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सौम्या हत्याकांड: जब एक पत्रकार लड़की के मर्डर का राज़ दूसरी लड़की से मर्डर से खुला

2020. दिल्ली का राजिंदर नगर. फरवरी में यहां के एक बिजनेसमैन के पास वसूली के लिए कॉल आया. वॉट्सऐप पर. ढाई करोड़ रुपयों के लिए. कहा गया, पैसे नहीं दिए तो घर पर गोलियां चलवा देंगे. बिजनेसमैन ने ध्यान नहीं दिया. आखिर उसके घर के ऊपर गोलियां चलवा दी गईं. वो और उसका भतीजा घायल हो गए. पुलिस ने तफ्तीश की, और आठ लोगों के नाम सामने आए. ये दिल्ली के कुख्यात नीरज बवानिया गैंग के सदस्य बताए जा रहे हैं.

लेकिन इन आठ लोगों में एक नाम ऐसा भी है जिसने पिछले दस सालों में कई बार अखबारों की सुर्खियां देखी हैं. ये है अमित शुक्ला. इस वक़्त तिहाड़ जेल में है. रिपोर्ट्स के अनुसार वहां से इसने वॉट्सऐप के ज़रिए धमकियां दीं. इसे सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस में अरेस्ट किया गया था. ये केस ऐसा था जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. आखिर क्या हुआ था सौम्या विश्वनाथन के साथ.

कौन थी सौम्या?

सौम्या विश्वनाथन. 25 साल की जर्नलिस्ट. इंडिया टुडे ग्रुप में काम करती थी. 30 सितंबर 2008 को अपनी गाड़ी से घर लौट रही थी. दिल्ली के वसंत कुंज में. सुबह के साढ़े तीन बजे थे. उसे देर हो गई थी, क्योंकि मालेगांव में हुए धमाकों पर उसे न्यूज बुलेटिन बनाना था. उसने अपने पापा को फोन करके बताया, कि वो कहां है, लेकिन कभी घर नहीं लौटी. उसकी लाश वहां गाड़ी में पाई गई. मारुती सुजुकी जेन, जो डिवाइडर से भिड़ी हुई थी. गाड़ी के अन्दर सौम्या स्टीयरिंग व्हील के बल पड़ी थी. सिर से खून बहकर सूख गया था.

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अपने पिता एमके विश्वनाथन के साथ सौम्या. (तस्वीर साभार: The News Minute)

क्या हुआ था उस रात?

रात को सौम्या जब पीवीआर प्रिया के सामने से निकली, तो वहां चार लड़के खड़े थे. उन्होंने  सौम्या को ड्राइव करके जाते हुए देखा, और उसका पीछा करने लग गए. जिस गाड़ी में वो थे, वो चुराई हुई वैगनआर थी.

सौम्या अपनी गाड़ी धीमी स्पीड पर चला रही थी. पीछा करने वाली गाड़ी में मौजूद थे रवि, बलजीत, अमित, और विजय. उन्होंने सौम्या का पीछा करना शुरू किया, तो उसने अपनी गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी. इससे रवि चिढ़ गया. अपना देसी कट्टा निकाला, और सौम्या को गोली मार दी. जो सीधे सौम्या के सिर में जा धंसी. वहीं पर सौम्या की मौत हो गई. अगले दिन उसकी लाश गाड़ी में मिली.

पुलिस के मुताबिक़ इन लोगों का प्लान ये था कि सौम्या को लूटा जाए. यौन शोषण भी वजह हो सकती थी. लेकिन पुलिस ने इस पर पक्का कुछ भी कहने से इंकार कर दिया. तफ्तीश शुरू की, लेकिन कुछ हाथ न लगा.महीने बीतते गए.

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सौम्या की हत्या के बाद दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से सवाल हुए. उन्होंने कहा, लड़कियों को ज़्यादा ‘एडवेंचरस’ नहीं होना चाहिए. इस बयान पर उनकी काफी आलोचना हुई. (तस्वीर: Topyaps)

मीडिया में होने की वजह से सौम्या के केस को काफी अटेंशन मिली. उसके माता-पिता एम के विश्वनाथन और माधवी विश्वनाथन लगातार इसी इंतज़ार में थे कि पुलिस को कुछ पता चलेगा. केस आगे बढ़ेगा. लेकिन इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस के हाथ सुराग तब लगा, जब एक हत्या और हो गई.

