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सारा अली खान की ये तस्वीर देख आप समझ नहीं पाएंगे, आखिर ये हुआ कैसे?

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सारा अली खान ने हाल-फिलहाल में अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की. तस्वीर काफ़ी पुरानी है. इस तस्वीर में सारा अपनी मां अमृता राव के साथ बैठी हैं. ये उन दिनों की तस्वीर है जब सारा फ़िल्मों में नहीं आई थीं. उनका वज़न भी काफ़ी बढ़ा हुआ है.

तस्वीर शेयर करते हुए सारा ने लिखा-

‘ये उन दिनों की तस्वीर है जब मुझे फेंका नहीं जा सकता था.’


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Throw to when I couldn’t be thrown☠️↩️ #beautyinblack

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सारा की आने वाली फ़िल्म ‘लव आज कल 2’ के को-स्टार कार्तिक आर्यन ने लिखा-

‘ये लड़की तो सारा अली खान जैसी दिख रही है.’

कार्तिक के साथ-साथ बाकी लोग भी सारा कि ये तस्वीर देख हैरत में आ गए. दरअसल सारा ने अपना काफ़ी वज़न घटा लिया है. फ़िल्मों में आने के लिए उन्हें काफ़ी वेट लूज़ करना पड़ा. पर ऐसा करना सारा के लिए आसान नहीं था.

सारा के बॉलीवुड डेब्यू से पहले वो अपने पिता सैफ़ अली खान के साथ ‘कॉफ़ी विद करन’ में आई थीं. इस शो पर भी सारा के वेट को लेकर बात छिड़ी. इस दौरान सारा ने बताया कि उनको पीसीओडी था. जिसकी वजह से उनका वज़न काफ़ी बढ़ गया था. और तो और, पीसीओडी में वज़न घटाना आसान नहीं होता.

तो क्या है ये पीसीओडी

पीसीओडी यानी पोलीसिस्टिक ओवेरियन डिज़ीज़. पॉली मतलब बहुत सारे. सिस्ट यानी गांठें.

1. देखिये औरतों की जो बच्चेदानी होती है, उसमें दो तरफ ओवरीज़ यानी अंडाशय होते हैं. इनसे हर महीने एक अंडा निकलता है जो बच्चेदानी में जाता है और इंतज़ार करता है कि कोई स्पर्म आ कर उससे मिलेगा और बच्चा बनने की शुरुआत होगी. इसके लिए यूटरस खुद को तैयार करता है, क्योंकि अगर बच्चा आया तो उसको खाने-पीने को तो चाहिए होगा. इसके लिए यूटरस के अंदर की परत मोटी होनी शुरू हो जाती है.

2. अगर आपके पेट में बच्चा रह जाता है तो वो इसी मोटी परत से जुड़ेगा और अपने लिए आहार लेगा. अगर ऐसा होता है तो ठीक, वरना महीने के अंत में पूरी तैयारी बेकार हो जाती है. गुस्से में यूटरस बदला लेता है और सारा कुछ वजाइना के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है, और तभी होता है मासिक धर्म.

3. खैर, मुद्दे पर आते हैं. तो जब हर महीने समय पर अगर अंडा निकला तो ठीक है. सब कुछ सही से चलेगा. लेकिन अगर नहीं निकला, तो उसकी जगह पर छोटी-छोटी गांठें बनना शुरू हो जाती हैं, जहां से उनको निकलना था. इनको सिस्ट कहा जाता है. सिर्फ यही कारण नहीं है PCOD का. जब औरतों के शरीर में मर्दों का हॉर्मोन ‘टेस्टस्टरॉन’ बढ़ जाता है, तब भी ये दिक्कत होती है. इससे ओवरी से अंडे निकलने बंद हो जाते हैं. इस स्थिति या कंडीशन को ‘एनोवुलेशन’ यानी ओवुलेशन (अंडा निकलने की प्रक्रिया) ना होना कहते हैं.

पीसीओडी यानी पोलीसिस्टिक ओवेरियन डिज़ीज़. पॉली मतलब बहुत सारे. सिस्ट यानी गांठें.

क्या हैं लक्षण?

इसके लक्षण वैसे तो आसानी से पता चल जाते हैं , लेकिन इसका पक्का पता अल्ट्रासाउंड करके ही लगता है.

