Submit your post

Follow Us

अफगानिस्तान में आतंक मचा रहे तालिबान की नाक में दम करने वाली ये महिला कौन है?

विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान (Taliban) लगतार अफगानिस्तान (Afghanistan) के इलाकों पर कब्जा करता जा रहा है. न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने 13 अगस्त की सुबह दक्षिणी अफगानिस्तान के एक प्रमुख शहर लश्कर गाह पर कब्जा कर लिया. वहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जजीरा की रिपोर्ट बताती है कि तालिबान (Taliban) ने कांधार, हेरात और गजनी पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया है. कांधार और हेरात देश की राजधानी काबुल (Kabul) के बाद दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहर हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक इन शहरों पर तालिबान का नियंत्रण न स्थापित होने देने के लिए अफगानिस्तान के सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला था. हालांकि, सुरक्षाबल तालिबान को रोक नहीं पाए. इन तीनों शहरों पर कब्जे के साथ अब देश की 34 में से 12 प्रांतीय राजधानियों पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित हो गया है.

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 14 अप्रैल को अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा की थी. जिसके बाद 4 मई को तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण के लिए हमले शुरू कर दिए. तालिबान ने जबसे हमले शुरू किए, उस वक्त से ही अफगानिस्तान (Afghanistan) के सैनिक इस चरमपंथी संगठन के आगे कहीं नहीं टिक रहे हैं. सैकड़ों सैनिकों की मौत हो चुकी है और बहुत सारे तो देश छोड़कर चले गए हैं. इस बीच अफगानिस्तान की सरकार ने कहा है कि वो तालिबान के साथ सत्ता का बंटवारा करने के लिए तैयार है. हालांकि, शर्त यह है कि तालिबान को अपने हमले रोकने पड़ेंगे.

तालिबान ने कांधार और हेरात पर कब्जा कर लिया है. ये दोनों राजधानी काबुल के बाद अफगानिस्तान के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहर हैं. आशंका जताई जा रही है कि तालिबान जल्द ही राजधानी काबुल पर भी कब्जा कर लेगा. (फोटो: एपी)
तालिबान ने कांधार और हेरात पर कब्जा कर लिया है. ये दोनों राजधानी काबुल के बाद अफगानिस्तान के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहर हैं. आशंका जताई जा रही है कि तालिबान जल्द ही राजधानी काबुल पर भी कब्जा कर लेगा. (फोटो: एपी)

अफगानिस्तान सरकार का यह बयान बताता है कि उसे अपने सही स्थिति का अंदाजा हो गया है. उसे पता है कि तालिबान के सामने उसे घुटने टेकने ही पड़ेंगे. दूसरी तरफ अब तालिबान, राजधानी काबुल के बिल्कुल करीब आ गया है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कुछ दिन के अंदर ही तालिबान काबुल पर भी कब्जा कर लेगा. इस बीच अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों ने अपने कुछ हजार सैनिक फिर से अफगानिस्तान भेजने का फैसला लिया है, ताकि वहां काम कर रहे अपने कर्मचारियों और नागरिकों को बाहर निकाला जा सके.

महिला गवर्नर का तालिबान के खिलाफ मोर्चा

पिछली बार जब 1996 से 2001 के दौरान तालिबान का अफगानिस्तान में शासन था, तो यह मुख्य तौर पर देश के दक्षिणी हिस्से में था. देश के उत्तरी हिस्से में चरमपंथी संगठन का नियंत्रण उतना मजबूत नहीं था. लेकिन, इस बार तालिबान (Taliban) उत्तर में भी अपनी पैठ बढ़ा रहा है. जून के आखिर में ही तालिबान ने देश के उत्तरी इलाकों में हमले शुरू किए और ताजिकिस्तान सीमा से लगे कई इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया. अगस्त की शुरुआत से ही उत्तरी इलाकों में तालिबान का प्रभुत्व बढ़ता गया. सात अगस्त को तालिबान ने घोषणा की कि उसने पूरे के पूरे उत्तरी प्रांत जॉवजान को अपने नियंत्रण में कर लिया है. इसी तरह उत्तर के ही एक महत्वपूर्ण शहर शेर-ए-पुल पर इस संगठन ने अपना कब्जा कर लिया. 8 अगस्त को देश के उत्तरी इलाके में तालिबान ने बेहद ही महत्वपूर्ण शहर कुंदुज पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया.

