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कोरोना ग्रस्त लड़कियों का रेप करने वालों को अपनी जान का डर क्यों नहीं लगता?

ओडिशा में एक ज़िला है नुआपाड़ा नाम का. यहां शिलदा नाम का एक इलाका है. यहीं पर पुलिस ने कुछ दिन पहले एक कोविड मरीज़ के खिलाफ FIR दर्ज की. मरीज़ पर आरोप था कि उसने अस्पताल में भर्ती एक दूसरी कोविड मरीज़ का यौन शोषण किया था. जब ये केस सामने आया, हम सच बताएं, तो हमें हैरानी नहीं हुई. क्योंकि ये कोई पहला केस नहीं था. ऐसे बहुतेरे मामले आ चुके हैं, जहां अस्पतालों में भर्ती कोविड मरीज़ या वार्ड बॉय के ऊपर, या डॉक्टर के ऊपर किसी महिला मरीज़ का यौन शोषण करने का आरोप लगा है. विडंबना देखिए, कोरोना का मुश्किल वक्त चल रहा है, जहां ज्यादातर लोग बस ये सोच रहे हैं कि कैसे भी इस वायरस से बचे रहें, या फिर अगर संक्रमित हो भी गए तो ठीक हो जाएं, वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो अभी भी यौन शोषण और रेप जैसे गंभीर अपराधों के बारे में ही सोच रहे हैं. आज हम इन्हीं कुछ मामलों पर बात करेंगे. साथ ही ये भी बताएंगे कि इन आरोपियों के दिमाग में आखिर क्या चलता है, जो वो ऐसी संकट के समय भी इस तरह की हरकतें करने से बाज़ नहीं आ रहे.

ओडिशा का जो मामला हमने आपको शुरुआत में बताया, उसमें महिला मरीज़ 26 अप्रैल को भर्ती हुई थी, इसके तीन दिन पहले आरोपी भर्ती हुआ था. ‘इंडिया टुडे’ के मोहम्मद सुफियान की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का आरोप था कि आरोपी ने उसे गलत तरीके से छुआ था, वो उसकी मंशा समझ गई थी, इसलिए ज़ोर से चिल्लाई. आस-पास के मरीज़ भी इकट्ठे हो गए. फिर अस्पताल प्रशासन को बुलाया गया. और पुलिस को जानकारी दी गई. पुलिस ने IPC की धारा 354, 354 (A), 269 और 270 के तहत मामला दर्ज किया. ये भी बताया कि कार्रवाई तभी हो पाएगी जब आरोपी की कोविड रिपोर्ट निगेटिव आएगी.

Sexual Harassment In Covid Time (4)
मामला ओडिशा के नुआपाड़ा जिले का है. Covid पॉजिटिव महिला के यौन शोषण का आरोप दूसरे कोरोना मरीज पर लगा है.

और भी केस आ चुके हैं

ग्वालियर में भी इसी तरह का मामला सामने आया था. यहां के एक प्राइवेट अस्पताल के वार्ड बॉय पर कोविड मरीज के साथ रेप करने का आरोप लगा था. पीड़िता 16 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुई थी. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने 18 अप्रैल को वार्ड बॉय को गिरफ्तार कर लिया था. उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया था.

चार दिन पहले ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की वेबसाइट में भी इस तरह की एक न्यूज़ छपी थी. गुजरात के राजकोट ज़िले के सिविल अस्पताल में 60 साल की एक महिला ने रेप की शिकायत की थी. महिला का आरोप था कि एक दिन पहले आधी रात को PPE पहने एक व्यक्ति उसके पास आया था, फिर सिर में मसाज देने के बहाने से उसने महिला का रेप किया था. चूंकि महिला के मुताबिक, आरोपी PPE किट में था, इसलिए वो उसे पहचान नहीं सकी. लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करके छानबीन की और 35 साल के एक अटेंडेंट को गिरफ्तार कर लिया. मामले की जांच चल रही है. पीड़ित महिला कुछ दिन पहले कोरोना से संक्रमित हुई थी. घटना के समय तक उसकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी, लेकिन पोस्ट-कोविड कॉम्प्लिकेशन्स का इलाज चल रहा था.

