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साकीनाका रेप केस: महिला को इंसाफ दिलाने के नाम पर राजनेताओं ने गंदगी की हद पार कर दी

दिसंबर 2012 की बात है. दिल्ली में एक चलती बस के अंदर एक लड़की गैंगरेप का शिकार हुई थी. रेप करने वालों ने हद पार करते हुए उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड तक इन्सर्ट कर दी थी. हम और आप इस मामले को ‘निर्भया गैंगरेप केस’ के नाम से जानते हैं. इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. रेप के कानून में कई तरह के बदलाव भी इस घटना के बाद हुए थे. उम्मीद थी कि शायद इन कानूनों का ऐसा डर बनेगा कि इन अपराधों में कमी आएगी. लेकिन सच्चाई इससे परे है. रेप जैसे गंभीर अपराधों में कोई कमी नहीं आ रही है. आए दिन हम एक न एक इस तरह की घटना सुनते ही हैं. अभी दो दिन पहले मुंबई में भी एक महिला इसी तरह के ब्रूटल रेप का शिकार हुई. उसके प्राइवेट पार्ट में भी आरोपी ने रेप के साथ ही दूसरे ऑब्जेक्ट इन्सर्ट किए थे. इसके चलते महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि आखिर में उसकी मौत हो गई. इस केस के बारे में लिखते हुए सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘एक और निर्भया केस’ की संज्ञा दे रहे हैं. क्या है पूरा मामला? कितनी जांच हुई है? पुलिस क्या कह रही है? और किस तरह की राजनीति हो रही है? सब बताएंगे एक-एक करके-

क्या है मामला?

शुक्रवार यानी 10 सितंबर सुबह करीब साढ़े तीन बजे की बात है. मुंबई के साकीनाका इलाके की खैरानी रोड पर एक महिला खून से लथपथ एक टेम्पो के अंदर दिखाई दी. एक वॉचमैन ने तुरंत मुंबई पुलिस के कंट्रोल रूम में कॉल किया. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को राजावाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां डॉक्टर्स ने जांच करने पर पाया कि महिला के प्राइवेट पार्ट्स समेत शरीर के कई अंगों पर गहरे घाव थे. महिला का इलाज शुरू किया गया, लेकिन शनिवार यानी 11 सितंबर को उसकी मौत हो गई. इधर घटना सामने आने के बाद ही पुलिस ने आरोपी को खोजना शुरू कर दिया था.

आरोपी पर एलिगेशन्स हैं कि उसने पहले महिला का रेप किया फिर उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाल दी. पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला. फुटेज से पता लगा कि साकीनाका इलाके में आरोपी ने महिला को बुरी तरह पीटा था और रेप किया था. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना 10 सितंबर की सुबह करीब तीन बजे की है. फुटपाथ पर महिला को आरोपी ने बुरी तरह पीटा उसके बाद उसे टेम्पो के अंदर लेकर गया. वहीं उसे छोड़कर फरार हो गया. 15-20 मिनट बाद एक वॉचमैन ने पुलिस को कॉल किया और बताया कि एक महिला टेम्पो के अंदर बेहोशी की हालत में पड़ी हुई है.

पुलिस ने इसी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को पकड़ने को कोशिश शुरू की. छानबीन करने पर शुरुआती जानकारी ये मिली कि आरोपी टेम्पो ड्राइवर है और फुटपाथ पर ही रहता है. एक अधिकारी ने एक्सप्रेस को बताया-

“हमें उसका फोन नंबर भी मिला, लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ था. बाद में मुखबिरों की मदद से हम साकीनाका इलाके में दोपहर लगभग 1:30 बजे उसका पता लगाने में सफल रहे.”

पुलिस ने कहा कि वे उसे थाने ले गए. शुरू में उसने झूठ बोलकर गुमराह करने की कोशिश की. बताया कि उसका नाम सुनील है, लेकिन बाद में पुलिस ने लगातार पूछताछ की, तो उसने बताया कि उसका असली नाम मोहन चौहान है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी के दो बच्चे हैं और वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर का रहने वाला है. पुलिस ने कहा कि वह ड्रग्स और शराब का आदी है, जिसके चलते उसके परिवार ने उससे नाता तोड़ लिया है. उसका भाई मुंबई में रहता है, लेकिन उसकी लत के कारण, वह उसे अपने घर नहीं ले जाता है. उसकी पत्नी और दो बच्चे भी उससे बात करने से बचते हैं. वह 25 साल पहले मुंबई आया था. पुलिस को पता चला है कि वह वाहनों से बैटरी और पेट्रोल चोरी करने में शामिल है. पुलिस का कहना है कि उसका इतिहास खोजने की कोशिश कर रहे हैं.

