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सिमोन बाइल्सः जिसके जानबूझकर ओलंपिक गोल्ड छोड़ने का फैसला सुकून देता है

साल 2016. रियो में ओलंपिक गेम्स होने थे. अमेरिका की 19 साल की जिमनास्ट पहली बार इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही थी. चमकती आंखों के साथ, सपनों से भरी उस जिम्नास्ट ने कहा था.

मैं अगली यूसैन बोल्ट या अगली माइकल फेल्प्स नहीं हूं. मैं पहली सिमोन बाइल्स हूं.

जो उसने कहा वो करके दिखाया. अकेले रियो ओलंपिक में उन्होंने पांच मेडल जीते थे. चार गोल्ड और एक ब्रॉन्ज़. वर्ल्ड चैम्पियनशिप्स में सिमोन ने कुल 19 गोल्ड, तीन सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल्स जीत हैं. सिमोन को दुनिया की सर्वकालिक महान जिमनास्ट कहा जाता है.
सिमोन बीते तीन दिन से खबरों में बनी हुई हैं. वजह टोक्यो ओलंपिक्स 2020 से जुड़ी है. सिमोन ने ओलंपिक्स के टीम ईवेंट और ऑल-राउंड कॉम्पिटिशन से अपना नाम वापस ले लिया है.

कब क्या हुआ?

# 26 जुलाईः सिमोन बाइल्स ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखा.

“प्रीलिम्स डन. अब फाइनल की तैयारी. ये कोई आसान दिन नहीं था और न ही मेरा बेस्ट दिन था, पर मैंने इसे पार कर लिया. मुझे कई बार सच में लगता है कि मेरे कंधों पर पूरी दुनिया का भार है. मैं जानती हूं और मैं इसे खारिज करती हूं और ऐसे दिखाने की कोशिश करती हूं कि ये प्रेशर मुझ पर असर नहीं डालता. लेकिन कई बार ये बेहद मुश्किल होता है. ओलंपिक्स कोई मज़ाक नहीं है. पर मैं खुश हूं कि मेरा परिवार वर्चुअली मेरे साथ था, वो मेरे लिए मेरी पूरी दुनिया हैं.”

# 27 जुलाई: ओलंपिक्स में आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स विमेन टीम ईवेंट का फाइनल खेला गया. ईवेंट के पहले राउंड में वो ठीक से लैंड नहीं कर पाईं. इसके बाद वो मुकाबले से बाहर हो गईं. और बाकी रोटेशंस टीम बाकी जिमनास्ट्स ने पूरे किए. नतीजा ये हुआ कि फाइनल मुकाबला अपने नाम कर रूस की टीम ने गोल्ड हासिल किया. वहीं, अमेरिका की टीम ने सिल्वर जीता.

Simone Biles
ग्रुप ईवेंट में सिल्वर जीतने के बाद सिमोन ने अपनी टीममेट्स के साथ ये फोटो पोस्ट की थी.

मेडल सेरेमनी के बाद सिमोन ने मीडिया से कहा,

“मैं अपने ऊपर जितना भरोसा करती थी, अब उतना नहीं करती हूं. मुझे नहीं पता कि ये मेरी उम्र है कि क्या है. मैं जब भी जिमनास्ट करती हूं, थोड़ा नर्वस हो जाती हूं. मैं ये भी महसूस करती हूं कि मुझे मज़ा नहीं आ रहा है. मुझे बुरा लग रहा है कि ये ओलंपिक्स में हुआ.”

# 28 जुलाई: USA जिमनास्टिक्स ने कन्फर्म किया कि प्रॉपर मेडिकल चेकअप के बाद सिमोन ने फाइनल इंडिविजुअल ऑल-राउंड कॉम्पिटिशन से भी नाम वापस ले लिया है. USA जिमनास्टिक्स ने ये भी कहा कि वो सिमोन के फैसले के साथ हैं और इस बात की तारीफ करते हैं कि उन्होंने अपनी हेल्थ को प्राथमिकता दी. USA जिमनास्टिक्स ने अपने बयान में लिखा-