अब थोड़ा पीछे चलते हैं. पिछले साल जुलाई में नोएडा के एक प्राइवेट अस्पताल में एक डॉक्टर भर्ती हुआ. कोरोना पॉज़िटिव था. आइसोलेशन वार्ड में उसे रखा गया. उसी वार्ड में 20 साल की एक लड़की भी एडमिट थी, वो भी कोविड से जूझ रही थी. डॉक्टर के भर्ती होने के कुछ ही दिन बाद डॉक्टर पर लड़की का यौन शोषण करने का आरोप लग गया. लड़की ने पुलिस में डॉक्टर के खिलाफ शिकायत भी की. डॉक्टर के खिलाफ तुरंत केस दर्ज हुआ और जांच शुरू की गई. पुलिस ने तब अस्पताल प्रशासन से ये भी सवाल किया था कि महिला और पुरुष को एक ही वार्ड में क्यों रखा गया?

जुलाई 2020 में ही एक और केस आया था. दिल्ली के छतरपुर में बने कोविड केयर सेंटर से. समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, 14 साल की लड़की, जो कोरोना पॉज़िटिव थी, उसे सेंटर में ही भर्ती एक दूसरे कोरोना मरीज़ ने वॉशरूम में कथित तौर पर सेक्शुअली हैरेस किया था. लड़की ने जब अपने घरवालों को इसकी जानकारी दी, तो घरवालों ने पुलिस को सूचना दी. लड़की ने फिर पुलिस को बताया था कि वॉशरूम में एक लड़का यौन शोषण कर रहा था, और दूसरा उसे फोन पर रिकॉर्ड कर रहा था.

केरल के कोझिकोड से भी ऐसा मामला आ चुका है. पिछले साल नवंबर में एक अस्पताल में काम करने वाले स्टाफ को कोरोना पॉज़िटिव महिला के रेप की कोशिश में गिरफ्तार किया गया था. मामला जब सामने आया तो अस्पताल ने अपने स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया. और पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC के सेक्शन 376 R/w 511 IPC और 354 डी के तहत केस दर्ज किया था.

किन कानूनों के तहत केस दर्ज हुआ

ये तो तो कुछ मामले हैं जो सामने आ पाए, बहुत से केस तो ऐसे रहे होंगे जो दर्ज ही न हुए हों. यानी ऐसी घटनाओं का असल आंकड़ा आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा हो सकता है. जो केस आपको बताए गए हैं, उनमें से ज्यादातर में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जिन धाराओं में केस किया, वो थीं- IPC का सेक्शन 354, यानी सेक्शुअल हैरेसमेंट, सेक्शन 376 यानी रेप, धारा 376 R/w 511, यानी रेप की कोशिश. साथ ही कुछ मामलों में सेक्शन 269 के तहत भी केस दर्ज हुआ था, ये धारा तब लगती है जब आरोप हो कि व्यक्ति ने खतरनाक बीमारी को फैलाने जैसी हरकत की. यहां खतरनाक बीमारी है कोविड. अब एक और सवाल उठता है कि क्या एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के तहत भी आरोपी के खिलाफ बीमारी फैलाने के आरोप में केस हो सकता है. इसका जवाब हमें दिया वकील प्रज्ञा पारिजात ने. उन्होंने कहा,

“ये एक्ट काफी पुराना है. इसमें कुल चार-पांच सेक्शन्स ही हैं. जब भी हमें लगा है कि हमारे देश में महामारी जैसी स्थिति आई है तो इस एक्ट को लगाया गया था. पुराने ज़माने के हिसाब से देखें तो वो बहुत इनकम्प्लीट लगेगा. लेकिन इसमें पार्लियामेंट ने एग्जिक्यूटिव अथॉरिटी को पावर दी हुई है, जैसे DM, SDM. तो उन्हें कभी भी अगर लगता है कि IPC का सेक्शन लगाने की स्थिति पैदा हुई है, तो वो पावर का इस्तेमाल कर सकते हैं. सेक्शुअल हैरेसमेंट का अगर कोई केस होता है तो वहां पर भी वो उस पावर का इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ ऐसी स्थिति आती है जहां एक कोविड पेशेंट दूसरे कोविड पेशेंट के साथ, या कोई अस्पताल का स्टाफ किसी कोविड पेशेंट का सेक्शुअल हैरेसमेंट करने की कोशिश करता है, तो एपिडेमिक एक्ट के अंदर जो पावर दी गई है एग्जिक्यूट की, वो इनवोक करके IPC की धारा लगाई जा सकती है.”