पिछली बार जब 1996 से 2001 के दौरान तालिबान का अफगानिस्तान में शासन था, तो देश के उत्तरी इलाकों में उसका वैसा नियंत्रण नहीं था, जैसा कि दक्षिणी इलाकों में. (प्रतीकात्मक फोटो: इंडिया टुडे )
पिछली बार जब 1996 से 2001 के दौरान तालिबान का अफगानिस्तान में शासन था, तो देश के उत्तरी इलाकों में उसका वैसा नियंत्रण नहीं था, जैसा कि दक्षिणी इलाकों में. (प्रतीकात्मक फोटो: इंडिया टुडे )

अफगानिस्तान के उत्तरी भाग में ही एक और प्रांत है. नाम है उत्तरी बाल्ख प्रांत. यहां का एक जिला है. चारकिंत नाम से. इस जिले पर अभी तक तालिबान अपना कब्जा नहीं कर पाया है. वजह हैं, यहां की गवर्नर सलीमा मजारी (Salima Mazari). सलीमा मजारी, अफगानिस्तान की मात्र तीन महिला गवर्नर में से एक हैं. वो ना केवल प्रशासनिक कामकाज देखती हैं बल्कि तालिबान से लड़ने के लिए खुद बंदूक भी चला रही हैं. सेना के लोगों को आदेश देना और तालिबान से लड़ने के लिए अपने जिले के लोगों को सेना में शामिल करना, इन जिम्मेदारियों को भी वो बखूबी निभा रही हैं. उनके लिए तालिबान से लड़ना एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी है. कट्टरता से ना केवल अपने लोगों बल्कि पूरी दुनिया को बचाने की कवायद है. 40 साल की मजारी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान द गार्डियन को बताया,

“कभी-कभी मुझे ऑफिस में होना होता है और कभी-कभी खुद बंदूक उठाकर लड़ाई लड़नी होती है. खुद को हमारे ऊपर थोपने वाले चरमपंथी समूहों और विचारधाराओं से अगर हम नहीं लड़ेंगे तो उन्हें हराने की हमारी संभावना लगभग नगण्य हो जाएगी. वो जीत जाएंगे. समाज के ऊपर जबरन अपना एजेंडा थोप देंगे.”

सलीमा मजारी (Salima Mazari) का जन्म साल 1980 में ईरान में हुआ था. उनके माता-पिता पहले अफगानिस्तान में ही रहते थे. लेकिन सोवियत युद्ध के दौरान ईरान जाने को मजबूर हो गए. मजारी ने तेहरान यूनीवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और फिर प्रवासियों के संबंध में बनाए गए कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों में काम किया. थोड़े समय के बाद वो अफगानिस्तान आ गईं और चारकिंत में रहने लगीं. सलीमा चारकिंत को अपना पैतृक घर बताती हैं.

सैन्य टुकड़ी का गठन

द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में सलीमा मजारी (Salima Mazari) को पता चला कि चारकिंत जिले में गवर्नर पद पर चुनाव होने हैं. जिसके बाद उन्होंने इस पद की दौड़ में शामिल होने का फैसला लिया. उनके रिश्तेदारों और दोस्तों ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया. लोगों के लिए काम करने की इच्छा ने उन्हें चुनाव में जीत दिलाई. हालांकि, एक महिला के तौर पर अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर मजारी थोड़ा आशंकित थीं. उन्होंने द गार्डियन को बताया,

“शुरुआत में मुझे आशंका थी कि एक महिला गवर्नर होने के कारण शायद मेरे साथ भेदभाव हो. लेकिन लोगों ने मेरी आशंका को गलत साबित कर दिया. जिस दिन से मैंने अपना पद संभाला, लोगों ने मुझे बहुत प्यार और समर्थन दिया.”

रिपोर्ट के मुताबिक आज से दो साल पहले सलीमा मजारी ने अपने जिले में एक सिक्योरिटी कमीशन का गठन किया. यह कमीशन स्थानीय लोगों को सैनिकों के तौर पर भर्ती करता है ताकि जिले की रक्षा की जा सके. सलीमा खुद जाकर लोगों को प्रोत्साहित करती हैं. इस समय करीब 600 ऐसे लोगो चारकिंत की सीमाओं पर तैनात हैं. सलीमा को उम्मीद है कि वो अपने जिले को तालिबान से बचा लेंगी.

