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शादी किए बिना सिंगल पिता बनना चाहते हैं तो अपनाइए ये कानूनी तरीके

तुषार कपूर. एक्टर हैं. अभी तक शादी नहीं की है. ना ही करने का प्लान है. ऐसा खुद बताया है. बताया है कि अपने बेटे लक्ष्य के साथ खुश हैं और खुद को किसी और के साथ शेयर नहीं करना चाहते. तुषार 2016 में सरोगेसी के सहारे पिता बने थे. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार एक अखबार से बात करते हुए तुषार ने कहा-

“मैं कभी भी शादी नहीं करना चाहता. अगर ऐसा कोई प्लान होता तो फिर सिंगल पैरेंट बनने की प्रक्रिया से ना गुजरता. मुझे लगता है कि सिंगल पैरेंट बनकर मैंने सही कदम उठाया है. अपने बेटे के साथ करने के लिए मेरे पास बहुत सी चीजें होती हैं. मैं खुद को किसी और के साथ शेयर नहीं करना चाहता.”

तुषार कपूर ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि फिल्म निर्माता प्रकाश झा ने उन्हें सरोगेसी के जरिए पिता बनने की सलाह दी थी. उन्होंने यह भी बताया कि पिता बनने के बाद उनके जीवन में बहुत से सकारात्मक बदलाव हुए.

तुषार तो 2016 में सरोगेसी के जरिए सिंगल पैरेंट बन गए. लेकिन क्या अब ऐसा हो सकता है? क्या अकेला पुरुष सरोगेसी के जरिए पिता बन सकता है? सरोगेसी के अलावा बच्चा गोद लेने के बारे में कानून क्या कहता है? सब विस्तार से जानते हैं.

सरोगेसी में बड़े बदलाव होने वाले हैं, लेकिन…

सबसे पहले सरोगेसी के बारे में बात कर लेते हैं. दरअसल, 2016 में केंद्र सरकार ने सरोगेसी से जुड़ा एक बिल पेश किया था. यह बिल साल 2018 में लोक सभा में पास हो गया. राज्य सभा में पास होने से पहले आम चुनाव आ गए. इसके बाद इसे फिर से अगली लोक सभा में पेश किया गया. इसके तहत अकेले पुरुष, महिला और समलैंगिक कपल्स के लिए सरोगेसी प्रक्रिया पर रोक लगाने की बात कही गई.

अगस्त 2019 में सरोगेसी रेगुलेशन बिल लोक सभा में पास हुआ. यहां से इसे राज्य सभा की 23 सदस्यीय सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया. राज्य सभा की सेलेक्ट कमेटी ने फरवरी 2020 में इस बिल में कुल 15 बदलाव करने की सलाह दी. लेकिन इस सलाह में अकेले पुरुष के लिए सरोगेसी को वैध बनाने की सलाह शामिल नहीं थी. बाद में केंद्रीय कैबिनेट ने सेलेक्ट कमेटी की सलाह को मंजूरी दे दी.

यहां ध्यान रखने वाली बात है कि राज्य सभा की सेलेक्ट कमेटी ने इस मुद्दे पर 10 जनवरी 2020 को यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड के विचार सुने थे. यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड ने कमेटी से कहा था कि सरोगेसी की सुविधा अविवाहित जोड़ों, अकेली महिलाओं और अकेले पुरूषों को भी दी जाए. लेकिन कमेटी ने केवल अकेली महिलाओं के लिए ही बिल में बदलाव करने की सलाह दी. कमेटी ने कहा कि विधवा और तलाकशुदा औरतें सरोगेसी की जरिए मां बन सकती हैं. हालांकि, कमेटी ने इसमें भी कुछ शर्तें लगा दीं.

 

सरोगेसी रेगुलेशन बिल में कमर्शियल सरोगेसी पर भी बैन लगाने का प्रावधान है.
सरोगेसी रेगुलेशन बिल में कमर्शियल सरोगेसी पर भी बैन लगाने का प्रावधान है.