वैसे कुछ ख़ास लक्षण होते हैं जैसे:

-पेट के निचले हिस्से में दाएं या बाएं साइड में दर्द होना.
-पीरियड्स का देर से होना या ना होना.
-पीरियड के समय असह्य दर्द होना.
-भूख मर जाना.
-वज़न बढ़ना.
-थकान.
-शरीर में सूजन.
-चेहरे पर ज्यादा बाल आना

क्या हैं खतरे?

इसमें अधिकतर गांठें नुकसानदेह नहीं होतीं, लेकिन कई बार कैंसर होने की आशंका भी बन सकती है. अगर उन्हें समय पर इलाज ना मिला तो. अगर ऐसा होता तो फिर अंडाशय हटाने पड़ जाते हैं, मामला हाथ से निकला या देर हुई तो पूरी बच्चेदानी निकालनी पड़ती है. कई बार लोग अंडाशय निकलवा देते हैं, पर बच्चेदानी नहीं. क्योंकि आइवीएफ़ के द्वारा भी कई लोग बच्चे करने लग गए हैं अब. आईवीएफ मतलब इन विट्रो फर्टीलाइज़ेशन. यानी साइंस की मदद से मां के पेट के बाहर एग और स्पर्म को मिलाना और भ्रूण बनाना.

एक बार भ्रूण बन जाता है तो फिर उसे मां के यूटरस में प्लांट कर देते हैं. कई बार लोग अंडाशय निकलवाते हैं, और अंडे फ्रीज़ करवा लेते हैं ताकि बाद में कभी ज़रूरत पड़े तो बच्चे किये जा सकें. पीरियड अगर समय पर ना हुए तो शारीरिक परेशानी के साथ-साथ मानसिक परेशानियां भी बढ़ जाती हैं. अगर बच्चा करने का प्लान हो, तो कई बार मुश्किल आती है. ऐसा नहीं है कि PCOD से जूझ रही महिलाएं मां नहीं बन सकतीं. लेकिन थोड़ी दिक्कत ज़रूर आती है.

कई बार लोग अंडाशय निकलवा देते हैं, पर बच्चेदानी नहीं.

 

क्या है इलाज?

हमने जितने डॉक्टरों से बातचीत की, सभी ने यही कहा कि एक मुख्य कारण लाइफस्टाइल है इसके पीछे. बाकी भी कई कारण होते हैं, लेकिन यह एक सबसे बड़ा और कॉमन कारण है. आप पूछेंगे ऐसे कैसे? उसका मतलब है, नींद पूरी न लेना, जंक फूड यानी बाहर का चटपट खाना खाना, ज़रूरत से ज्यादा टेंशन या स्ट्रेस लेना. खाने-पीने का कोई सही समय ना होना, शारीरिक एक्सरसाइज ना करना. ये लाइफस्टाइल की कमियां हैं. इनकी वजह से ये बीमारी भयंकर हो जाती है. ये तो सब कहते हैं कि जंक फ़ूड नहीं खाना चाहिए. सेहत के लिए खराब होता है. लेकिन पता तो हो कि जंक फ़ूड में क्या-क्या चीज़ें आती हैं.

चाउमिन,पीत्ज़ा, बर्गर, मोमोज, स्प्रिंग रोल, चाट-पकौड़ी वगैरह खाना सेहत के लिए बहुत खराब है. मैदा आपके शरीर के लिए ज़हर जैसा है. जिस चीज़ में जितना ज्यादा मैदा होगा, वो सेहत के लिए उतना ही ख़राब होगा. जीभ के स्वाद के चक्कर में शरीर बर्बाद करने वाली चीज़ें हैं ये.

अगर हॉर्मोन देने की ज़रूरत पड़ी, तो वो भी डॉक्टर्स ही बताते हैं. तो चिंता मत कीजिये. शरीर की अपनी एक भाषा होती है. अगर कुछ गड़बड़ है तो वो आपको ज़रूर बताएगा. बस आपको सुनने की ज़रूरत है. इसे लेकर शर्म करने की कोई ज़रूरत नहीं. जिंदगी एक है- शरीर एक है. बीमार होकर जीने से क्या फायदा?


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