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BJP कार्यकर्ता की बूढ़ी मां की मौत के बाद बंगाल की राजनीति में फैली गंदगी!

पश्चिम बंगाल में चुनाव चल रहा है. पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है. दूसरे चरण की होनी है. इस बीच राज्य में बीजेपी और टीएमसी, 85 साल की एक महिला की मौत को लेकर भिड़ी हुई हैं. आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर जारी है. जिस महिला की मौत हुई है, वो एक बीजेपी कार्यकर्ता की मां थी. करीब एक महीने पहले 27 फरवरी को उस महिला पर कथित तौर पर हमला हुआ था. जिसके आरोप बीजेपी ने टीएमसी पर लगाए थे. यह मामला कितना हाई-फाई हो चुका है… इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पीएम मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इसपर रिएक्शन दे चुके हैं…  कौन थी वो महिला? इस मामले में कब क्या मोड़ आया? क्या राजनीति हुई? क्या यह मुद्दा चुनाव पर असर डालेगा? विस्तार से जानते हैं.

क्या है पूरा मामला?

Shova Majumdar के पार्थिव शरीर को बीजेपी के झंडे में लपेटा गया.
Shova Majumdar के पार्थिव शरीर को बीजेपी के झंडे में लपेटा गया.

ऊपर जो फोटो आप देख रहे हैं, इसमें बीजेपी के झंडे में एक शव को लपेटा गया है. शव के आसपास बैठे घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है. ये शव है शोवा मजूमदार नाम की एक बुजुर्ग महिला का. एक महीने पहले जब शोवा पर कथित तौर पर हमला हुआ था, तो उन्होंने खुद ही आपबीती सुनाई थी. उन्होंने बताया था,

“गुंडे अचानक से आए और मेरे ऊपर हमला कर दिया. उन्होंने मेरे सिर और चेहरे पर मुक्के मारे. मुझे धक्के मारे. मुझे कई जगह चोटें आईं. पूरा शरीर दुख रहा है. मैं बहुत डर गई हूं”

शोवा मजूमदार उत्तर 24 परगना जिले के निमटा की रहने वाली थीं. उनके बेटे गोपाल मजूमदार इसी इलाके में बीजेपी के लिए काम कर करते हैं. गोपाल ने एक महीने पहले आरोप लगाया था कि टीएमसी कार्यकर्ता उन्हें मारने के लिए आए थे. उनकी मां ने शोर सुना तो बाहर आ गईं. फिर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनकी मां पर हमला कर दिया. गोपाल ने बताया,

“टीएमसी के गुंडे मेरे ऊपर हमलावर थे. मां ने शोर सुना तो वो बाहर आईं. वो जैसे ही बाहर आईं तो गुंडो ने उन्हें भी बहुत बेरहमी से मारा. वो बुरी तरह से घायल हो गईं.”

शोवा मजूमदार को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके एडमिट होते ही इस पूरे मामले पर राजनीति शुरू हो गई. ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार की शुरुआत से ही खुद को बंगाल की बेटी के तौर पर प्रोजेक्ट किया था. शोवा मजूमदार पर हमले के बाद बीजेपी ने उनके इसी एजेंडे पर पलटवार किया और पूछा कि क्या शोवा मजूमदार बंगाल की बेटी नहीं थीं? क्या वे बंगाल की मां नहीं थीं? बीजेपी ने ऐसे सवालों से लैश पोस्टर जगह-जगह लगा दिए. पश्चिम बंगाल बीजेपी की महिला मोर्चा अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल ने तो टीएमसी को गुंडो और बलात्कारियों की पार्टी बता दिया,

“कार्यकर्ता पर हमला करते हो तो समझ में भी आता. लेकिन एक बूढ़ी मां को इतनी बुरी तरह से पीटा. टीएमसी के लोग दिनभर संस्कृति की बातें करते हैं. क्या यही है संस्कृति. ममता बनर्जी की पूरी पार्टी गुंडों, हत्यारों और बलात्कारियों से भरी हुई है.”

