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क्या है PCOS, जिसमें पीरियड्स लेट होते हैं और औरतों के चेहरे पर बाल निकल आते हैं

यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.

PCOS. यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic ovary syndrome). ये एक मेडिकल कंडीशन है जिससे हिंदुस्तान में हर 10 में से एक औरत जूझ रही है. अगर मैं गिनूं तो मेरी ही जान-पहचान में छह ऐसी औरतें है जिन्हें PCOS है. PCOS में क्या हाल हो जाता है, ये उस लड़की से जानिए, जो इससे जूझ रही है.

नाम-अदिति (बदला गया है)
उम्र-30
पेशा- मीडिया प्रोफेशनल

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                                                    (सांकेतिक तस्वीर)

मुझे 10 साल पहले पता चला मुझे PCOS है. दो-दो, तीन-तीन महीने तक पीरियड्स नहीं आते थे. जब पीरियड्स नहीं आते तो चेहरे पर, सिर पर बड़े-बड़े दर्द वाले दाने हो जाते. दवाई लेने पर कुछ महीने तक सब ठीक रहता. उसके बाद फिर से दिक्कत होने लगती. PCOS की वजह से वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ता है. छोटी-छोटी चीज़ों से इरिटेशन होती है. PCOS पता चलने के बाद मैंने नोटिस किया कि मेरे चेहरे पर भी बाल आने लग गए हैं. बहुत ज़्यादा दाढ़ी जैसे नहीं आते हैं पर प्लकर से खींच कर निकालना पड़ता है हर हफ़्ते.

अंदाज़ा तो लग ही गया होगा कि कितनी परेशानी होती है!

तो हमने बात की डॉक्टर ध्रुपती डेढ़िया से. वो मुंबई की क्रिटीकेयर अस्पताल स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं. डॉक्टर डेढ़िया ने जो जानकारी हमें दी वो हम आपको बता रहे हैं, ताकि ये हर लड़की और औरत के काम आ सके. हम PCOS से जुड़े कुछ ज़रूरी सवालों के जवाब यहां देंगे.

डॉक्टर ध्रुपती डेढ़िया, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, क्रिटीकेयर हॉस्पिटल, मुंबई.
डॉक्टर ध्रुपती डेढ़िया, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, क्रिटीकेयर हॉस्पिटल, मुंबई.

PCOS क्या है?

PCOS ओवरी की बीमारी का नाम है. ओवरी का एक ही काम होता है अंडा बनाना. आदर्श स्थिति में 28 दिन का पीरियड साइकल होता है. इसमें ओवरी में अंडा बनता है, फिर ओवरी से बाहर निकलता है और पीरियड के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है. जब एक अंडे के बदले बहुत सारे अंडे बनने शुरू हो जाते हैं, तो एक भी अंडा ठीक से डेवलप नहीं हो पाता. इन अंडर डेवलप्ड अंडों को सिस्ट कहते हैं. ये सिस्ट ओवरी के अंदर ही रह जाते हैं. इस वजह से इस कंडीशन को पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम कहते हैं. यानी ओवरी में बहुत सारे सिस्ट वाली बीमारी.

 

Help for women with polycystic ovary syndrome – research magazine
बाएं तरफ नार्मल ओवरी. दाईं तरफ़ PCOS से ग्रसित ओवरी.

लेकिन इससे होता क्या है?

अंडा बनाने के दौरान ओवरी एस्ट्रोजन नाम का हॉर्मोन बनाती है. अंडा जब भी ओवरी के बाहर आता है तब प्रोजेस्टेरॉन नाम का दूसरा हॉर्मोन बनता है. रेगुलर पीरियड आने के लिए इन दोनों हॉर्मोन्स की मात्रा में संतुलन ज़रूरी होता है. लेकिन PCOS में चूंकि कई अंडे बनते जाते हैं तो एस्ट्रोजन बहुत ज्यादा बनता है. लेकिन ये ओवरी से बाहर नहीं निकल पाते ऐसे में प्रोजेस्टेरॉन नहीं बन पाता है. यानी दोनों हॉर्मोन्स का बैलेंस बिगड़ जाता है. एस्ट्रोजन ज्यादा, प्रोजेस्टेरॉन कम. इससेः

-एस्ट्रोजन बढ़ने से औरत का वज़न बढ़ने लगता है.

-प्रोजेस्टेरॉन रिलीज़ नहीं होने के चलते पीरियड रेगुलर नहीं आते.

– पीरियड रेगुलर नहीं होंगे तो प्रेग्नेंसी में प्रॉब्लम हो सकती है.

