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अफगानिस्तानः एंट्रेंस एग्जाम में लड़की ने टॉप किया, पर क्या वो कॉलेज में कदम रख पाएगी?

अफगानिस्तान की महिलाओं के भविष्य को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है. शुरुआत में औरतों के हक की बात करने वाले तालिबान का असली चेहरा अब सामने आ रहा है. उसने औरतों के घर से बाहर निकलने पर ये कहकर रोक लगा दी है कि उसके लड़ाकों के पास औरतों का सम्मान करने की ट्रेनिंग नहीं है. इस बीच तालिबान से एक ऐसी खबर आई है जिसे सामान्य परिस्थितियों में अच्छी खबर कहा जाता, पर अब उसे अच्छी कहें या फिजूल कहें, इस पर संशय बना हुआ है.

दरअसल, अफगानिस्तान के कॉलेजों में एडमिशन के लिए एक एंट्रेंस एग्जाम होता है. 12वीं के बाद ये परीक्षा देनी होती है. इस परीक्षा को कांकोर नाम से जाना जाता है. इसमें आई रैंकिंग के आधार पर मेडिकल, इंजीनियरिंग और डिग्री कॉलेजों में भर्ती होती है. अफगानिस्तान की न्यूज एजेंसी पजवोक अफगान न्यूज के मुताबिक, इस परीक्षा में एक लड़की ने टॉप किया है. उसका नाम सल्गई है. सल्गई को कुल 360 में से 352 नंबर मिले हैं.

खुले मेडिकल यूनिवर्सिटी के दरवाजे, लेकिन…

अफगानिस्तान के श्मशाद न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, सल्गई ने करीब दो लाख प्रतियोगियों के साथ इस एग्जाम में हिस्सा लिया था. एग्जाम में पहला स्थान हासिल करने के बाद उनके लिए काबुल मेडिकल यूनिवर्सिटी के दरवाजे खुल गए हैं. यह एग्जाम अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्रालय ने कराया था.

सल्गई की इस सफलता के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा हो रही है. लोग यह चिंता जता रहे हैं कि क्या एग्जाम में टॉप करने के बाद सल्गई आगे की पढ़ाई कर पाएंगी क्योंकि तालिबान औरतों की पढ़ाई का समर्थक नहीं रहा है. पत्रकार मलाली बशीर ने ट्वीट किया,

“सल्गई ने अफगानिस्तान के विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए होने वाले एंट्रेंस एग्जाम में टॉप किया है. कोई नहीं जानता कि सल्गई को आगे की पढ़ाई करने दी जाएगी या चार दीवारों में कैद कर दिया जाएगा.”

एक यूजर ने लिखा,

“तालिबान के नियम और कानून लड़कियों के लिए काम और पढ़ाई करने को बहुत ही कठिन बना देंगे. सल्गई, लोकतंत्र का शायद आखिरी गिफ्ट है. धार्मिक तंत्र महिलाओं के लिए अच्छा नहीं है. वे आगे नहीं बढ़ सकतीं.”

काबुल यूनीवर्सिटी में लेक्चरर कबीर हकमाल ने ट्वीट किया,

“बधाई सल्गई. तुमने एंट्रेंस एग्जाम टॉप किया. लेकिन हम तुम्हें पढ़ाई के लिए एक अच्छा वातावरण देने में असफल रहे. हमने अफगानिस्तान से आतंक को खत्म करने के लिए बहुत प्रयास किए. लेकिन हम उस समूह से हार गए, जो शायद तुम्हें पढ़ाई ना करने दे. जो शायद तुम्हें घर के अंदर बंद कर दे और तुम्हें अपने रास्ते पर चलने से रोक दे. मैं आशा करता हूं कि तुम और सफलता हासिल करो और एक ऐसी डॉक्टर बनो, जो केवल मरीजों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को ठीक करे. भविष्य की नेता बनो!”

बशीर नाम के यूजर ने ट्वीट किया,

“एक बार फिर से एक लड़की ने एंट्रेस एग्जाम में टॉप किया है. लेकिन क्या वो हजारों लड़कियां, जो सल्गई को देखकर प्रोत्साहित होंगी, अगले साल से होने वाले इस एग्जाम में बैठ पाएंगी? स्कूल जा पाएंगी?”

 

‘औरतें अभी घर में रहें’

सल्गई के भविष्य को लेकर जताई गई चिंता हवा-हवाई नहीं है. बीते 15 अगस्त को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा करने के बाद ताबिलान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान ने कहा था कि वो पहले की तरह महिलाओं के रोजगार और पढ़ाई के अधिकार का विरोध नहीं करेगा. हालांकि, महिलाओं को ये सभी अधिकार शरिया कानून के दायरे में दिए जाएंगी. दूसरी तरफ, अफगानिस्तान से लगातार आ रहीं खबरें तालिबान के इन दावों को झूठा साबित कर रही हैं. कई महिलाओं ने खुद आगे आकर बताया है कि तालिबान के आने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है.

दूसरी तरफ, तालिबान ने खुद कहा है कि फिलहाल महिलाएं घरों से बाहर ना निकलें. अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान के प्रवक्ता जबीबुल्ला मुजाहिद ने औरतों से कहा है कि तालिबान के लड़ाकों को महिलाओं का सम्मान करने की ट्रेनिंग नहीं मिली है, ऐसे में वे उनके ऊपर हमला कर सकते हैं. मुजाहिद ने कहा कि तालिबान नहीं चाहता कि औरतों के ऊपर हमला हो. इसलिए जब तक तालिबान के लड़ाकों को जब तक महिलाओं का सम्मान करने की ट्रेनिंग ना मिल जाए, तब तक औरतें घर में ही रहें.

Taliban का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थाई है और जब तक औरतें घर में रहेंगी. तब तक उनकी सैलरी वहीं पहुंचाई जाएगी. (प्रतीकात्मक फोटो: एपी)
Taliban का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थाई है और जब तक औरतें घर में रहेंगी. तब तक उनकी सैलरी वहीं पहुंचाई जाएगी. (प्रतीकात्मक फोटो: एपी)

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने तालिबान के इस कथन पर चिंता जताई है. उनका कहना है अगर तालिबान को महिलाओं को हमले से बचाना है, तो उसे अपने लड़ाकों पर अंकुश लगाना चाहिए. महिलाओं से घर में रहने की बात कहना, असल में बताता है कि तालिबान नहीं बदला है और वो औरतों को कैद करने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करेगा.

अफगानिस्तान के स्कूल और विश्वविद्यालय अभी बंद हैं. तालिबान ने कहा था कि उन्हें जल्द ही खोला जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान 31 अगस्त को नई सरकार के गठन की योजना बना रहा है. इस बीच समूह ने हेमत अखूनजादा को एक्टिंग शिक्षा मंत्री के तौर पर नियुक्त कर दिया है.


 

वीडियो- तालिबान से मोर्चा ले रही क्रिस्टल बयात की बातें हर इंसाफ पसंद इंसान को सुकून देंगी

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