मामले में आया ट्विस्ट

इस बीच शोवा मजूमदार के पोते गोविंदो का एक वीडियो सामने आया. जिसमें उसने दावा किया कि शोवा मजूमदार को उनका बेटा गोपाल मजूमदार अक्सर पीटा करता था और जो कुछ भी हुआ है, वो असल में पारिवारिक कलह का परिणाम है. टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने कोई हमला नहीं किया. कुछ ऐसा ही दावा गोविंद की पत्नी प्रतिमा ने किया.

इन बयानों के बाद टीएमसी को भी पलटवार करने का मौका मिल गया. पार्टी के नेता सुब्रता मुखर्जी ने कहा कि शोवा मजूमदार की जो हालत हुई है, वो उनके और उनके बेटे के बीच की आपसी कलह का परिणाम है. टीएमसी का इससे कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा,

“ये सब लड़के और उसकी मां का झगड़ा है. पारिवारिक कलह का मामला है. चुनाव आ गए हैं. हम चुनाव पर फोकस कर रहे हैं. बीजेपी के आंतरिक मामलों से हमें कोई लेना देना नहीं है. बेवजह टीएमसी को ना घसीटा जाए.”

खैर, औपचारिकता निभाने के बाद सभी नेता अपने काम पर लग गए. फिर 29 मार्च को शोवा मजूमदार की मौत हो गई. इसके बाद फिर से नेताओं के बीच तलवारें खिंच गईं. इस बार तो हाई प्रोफाइल नेता भी मैदान में आ गए. पीएम मोदी, अमित शाह, स्मृति ईरानी, जेपी नड्डा, लॉकेट चटर्जी से लेकर ममता बनर्जी, सौगत रॉय, शशि पंजा और डेरेक ओ ब्रायन तक.

दिग्गज उतरे मैदान में

इस पूरे मामले पर सबसे ताजा बयान पीएम नरेंद्र मोदी का है. प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के धारापुरम में रैली करते हुए ये मुद्दा उठाया. पीएम ने विपक्ष की सोच को महिला विरोधी बताते हुए तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के साथ विधानसभा में हुए दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया. पीएम ने कहा,

“हमें 25 मार्च 1989 की तारीख कभी नहीं भूलनी चाहिए. जब डीएमके के नेताओं ने विधानसभा में अम्मा के साथ बदसलूकी की थी. कांग्रेस और डीएमके की सोच महिला विरोधी है. और यह सोच सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. कल पश्चिम बंगाल में एक बूढ़ी औरत शोवा मजूमदार की मौत हो गई. उन्हें टीएमसी के गुंडों ने पीटा था. सिर्फ इसलिए क्योंकि वे अलग विचारधारा की थीं.”

वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया कि वे बंगाल की बेटी की मौत से दुखी हैं. टीएमसी के गुंडों ने उनसे मारपीट की. मजूमदार परिवार के इस घाव का दर्द लंबे समय तक ममता दीदी को परेशान करेगा. बंगाल हिंसामुक्त कल के लिए लड़ेगा ताकि हमारी माताओं और बहनों को सुरक्षित कल मिले. वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट करते हुए कहा कि गोपाल मजूमदार को बीजेपी कार्यकर्ता होने के कारण अपनी मां की जान गंवानी पड़ी. उनका बलिदान हमेशा याद किया जाएगा. ये भी बंगाल की बेटी थीं, मां थीं. बीजेपी हमेशा मां और बेटियों की सुरक्षा के लिए लड़ती रहेगी.

Amit Shah का ट्वीट.
Amit Shah Tweet

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों का जवाब देने में ज्यादा देर नहीं लगाई. बनर्जी नंदीग्राम के एक इलाके में जनसभा कर रही थीं. शोवा मजूमदार की मौत और बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने भी वही तरीका अपनाया, जो अब राजनीति में बहुत आम बना दिया गया है. यानी कि ‘तब कहां थे’  का सवाल पूछने का तरीका. अपनी नाकामियों को दूसरों की नाकामियों के जरिए छिपाने का तरीका. एक गलत चीज के सामने दूसरी गलत चीज को रखने का तरीका. ममता बनर्जी ने कहा,

“अमित शाह ट्वीट करके पूछते हैं कि बंगाल का हाल क्या है? अरे, वे बताएं कि यूपी का हाल क्या है? हाथरस के समय वे कहां छिप गए थे. क्यों नहीं किया था ट्वीट? सिर्फ बंगाल पर ही ट्वीट कर पाते हैं. हमारी पार्टी महिलाओं के खिलाफ हिंसा का समर्थन नहीं करती है.”