“मेंटल हेल्थ पर फोकस करने के लिए सिमोन ने इंडिविजुअल ऑल-राउंड कॉम्पिटिशन से नाम वापस ले लिया है. सिमोन को रोज़ाना इवेलुएट किया जाएगा, ये जानने के लिए कि क्या वो अगले हफ्ते के इंडिविजुअल ईवेंट के फाइनल्स में हिस्सा ले पाएंगी या नहीं. उनकी जगह जेड कैरी, जो क्वालिफिकेशन्स में नौवें नबंर पर आई थीं, वो ऑल-राउंड में पार्टिसिपेट करेंगी. हम सिमोन को पूरा सपोर्ट करते हैं. उनकी हिम्मत दिखाती है कि वो आखिर क्यों इतने लोगों की रोल मॉडल हैं.”

सिमोन के ओलंपिक छोड़ने पर किस तरह की प्रतिक्रियाएं आईं?

Fox News अमेरिका का बड़ा और दुनिया का नामी न्यूज़ चैनल है. सिमोन के ओलंपिक छोड़ने के फैसले पर चैनल के एंकर टकर कार्लसन ने कहा,

“आज मिस बाइल्स ने न केवल अपने देश और फैन्स को धोखा दिया है. लेकिन हमसे वो सब सुनने का मौका भी छीन लिया जो टीम यूएसए को गोल्ड जीतने पर वो कहतीं.”

Simone Biles1
26 जुलाई को ये फोटो पोस्ट करते हुए सिमोन ने लिखा था कि वो पूरी दुनिया का प्रेशर अपने कंधे पर महसूस कर रही हैं.

चार्ली किर्क. अमेरिका में बड़ा नाम हैं. गूगल पर दिखता है कि ये एक एक्टविस्ट हैं. उन्होंने एक रेडियो शो में कहा,

“हम सिमोन बाइल्स जैसे कमज़ोर लोगों की जनरेशन को बड़ा कर रहे हैं. अगर उन्हें इतनी मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं तो उनको आना ही नहीं थी. वो एक बेहतरीन एथलीट हैं, इससे मैं इनकार नहीं करता. लेकिन वो बेहद स्वार्थी, अपरिपक्व और देश के लिए शर्म का सबब हैं.”

ऊटपटांग बयानों से चर्चा में रहने वाले ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मॉर्गन ने भी सिमोन बाइल्स के खिलाफ डेली मेल पर एक लंबा लेख लिखा. जिसका शीर्षक था- आपको मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए आपने अपने टीममेट्स, फैन्स और देश को धोखा दिया, इसमें कुछ हीरोइक नहीं है.

पर ये चंद लोग हैं जिन्होंने सिमोन बाइल्स के फैसले के खिलाफ लिखा. दुनिया अभी भी कम्पैशनेट लोगों से भरी हुई है. अमेरिका ही नहीं, दुनिया के तमाम देश के लोगों ने सिमोन के लिए अपना सपोर्ट और प्यार सोशल मीडिया पर साझा किया. कई लोगों ने अपने खुद के फैसलों के बारे में बताकर सिमोन की हिम्मत बढ़ाई. कुछ उदाहरण देखिएः

मिशेल ओबामा ने ट्वीट किया,

“क्या मैं ठीक हूं? हां, मैं हूं. ये वो मंत्र है, जिस पर मैं रोज़ाना काम करती हूं. सिमोन बाइल्स, हमें आप पर गर्व है और हम आपके साथ हैं. सिल्वर मेडल के लिए बधाई टीम USA”.

पॉप स्टार जस्टिन बीबर ने लिखा,

“कोई कभी नहीं समझ पाएगा कि आप कितना प्रेशर झेलती हैं. हम एक दूसरे को नहीं जानते, लेकिन ओलंपिक्स छोड़ने के आपके फैसले पर मुझे गर्व है. अपनी आत्मा की कीमत पर पूरी दुनिया जीत भी ली तो उसका हासिल क्या है? ये इतना ही आसान है. कई बार हमारी न हमारी हां से ज्यादा ताकतवर होती है. आप जिस चीज़ से प्यार करते हैं अगर वो आपकी खुशी छीनने लगे तो ज़रूरी हो जाता है कि हम अपने कदम पीछे खींच लें ताकि पता कर सकें कि ऐसा क्यों हो रहा है. मैंने पर्पस टूर पूरा नहीं किया, लोगों को लगता था कि मैं बावरा हूं, लेकिन मेरे मानसिक स्वास्थ्य के लिए वो सबसे अच्छी चीज़ थी जो मैंने की थी. आप पर गर्व है.”