-टेस्टेस्टेरॉन एक और हॉर्मोन है जिसकी हल्की सी मात्रा हर औरत में होती है. लेकिन पीरियड इर्रेगुलर रहता है तो इसकी मात्रा भी बढ़ जाती है, इससे चेहरे पर बाल आते हैं. सिर के बाल झड़ने लगते हैं.

लेकिन ये PCOS होता क्यों है?

थायरॉइड. इसके बारे में हम पहले डिटेल में बात कर चुके हैं. जब किसी को हाइपो थायरॉइड होता है, यानी शरीर में थायरॉइड हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है तो ओवरी ठीक से फंक्शन नहीं कर पाती है.

-अगर इंसुलिन की मात्रा ज़्यादा या कम रहती है तो ओवरी पर असर पड़ता है

– हमारी किडनी के ऊपर एक एड्रेनल ग्लैंड होता है. इसका काम होता है टेस्टेस्टेरॉन हॉर्मोन बनाना. अगर ये हॉर्मोन ज्यादा बनने लग जाए तो ओवरी का काम प्रभावित होता है.

– हमारे ब्रेन में पिट्यूटरी नाम का एक ग्लैंड होता है. इस ग्लैंड से प्रोलैक्टिन हॉर्मोन निकलता है. स्ट्रेस या ट्यूमर की वजह से इस हॉर्मोन की मात्रा कई बार बढ़ जाती है. इस वजह से भी ओवरी ठीक से फंक्शन नहीं कर पाती.

– जेनेटिक कारण.

-लाइफस्टाइल की दिक्कतें. जैसे जंक फूड खाना . एक्सरसाइज़ न करना. बहुत स्ट्रेस लेना.

Junk food and diabetes: The link, the effects, and tips for eating out
अगर आपको PCOS है तो आपको जंक फ़ूड से थोड़ा दूर ही रहना पड़ेगा.

कैसे पता चलता है कि PCOS है?

– पीरियड्स की दिक्कत होने पर सोनोग्राफी करते हैं. इससे पता चलता है कि ओवरी का साइज़ ठीक है या नहीं. साइज़ बढ़ा होने पर डॉक्टर हॉर्मोन टेस्ट करवाने को कहते हैं.

– हॉर्मोन टेस्ट के लिए ब्लड का सैम्पल लिया जाता है. इसमें टेस्टेस्टेरॉन, प्रोजेस्टेरॉन लेवल्स चेक किए जाते हैं. लेवल ऊपर नीचे आने पर हॉर्मोनल ट्रीटमेंट शुरू करते हैं.

इसका इलाज क्या है?

– इसमें डॉक्टर या तो प्रोजेस्टेरॉन सप्लीमेंट देते हैं ताकि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन का संतुलन सही हो जाए या गर्भ निरोधक गोलियों के अलग-अलग डोसेज देते हैं. ये दवाएं एक पूरे साइकल के हिसाब से आती हैं. इससे पीरियड रेगुलर हो जाता है.

– पीसीओएस के निपटने का दूसरा और लॉन्ग टर्म में बेनिफिट देने वाला तरीका है लाइफस्टाइल में बदलाव करने का. इसमें डॉक्टर एक्सरसाइज़ करने और हेल्दी खाना खाने की एडवाइज़ देते हैं.

-थायरॉइड या इंसुलिन रेजिस्टेंस को दवाओं से ठीक किया जा सकता है.

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PCOS को कंट्रोल करने के लिए हॉर्मोन की दवाइयां दी जाती हैं. ये एक्ने, चेहरे पर बाल, वेट गेन पर रोकथाम के लिए भी असरदार है.

अब आते हैं PCOS के लिए सबसे ज़रूरी चीज़, यानी डायट पर

PCOS में आपको अपने खाने-पीने का ख़ास ख़याल रखना होगा. क्या चीज़ें आपको अपनी डाइट में रखनी हैं, क्या नहीं. ये हमें बताया डायटीशियन श्रेया ने.

-प्रोटीन और फाईबर अपनी डाइट में ज़्यादा करें

-ऐसा दूध जिसमें एंटी बायोटिक या ग्रोथ हॉर्मोन मिला हो वो नहीं लेना चाहिए

-अपनी डाइट में रागी, ज्वार, बाजरा लें

-केला, आम वगैरह ज़्यादा न खाएं क्योंकि इस कंडीशन में आपको डायबिटीज़ जैसा रिस्ट्रिक्शन करना है

इन डाइट टिप्स का ख़ास ख़याल रखिएगा.


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