे तक रिजर्व रखा जा सकता है. उसी बीच मीटिंग होनी होती है. बच्चे से मिलने के बाद अगर आपको सब सही लगता है, तो आपको बच्चे की चाइल्ड स्टडी रिपोर्ट पर साइन करना होता है. अगर मीटिंग सफल नहीं होती है, तो यही प्रोसेस दोबारा होती है. आपको फिर अपना नंबर आने का इंतजार करना होगा. आपको फिर से बच्चों की तस्वीरें भेजी जाएंगी. और फिर यही प्रोसेस होगी.

बच्चे को गोद लेने के बाद 2 साल तक स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी का कोई कर्मचारी हर 6 महीने में आपके घर आएगा. ये जायजा लिया जाएगा, कि आप बच्चे को ठीक से पाल रहे हैं या नहीं. 2 साल तक अगर सब सही रहता है, तो फिर बच्चे की जिम्मेदारी पूरी तरह से आपको मिल जाती है.

एक और बात, अगर इन दो साल में बच्चा बीमार पड़ता है, उसके साथ अगर कुछ अनहोनी हो जाती है, तो सबसे पहले आपको कारा को इन्फॉर्म करना होता है. कारा की तरफ से पूरी जांच-पड़ताल की जाती है.

ये है पूरी प्रोसेस बच्चा एडॉप्ट करने की. लेकिन इसमें दो से 3 साल तक का टाइम लग जाता है.


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