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समलैंगिक कपल्स को शादी करने का अधिकार मिलना क्यों ज़रूरी है?

6 सितंबर 2018 के दिन हमारे सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया था. समलैंगिकता को IPC के सेक्शन 377 में अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था. बरसों की लड़ाई का नतीजा था ये. लेकिन संघर्ष यहीं नहीं रुका. अभी और आगे जाना था. बात उठी समलैंगिक कपल्स के शादी के अधिकारों की. क्योंकि अभी तक हमारे देश में इसे कानूनी मान्यता नहीं मिली है. इसे लेकर कई सारी याचिकाएं डाली जा चुकी हैं. इन्हीं याचिकाओं पर 24 मई को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. जहां केंद्र सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा.

इन याचिकाओं पर कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग हो रही थी. ‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तुषार मेहता ने कहा-

“आपको अस्पतालों में मैरिज सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं होती. और मैरिज सर्टिफिकेट के अभाव में कोई भी मर नहीं रहा है.”

सॉलिसिटर जनरल ने महामारी का हवाला देते हुए ये बात कही थी. कहा कि देश इस वक्त महामारी का सामना कर रहा है और ऐसे में कई अहम मुद्दे हैं, जिन पर सुनवाई की ज़रूरत है. उन्होंने कहा-

“एक सरकार के नाते, अर्जेंसी के संदर्भ में हमारा फोकस अत्यावश्यक (यानी सबसे अहम) मुद्दों पर है.”

इसके आगे ये भी तर्क दिया कि लॉ ऑफिसर्स खुद भी इस वक्त महामारी से जुड़े मामलों से डील कर रहे हैं. इस पर एक याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट सौरभ कृपाल ने कहा कि कोई मुद्दा अर्जेंट है या नहीं इसे निष्पक्ष होकर तय करना चाहिए और ये फैसला पूरी तरह से कोर्ट पर निर्भर करता है. सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी भी याचिकाकर्ताओं को रिप्रेजेंट कर रही थीं. उन्होंने कोर्ट को बताया कि अस्पतालों में एडमिशन मिलने और मेडिकल ट्रीटमेंट को लेकर भी समलैंगिक लोगों को दिक्कत हो रही है. इसी पर तुषार मेहता ने कहा कि अस्पतालों में मैरिज सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है. सॉलिसिटर जनरल ने लिखित रूप से मांग रखी कि अभी के लिए केवल अर्जेंट मुद्दों को सुना जाए और इस मुद्दे पर हो रही सुनवाई को आगे खिसका दिया जाए. कोर्ट ने अब इन याचिकाओं पर सुनवाई की अगली तारीख 6 जुलाई तय की है.

Same Sex Marriage (9)
होमोसेक्शुअलिटी को सितंबर 2018 में अपराध के दायरे से बाहर किया गया था. (फोटो- PTI)

याचिकाएं क्यों डाली गईं?

एक याचिका डाली गई है दो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की तरफ से. जिनके नाम हैं डॉक्टर कविता अरोड़ा और अंकिता खन्ना. स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी को कानूनी मान्यता दिलवाना चाहते हैं. इनके द्वारा डाली गई याचिका के मुताबिक, दो औरतें पिछले आठ साल से रिलेशन में हैं. साथ में रहती हैं, बिल्कुल उसी तरह जैसे तथाकथित नॉर्मल कपल रहते हैं. लेकिन एक चीज़ की कमी है, कानूनी मान्यता की. दोनों ऐसा महसूस करते हैं कि शादी इनके रिश्ते को कानूनी सुरक्षा और सामाजिक मान्यता, सपोर्ट दिलवा सकती है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान काफी अहम है. दोनों ने पिछले साल दिल्ली में SDM से कॉन्टैक्ट भी किया था, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत शादी को कानूनी मान्यता दिलवाने के लिए. लेकिन ये हो नहीं सका, क्योंकि दोनों एक ही जेंडर की थीं. इसी वजह से इस कपल ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.

दूसरी याचिका डाली है अमेरिका में रहने वाले एक कपल ने. नाम है वैभव जैन और पराग विजय मेहता. वैभव भारत के नागरिक हैं, काम अमेरिका में करते हैं. पराग अमेरिकन सिटिजन हैं, लेकिन ओवरसीज़ भारतीय नागरिकता भी उनके पास है, परिवार के कई सारे लोग आज भी भारत में ही रहते हैं. दोनों साल 2012 से एक-दूसरे के साथ हैं. चूंकि अमेरिका में सेम सेक्स मैरिज को मान्यता मिली हुई है, इसलिए 2017 में दोनों ने वॉशिंगटन डीसी में एक कोर्ट में शादी कर ली. चूंकि वैभव अभी भी भारत के नागरिक हैं, इसलिए वो चाहते हैं कि उनकी शादी को भारतीय कानून की नज़र में भी मान्यता मिले. फॉरेन मैरिज एक्ट 1969 के तहत अमेरिका में इंडियन कॉन्सुलेट में जाकर शादी रजिस्टर कराने की कोशिश भी की थी, लेकिन असफल रहे. इसके बाद उन्होंने भारतीय कोर्ट में याचिका डाली. दोनों चाहते हैं कि फॉरेन मैरिज एक्ट के तहत उनकी शादी को मान्यता दी जाए. वैभव चाहते हैं कि पासपोर्ट में स्पाउस की जगह पराग का नाम लिखा जाए. और उन्हें भारत में वो सारे अधिकार मिलें, जो मैरिड कपल को मिलते हैं.