 

 

 

 

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एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने सिमोन के साथ कुछ साल पहले हुई बातचीत का वीडियो डाला. और लिखा-

“मैं उस नामुमकिन दबाव की गहराई का अंदाज़ा भी नहीं लगा सकती, जिसके तहत आप सभी परफॉर्म करते हो. लेकिन ये जानना ज़रूरी है कि आपको लाइन कहां खींचनी है और कब दूरी बनानी है- अपने आप को चुनना- सबसे अहम है. जब हम ठीक होंगे तभी हम अपना बेस्ट कर सकेंगे और उसका मज़ा ले सकेंगे. आपको शुक्रिया कि आपने ये बताया कि इस भयानक दबाव के बीच भी इंसान होना ठीक है. आपकी हिम्मत के लिए थैंक्यू. आप रोल मॉडल हैं. पूरी दुनिया की तरह मैं भी आपसे प्रेरित हूं. आपने हमें बता दिया कि असल चैम्पियन होना क्या होता है.”


इस पोस्ट में जो वीडियो प्रियंका ने डाला, उसमें सिमोन अपने ऊपर पड़ने वाले दबाव के बारे में खुलकर बात करते दिखी हैं. वो कह रही हैं-

“मुझे लगता है कि जब मैं लोगों की मंशाओं पर खरी नहीं उतरूंगी, तो मुझे बुरा लगता है, ये मेरे लिए सबसे मुश्किल है. मेरे ऊपर जो भी प्रेशर आता है उसका हल मैं थैरेपी से करती हूं.”

दुनिया की आम और नामी जनता से इतना सपोर्ट मिलने के बाद सिमोन ने भी ट्वीट कर कहा-

“जो प्यार और सपोर्ट मुझे आपसे मिला उसने मुझे ये अहसास कराया है कि मैं अपनी उपलब्धियों से और जिमनास्टिक्स से कहीं ज्यादा हूं, ये पहले मैंने कभी महसूस नहीं किया था.”

कब क्या हुआ, किसने क्या कहा, हमने जान लिया. अब जान लेते हैं कि सिमोन बाइल्स असल में कौन हैं.

एक नज़र सिमोन बाइल्स की अब तक की जर्नी पर

सिमोन ने छह साल की उम्र में जिम्नास्टिक्स की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. ओलंपिक्स डॉट कॉम के मुताबिक, 2013 में 16 की उम्र में बाइल्स ने दो वर्ल्ड चैम्पियनशिप गोल्ड अपने नाम किए. अगले साल यानी 2014 में उन्होंने वर्ल्ड चैम्पियनशिप में चार गोल्ड जीते. 2015 में फिर से चार गोल्ड मेडल जीते. 2016 के रियो ओलंपिक्स से पहले ही वो एक सुपरस्टार बन चुकी थीं.

हालांकि, सिमोन का बचपन इतना आसान नहीं था. फेसबुक वॉच ने सिमोन पर एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ रिलीज़ की थी. जुलाई की शुरुआत में. ‘सिमोन वर्सेज़ हरसेल्फ’ टाइटल से. इसमें सिमोन ने अपनी लाइफ के बारे में काफी चीज़ें बताई थीं. सिमोन चार भाई-बहनों में एक थीं. उनकी मां ड्रग और एल्कॉहल की एडिक्ट थीं. जिसके चलते वो बच्चों का ख्याल रखने में सक्षम नहीं थीं.

सिमोन और उनके भाई-बहनों को खाना नहीं मिलता था, वो अक्सर भूखे रहते थे. पड़ोसियों ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद सिमोन और उनके भाई-बहनों को फॉस्टर केयर में भेजा गया. बाद में सिमोन और उनकी एक बहन को उनकी मां के पेरेंट्स नेली और रोनाल्ड्स बाइल्स ने गोद ले लिया. वहीं उनके दो बड़े भाई-बहनों को उनके पिता की बहन ने गोद लिया.