सरोगेसी रेगुलेशन बिल, 2019 अभी पास नहीं हुआ है. ऐसे में पुराने कानूनों के तहत ही सरोगेसी की प्रक्रिया चल रही है. अकेले पुरुष के लिए अगर सरोगेसी की बात करें तो, इस संबंध में ICMR की 2005 की गाइडलाइंस महत्वपूर्ण हैं. इनमें कहा गया है कि

– अगर किसी अकेले पुरुष को सरोगेसी के जरिए पिता बनना है, तो स्पर्म उसका होना चाहिए. अगर ऐसा नहीं है, तो वह पिता बनने के लिए बच्चे को गोद लेने के विकल्प पर विचार कर सकता है.

– सरोगेसी के जरिए पैदा हुए बच्चे को सिंगल पैरेंट की वैध संतान माना जाएगा.

– सरोगेट बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट में केवल उस पैरेंट का नाम लिखा जाएगा, जिसने उसे कमीशन किया है.

इस बारे में हमें डॉक्टर लवलीना नादिर ने भी कुछ जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिस भी सिंगल पुरुष को सरोगेसी के जरिए पिता बनना है, उसके लिए सबसे जरूरी है कि वो भारत का नागरिक हो. साथ ही उसकी उम्र 25 से 55 साल के बीच हो.

कुल मिलाकर, फ़िलहाल सिंगल पुरुष सरोगेसी से पिता बन सकते हैं. मगर अटके हुए बिल के पास होते ही उनका ये अधिकार ख़त्म हो जाएगा.

गोद लेने के लिए नियम-कानून

ये थे सरोगेसी से जुड़े नियम कानून. अब आते हैं गोद लेने की शर्तों पर. इन शर्तों को जानने के लिए हमने सेंट्रल रिसोर्स अथॉरिटी यानी CARA की वेबसाइट का चक्कर लगाया. हमारी साथी लालिमा ने संस्था की एक काउंसलर से बात भी की. पता चला कि CARA महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एक विभाग है. यह विभाग देश में एडॉप्शन की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखता है. इसकी मंजूरी के बिना तो एडॉप्शन हो ही नहीं सकता. सिंगल आदमियों के लिए एडाप्शन की शर्तें कुछ यूं हैं-

– लड़के की मिनिमम एज यानी उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए.

– उसका शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर स्टेबल होना जरूरी है.

– वो गर्ल चाइल्ड को एडॉप्ट नहीं कर सकता. इसके लिए बिग नो-नो है.

– बच्चे और एडॉप्ट करने वाले आदमी के बीच कम से कम 25 साल का एज गेप रहना जरूरी है. 0 से 4 साल तक के बच्चे को गोद लेने के लिए आदमी की उम्र 25 से 45 के बीच होनी चाहिए.

– 4 से 8 साल के बच्चे को गोद लेने के लिए आदमी की उम्र 50 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

– 8 से 18 साल के बच्चे को गोद लेने के लिए आदमी की उम्र 55 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

– सिंगल पैरेंट के लिए बच्चा गोद लेने की सर्वाधिक उम्र 55 साल है. उसके बाद नो एडॉप्शन. यानी अगर रोहित 55 साल का हो जाता है, तो फिर वो बच्चा एडॉप्ट नहीं कर सकता.

धर्म का काई बंधन नहीं है. किसी भी धर्म का आदमी, किसी भी धर्म के बच्चे को गोद ले सकता है. कारा की एक काउंसलर ने हमसे कहा था कि कारा धर्मनिरपेक्ष होकर काम करता है.

Adoption Process In India (1)
CARA की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट.

अब ये सारी जरूरी शर्तें जानने के बाद बारी आती है रजिस्ट्रेशन की. इसके लिए कारा की वेबसाइट पर जाकर आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज

– अपने परिवार की तस्वीर. अगर आदमी अपने माता-पिता के साथ रहता है, तो उनके साथ की तस्वीर. खुद की एक तस्वीर.