तीसरी याचिका हिंदू मैरिज एक्ट के तहत सेम सेक्स मैरिज को मान्यता दिलवाने के लिए डाली गई है. इसे डिफेंस एनालिस्ट अभिजीत अय्यर और तीन अन्य लोगों ने डाला है.

एक्टिविस्ट क्या कहते हैं?

सवाल उठता है कि शादी की वैधता क्यों ज़रूरी है? ये जानने के लिए हमने बात की हरीश अय्यर से. ये LGBT राइट एक्टिविस्ट हैं. उन्होंने कहा-

“मैं तो मानता हूं कि शादी का इंस्टीट्यूशन पितृसत्ता सोच का एक ढांचा है. शादियों में हमारे यहां पति परमेश्वर कहा जाता है, पत्नी क्या होती है? उसके लिए कोई शब्द नहीं है. मगर हेट्रोसेक्शुअल लोगों के पास चुनने का अधिकार है, होमोसेक्शुअल, लेस्बियन, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर्स लोगों को पास नहीं, उन्हें भी इस चीज़ का ऑप्शन दिया जाना चाहिए. मैं अगर मर जाऊं या मुझे विल लिखना हो, तो मेरे परिवार को जाएगा. लेकिन अगर आप मेरे परिवार को ही परिभाषित नहीं करोगे, तो दिक्कत होगी. उसे शादी बुलाओ, या उसको सिविल पार्टनरशिप बुलाओ, कुछ भी बुलाओ, अगर आप उन रिश्तों को मान्यता नहीं दोगे, तो हम आगे कैसे बढ़ेंगे. हमारे रिश्ते की बुनियाद कभी नहीं बनेगी, जब हम रिश्तों को मान्यता नहीं देंगे तो. उसे जब कानूनी पहचान नहीं देंगे तो.”

Harish Iyer
हरीश अय्यर. LGBT राइट एक्टिविस्ट.

हरीश ने सॉलिसिटर जनरल के तर्कों पर भी अपनी टिप्पणी दी, उन्होंने कहा-

“बड़ा इंसेसिटिव सा रवैया है. मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हम कोविड-19 जैसी असाधारण परिस्थितियों में जी रहे हैं, ऐसी परिस्थितियों का सबसे बुरा असर हाशिए पर मौजूद कम्युनिटी पर होता है. आप सोचिए कि मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ हूं, हमारे रिश्ते को कोई मान्यता नहीं दी गई है, कोई ये नहीं जानता कि हम कपल हैं, ऐसे में अगर मेरे बॉयफ्रेंड को मुझे अस्पताल ले जाना पड़े, उसे भर्ती करना पड़े, तो अस्पताल वाले ये पूछेंगे कि तुम उसके क्या लगते हो. तो अगर हमारे पास लीगल कॉन्ट्रैक्ट होता, तो शायद मैं मेरे बॉयफ्रेंड को बचा सकूं. जब हम ज़िंदगी और मौत की बात करते हैं, ये कहते हैं कि कोई मरे जा रहा है क्या? तो हम लोग मरे जा रहे हैं. LGBT समुदाय के लोग मरे जा रहे हैं. तुषार मेहता को समझाएं, शायद वो नहीं जानते होंगे LGBT लोगों को, अगर वो चार-पांच LGBT लोगों से बात कर लेते, तो शायद इतनी इंसेसिटिव बात नहीं कहते.”

बाकी देशों का क्या हाल है?

दुनिया के करीब 29 देशों में सेम-सेक्स मैरिज को परमिशन दी जा चुकी है. इन देशों में ताइवान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, कोलंबिया, आयरलैंड, स्कॉटलैंड, फ्रांस, ब्राज़ील, स्वीडन का नाम शामिल है. यूनाइटेड स्टेट्स में पहले कुछ ही राज्यों में सेम सेक्स मैरिज की परमिशन थी, लेकिन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में इसे लीगल करने का फैसला सुनाया था. एडॉप्शन की बात करें, तो कई सारे देशों में खास तौर पर जहां शादी की परमिशन है, वहां समलैंगिक कपल्स को बच्चे गोद लेने का हक है. वहीं कुछ जगहों पर स्टेप चाइल्ड गोद लेने का हक मिला हुआ है. फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, यूनाइटेड स्टेट्स में समलैंगिक कपल कानूनी तौर पर बच्चा गोद ले सकते हैं. उम्मीद है इंडिया भी ऐसे पॉजिटिव बदलाव जल्द देख पाएगा. और हमारा इंद्रधनुषी झंडा बुलंद होगा.


वीडियो देखें: बुलंशहर में समलैंगिक होने की वजह से एक आदमी को नौकरी से निकाला!

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