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सिमोन बाइल्स के नाम छह ओलंपिक गोल्ड मेडल हैं. इनमें से चार गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल है.

सिमोन अपने बचपन और टीनेज के दौर में यौन शोषण की भी शिकार हुईं. अमेरिका की जिमनास्ट टीम का ऑफिशियल डॉक्टर लैरी नासर था. 18 साल तक वो इस पोस्ट पर रहा और इस दौरान उसने कई जिमनास्ट्स का यौन शोषण किया. सिमोन भी उनमें से एक थीं. सिमोन ने इस बारे में डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ में बताया था. अमेरिका में नैशनल जिम्नास्ट्स की ट्रेनिंग टेक्सास स्थित करैली रेंच में होती है. सिमोन ने 12 की उम्र से यहां ट्रेनिंग शुरू कर दी थी. उन्होंने कहा था,

“रेंच में एथलीट्स को दिन भर में कई सारे स्टेशन्स पर जाना होता था. लास्ट स्टेशन था थैरेपी का. जहां यंग गर्ल्स डॉक्टर नासर से मिलती थीं. उन बरसों में किसी ने भी हमें ये नहीं बताया था कि सेक्सुअल अब्यूज़ क्या होता है. इसलिए हमें पता ही नहीं चला कि हमारे साथ वो सब हो रहा है, हम विक्टिम्स बन रहे हैं. हममें से बहुत से लोग स्कूल नहीं जाते थे, होम स्कूलिंग भी नहीं थी, इसलिए कुछ पता नहीं था.”

बाद में जब अथॉरिटीज़ उनके परिवार से और परिवार उनसे पूछता तो सिमोन कहती उन्हें कुछ नहीं पता है. उनके साथ कुछ नहीं हुआ है. हालांकि एक दिन. सिमोन ड्राइव कर रही थीं. इसी दौरान उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ वो सबकुछ हुआ है जो उनसे पूछा जा रहा है. सारी घटनाएं उनकी आंखों के सामने घूम गईं और वो बस रोने लगीं. उन्होंने अपनी मां को फोन किया और रोती रहीं. इसके बाद सिमोन ने बताया था,

“मैं डिप्रेस हो गई. दिनभर अपने कमरे में रहती थी. कहीं जाना नहीं चाहती थी. किसी से बात करने का मन नहीं होता था. बहुत मुश्किल था मेरे लिए. मैं दिन भर सोती रहती थी. क्योंकि वो सच्चाई से भागने का मेरा अपना तरीका था. उस वक्त सोना मेरे लिए मौत के करीब होने जैसा था. इसलिए हर वक्त सोती रही.”

ऐसा बचपन जहां पेटभर खाना नहीं मिलता था, ऐसा बचपन जिसमें वो यौन शोषण की लगातार शिकार होती रहीं, उसको पीछे छोड़कर सिमोन ने खुद को स्थापित किया. दुनिया की सर्वश्रेष्ठ जिमनास्ट होने का दर्जा हासिल किया. लेकिन जीवन में एक बार अपने मानसिक स्वास्थ्य को किसी कॉम्पिटीशन से पहले रखने का फैसला उन्होंने किया तो लोग उनकी खेल भावना पर सवाल उठाने लगे.

ऐसा क्यों है कि खिलाड़ियों की मेंटल हेल्थ को हमेशा इग्नोर किया जाता है

जब भी किसी बेहतरीन खिलाड़ी की कहानी हमें बताई जाती है तो बताया जाता है कि उसने खेल के लिए क्या-क्या नहीं किया. कितनी कठिन ट्रेनिंग की. अनुशाषन और सख्ती को मेडल्स की चाबी बताया जाता है. खिलाड़ियों को भी खुद के साथ सख्ती बरतने को कहा जाता है. आप चक दे इंडिया के ट्रेनिंग सेशंस देख लें, वो सेशन जिसके बाद सारी लड़कियां कबीर खान से ट्रेनिंग लेने से हाथ खड़े कर देती हैं.