Salima Mazari ने दो साल पहले सिक्योरिटी कमीशन का गठन किया था. इस कमीशन के तहत स्थानीय लोगों को सैन्य ट्रेनिंग दी गई. अब ये लोग जिले की सीमाओं पर तैनात किए गए हैं ताकि तालिबान से मुकाबला किया जा सके. (फोटो: ट्विटर)
Salima Mazari ने दो साल पहले सिक्योरिटी कमीशन का गठन किया था. इस कमीशन के तहत स्थानीय लोगों को सैन्य ट्रेनिंग दी गई. अब ये लोग जिले की सीमाओं पर तैनात किए गए हैं ताकि तालिबान से मुकाबला किया जा सके. (फोटो: ट्विटर)

चारकिंत (Charkint) अफगानिस्तान में ऐसा एकमात्र जिला है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एक महिला के कंधों पर है और जहां आजतक कोई आतंकी समूह कब्जा नहीं कर पाया है. पिछले साल सलीमा मजारी ने 100 से अधिक तालिबान लड़ाकों का आत्मसमर्पण कराया था. हालांकि, मजारी का कहना है कि इस तरह के प्रयासों को हर बार सफलता नहीं मिलती. उन्होंने द गार्डियन को बताया,

“हमने कई बार अपने लोगों को तालिबान से बातचीत करने के लिए भेजा है. लोगों की जान बचाने के लिए और क्षेत्र के विकास के लिए हमने करीब 10 बार मुलाकात की है. यहां के लोग अपनी फसल पर निर्भर हैं. हम तालिबान से बस इतना कहते हैं कि लोगों को उनका जीवनयापन करने दिया जाए. लेकिन तालिबान नहीं मानता.”

तालिबान औरतों की आजादी का बहुत बड़ा विरोधी है. अपने इस्लाम के मुताबिक वो लड़कियों को स्कूल नहीं जाने देना चाहता. औरतें बिना किसी पुरुष के बाहर नहीं निकल सकतीं. वो नौकरी नहीं कर सकतीं. उनके लिए पूरे शरीर को ढंकने वाला बुर्का पहनना ज़रूरी है. आपात स्थिति होने पर भी कोई पुरुष डॉक्टर महिलाओं का इलाज नहीं कर सकता और महिलाओं को तो तालिबान डॉक्टरी क्या, कोई दूसरी पढ़ाई भी नहीं करने देता. यही नहीं, इन बर्बर नियमों को तोड़ने वाली औरतों को तालिबान सजा भी देता है. सजा भी मध्ययुगीन. जैसे सार्वजनिक तौर पर कोड़े मारना और शरीर के अंगों को काट देना.

ऐसे में सलीमा मजारी को मिली प्रसिद्धि और सम्मान ने उनकी जिंदगी खतरे में डाल दी है. तालिबान गाहे-बगाहे उन्हें मारने की कोशिश करता रहता है. माजरी, ऐसे कई हमलों से बाल-बाल बची हैं. उन्हें मारने के लिए कई बार माइन्स भी बिछाई गईं. हालांकि, माजरी का कहना है उन्हें तालिबान से डर नहीं लगता और वो अफगानिस्तान में कानून के शासन में विश्वास रखती हैं.

तालिबान से बचने के लिए घर छोड़ रही महिलाएं

एक तरफ सलीमा माजरी जैसी महिलाएं तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, तो दूसरी तरफ कई आम महिलाएं तालिबान के डर से अपना घर छोड़ने पर मजबूर हैं. कई महिलाओं ने इस डर से अपनी जान भी दे दी है. ऐसी बहुत सी मीडिया रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें बताया गया है कि अफगानिस्तान के अलग-अलग इलाकों में कब्जा करने के बाद तालिबान वहां के युवा पुरुषों को मौत के घाट उतार रहा है और महिलाओं को सेक्स स्लेव के तौर पर अपने साथ ले जा रहा है. तालिबान के डर से परिवार के परिवार अपना घर-द्वार छोड़कर भाग रहे हैं.

अफगानिस्तान इंडेपेंडेंट ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के आतंक की वजह से पिछले कुछ महीनों में अफगानिस्तान के लगभग 10 लाख लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं. इन लोगों में 70 फीसदी हिस्सा महिलाओं और बच्चों का है. ज्यादातर लोग पार्कों और सड़कों पर सोने और रहने के लिए मजबूर हैं.