– पैन कार्ड

– बर्थ सर्टिफिकेट, या फिर जन्म के लिए किसी भी तरह का प्रूफ

– अपने घर के पते का प्रूफ. इसमें आधार कार्ड/वोटर कार्ड/पासपोर्ट/इलेक्ट्रिसिटी बिल/टेलीफोन बिल जमा करवा सकते हैं.

– इनकम का प्रूफ. इसमें सैलेरी स्लिप/इनकम सर्टिफिकेट या जो इनकम टैक्स रिटर्न आदमी भरता है, उसका प्रूफ देना होगा.

– मेडिकल सर्टिफिकेट. जिसमें आपके डॉक्टर ने ये बताया हो कि आपको कोई लंबी या बड़ी बीमारी नहीं है. और आप एडॉप्ट करने के लिए फिट हैं.

– आपकी एडॉप्शन की इच्छा को सपोर्ट करते हुए आपके किसी दो रिश्तेदारों या दोस्तों के लेटर्स.

रजिस्ट्रेशन के वक्त, आपको कुछ राज्यों को चुनना होगा. मतलब, उन राज्यों के नाम डालने होंगे, जहां से आप बच्चा एडॉप्ट करना चाहते हैं. आप जो राज्यों को सेलेक्ट करेंगे, आप उनकी स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी में अपने आप रजिस्टर्ड हो जाएंगे.

क्या होती है स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी?

हर राज्य में ये एजेंसी होती हैं. ये बच्चे के एडॉप्शन की प्रोसेस पर नज़र रखती हैं. ये सारी एजेंसी कारा में रजिस्टर्ड होती हैं.

रजिस्ट्रेशन पूरा करने के बाद आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा. इसी नंबर के जरिए आप ये देख सकेंगे, कि आपके एप्लीकेशन में कहां तक प्रोग्रेस हुई है.

पिता और बच्चे के बीच 25 साल का अंतर होना चाहिए. प्रतीकात्मक तस्वीर- Pixabay.
पिता और बच्चे के बीच 25 साल का अंतर होना चाहिए. प्रतीकात्मक तस्वीर- Pixabay.

आपको अपने घर के सबसे नजदीक की एक स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी, को प्राथमिक तौर पर चुनना होगा. आपके रजिस्ट्रेशन के बाद एक होम स्टडी रिपोर्ट बनाई जाएगी. इसे बनाने के लिए आपके जरिए चुनी हुई आपकी प्राथमिक स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी के सोशल वर्कर आपके घर आएंगे. पूरा जायजा लिया जाएगा. आपसे बात की जाएगी.

होम स्टडी रिपोर्ट की तैयारी

कारा में आपके रजिस्ट्रेशन के 30 दिन के अंदर ही होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. और उसे कारा के डाटाबेस में अपलोड कर दिया जाएगा.

ये रिपोर्ट तीन साल तक के लिए मान्य रहेगी. और यही रिपोर्ट आपके एडॉप्शन का आधार रहेगी. आपकी रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर ही ये डिसाइड होगा कि आप बच्चा गोद लेने लायक हैं या नहीं.

अगर आपकी रिपोर्ट में या फिर दस्तावेजों में आपको रिजेक्ट कर दिया जाता है, तो आप कारा की अथॉरिटी के पास दोबारा अपील भी कर सकते हैं.

सिंगल आदमियों के लिए होम स्टडी में एक जरूरी बात देखी जाती है. वो ये कि वो किसके साथ रहते हैं. अकेले या फिर अपने मां-बाप के साथ. ये देखना इसलिए जरूरी होता है, क्योंकि जब वो जॉब के लिए ऑफिस चले जाएंगे, तब बच्चे की देखरेख कौन करेगा. अगर वो आदमी आया रखता है, तो इसे मान्यता मिलना थोड़ा मुश्किल है. घर का कोई मेंबर बच्चे का ख्याल रखने के लिए मौजूद होना चाहिए. या फिर उस आदमी के ऑफिस में क्रैश सुविधा होनी चाहिए. इसके अलावा आपको बच्चे की अंडरटेकिंग के लिए दो नाम भी सजेस्ट करने होंगे. मतलब, आपको ये बताना होगा कि आपको कुछ हो जाए तो बच्चे की देखरेख कौन करेगा. इसके लिए आप अपने किसी नजदीकी का नाम दे सकते हैं.