दूसरी तरफ बीजेपी की महिला नेता भी मुद्दे को लेकर हमलावर रहीं. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि बुजुर्ग महिला को केवल इसलिए पीटा गया क्योंकि वे बीजेपी कार्यकर्ता की मां थीं. उन्होंने कहा कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में उन सभी महिलाओं को इंसाफ दिलाएगी, जिनके साथ टीएमसी के गुंडों ने बलात्कार किया, उत्पीड़न किया और हत्या की. वहीं बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी ने भी टीएमसी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि एक तरफ ममता बनर्जी चुनाव प्रचार में खुद को बंगाल की बेटी बता रही हैं लेकिन दूसरी तरफ शोवा मजूमदार जैसी बेटियों और माओं की हत्या हो रही है. क्या वे बंगाल की बेटी नहीं हैं?

Shova Majumdar पर कथित तौर पर हमला होने के बाद बीजेपी ने जगह-जगह ऐसे पोस्टर लगाए.
Shova Majumdar पर कथित तौर पर हमला होने के बाद बीजेपी ने जगह-जगह ऐसे पोस्टर लगाए.

इधर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ममता सरकार के बचाव में उतर आए. उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता गोपाल मजूमदार का टीएमसी कार्यकर्ता से विवाद हुआ था. इसमें गोपाल नीचे गिर गया. उसकी मां को लगा कि बेटे पर हमला हुआ है तो वे दौड़ीं. गिर जाने की वजह से वो घायल हो गईं. ममता कैबिनेट की मंत्री शशि पंजा ने तो यह दावा कर दिया कि शोवा मजूमदार की मौत बीमारियों की वजह से हुई है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ममता सरकार को घेरने के लिए पोस्टमार्टम तक का इंतजार नहीं किया. ऐसा इसलिए क्योंकि परिस्थितियां संदिग्ध थीं. उन्होंने भी अमित शाह पर पलटवार करते हुए हाथरस का जिक्र किया.

इस बीच यह भी सामने आया है कि शोवा मजूमदार का डेथ सर्टिफिकेट पर जिन डॉक्टर ने हस्ताक्षर किए, वो बीजेपी नेता हैं. दरअसल, शोवा मजूमदार के डेथ सर्टिफिकेट पर डॉक्टर अर्चना मजूमदार ने हस्ताक्षर किए हैं. अर्चना मजूमदार ना केवल बीजेपी नेता हैं, बल्कि उत्तरी दमदम सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ रही हैं.

फिलहाल, इस मुद्दे पर राजनीति थमती नजर नहीं आ रही है. पिछले महीने जब बीजेपी के नेता बाबुल सुप्रियो ने ममता बनर्जी के खिलाफ स्त्री विरोधी टिप्पणी करते हुए उन्हें पराया धन बताया था और राज्य से विदा करने की बात कही थी, तभी से बीजेपी को एक ऐसे मुद्दे की तलाश थी, जिसके सहारे वो ममता के ‘बंगाल की बेटी’ वाले नैरेटिव को चुनौती दे सके. शोवा मजूमदार की मौत के बाद बीजेपी को वह मुद्दा मिल गया है. पार्टी ने उसे दोनों हाथों से लपका भी है. दूसरी तरफ महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ममता सरकार डिफेंसिव नजर आ रही है. शोवा मजूमदार की मौत कैसे हुई, ये बात तो अब आने वाले वक्त में ही पता चलेगी. लेकिन आरोपों-प्रत्यारोपों और राजनीतिक रस्साकसी के बीच एक बात तो नकारी नहीं जा सकती है. वो यह कि पश्चिम बंगाल की सत्ता की लड़ाई की कीमत वहां की निर्दोष जनता चुका रही है.

वीडियो- शोभा मजूमदार की मौत के बाद पीएम मोदी और अमित शाह ने ममता बनर्जी को क्या चेतावनी दी?

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