यानी सीधे तौर पर इस एक्ट के किसी प्रावधान के तहत सेक्शुअल हैरेसमेंट के मामलों में केस नहीं होता. बस इस एक्ट का इस्तेमाल करके एग्जिक्यूट अथॉरिटी यौन शोषण के केस में IPC की धाराओं के तहत केस दर्ज कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए भी पीड़ित पक्ष की तरफ से शिकायत होना ज़रूरी है.

डॉक्टर क्या कहते हैं?

कोरोना के समय में भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों को हम ‘नॉर्मल’ नहीं कह सकते. या सिर्फ ये नहीं कह सकते कि सेक्शुअल अराउज़ल की वजह से ऐसी हरकत की. फिर क्यों लोग इतना नीचे गिरकर यौन शोषण की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. क्या सायकोलॉजी है उनकी. ये जानने के लिए हमने बात की डॉ. अखिल अग्रवाल से. ये मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल हैं. उन्होंने बताया कि इस तरह की हरकतों को बीमारी नहीं माना गया है, बल्कि ‘अबनॉर्मल सेक्शुअल बिहेवियर’ माना गया है. और कोविड के समय में जो लोग ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, उनके अंदर दो वजहों से ‘अबनॉर्मल सेक्शुअल बिहेवियर’ पैदा हो सकता है. पहला है लर्निंग, दूसरा है न्यूरो सायकोलॉजिकल प्रॉब्लम. लर्निंग माने जब आरोपी के साथ बचपन में होने वाली घटनाओं का उस पर काफी प्रभाव पड़ना. जैसे- अगर वो बचपन में खुद सेक्शुअल एब्यूज़ का शिकार हुआ हो, या बचपन में बहुत सताया गया हो, घर का टॉक्सिक माहौल हो, ये सारी चीज़ें उसके ऊपर असर डालती हैं. और लर्निंग की वजह से जो व्यक्ति ऐसा क्राइम करते हैं, उनके दिमाग में औरतों को लेकर बहुत निगेटिव विचार होते हैं, जैसे- औरत केवल उपभोग की वस्तु है, उसकी न का मतलब ही हां है. इस तरह की बातें. दूसरा कारण है- न्यूरो सायकोलॉजिकल प्रॉब्लम. उन्होंने कहा-

“बहुत सारी स्टडीज़ ये कहती हैं कि ऐसे लोग जिनमें कि एक्सेसिव अबनॉर्मल सेक्शुअल बिहेवियर पाया जाता है, उनमें कहीं न कहीं हेड इन्जरी के केस ज्यादा होते हैं. यानी उनके न्यूरॉन्स कुछ डैमेज होते हैं. ऐसे में वो इमोशनल फीलिंग को समझने में नाकाम होते हैं. इसी वजह से उनमें क्रिमिनल टेंडेंसी बढ़ जाती है. सायकोलॉजिकली अगर हम बात करें, तो बहुत बार ऐसे लोग किसी न किसी एडिक्शन जैसे किसी तरह के नशे का शिकार होते हैं. उससे जो उन्माद होता है, उस उन्माद के चक्कर में वो उस तरह के एक्ट कर लेते हैं. दूसरा, जो लंबे समय का डिप्रेशन होता है, मैरिटल डिस्प्यूट होता है, वो आपके अंदर अबनॉर्मल सेक्शुअल डिज़ायर को बढ़ाता है. पर्वर्टेड सेक्शुअल बिहेवियर वाले लोगों को फीमेल को टीज़ करने में मज़ा आता है. हम अगर कोविड एरा की बात करें, तो इसका एक बड़ा कारण लंबे समय तक अलग रहना हो सकता है. आप एक रूम में कैद रहते हैं, वहां आपकी फ्रस्ट्रेशन, लोनलिनेस बढ़ जाती है. लेकिन अल्टिमेटली कहीं न कहीं इसमें आपकी अपब्रिंगिंग, आपकी सोसायटी की सायकोलॉजी बहुत असर करती है.”

