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क्या दमा के मरीज़ कोरोना वायरस से ज़्यादा मर रहे हैं?

मुझे अस्थमा है. ये क्या होता है. इसके बारे में तफ़सील से थोड़ी देर में बात करेंगे. पर मोटा-माटी कहें तो मुझे सांस लेने में दिक्कत आती है. बचपन से ही. ज़िंदगी इनहेलर के भरोसे कट रही थी. पर फिर एक दिन हम सबकी ज़िंदगी में आए कोरोना भाईसाहब. सबकी ही बैंड बजा दी. घर से निकलना बंद. दोस्तों से मिलना बंद. कहीं आना-जाना बंद. मेरे दोस्तों और घरवालों ने तो मुझपर और भी पाबंदियां लगा दी. बोले तुम्हें अस्थमा है. तुम्हारे लिए तो और भी ख़तरनाक है. अब इस बात को चार महीने हो गए हैं. ज़िंदगी डब्बे में कट रही है. कुछ करने की कोशिश करो तो एक ही बात सुनने को मिलती है. तुम्हे अस्थमा है. तुम्हें ज़्यादा रिस्क है. तो भई हमने सोचा कि हम अकेले तो हैं नहीं दुनिया में जिसे अस्थमा है. और भी बहुत लोग हैं. तो पता किया जाए कि क्या वाकई हमें दूसरों से ज़्यादा रिस्क है? और अगर हां, तो फिर क्या किया जाए. पर सबसे पहले ये जान लेते हैं कि अस्थमा क्या होता है.

ये अस्थमा किस बला का नाम है?

ब्रोंकिअल अस्थमा दरअसल एक तरह की बीमारी है. कुछ लोग इसे एलर्जी समझते हैं. पर ये सही नहीं है. ये बीमारी एक्चुअली एलर्जी का नतीजा है. अब सबसे पहले ये दो चीज़ें समझिए:

-अस्थमा में आपकी सांस की नली धोखा दे जाती है. ये सिकुड़ जाती है. ये इसलिए होता है क्योंकि आपकी सांस की नली के पास जो मांसपेशियां हैं, उनमें ऐंठन होती है. इंग्लिश में इसे spasm कहते हैं. सांस की नली को एक पाइप की तरह समझिए. कितनी सी ही जगह होती हैं इसके अंदर. अब ये सिकुड़ जाए. तो जगह और कम हो जाएगी. नतीजा सांस लेने में नानी याद आ जाती है. बलगम भी ज़्यादा बनने लगता है. साथ ही खांसी भी आती है. डेडली कॉम्बिनेशन है बाई गॉड. जब आप सांस बाहर छोड़ते हैं तो एक सीटी जैसी आवाज़ आती है. इसे व्हीज़िंग कहते हैं. कुछ लोगों में ये बीमारी इतनी सीवियर नहीं होती. रोज़ का काम चलता रहता है. पर कुछ लोगों को पड़ते हैं ख़तरनाक अस्थमा अटैक. कुछ मिनट तक ज़बरदस्त खांसी के साथ सांस नहीं आती. सीने में खिंचाव लगता है.

What To Do Now if Your Asthma is Worse in Winter – Health Essentials from Cleveland Clinic
अस्थमा में आपकी सांस की नली धोखा दे जाती है. ये सिकुड़ जाती है.

-दूसरी बात. जिन लोगों को अस्थमा होता है. उनकी सांस की नली बहुत सेंसिटिव होती होती है. आपको किसी भी चीज़ से एलर्जी हो सकती है. धूल, बदलता मौसम, ठंडी हवा, कुत्ते या बिल्ले के बाल, पेड़ों और पौधों से निकलने वाले पाउडरनुमा पोलन से. जिस भी चीज़ से आपको एलर्जी है. आप ज़रा से उसके कांटेक्ट में आए और लग गया काम. आपकी ये सेंसिटिव सांस की नली शर्माकर सिकुड़ जाएंगी. और आपको पड़ेगा एक तगड़ा अस्थमा अटैक.

अब ये तो था छोटा सा कोर्स अस्थमा पर. पर मुद्दा ये है कि…

जिन लोगों को ये दिक्कतें हैं, क्या उनको कोविड-19 का ज़्यादा रिस्क है? और कैसा? ये जानने के लिए हमने बात की डॉक्टर सुप्रियम से. उन्होंने बताया:

-जब-जब अस्थमा का अटैक होता है, तब सांस की नली, जो ऑक्सीजन को फेफड़ों तक ले जाती है, वो सिकुड़ जाती है

-सिकुड़ने के कारण सांस लेने में परेशानी होती है

-क्योंकि ऑक्सीजन की मात्रा फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती है

-ऐसे लोगों को अगर कोविड-19 होता है, तब फेफड़ों में ऑक्सीजन के आदान-प्रदान की क्षमता कम हो जाती है

-अस्थमा के अटैक के कारण इस समय खून में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत तेज़ी से गिरती है. ऐसे में तुरंत पेशेंट को ऑक्सीजन थेरेपी देनी पड़ती है.

The Effectiveness of Omega 3's in Asthma – The Latest Research - RN Labs
जिन लोगों को अस्थमा होता है. उनकी सांस की नली बहुत सेंसिटिव होती होती है. आपको किसी भी चीज़ से एलर्जी हो सकती है.

-फिर भी पेशेंट ठीक न हो तो वेंटिलेटर पर डालना पड़ता है. ऐसे पेशेंट्स में मृत्युदर बहुत ज़्यादा होता है, नॉर्मल पेशेंट की तुलना में

तो ये बात है. कोरोना काल में अब बचने के लिए क्या किया जाए, ये भी जान लेते हैं.

-जिस भी चीज़ से एलर्जी है, उससे बचकर रहिए

– सोशल डिस्टेंसिंग करिए

जानिए डॉक्टर दीपक शुक्ला क्या कह रहे हैं:

-अस्थमा को ठीक करने के लिए इनहेलर से दवाएं दी जाती हैं. ये दवाएं सीधे फेफड़ों में असर करती हैं, इन दवाओं का असर जल्दी होता है. लंबे समय तक रहता है. इसके साइडइफ़ेक्ट न के बराबर होते हैं.

-कोविड-19 का समय अस्थमा के लोगों के लिए अच्छा नहीं है

-बचने के लिए अस्थमा की दवा समय पर और सटीक तरह से लेनी ज़रूरी है

-अस्थमा से ग्रसित लोगों को इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवानी चाहिए

-बाकी आप प्राणायाम कर सकते हैं

-अगर गले में दर्द, बुखार, सर्दी, खांसी होती है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

तो डॉक्टर साहब ने जो बातें बताई, उन्हें गांठ बांध लीजिए. बहुत काम आएंगी.


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