अब अगर महिला की बात करें तो वो 32 साल की थीं. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला के रिश्तेदारों ने जानकारी दी कि करीब सात से आठ साल पहले उसके पति ने उसे छोड़ दिया था. दो बेटियों को पालने की ज़िम्मेदारी महिला पर ही आ गई थी. वो बेटियों को लेकर अपनी मां के पास रहने चली गई थी. लेकिन कोई नौकरी न होने के चलते महिला के दिमाग पर असर पड़ने लगा. फिर पारीवारिक झगड़े के बाद महिला ने करीब छह साल पहले अपनी मां का घर भी छोड़ दिया और सड़क-फुटपाथ पर रहने लगी. महिला की मां ही अपनी दोनों नातिनों की देखभाल कर रही थी. हालांकि वो खुद गरीब है, सब्ज़ी की दुकान लगाती है और किसी तरह बच्चियों को पाल रही थी. महिला कभी-कभी अपनी मां और बच्चियों से मिलने जाती थी. 9 सितंबर यानी गुरुवार की रात भी वो अपनी बच्चियों से करीब 10 मिनट के लिए मिलने गई थी. और ये मुलाकात उसकी आखिरी मुलाकात बन गई.

अब बताते हैं कि पुलिस ने अब तक क्या-क्या कहा और क्या कदम उठाए. आपको पहले ही बता चुके हैं कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और वो पुलिस के कब्ज़े में है. लेकिन जब से ये मामला सामने आया, तब से मुंबई में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इस केस के बारे में लोग और ज्यादा जानकारी पाना चाह रहे हैं. इसी के मद्देनज़र मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले ने 11 सितंबर को जानकारी दी कि जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT का गठन किया गया है. उनसे जब ये सवाल किया गया कि चूंकि अभी गणेश उत्सव भी चल रहा है, ऐसे में साकीनाका इलाके में पुलिस पैट्रोलिंग यूनिट्स क्यों मौजूद नहीं थी. इस पर उन्होंने जवाब दिया कि घटना की सूचना मिलने के 10 मिनट बाद ही पुलिस वहां पहुंच गई थी, पुलिस हर क्राइम स्पॉट में मौजूद नहीं हो सकती. वो जानकारी मिलने के बाद ही पहुंच सकते हैं. और इस केस में पुलिस अपनी क्षमता के हिसाब से बेस्ट काम कर रही है.

चूंकि ये खबरें भी सामने आ रही हैं कि विक्टिम महिला और आरोपी मोहन पहले से एक-दूसरे को जानते थे. इस पर कमिश्नर ने कहा कि ये जांच का विषय है. उन्होंने कहा-

“शुरुआत में लग रहा था कि इस मामले में एक से अधिक आरोपी हैं. पर अब तक की जांच में सामने आया कि आरोपी ने अकेले ही वारदात को अंजाम दिया है. मुख्यमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस केस को चलाने का निर्देश दिया है. दुर्भाग्य है कि पीड़िता की शनिवार सुबह मौत हो गई. हम उसका स्टेटमेंट रिकॉर्ड नहीं कर पाए. उसकी मौत के बाद धारा 307 (किसी धारदार हथियार से चोट पहुंचाना) को 302 (हत्या करने का अपराध) में बदल दिया गया है.”

इस मामले के सामने आने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग यानी NCW एक्टिव हुआ. अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्विटर पर लिखा-

“जानकर दुख हुआ कि पीड़िता जंग हार गई. पुलिस आरोपियों को अरेस्ट करने में विफल रही. NCW ने खुद मामले में संज्ञान लिया है और मुंबई पुलिस कमिश्नर से आग्रह करती है कि दोषियों को जल्द से जल्द अरेस्ट कर पीड़िता के परिवार को हर संभव मदद दी जाए.”

NCW ने की मुलाकात

हालांकि ये ट्वीट घटना की शुरुआती जानकारी सामने आने के बाद किया गया था. अब NCW के मामले में अपडेट ये है कि इसकी और NCSC की टीम्स ने विक्टिम के परिवार से 12 सितंबर यानी रविवार को मुलाकात की. और बच्चियों के रिहैबिलिटेशन की सिफारिश रखी. NCSC यानी नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट. दोनों टीमों ने अलग-अलग टीमें गई थीं मुलाकात के लिए. NCW की मेंबर चंद्रमुखी देवी ने क्राइम स्पॉट का, पुलिस थाने का और राजावाड़ी अस्पताल का दौरा किया. उन्होंने DGP संजय पांडे से भी मुलाकात की. इसके बाद चंद्रमुखी देवी ने मीडिया से बात की. चंद्रमुखी देवी ने कमिश्नर के बयान का भी ज़िक्र किया. चूंकि कमिश्नर ने कहा था कि पुलिस हर जगह मौजूद नहीं रह सकती, इस पर चंद्रमुखी ने कहा कि ये सच है कि पुलिस हर जगह नहीं रह सकती, लेकिन पुलिस का खौफ रहना चाहिए. खौफ ऐसा है जो हर जगह पुलिस की उपस्थिति को दर्शाता है. अगर पुलिस का डर बना रहेगा तो अपराधियों का मनोबल टूटेगा. इसके लिए चंद्रमुखी देवी ने अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने की भी सलाह दी. NCW ने मांग रखी है कि जल्द से जल्द मामले की जांच हो और चार्जशीट दाखिल की जाए.

