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स्कॉच ब्राइट वालों ने ढंग का काम करना चाहा, ट्विटर पर लोगों ने उल्टी गंगा बहा दी

बर्तन धोने के लिए आपने कभी न कभी स्कॉच ब्राइट का इस्तेमाल किया ही होगा. वही पीले-हरे रंग का स्पंज, जो बर्तन घिसने के काम आता है. उसकी पैकेजिंग को लेकर ट्विटर पर घमासान मचा हुआ है आप पूछेंगे ऐसा क्या हो गया भई? तो जानने से पहले एक बार उसकी पैकेजिंग देख लीजिए :

Scotch Brite 700
(तस्वीर: लिंक्डइन/कार्तिकश्रीनिवासन)

ये वाइप्स की फोटो है, जो किचन में स्लैब और चूल्हा वगैरह पोंछने के काम आती हैं. इन पर एक महिला का चेहरा बना हुआ है.

अब हुआ ये कि कार्तिक श्रीनिवासन नाम के एक कम्युनिकेशन प्रोफेशनल ने ये पैकेजिंग देखी, और कंपनी को लपेट लिया. अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल पर इमेज डाली और लिखा,

“लोगो  में एक महिला की तस्वीर है (जिसने एक बिंदी लगा रखी है, ये इसलिए बता रहा हूं ताकि अन्तर पता चल सके कि स्कॉच ब्राइट के दूसरे देशों के लोगो में भी महिला का चेहरा था)

मैंने सोचा कि क्या स्कॉच ब्राइट के सभी प्रोडक्ट्स में ये लोगो है? कपड़े पर से गांठें और रोयें हटाने वाले लिंट रोलर में ये नहीं है, लेकिन स्क्रब पैड/स्पंज, सिंक ब्रश, झाड़ू, टॉयलेट ब्रश में ये लोगो है.

स्कॉच ब्राइट के प्रोडक्ट्स बेहद उपयोगी हैं और मुझे 3M ब्रांड बेहद पसंद है. लेकिन ऐसा लगता है कि इस तरह की तस्वीर से इशारा मिलता है कि 3M ये मानकर चलती है कि ये प्रोडक्ट्स कौन इस्तेमाल करेगा. जेंडर मार्कर तब क्लियर हो जाता है  जब आप देखते हैं कि लिंट रोलर, जिसके प्रोडक्ट पैक पर पुरुषों का कोट बना हुआ है, उस पर ये लोगो नहीं है.

Lint Roller
लिंट रोलर. जो कोट- स्वेटर इत्यादि कपड़ों पर बनी रोंये की गांठें हटाने के काम आता है. इस पर महिला का लोगो नहीं है. (तस्वीर: Scotch Brite)

जब 3M ने 1990 में स्कॉच ब्राईट को लॉन्च किया भारत में, तब मैं समझ सकता हूं कि ब्रांड या एजेंसी ने ये एडिशन सोचा होगा, ताकि उनके यूजर्स को ध्यान में रखा जा सके. और उसके बाद से वो लगता है इस के बारे में पूरी तरह भूल गए.

लेकिन 2020 में  ऐसे जेंडर मार्कर बेहद अजीब और गलत लगते हैं. मुझे पूरी उम्मीद है कि 3M  में काम कर रहे लोग इस बात का संज्ञान लेंगे, और इस लोगो को अपडेट करेंगे.”

Karthik 700
कार्तिक श्रीनिवासन का वो पोस्ट जो लिंक्डइन पर उन्होंने डाला. (तस्वीर: लिंक्डइन से स्क्रीनशॉट)

3M वो कंपनी है जो स्कॉच ब्राइट बनाती है. उसके हेड ऑफ मार्केटिंग (कंज्यूमर बिजनेस) अतुल माथुर ने इस पोस्ट का जवाब दिया. उन्होंने लिखा,

“आपने सही कहा कि ये लोगो काफी समय से चला आ रहा है. और अब समय आ गया है कि हम पिछड़े हुए विचारों से आगे बढ़ें. इसकी पहचान करते हुए हमने व्यवहार में बदलाव की शुरुआत करने की तरफ कदम बढ़ा दिया है.”

इसके बाद उन्होंने एक ऐड का लिंक डाला स्कॉच ब्राइट का जिसमें घर सबका तो काम भी सबका कैम्पेन चलाया गया है. इसके बाद अतुल माथुर ने लिखा,

“हम इस ब्रैंड वेक्टर को भी बदल रहे हैं. आप कुछ ही महीनों में इसमें बदलाव देखेंगे.”

Atul Mathur 3 M 700
कंपनी के अधिकारी अतुल माथुर का कार्तिक को जवाब. (तस्वीर: लिंक्डइन से स्क्रीनशॉट)

मामला ये था कि बर्तन साफ़ करने वाले, किचन से जुड़े प्रोडक्ट्स पर सिर्फ महिला की तस्वीर लगी थी. चूंकि प्रोडक्ट भारत का था, इसलिए उस लोगो की महिला के चेहरे पर बिंदी लगी थी. दूसरे देशों में भी स्कॉच ब्राइट के प्रोडक्ट्स बिकते हैं. उनमें भी पहले कई लोगोज़  पर महिला की तस्वीर लगी थी. लेकिन भारत पर फोकस दिखाने के लिए लोगो की महिला के चेहरे पर बिंदी लगाई गई. और तब से यही लोगो चलता आ रहा है.

कार्तिक ने पॉइंट आउट किया कि महिला की तस्वीर लगाकर स्कॉच ब्राइट ये दिखाना चाह रहा है कि किचन और साफ़-सफाई के काम सिर्फ औरतें करती हैं. जोकि नहीं होना चाहिए. इसमें उन्होंने बिंदी मेंशन कर दी. अब ट्विटर पर लोग उलट लिए. कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा मिलाकर भानुमती ने कुनबा जोड़ लिया. और लोग पिल पड़े स्कॉच ब्राइट पर.

धड़ाधड़ ट्वीट किए जाने लगे कि बिंदी को पिछड़ा हुआ कैसे कह दिया? बिंदी का मतलब नहीं पता तुम्हें? ऐसे कैसे? स्कॉच ब्राइट को बैन करो. बिंदी का ये अपमान नहीं सहा जाएगा. जबकि बहस बिंदी की थी भी नहीं. कुछ ट्वीट आप देख सकते हैं:

इन जनाब ने तो पूरा तीया-पांचा ही बदल दिया. कंपनी का ध्यान इस लोगो की तरफ खींचने वाले कार्तिक को ही कंपनी का मार्केटिंग हेड बना दिया.

ले-दे कर एक ये ही अकाउंट दिखा जिसने इस बाबत बात क्लियर होने पर अपना ट्वीट डिलीट किया.

बाकी और भी ऐसे कई एकाउंट्स हैं जो लगातार बिंदी की तस्वीरें डाल रहे हैं, और हैश टैग चला  रहे हैं #IwearBindi.

ट्विटर की लीला ट्विटर ही जाने.


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