आप दंगल में गीता-बबीता की ट्रेनिंग देख लीजिए. कितनी सख्त. आप साला खड़ूस की ट्रेनिंग देखिए. इन सबमें डिसिप्लिन पर फोकस है, सख्ती पर फोकस है जो अच्छी बात है. लेकिन कहीं पर भी मानसिक स्वास्थ्य और कड़े अनुशासन के बीच की महीन रेखा नहीं दिखती है. और रेखा के लगभग गायब हो जाने का ही नतीजा है कि नाओमी ओसाका और सिमोन बाइल्स जैसी एथलीट्स टूर्नामेंट्स छोड़ रही हैं.

जीत का प्रेशर, मेडल का प्रेशर, रिकॉर्ड तोड़ने का प्रेशर. जब भी किसी खेल या टूर्नामेंट की बात होती है तो ये ही चीज़ें हमें सुनने को मिलती है. खिलाड़ियों पर प्रेशर को इतना नॉर्मलाइज़ कर दिया गया है कि जब कोई खिलाड़ी ये कहता है कि मैं बहुत दबाव में हूं, मैं ये नहीं कर सकता या सकती, तो लोगों को लगता है कि ये क्या बात हुई. स्पोर्ट्स पर्सन होकर इतना प्रेशर नहीं झेल सकते तो कोई और करियर चुनते.

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सिमोन बाइल्स को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ जिम्नास्ट कहा जाता है.

खिलाड़ियों के ऊपर पड़ने वाले मेंटल प्रेशर को लेकर हमारे साथी नीरज ने न्यूरो साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर नितनेम सिंह सोढ़ी से बात की. डॉक्टर सोढ़ी ने बताया,

हम खिलाड़ियों को अलग भी रख दें तो भी अगर किसी के ऊपर प्रेशर होगा तो वो डिप्रेशन और एंग्जायटी के रूप में सामने आ सकता है. ये हम खुद भी एक्सपीरियंस करते हैं कि अगर हम किसी टेंशन में हैं, किसी चीज़ के प्रेशर में हैं तो हम अपना 100 परसेंट नहीं दे पाते हैं.

अक्सर सुनने को मिलता है कि खिलाड़ियों को तो प्रेशर झेलना ही पड़ता है और आप जान बूझकर उस फील्ड में आए हो. फिर मेंटल हेल्थ का रोना क्यों? इस पर डॉक्टर सोढ़ी कहते हैं,

“कोई व्यक्ति किसी खेल में इसलिए नहीं आता कि उसे उसमें रिकॉर्ड बनाना होता है. वो खेलता है क्योंकि उसे उसमें मज़ा आता है. एक खेल को मज़े से खेलने वाले कई होते हैं, पर कुछ ऐसे होते हैं जो एक्स्ट्राऑर्डिनरी होते हैं. और वही चुने जाते हैं नैशनल-इंटरनैशनल टीमों में. इन टीमों में जाने के बाद मान लिया जाता है कि वो देश के लिए खेल रहा है, अपने लिए नहीं. और यहीं से दिक्कत शुरू होती है.

जब कोई खिलाड़ी अपने लिए खेलता है, खुद को इम्प्रूव करने के लिए खेलता है तो बहुत पॉसिबल है कि वो खुद पर पड़ने वाले प्रेशर से डील कर लेगा. पर अगर किसी खिलाड़ी के मन में ये बात चलती रहे कि उसे किसी को हराना है, कोई रिकॉर्ड बनाना है, कोई मेडल जीतना है, नहीं कर पाने पर लोग क्या कहेंगे, सबकी उम्मीदों का क्या होगा तो फिर ये उनकी मेंटल हेल्थ को हैम्पर करता है. और मेंटल हेल्थ का सीधा असर उनकी परफॉर्मेंस पर पड़ता है.”

सिमोन बाइल्स अपने गेम में टॉप पर हैं. ऐसे में मेंटल हेल्थ पर खुलकर बात करके. अपने मानसिक स्वास्थ्य को किसी मेडल या अचीवमेंट से पहले रखकर उन्होंने एक हिम्मत वाला कदम उठाया है. हमें उम्मीद है कि उनकी तरह ही और भी लोग अपनी मेंटल हेल्थ को गंभीरता से लेंगे और मदद मांगने से नहीं हिचकिचाएंगे.


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