अब इतनी बड़ी घटना हो गई, ज़ाहिर है राजनीति तो होनी ही थी. महाराष्ट्र में है शिवसेना, कांग्रेस और NCP के गठबंधन वाली सरकार. मुख्यमंत्री हैं उद्धव ठाकरे, जो कि शिवसेना से हैं. ये पार्टी कुछ साल पहले तक BJP के साथ थी. जब ये घटना हुई, तो बीजेपी के नेताओं ने इसे मुंबई का निर्भया कांड कहना शुरू कर दिया. BJP नेता चित्रा वाग ने सीधे महाराष्ट्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. कहा है कि राज्य में औरतें सुरक्षित नहीं हैं.

इसके अलावा BJP के कई नेता भी लगातार ट्वीट कर रहे हैं. प्रीति गांधी ने भी महाराष्ट्र सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर निशाना साधा. लिखा-

“मुंबई हमेशा महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित रही है. ये घटना चौंकाने और दिल दहला देने वाली है. शहर के बीचों-बीच ‘निर्भया’ जैसी रेप की वारदात हुई. एक 34 वर्षीय महिला के साथ बेरहमी से रेप किया गया और उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली गई. महाराष्ट्र सरकार की प्रतिक्रिया आने तक महिलाओं को और कितना ये सब झेलना पड़ेगा?”

BJP IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय कैसे न बोलते. उन्होंने लिखा-

“मुंबई, जिसे कभी महिलाओं के लिए सुरक्षित माना जाता था, अब पुरुषों को असहाय पीड़ितों के साथ यौन उत्पीड़न और क्रूरता करते हुए दिखाई देती है. मुंबई अकेली नहीं है. अभी कुछ दिन पहले पुणे में 13 लोगों ने 14 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप किया था. क्या महाराष्ट्र सरकार कोई जिम्मेदारी लेगी?”

इसके अलावा ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट की मानें तो BJP और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने 12 सितंबर को घटना के विरोध में प्रोटेस्ट भी किया. BJP नेता प्रवीण दारेकर ने कहा कि औरतों के साथ इस तरह की घटनाएं सरकार की लापरवाही के कारण हो रही हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि औरतों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इसे लेकर एक्शन प्लान तैयार किया जाए. इन सभी विरोधों के बीच शिवसेना का बयान आया. उनके माउथपीस ‘सामना’ के ज़रिए. समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, सामना में एक एडिटोरिल छपा, 13 सितंबर को. लिखा गया-

“साकीनाका इलाके में महिला के रेप और हत्या के मामले ने हर किसी को हैरान किया है. लेकिन मुंबई औरतों के लिए दुनिया की सबसे सुरक्षित सिटी है और इसे लेकर किसी के भी दिमाग में कोई डाउट नहीं होना चाहिए.”

आगे कहा गया कि साकीनाका में जो घटना हुई है वो “डरावनी विकृतता” की वजह से हुई है, जो दुनिया के किसी भी हिस्से में देखी जा सकती है. मुंबई की इस घटना को हाथरस की घटना से कम्पेयर करना पूरी तरह से गलत है. एडिटोरिल में दावा किया गया कि हाथरस केस में अपराधियों को सत्ताधारियों का सपोर्ट मिला हुआ था और गिरफ्तारी को लेकर भी देरी हुई थी. विक्टिम का शव जल्दबाज़ी में सरकार द्वारा जला दिया गया था, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें. एडिटोरिल में आगे लिखा-

“योगी सरकार ने कहा था कि हाथरस मामले में रेप नहीं था. NCW की टीम ने जिस अर्जेंसी के साथ साकीनाका का दौरा किया, वो हाथरस केस में नहीं दिखा था. यहां राज्य सरकार ने विक्टिम की दोनों बेटियों के पढ़ाई और जीवन का खर्च उठाने का ज़िम्मा लिया है, क्या ये संवेदनशील होने की निशानी नहीं है? पुलिस को उनका काम करने दो, लेकिन अगर कोई चाहता है कि साकीनाका केस की फाइल ईडी को सौंप दी जाए, तो कोई क्या कर सकता है?”

इसके अलावा एडिटोरिल में लिखा गया-

“डॉक्टर्स ने महिला को बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसकी मौत हो गई. आरोपी की पहचान जौनपुर, यूपी के मोहन चौहान के नाम से हुई है. अगर हम गहराई से इस केस की जांच करें, तो कोई भी समझ जाएगा कि किस तरह से जौनपुर पैटर्न ने इतनी ज्यादा गंदगी मचाई.”

हैरानी होती है, एक महिला दर्दनाक रेप का शिकार हुई. तड़पते हुए उसकी जान चली गई. लेकिन फिर भी हमारी राजनीतिक पार्टियां राजनीति कर रही हैं. रेप की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं. कोई भी राज्य इससे अछूता नहीं है. लेकिन होता यही है, कि अगर किसी राज्य में रेप की कोई घटना काफी ज्यादा खबरों में आए, तो उस राज्य की विरोधी पार्टी बड़ी आवाज़ उठाती है. लेकिन इसी पार्टी की सरकारें जिन राज्यों में होती है, वहां चुप्पी साध ली जाती है. कड़वा है, लेकिन यही राजनीति है.


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