अब ये सारी चीजें होम स्टडी रिपोर्ट बनाते वक्त देखी जाती है. पूरी रिपोर्ट बनने के बाद, उसे कारा के डाटाबेस पर अपलोड होने के बाद, आपको इंतजार करना होगा. कारा या स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी की तरफ से आपको तब कॉन्टैक्ट किया जाएगा, जब आपका नंबर आएगा और जब आपकी इच्छा के मुताबिक, बच्चा उपलब्ध होगा. यहां इच्छा के मुताबिक से मतलब है फॉर्म में आपके जरिए भरे हुए राज्य और बच्चे की एज ग्रुप.

इस प्रोसेस में दो से तीन साल का वक्त लग जाता है. प्रतीकात्मक तस्वीर- Pixabay
इस प्रोसेस में दो से तीन साल का वक्त लग जाता है. प्रतीकात्मक तस्वीर- Pixabay

आप अपने रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए कारा की वेबसाइट में जाकर अपना वेटिंग नंबर देख सकते हैं. आपकी तरह और भी कई लोग एडॉप्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं. ऐसे में एक लंबी लिस्ट होती है बच्चा एडॉप्ट करने की इच्छा रखने वाले पैरेंट्स की. नंबर आने पर, और आपने कौनसे राज्य चुने हैं, इसी के आधार पर आपको कॉन्टैक्ट किया जाता है. इस वक्त 23 हजार पैरेंट्स ने एडॉप्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा है. यानी इतने लोग अभी वेटिंग में है.

अब अगर जैसे आपने 2 से 3 साल के बच्चे को चुना है, तो आपको वेटिंग के हिसाब से बच्चा मिलता है. इसमें एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है. आपका नंबर आने पर, और बच्चे की उपलब्धता के आधार पर, आपको तीन बच्चों की तस्वीरें और प्रोफाइल भेजी जाती हैं. उनमें से एक बच्चा चुनना होता है. उसके बाद एडॉप्शन एजेंसी, आपके और बच्चे के बीच मीटिंग रखते हैं. ये बच्चा एडॉप्शन के लिए ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे तक रिजर्व रखा जा सकता है. उसी बीच मीटिंग होनी होती है. बच्चे से मिलने के बाद अगर आपको सब सही लगता है, तो आपको बच्चे की चाइल्ड स्टडी रिपोर्ट पर साइन करना होता है. अगर मीटिंग सफल नहीं होती है, तो यही प्रोसेस दोबारा होती है. आपको फिर अपना नंबर आने का इंतजार करना होगा. आपको फिर से बच्चों की तस्वीरें भेजी जाएंगी. और फिर यही प्रोसेस होगी.

बच्चे को गोद लेने के बाद 2 साल तक स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी का कोई कर्मचारी हर 6 महीने में आपके घर आएगा. ये जायजा लिया जाएगा, कि आप बच्चे को ठीक से पाल रहे हैं या नहीं. 2 साल तक अगर सब सही रहता है, तो फिर बच्चे की जिम्मेदारी पूरी तरह से आपको मिल जाती है.

एक और बात, अगर इन दो साल में बच्चा बीमार पड़ता है, उसके साथ अगर कुछ अनहोनी हो जाती है, तो सबसे पहले आपको कारा को इन्फॉर्म करना होता है. कारा की तरफ से पूरी जांच-पड़ताल की जाती है.

ये है पूरी प्रोसेस बच्चा एडॉप्ट करने की. लेकिन इसमें दो से 3 साल तक का टाइम लग जाता है.


 

वीडियो- कब, कहां, कैसे किसी अनाथ बच्चे को गोद लें, पूरा तिया-पांचा जानिए!

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