इस बार मरने वाली लड़की का नाम था जिगीषा घोष.

28 साल की जिगीषा घोष एक मल्टीनेशनल कंपनी के कॉल सेंटर में काम करती थी. वसंत विहार में रहती थी. 18 मार्च को उसकी ऑफिस की कैब उसे घर के पास छोड़ कर गई. वहां तीन शराब के नशे में धुत व्यक्ति पहुंचे. रास्ता पूछने के बहाने जिगीषा को रोका. फिर बंदूक की नोक पर उसे अपनी गाड़ी में बिठा लिया. उसका डेबिट कार्ड उससे छीना. उसका पिन नंबर पूछा. उसके बाद उसे दिल्ली के बाहर की तरफ ले गए. और जिगीषा को मारकर उसकी डेड बॉडी वहीं फेंक दी. तीन दिन बाद जिगीषा का शरीर सूरजकुंड के पास से मिला.

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जिगीषा अपने कॉल सेंटर से लौटने के बाद एक दोस्त से फन पर बात करती हुई घर की तरफ जा रही थी, जब उसे किडनैप किया गया. उसके गहने, पैसे, और डेबिट कार्ट उससे छीन लिए गए. इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई. (तस्वीर: Twitter)

पुलिस ने जब इस मामले की जांच शुरू की, तो उन्हें जिगीषा का ATM कार्ड इस्तेमाल करते हुए लोगों के बारे में पता चला, जब उन्हें पकड़ा गया, और उनसे पूछताछ की गई तब पता चला कि सौम्या विश्वनाथन की हत्या में भी यही लोग शामिल थे.

एक और टैक्सी ड्राईवर की हत्या के मामले में भी इनका नाम जोड़ा गया.

सज़ा क्या हुई?

सौम्या की हत्या के मामले में सुनवाई पिछले दस सालों से चल रही है. साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अभी तक कई जज बदल गए. कई पब्लिक प्रोसेक्यूटर बदल गए. लेकिन सुनवाई जस की तस चल रही है. छह साल पहले दिल्ली के मुख्मंत्री अरविन्द केजरीवाल के पास सौम्या के माता-पिता ने अर्जी लगाईं. मामले की सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए. उस समय अरविन्द केजरीवाल ने आश्वासन दिया था. लेकिन उसके फौरन बाद सरकार गिर गई. दुबारा आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद फिर केजरीवाल के पास मामला पहुंचा. उन्होंने संज्ञान लिया, उसके बाद मामले में थोड़ी तेज़ी आई. लेकिन निर्णय अभी तक नहीं सुनाया गया है. जब भी तारीख आती है, सौम्या के माता-पिता कोर्ट में बिना नागा ज़रूर पहुंचते हैं. इस केस में आरोपी बलजीत मलिक ने तो मुआवजे में 1 करोड़ रूपए भी मांग लिए सरकार से. इस बिना पर कि सुनवाई में इतनी देरी हो रही है. उसकी अपील खारिज कर दी गई.

जिगीषा घोष की हत्या के मामले में साकेत डिस्ट्रिक्ट अदालत ने 2016 में रवि कपूर, अमित शुक्ला, और बलजीत मलिक को दोषी ठहराया. रवि कपूर और अमित शुक्ला को मौत की सज़ा सुनाई गई. 2018 में इसे बदल कर उम्रकैद कर दिया गया. जिगीषा की मां सबिता ने इस पर कहा, कि उन्हें ऐसा लगा जैसे जिगीषा की दुबारा हत्या कर दी गई हो. जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने रवि कपूर को जमानत दी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में चैलेन्ज कर रुकवा दिया था.


वीडियो: ऑनलाइन डेटिंग और मैट्रीमोनियल साइट्स पर यौन शोषण के मामलों से कैसे बचें?

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