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जब सरोज खान ने गाने की एक लाइन पर 16 एक्सप्रेशन दिए और डायरेक्टर भौंचक रह गईं

निर्मला नागपाल. इनके माता-पिता कराची से भारत आए थे. छोटी-सी उम्र में ही निर्मला ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में काम करना शुरू कर दिया था. चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर. डांस को लेकर इतनी जुनूनी, कि अपनी छाया देखकर डांस करती. उनकी मां को ये देखकर लगता कि उनकी बच्ची ने सुध-बुध भुला दी है. एक दिन डॉक्टर के पास ले गईं. दिखाया. डॉक्टर ने कहा, बच्ची अगर नाचना चाहती है, तो नाचने दो. उन्होंने कहा कि बच्ची को फिल्म इंडस्ट्री में डाल दो. निर्मला फिल्म इंडस्ट्री में चली गईं. बैकग्राउंड डांसर के तौर पर कुछ साल काम किया.

कोरियोग्राफी की दुनिया में निर्मला ने जब कदम रखा तब वो सिर्फ 13 साल की थीं. तब उनके सीनियर थे बी. सोहनलाल. डांस डायरेक्टर थे. उनके अंडर में छोटी सी निर्मला ने काम करना शुरू किया. और बाद में उनसे ही शादी की. हालांकि ये शादी चली नहीं. क्योंकि बी. सोहनलाल पहले से शादी-शुदा थे, और उनके चार बच्चे थे. ये बात उन्होंने निर्मला को नहीं बताई थी. उनसे शादी करने से पहले निर्मला ने इस्लाम अपना लिया. और वो नाम रखा, जो दशकों बाद भारत में एक आइकन बनने वाला था.

निर्मला नागपाल से सरोज खान तक

निधि तुली ने 2012 में सरोज खान के ऊपर एक डाक्युमेंट्री बनाई. नाम रखा द सरोज खान स्टोरी. ये PSBT के चैनल पर अपलोड हुआ था. PSBT यानी पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग ट्रस्ट एक नॉन प्रॉफिट संस्था है जो इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स के काम को मंच देती है. इस डाक्यूमेंट्री में सरोज खान और उनके साथ काम कर चुके कई लोगों के इंटरव्यू हैं. उनके फिल्म्स के स्टिल हैं, और खुद सरोज खान द्वारा बताई गई कई छोटी-छोटी बातें हैं. जो आम तौर पर कहीं पढ़ने को नहीं मिलतीं. उसमें उन्होंने चंद किस्से सुनाये.

जब सरोज खान और बेबी नाज़ को राधा कृष्ण समझ लिया गया

अपने बचपन का एक किस्सा सुनाते हुए सरोज खान ने बताया कैसे वो और बेबी नाज़ एक गाने के लिए राधा और कृष्ण बनने वाले थे. उन्हें ड्रेस फिटिंग के लिए मगनलाल ड्रेसवाले के पास भेजा गया. वहां से कपड़े पहनकर तैयार होकर वो और बेबी नाज़ सीढ़ियों से उतर रहे थे. स्कूल की बातें कर रहे थे. तभी उधर से एक वृद्ध महिला और पुरुष आए. उन्हें देखकर सरोज और बेबी नाज़ चुपचाप खड़े हो गए. उन्हें कृष्ण और राधा के रूप में देखकर दोनों व्यक्ति फौरन घुटनों के बल झुक गए. और उन्हें प्रणाम करने लगे. उन्हें लगा कि सच में उन्हें दर्शन मिल गए. जब वो लोग झुके हुए थे, तो सरोज और बेबी नाज़ उनके ऊपर से कूद कर निकल गए. दोनों ने आंखें खोलीं तो सामने कोई नहीं था.

Saroj Khan Baby Naz
1953 में आई फिल्म ‘आगोश’ में राधा कृष्ण बनी सरोज खान और बेबी नाज़ की जोड़ी. (तस्वीर: यूट्यूब स्क्रीनशॉट)

सरोज खान जब बैकग्राउंड डांसर थीं, तो एक गाने में लड़का बनी थीं. गाना कौन सा था? आइये मेहरबान. उसमें वो पीछे कैप पहन कर एक लड़के के गेटअप में दिखाई देती हैं. देखिए 1:26 पर:

जब शशि कपूर ने उन्हें उन्हें 200 रुपए उधार दिए

जब सरोज बच्ची थीं, तब उनके घर की माली हालत ठीक नहीं थी. ग्रुप डांसर के तौर पर सरोज जो थोड़ा बहुत कमा लेती थीं, उससे मदद हो जाती थी. ऐसे ही एक बार वो एक गाने में बैकग्राउंड डांसर थीं, और गाने में शशि कपूर थे. वो मेकअप रूम के पास खड़े थे. उनके पास सरोज खान जाकर बोलीं,

‘कल दीवाली है, लेकिन मेरे घर पर कुछ नहीं है. ये पेमेंट मुझे मिलेगी सात दिन बाद.’