अफगानिस्तान इंडेपेंडेंट ह्यूम राइट्स कमीशन की रिपोर्ट कहती है कि तालिबान के आतंक के कारण पिछले कुछ महीनों में अफगानिस्तान के करीब 10 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. इनमें से 70 फीसदी हिस्सा महिलाओं और बच्चों का है. (फोटो: एपी)
अफगानिस्तान इंडेपेंडेंट ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट कहती है कि तालिबान के आतंक के कारण पिछले कुछ महीनों में अफगानिस्तान के करीब 10 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. इनमें से 70 फीसदी हिस्सा महिलाओं और बच्चों का है. (फोटो: एपी)

बामियान में रहने वाली 38 साल की जियागुल ने वो दौर देखा है, जब तालिबान ने पहली बार अफगानिस्तान को कब्जे में लिया था. उन्होंने तालिबान द्वारा महिलाओं के ऊपर किए गए अत्याचार के बारे में द गार्डियन को बताया,

“तालिबान ने जब बामियान पर हमला किया था, तो उसके लड़ाकों ने महिलाओं का रेप किया. यह डर आज भी हमारे अंदर बसा हुआ है. इसलिए हम भाग आए हैं. हम नहीं चाहते कि दोबारा ऐसा हो.”

जियागुल बताती हैं कि बामियान से कई सारी महिलाएं काबुल भाग आई हैं. कई परिवार तो केवल अपने यहां की महिलाओं और लड़कियों को ही बाहर भेज रहे हैं, ताकि वे सुरक्षित रहें. इन महिलाओं और लड़कियों का केवल एक ही सवाल है. आखिर कब तक उन्हें भागना पड़ेगा? फिलहाल, इस सवाल का जवाब मुकम्मल तौर पर कोई नहीं दे सकता. सबको यह भी पता है कि अफगानिस्तान की महिलाओं को एक ऐसे अंधे कुएं में धकेल दिया गया है, जहां से उनका निकलना लगभग नामुमकिन है. वैश्विक रहनुमा भी उनकी चीखों को नजरअंदाज करने में लगे हुए हैं.


 

वीडियो- अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी शासन आया तो क्या होगा?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

यूपी: नाबालिग ने 28 पर किया गैंगरेप का केस, FIR में सपा-बसपा के जिलाध्यक्षों के भी नाम

यूपी: नाबालिग ने 28 पर किया गैंगरेप का केस, FIR में सपा-बसपा के जिलाध्यक्षों के भी नाम

पिता के अलावा ताऊ, चाचा पर भी लगाए गंभीर आरोप.

कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद बेटी ने आतंकियों को 'कुरान का संदेश' दे दिया!

कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद बेटी ने आतंकियों को 'कुरान का संदेश' दे दिया!

श्रद्धा बिंद्रू ने आतंकियों को किस बात के लिए ललकारा है?

बिहार: महिला चिल्लाती रही, लोग बदन पर हाथ डालते रहे; वीडियो भी वायरल किया

बिहार: महिला चिल्लाती रही, लोग बदन पर हाथ डालते रहे; वीडियो भी वायरल किया

बिहार की पुलिस ने क्या एक्शन लिया?

महिला अफसर के यौन उत्पीड़न का ये मामला है क्या जिसके छींटे वायु सेना पर भी पड़े हैं?

महिला अफसर के यौन उत्पीड़न का ये मामला है क्या जिसके छींटे वायु सेना पर भी पड़े हैं?

आरोपी अफसर पर बलात्कार से जुड़ी धारा 376 लगी है.

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी, 18 साल बाद फैसला आया है

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी, 18 साल बाद फैसला आया है

कोर्ट ने एक को फांसी और 12 लोगों को उम्रकैद की सज़ा दी है.

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

नाबालिग 15 साल की है और एक बच्चे की मां बन चुकी है.

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

नौ महीने के अंतराल में एक वीडियो के सहारे बच्ची का रेप करते रहे आरोपी.

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखने वाली फातिमा पेशे से वकील हैं.

रेप की कोशिश का आरोपी ज़मानत लेने पहुंचा, कोर्ट ने कहा- 2000 औरतों के कपड़े धोने पड़ेंगे

रेप की कोशिश का आरोपी ज़मानत लेने पहुंचा, कोर्ट ने कहा- 2000 औरतों के कपड़े धोने पड़ेंगे

कपड़े धोने के बाद प्रेस भी करनी होगी. डिटर्जेंट का इंतजाम आरोपी को खुद करना होगा.

स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन शोषण के गंभीर आरोप, उनका जवाब भी आया

स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन शोषण के गंभीर आरोप, उनका जवाब भी आया

इस मामले पर विक्टिम और संजय राजौरा की पूरी बात यहां पढ़ें.