Sexual Harassment In Covid Time (3)
डॉ. अखिल अग्रवाल, मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल

ऐसे मामलों में सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी आती है अस्पताल प्रशासन पर. इन घटनाओं को रोकने के लिए, या कम से कम इनकी संख्या कम करने के लिए अस्पतालों को चाहिए कि वार्ड्स सही से मैनेज रहें. एक वार्ड मैनर्स रहे. जो कि अधिकतर अस्पतालों में होता ही है. किस तरह से अस्पतालों में वार्ड्स को लेकर मैनेजमेंट किया जाता है? मरीज़ का कैसा बर्ताव मिसबिहैव की कैटेगिरी में आएगा? ये जानने के लिए हमने बात की लखनऊ के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल की एक हेल्थ वर्कर से. उन्होंने कहा-

“हम पेशेंट की कंडिशन को देखकर डिसाइड करते हैं कि उसे कहां रखा जाएगा. पेशेंट अगर स्टेबल है तो उसको कहां रखा जाएगा. अगर स्टेबल नहीं है, ऑक्सीजन पर है, तो उसके अकॉर्डिंग हम डिसाइड करते हैं कि पेशेंट को किस वार्ड में रखा जाए. कुछ पेशेंट ऐसे होते हैं जो स्टाफ से बुरा बर्ताव करते हैं, तो उन्हें घर पर रखकर ट्रीटमेंट करना चाहिए. मैनेज भी नहीं हो पाएगा, क्योंकि ज़ाहिर सी बात है कि अगर गाली देंगे तो हम काम करना पसंद नहीं करेंगे.”

Sexual Harassment In Covid Time (2)
लखनऊ हेल्थवर्कर

कोरोना वायरस. शरीर को तोड़ देता है. जो इससे संक्रमित हो रहा है, उसे रिकवर करने में काफी वक्त लग रहा है. और रिकवरी के लिए भी ज़रूरी है कि मरीज़ सकारात्मक सोच रखे. लेकिन इसी दौरान अगर कोई महिला कोविड मरीज़ रेप का, सेक्शुअल हैरेसमेंट का शिकार हो जाए, तो सोचिए वो कहां से इस सकारात्मक सोच को लेकर आएगी. कोरोना की मार तो पहले ही उसके शरीर को कमज़ोर कर रही है, ऊपर से यौन शोषण की घटना, उसे दिमागी तौर पर भी कमज़ोर कर देती है. वक्त ऐसा चल रहा है कि हमें एक-दूसरे का साथ देना चाहिए. हिम्मत बंधाना चाहिए. खासतौर पर कोविड के जो मरीज़ अस्पताल में भर्ती हैं, वो अगर एक-दूसरे का हौंसला बढ़ाते रहें, तो हो सकता है कि जल्दी रिकवर भी कर जाएं. लेकिन इन्हीं मरीज़ों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो हिम्मत देना तो दूर, उसे तोड़ने का काम कर रहे हैं. कम से कम इस वक्त तो इस तरह की हरकतों से लोगों को बाज़ आ जाना चाहिए. हम ये नहीं कह रहे कि कोविड के न रहने पर इस तरह की घटनाएं होना जायज है, बिल्कुल भी नहीं है. कभी हो भी नहीं सकती. लेकिन अब ये एक आयरनी हो गया है कि अखबारों में रेप और यौन शोषण की खबरें पढ़ना हमें आम लगने लगा है.

उम्मीद करते हैं कि लोग एक-दूसरे के प्रति सेंसिटिव होंगे. और ऐसे घिनौने अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलेगी.


वीडियो देखें: कोविड अस्पतालों में भर्ती कोरोना पेशेंट्स पर लगते यौन शोषण के आरोपों की वजह क्या है?

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