तो शशि कपूर ने कहा, सरोज जी इस वक़्त मेरे पास दो सौ रुपए हैं. आप ले लीजिए.

सरोज खान ने हंसते हुए बताया था, कि वो ये बात कभी नहीं भूलेंगी.

Saroj Howrah Bridge Aaiye Meharbaan
जब सरोज बी सोहनलाल के साथ काम कर रही थीं, उनकी असिस्टेंट के तौर पर, तब वो पूरा गाना एक बार उनसे रिहर्स करवाते थे. ऊपर खड़े लाइटमैन उनका पूरा डांस देखते, और उसके बाद तालियां बजाया करते थे. 1962 से लेकर 1963 तक वो उनकी असिस्टेंट रहीं. (तस्वीर: यूट्यूब स्क्रीन शॉट)

जब सरोज खान को मेन सिंगर से जानबूझकर दूर रखा गया

सरोज खान के साथ काम कर चुके मेकअप आर्टिस्ट पंढारी जुकर ने बताया कि एक कव्वाली में वो बैकग्राउंड डांसर थीं. उसमें सरोज खान मेन सिंगर के पीछे बैठी थीं. उनके एक्सप्रेशन बहुत सुंदर थे. तो सलाह दी गई कि सरोज खान को थोड़ा आगे कर दिया जाए. लेकिन जवाब आया,

“अगर इनको आगे कर दिया तो मेन सिंगर मात खा जाएगी.”

Saroj Dance
सरोज खान ने छह महीने तक नर्स का कोर्स भी किया. टाइपराइटिंग का भी कोर्स किया. मेकअप आर्टिस्ट का भी कोर्स किया. कमाई के ज़रिए ढूंढने के लिए जो भी तैयारियां हो सकती थीं, उन्होंने कीं. (तस्वीर साभार: Youtube screenshot/PSBT)

सरोज खान ने ‘श्रृंगारम’ नाम की फिल्म में भी कोरियोग्राफी की थी. उस फिल्म की डायरेक्टर शारदा रामनाथन ने बताया कि एक लाइन में सरोज खान ने 16 एक्सप्रेशन दिए थे. ये देखकर वो खुद और मेन एक्ट्रेस भौंचक रह गए थे. उनसे कुछ बोलते नहीं बन पड़ा था. लेकिन इसके पीछे कई सालों की लगातार मेहनत थी. उनके गुरु बी सोहनलाल उन्हें एक पोस्चर में तीन-तीन घंटे खड़ा रखा करते थे. इस दौरान उन्हें अपनी आंख की पुतलियां भी घुमाने की इजाज़त नहीं होती थी. इस तगड़े डिसिप्लिन के तहत सरोज खान ने नृत्य की बारीकियां सीखीं.

कहानी उस गाने की जिसने एक नया अवॉर्ड शुरू करवा दिया

‘तेज़ाब’ फिल्म के डायरेक्टर एन चंद्रा ने बताया कि सरोज खान को उन्होंने ब्रीफ दिया था ‘एक दो तीन’ गाने के लिए. कि स्टेज पर नाचती माधुरी को देख कर नीचे खड़े लोग होश खो दें. एकदम बावरे होकर वो भी नाचने लगें, ऐसा डांस कराना है. सरोज खान ने उनसे कहा, एक बार वो स्टेप्स देख लें, तो माधुरी को फिर रिहर्सल कराई जाएगी. एन चंद्रा ने एक बार में ही उस डांस को ओके कर दिया. इसी गाने को देखने के बाद फिल्मफेयर ने बेस्ट कोरियोग्राफी का अवॉर्ड देना शुरू किया. उससे पहले कोरियोग्राफी के लिए कोई अवॉर्ड नहीं हुआ करता था.

Ek Do Teen
इस गाने के बाद माधुरी स्टार बन गई थीं. (तस्वीर: ट्विटर)

सरोज खान की जिंदगी पर और भी बातें जानने के लिए आप ये डाक्यूमेंट्री देख सकते हैं. ये कई फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई जा चुकी है:


वीडियो: मनोज वाजपेयी ने एक्टर बनने के संघर्ष की कहानी बताई, कहा-‘मैं आत्महत्या करने के करीब था’

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